पादप जगत – संरचना एवं आकारिकी (Plant Morphology) सम्पूर्ण नोट्स, महत्वपूर्ण तथ्य एवं MCQ | UP PET, UPSSSC, SSC

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प्रारंभिक जीव विज्ञान
अध्याय 7. पादप जगत – संरचना एवं आकारिकी (Plant Morphology)

जड़, तना, पत्ती, पुष्प, पुष्पक्रम, परागण, निषेचन, फल, बीज, पादप परिवार तथा आंतरिक संरचना का सम्पूर्ण अध्ययन।

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Complete Hindi Notes Concept + Examples Exam Oriented 50 MCQ Practice

अध्याय की विषय-सूची

  1. पादप शरीर का सामान्य परिचय
  2. जड़ – प्रकार, संरचना एवं कार्य
  3. जड़ के रूपांतरण
  4. तना – प्रकार एवं कार्य
  5. तने के रूपांतरण
  6. पत्ती – संरचना एवं प्रकार
  7. पत्ती के रूपांतरण
  8. पर्णविन्यास एवं शिरा विन्यास
  9. पुष्प – संरचना एवं भाग
  10. पुष्पक्रम के प्रकार
  11. परागण – स्वपरागण एवं परपरागण
  12. निषेचन की प्रक्रिया
  13. फल – प्रकार एवं वर्गीकरण
  14. बीज – संरचना एवं प्रकार
  15. एकबीजपत्री एवं द्विबीजपत्री बीज
  16. पौधों के प्रमुख परिवार एवं उदाहरण
  17. पौधों की आंतरिक संरचना
  18. वार्षिक वलय एवं आयु निर्धारण
  19. प्रमुख आर्थिक महत्त्व वाले पौधे
  20. औषधीय पौधे एवं उनके उपयोग
  21. अति महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य
  22. 50 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न
Topic 01

1. पादप शरीर का सामान्य परिचय

पादप आकारिकी (Plant Morphology) वनस्पति विज्ञान की वह शाखा है जिसमें पौधों के बाहरी स्वरूप, आकार, आकृति, विभिन्न अंगों तथा उनके रूपांतरणों का अध्ययन किया जाता है। किसी पौधे के सामान्य शरीर में जड़ और प्ररोह तंत्र (Shoot System) दो प्रमुख भाग होते हैं। जड़ सामान्यतः भूमि के अंदर विकसित होती है, जबकि प्ररोह तंत्र में तना, शाखाएँ, पत्तियाँ, कलियाँ, पुष्प और फल शामिल होते हैं।

पौधे के अंगों का निर्माण उसके आनुवंशिक गुणों तथा पर्यावरणीय परिस्थितियों के प्रभाव में होता है। जड़ पौधे को मिट्टी में स्थिर रखने और जल एवं खनिज लवणों के अवशोषण में सहायता करती है। तना पत्तियों, पुष्पों और फलों को सहारा देता है तथा जल, खनिज और भोजन के परिवहन में भाग लेता है। पत्तियाँ मुख्यतः प्रकाश संश्लेषण करती हैं। पुष्प लैंगिक प्रजनन का प्रमुख अंग है, जबकि फल और बीज प्रजनन तथा नई पीढ़ी के विकास में भूमिका निभाते हैं।

पादप शरीर के दो प्रमुख तंत्र

तंत्रमुख्य अंगप्रमुख कार्य
जड़ तंत्र (Root System)मुख्य जड़, पार्श्व जड़ें, मूल रोमस्थिरता, जल एवं खनिज अवशोषण, भोजन संग्रह
प्ररोह तंत्र (Shoot System)तना, शाखाएँ, पत्तियाँ, कलियाँ, पुष्प, फलप्रकाश संश्लेषण, परिवहन, प्रजनन एवं भोजन निर्माण

पौधों की वृद्धि के प्रमुख क्षेत्र

पौधों में वृद्धि मुख्यतः विभज्योतक ऊतकों (Meristematic Tissues) के कारण होती है। शीर्षस्थ विभज्योतक जड़ और तने के सिरों पर पाए जाते हैं तथा लंबाई में वृद्धि कराते हैं। पार्श्व विभज्योतक, जैसे कैम्बियम, मोटाई में वृद्धि या द्वितीयक वृद्धि में सहायक होते हैं। अंतर्वेशी विभज्योतक कुछ पौधों में पर्वसंधियों या पत्ती के आधार के पास पाए जाते हैं।

परीक्षा तथ्य: जड़ तंत्र का मुख्य कार्य अवशोषण एवं स्थिरता है, जबकि प्ररोह तंत्र में तना, पत्तियाँ, पुष्प और फल शामिल होते हैं। पादप आकारिकी में बाहरी संरचना का अध्ययन किया जाता है, जबकि शारीरिकी (Anatomy) में आंतरिक संरचना का।
Topic 02

2. जड़ – प्रकार, संरचना एवं कार्य

जड़ (Root) सामान्यतः पौधे का भूमिगत भाग है, जो बीज के भ्रूण में उपस्थित मूलांकुर (Radicle) से विकसित होती है। जड़ में सामान्यतः पर्व (Nodes), पर्वसंधियाँ (Internodes), पत्तियाँ और कलियाँ नहीं होतीं। जड़ का अग्र भाग मूलगोप (Root Cap) से ढका रहता है, जो मिट्टी में प्रवेश करते समय जड़ के कोमल शीर्ष की रक्षा करता है।

जड़ के प्रमुख कार्य

  • पौधे को मिट्टी में मजबूती से स्थिर रखना।
  • मिट्टी से जल एवं खनिज लवणों का अवशोषण करना।
  • अवशोषित जल और खनिजों को तने तक पहुँचाना।
  • कुछ पौधों में भोजन का संग्रह करना।
  • कुछ पौधों में सहारा, श्वसन और अतिरिक्त कार्य करना।

जड़ के प्रमुख प्रकार

1. मूसला जड़ (Tap Root System)

बीज के अंकुरण के बाद मूलांकुर सीधे विकसित होकर मुख्य जड़ बनाता है। इससे छोटी-छोटी पार्श्व जड़ें निकलती हैं। मुख्य जड़ और उसकी शाखाएँ मिलकर मूसला जड़ तंत्र बनाती हैं। यह सामान्यतः द्विबीजपत्री पौधों में पाया जाता है।

उदाहरण: सरसों, मटर, चना, आम, मूली, गाजर।

2. रेशेदार जड़ (Fibrous Root System)

इसमें प्राथमिक जड़ अधिक समय तक मुख्य जड़ के रूप में विकसित नहीं रहती। तने के आधार से लगभग समान आकार की अनेक पतली जड़ें निकलती हैं। यह सामान्यतः एकबीजपत्री पौधों में पाया जाता है।

उदाहरण: गेहूँ, धान, मक्का, घास।

3. अपस्थानिक जड़ (Adventitious Root System)

जब जड़ का विकास मूलांकुर के अतिरिक्त पौधे के किसी अन्य भाग, जैसे तना या पत्ती, से होता है तो उसे अपस्थानिक जड़ कहते हैं। ये जड़ें सहारा, भोजन संग्रह, आरोहण तथा अन्य विशेष कार्य कर सकती हैं।

उदाहरण: बरगद, मक्का, गन्ना, पान, मनी प्लांट।

जड़ के वृद्धि क्षेत्र

क्षेत्रविशेषताकार्य
मूलगोप (Root Cap)जड़ के शीर्ष पर टोपी जैसी संरचनाकोमल अग्र भाग की रक्षा
विभज्योतक क्षेत्रसक्रिय कोशिका विभाजननई कोशिकाओं का निर्माण
दीर्घीकरण क्षेत्रकोशिकाओं की लंबाई बढ़ती हैजड़ की लंबाई में वृद्धि
परिपक्वन क्षेत्रकोशिकाएँ विशिष्ट कार्य ग्रहण करती हैंमूल रोम का निर्माण एवं अवशोषण
महत्त्वपूर्ण तथ्य: मूल रोम जड़ के परिपक्वन क्षेत्र में पाए जाते हैं। ये जड़ का अवशोषण क्षेत्रफल बढ़ाते हैं और मिट्टी से जल एवं खनिजों के अवशोषण में सहायता करते हैं।
Topic 03

3. जड़ के रूपांतरण (Root Modifications)

कुछ पौधों में जड़ें सामान्य अवशोषण और स्थिरता के अतिरिक्त विशेष कार्य करने के लिए अपना आकार एवं संरचना बदल लेती हैं। इन्हें जड़ के रूपांतरण कहते हैं। जड़ों के प्रमुख रूपांतरण भोजन संग्रह, यांत्रिक सहारा, श्वसन तथा परजीवी पोषण के लिए विकसित होते हैं।

A. भोजन संग्रह करने वाली जड़ें

रूपांतरणविशेषताउदाहरण
शंक्वाकार (Conical)ऊपर चौड़ी और नीचे क्रमशः पतलीगाजर
धुरीनुमा (Fusiform)बीच में मोटी, दोनों सिरों पर पतलीमूली
कुंभीरूप/नेपिफॉर्म (Napiform)ऊपरी भाग गोलाकार, निचला भाग पतलाशलजम, चुकंदर
कंदिल/गुच्छेदार संग्रह जड़कई जड़ों में भोजन संग्रहशकरकंद, डहलिया

B. सहारा देने वाली जड़ें

  • स्तंभ जड़ें (Prop Roots): शाखाओं से नीचे की ओर निकलकर भूमि में प्रवेश करती हैं और स्तंभों की तरह सहारा देती हैं। उदाहरण – बरगद।
  • अवस्तंभ जड़ें (Stilt Roots): तने के निचले पर्वों से तिरछी निकलकर पौधे को सहारा देती हैं। उदाहरण – मक्का, गन्ना।
  • पकड़ने वाली जड़ें (Clinging Roots): पौधे को दीवार या सहारे से चिपकने में सहायता करती हैं। उदाहरण – पान, आइवी।

C. श्वसन मूल (Pneumatophores)

दलदली और जलभराव वाले क्षेत्रों में मिट्टी के अंदर ऑक्सीजन की कमी हो सकती है। ऐसे क्षेत्रों में कुछ पौधों की जड़ें भूमि से ऊपर की ओर निकलती हैं। इन जड़ों पर श्वसन छिद्र या लेंटिसेल पाए जाते हैं, जिनके माध्यम से गैसों का आदान-प्रदान होता है। इन्हें श्वसन मूल कहते हैं।

उदाहरण: मैंग्रोव पौधे – Avicennia, Sonneratia।

D. परजीवी जड़ें (Haustoria)

कुछ परजीवी पौधे दूसरे पौधों से भोजन और जल प्राप्त करते हैं। इनके विशेष अवशोषक अंग पोषक पौधे के ऊतकों में प्रवेश करके पदार्थ ग्रहण करते हैं। इन्हें चूषक जड़ें या हौस्टोरिया कहते हैं।

उदाहरण: अमरबेल (Cuscuta)।

E. वायवीय जड़ें (Aerial Roots)

कुछ पौधों में जड़ें वायु में खुली रहती हैं और नमी का अवशोषण करती हैं। ऑर्किड जैसे अधिपादप पौधों की जड़ों में वेलामेन नामक बहुपरत मृत कोशिकाओं का आवरण पाया जाता है, जो वातावरण से नमी ग्रहण करने में सहायक होता है।

परीक्षा में याद रखें: गाजर – शंक्वाकार जड़; मूली – धुरीनुमा जड़; शलजम – नेपिफॉर्म जड़; बरगद – स्तंभ जड़; मक्का – अवस्तंभ जड़; मैंग्रोव – श्वसन मूल; ऑर्किड – वेलामेन।
Topic 04

4. तना – प्रकार एवं कार्य

तना (Stem) पौधे का प्ररोह तंत्र का मुख्य अक्ष है। इसका विकास भ्रूण के प्रांकुर (Plumule) से होता है। तने पर पर्व (Nodes) और पर्वसंधियाँ (Internodes) पाई जाती हैं। पर्व से पत्तियाँ, शाखाएँ और कलियाँ निकलती हैं। तने के शीर्ष पर शीर्षस्थ कली तथा पत्ती के कक्ष में कक्षीय कलियाँ पाई जा सकती हैं।

तने की प्रमुख विशेषताएँ

  • तने में सामान्यतः पर्व एवं पर्वसंधियाँ होती हैं।
  • तने पर पत्तियाँ और शाखाएँ विकसित होती हैं।
  • तने की वृद्धि शीर्षस्थ कली द्वारा होती है।
  • तना जल, खनिज और भोजन के परिवहन में सहायक होता है।
  • कुछ तने भोजन संग्रह, प्रकाश संश्लेषण, आरोहण और कायिक प्रजनन करते हैं।

तने के प्रकार

प्रकारविशेषताउदाहरण
शाकीय तनानरम, हरा एवं कोमलपालक, धनिया
काष्ठीय तनाकठोर एवं लकड़ीदारआम, नीम, शीशम
मुख्य तनामुख्य अक्ष, जिससे शाखाएँ निकलती हैंआम, सरसों
लता (Climber)सहारे से ऊपर चढ़ती हैमटर, अंगूर
भूमि पर फैलने वाला तनाभूमि पर फैलता हैकद्दू, तरबूज

तने के प्रमुख कार्य

  1. पत्तियों, पुष्पों और फलों को सहारा देना।
  2. जड़ों से जल एवं खनिजों को पत्तियों तक पहुँचाना।
  3. पत्तियों में निर्मित भोजन को अन्य भागों तक पहुँचाना।
  4. कुछ पौधों में भोजन और जल का संग्रह करना।
  5. कुछ हरे तनों द्वारा प्रकाश संश्लेषण करना।
  6. कायिक प्रजनन में सहायता करना।
जड़ और तने की पहचान: तने पर पर्व, पर्वसंधियाँ, पत्तियाँ और कलियाँ होती हैं। सामान्य जड़ में ये संरचनाएँ नहीं होतीं। आलू के कंद पर उपस्थित आँखें वास्तव में कलियाँ हैं, इसलिए आलू संशोधित तना है, जड़ नहीं।
Topic 05

5. तने के रूपांतरण (Stem Modifications)

तना अनेक पौधों में भोजन संग्रह, कायिक प्रजनन, सुरक्षा, आरोहण तथा प्रकाश संश्लेषण जैसे कार्यों के लिए रूपांतरित हो जाता है। तने के रूपांतरणों को मुख्यतः भूमिगत, अर्धवायवीय और वायवीय रूपांतरणों में बाँटा जाता है।

A. भूमिगत तना

रूपांतरणविशेषताउदाहरण
प्रकंद (Rhizome)भूमिगत क्षैतिज तना; पर्व, पर्वसंधियाँ एवं कलियाँअदरक, हल्दी
कंद (Tuber)तने का फूला हुआ भाग; आँखों में कलियाँआलू
शल्ककंद (Bulb)छोटा तना और मांसल शल्क पत्तियाँप्याज, लहसुन
घनकंद (Corm)ठोस, सीधा, भूमिगत तनाअरबी, जिमीकंद, ग्लैडियोलस

B. अर्धवायवीय तना

  • रनर (Runner): भूमि की सतह पर क्षैतिज फैलने वाला तना। उदाहरण – दूब घास, स्ट्रॉबेरी।
  • स्टोलोन (Stolon): शाखा कुछ दूरी तक बढ़कर नीचे झुकती है और मिट्टी के संपर्क में नई जड़ें बनाती है। उदाहरण – चमेली के कुछ पौधे।
  • सकर (Sucker): भूमिगत भाग से निकलकर ऊपर की ओर बढ़ने वाली शाखा। उदाहरण – पुदीना, गुलदाउदी।
  • ऑफसेट (Offset): छोटा, एक पर्वसंधि वाला क्षैतिज तना, जो जलीय पौधों में पाया जाता है। उदाहरण – जलकुंभी, पिस्टिया।

C. वायवीय तना

  • तना प्रतान (Stem Tendril): पतला, कुंडलित तना जो चढ़ने में सहायता करता है। उदाहरण – अंगूर, पैशन फ्लावर।
  • काँटा (Thorn): कक्षीय कली या शाखा का कठोर एवं नुकीला रूपांतरण। उदाहरण – नींबू, बोगनवेलिया।
  • फाइलोक्लेड (Phylloclade): हरा, चपटा या बेलनाकार तना जो प्रकाश संश्लेषण करता है। उदाहरण – Opuntia, Euphorbia।
  • क्लैडोड (Cladode): सीमित वृद्धि वाला हरा तना, जो पत्ती जैसा कार्य करता है। उदाहरण – Asparagus, Ruscus।
  • बुलबिल (Bulbil): कलिका का मांसल संरचना में रूपांतरण, जो कायिक प्रजनन में सहायक है। उदाहरण – Agave, Dioscorea की कुछ प्रजातियाँ।
अति महत्वपूर्ण: आलू – कंद; अदरक – प्रकंद; प्याज – शल्ककंद; अरबी – घनकंद; अंगूर – तना प्रतान; नींबू – तने का काँटा; Opuntia – फाइलोक्लेड।
Topic 06

6. पत्ती – संरचना एवं प्रकार

पत्ती (Leaf) पौधे का पार्श्वीय, चपटा एवं सामान्यतः हरा अंग है, जो तने के पर्व से विकसित होता है। यह प्रकाश संश्लेषण का प्रमुख स्थान है। पत्ती का विकास कक्षीय कली से नहीं, बल्कि तने के शीर्षस्थ विभज्योतक से निकलने वाले पर्ण आद्यक (Leaf Primordium) से होता है। सामान्य पत्ती में पर्णाधार, पर्णवृंत और पर्णफलक पाए जाते हैं।

पत्ती के प्रमुख भाग

  • पर्णाधार (Leaf Base): पत्ती का वह भाग जिससे वह तने से जुड़ी होती है। कुछ पौधों में पर्णाधार फूला हुआ हो सकता है।
  • पर्णवृंत (Petiole): पत्ती को तने से जोड़ने वाला डंठल।
  • पर्णफलक (Lamina): पत्ती का चपटा और हरा भाग, जिसमें शिराएँ और शिरिकाएँ होती हैं।
  • अनुपर्ण (Stipules): कुछ पौधों में पर्णाधार के पास उपस्थित छोटी पत्ती जैसी संरचनाएँ।

पत्ती के प्रमुख कार्य

  1. प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन का निर्माण।
  2. वाष्पोत्सर्जन द्वारा जल का निष्कासन।
  3. रंध्रों के माध्यम से गैसों का आदान-प्रदान।
  4. कुछ पौधों में भोजन संग्रह और कायिक प्रजनन।
  5. कुछ पौधों में सुरक्षा एवं कीट पकड़ना।

पत्ती के प्रकार

1. सरल पत्ती (Simple Leaf)

इसमें पर्णफलक एक ही होता है। पर्णफलक कटा हुआ हो सकता है, लेकिन कटाव मध्य शिरा या पर्णवृंत तक नहीं पहुँचता। उदाहरण – आम, अमरूद, गुड़हल।

2. संयुक्त पत्ती (Compound Leaf)

इसमें पर्णफलक कई छोटी इकाइयों में विभाजित होता है जिन्हें पत्रक (Leaflets) कहते हैं। पत्रकों के आधार पर संयुक्त पत्तियाँ दो प्रमुख प्रकार की होती हैं:

  • पिच्छाकार संयुक्त पत्ती (Pinnately Compound): पत्रक एक सामान्य अक्ष या रैकिस पर लगे होते हैं। उदाहरण – नीम, गुलाब।
  • हस्ताकार संयुक्त पत्ती (Palmately Compound): सभी पत्रक एक ही बिंदु से निकलते हैं। उदाहरण – सेमल, शिरीष की कुछ प्रजातियाँ।
महत्त्वपूर्ण अंतर: नीम की पत्ती पिच्छाकार संयुक्त होती है। गुलाब में भी पिच्छाकार संयुक्त पत्ती होती है। मटर में भी पिच्छाकार संयुक्त पत्ती पाई जाती है, जिसका अंतिम पत्रक प्रतान में बदल सकता है।
Topic 07

7. पत्ती के रूपांतरण (Leaf Modifications)

पत्तियाँ पौधे में प्रकाश संश्लेषण के अतिरिक्त आरोहण, सुरक्षा, भोजन संग्रह, कीट पकड़ने और वाष्पोत्सर्जन कम करने जैसे कार्यों के लिए रूपांतरित हो सकती हैं। ऐसे रूपांतरण पौधों को विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में जीवित रहने में सहायता करते हैं।

रूपांतरणकार्यउदाहरण
पर्ण प्रतान (Leaf Tendril)आरोहण एवं सहारामटर
पर्ण काँटे (Leaf Spines)सुरक्षा एवं वाष्पोत्सर्जन में कमीOpuntia
भंडारण पत्तियाँभोजन संग्रहप्याज, लहसुन
कीटभक्षी पत्तियाँकीट पकड़ना एवं पोषक तत्व प्राप्त करनानेपेन्थीज, ड्रोसेरा, वीनस फ्लाईट्रैप
प्रजनन पत्तियाँपत्ती से नए पौधे बनानाBryophyllum
शल्क पत्तियाँसुरक्षा एवं भोजन संग्रहप्याज की बाहरी शल्क पत्तियाँ
फाइलोड (Phyllode)पत्ती के समान प्रकाश संश्लेषणकुछ Acacia प्रजातियाँ

कीटभक्षी पौधे

कीटभक्षी पौधे सामान्यतः ऐसे क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ मिट्टी में नाइट्रोजन जैसे खनिज पोषक तत्वों की कमी होती है। ये प्रकाश संश्लेषण करते हैं, लेकिन पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए छोटे कीटों को पकड़कर उनसे नाइट्रोजन आदि प्राप्त करते हैं।

  • नेपेन्थीज (Nepenthes): पत्ती का भाग घड़े जैसी संरचना में बदल जाता है।
  • ड्रोसेरा (Drosera): पत्तियों पर चिपचिपे ग्रंथियुक्त रोम होते हैं।
  • वीनस फ्लाईट्रैप (Dionaea): पत्ती के दो भाग कीट के संपर्क में बंद हो जाते हैं।
  • यूट्रिकुलेरिया (Utricularia): जल में रहने वाला कीटभक्षी पौधा, जिसमें छोटे ब्लैडर जैसे जाल होते हैं।
परीक्षा तथ्य: मटर में प्रतान पत्ती का रूपांतरण है। Opuntia में काँटे पत्तियों के रूपांतरण हैं और हरा चपटा तना प्रकाश संश्लेषण करता है। नेपेन्थीज में घड़े जैसी संरचना पत्ती से बनती है।
Topic 08

8. पर्णविन्यास एवं शिरा विन्यास

पर्णविन्यास (Phyllotaxy)

तने या शाखा पर पत्तियों के व्यवस्थित रूप से लगने की व्यवस्था को पर्णविन्यास कहते हैं। पौधे में पत्तियों का ऐसा विन्यास प्रकाश प्राप्त करने तथा एक-दूसरे पर छाया कम करने में सहायता करता है। इसके तीन प्रमुख प्रकार हैं।

प्रकारविशेषताउदाहरण
एकांतर (Alternate)प्रत्येक पर्व पर एक पत्तीगुड़हल, सरसों, सूरजमुखी
सम्मुख (Opposite)प्रत्येक पर्व पर दो पत्तियाँ आमने-सामनेअमरूद, आक
चक्रिक (Whorled)एक पर्व पर दो से अधिक पत्तियाँकनेर, सप्तपर्णी (Alstonia)

शिरा विन्यास (Venation)

पत्ती के पर्णफलक में शिराओं और शिरिकाओं के व्यवस्थित विन्यास को शिरा विन्यास कहते हैं। यह जल, खनिज और भोजन के परिवहन में सहायता करता है तथा पत्ती को यांत्रिक मजबूती देता है।

प्रकारविशेषताउदाहरण
जालिकावत (Reticulate)शिराएँ जाल जैसी संरचना बनाती हैंआम, अमरूद, पीपल
समानांतर (Parallel)शिराएँ लगभग समानांतर चलती हैंगेहूँ, धान, केला
द्विशाखित (Dichotomous)शिराएँ बार-बार दो शाखाओं में बँटती हैंGinkgo
सामान्य परीक्षा नियम: द्विबीजपत्री पौधों में सामान्यतः जालिकावत शिरा विन्यास और एकबीजपत्री पौधों में समानांतर शिरा विन्यास पाया जाता है। कुछ अपवाद भी होते हैं।
Topic 09

9. पुष्प – संरचना एवं भाग

पुष्प (Flower) आवृतबीजी पौधों का लैंगिक प्रजनन अंग है। यह एक रूपांतरित प्ररोह माना जाता है, जिसमें प्रजनन के लिए विशेष संरचनाएँ विकसित होती हैं। एक सामान्य पुष्प में पुष्पवृंत, पुष्पासन और चार चक्र पाए जा सकते हैं – बाह्यदलपुंज, दलपुंज, पुमंग और जायांग।

पुष्प के चार प्रमुख चक्र

चक्रअंगमुख्य कार्य
बाह्यदलपुंज (Calyx)बाह्यदल (Sepals)कली अवस्था में पुष्प की रक्षा
दलपुंज (Corolla)पंखुड़ियाँ (Petals)परागणकर्ताओं को आकर्षित करना
पुमंग (Androecium)पुंकेसर (Stamens)परागकणों का निर्माण
जायांग (Gynoecium)अंडप/स्त्रीकेसर (Carpel/Pistil)बीजांड का धारण एवं निषेचन

पुंकेसर की संरचना

पुंकेसर पुष्प का नर जनन अंग है। इसके दो प्रमुख भाग होते हैं – पुंतंतु (Filament) और परागकोष (Anther)। परागकोष में सामान्यतः चार परागधानी या माइक्रोस्पोरेंजिया पाए जाते हैं, जिनमें परागकण बनते हैं।

स्त्रीकेसर की संरचना

स्त्रीकेसर या जायांग पुष्प का मादा जनन अंग है। इसके तीन प्रमुख भाग हैं:

  • वर्तिकाग्र (Stigma): परागकण ग्रहण करता है।
  • वर्तिका (Style): वर्तिकाग्र और अंडाशय को जोड़ती है।
  • अंडाशय (Ovary): इसमें बीजांड (Ovules) उपस्थित होते हैं। निषेचन के बाद बीजांड बीज तथा अंडाशय फल में विकसित होता है।

पुष्पों के प्रमुख प्रकार

  • पूर्ण पुष्प: जिसमें चारों पुष्प चक्र उपस्थित हों।
  • अपूर्ण पुष्प: जिसमें चारों चक्रों में से कोई एक या अधिक अनुपस्थित हों।
  • द्विलिंगी पुष्प: जिसमें पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों उपस्थित हों। उदाहरण – गुड़हल, सरसों।
  • एकलिंगी पुष्प: जिसमें केवल पुंकेसर या केवल स्त्रीकेसर हो। उदाहरण – पपीता, मक्का।
  • सममित पुष्प: जो एक से अधिक तल से समान भागों में बाँटा जा सके।
  • असममित पुष्प: जिसे किसी भी तल से समान भागों में विभाजित न किया जा सके। उदाहरण – कैना।

अंडाशय की स्थिति के आधार पर पुष्प

प्रकारस्थितिउदाहरण
अधोजायांगी (Hypogynous)अंडाशय ऊपरी एवं अन्य पुष्प भाग नीचेसरसों, गुड़हल, बैंगन
परिजायांगी (Perigynous)अन्य पुष्प भाग अंडाशय के चारों ओर लगभग समान स्तर परगुलाब, आड़ू
अधिजायांगी (Epigynous)अन्य पुष्प भाग अंडाशय के ऊपर से निकलते हैंअमरूद, खीरा, सूरजमुखी
परीक्षा तथ्य: पुष्प का नर जनन अंग पुंकेसर और मादा जनन अंग स्त्रीकेसर है। परागकण परागकोष में तथा बीजांड अंडाशय में पाए जाते हैं।
Topic 10

10. पुष्पक्रम के प्रकार (Inflorescence)

तने या शाखा पर पुष्पों के लगने की व्यवस्था को पुष्पक्रम कहते हैं। पुष्पक्रम में पुष्प एक निश्चित क्रम में व्यवस्थित रहते हैं। मुख्यतः असीमाक्षी और ससीमाक्षी पुष्पक्रम दो प्रमुख प्रकार हैं।

A. असीमाक्षी पुष्पक्रम (Racemose)

इसमें मुख्य अक्ष लगातार बढ़ता रहता है और उसका अंत पुष्प में नहीं होता। पुराने पुष्प नीचे या बाहरी ओर तथा नए पुष्प ऊपर या केंद्र की ओर विकसित होते हैं। इसे अग्राभिसारी क्रम (Acropetal succession) कहते हैं।

प्रकारविशेषताउदाहरण
असीमाक्ष (Raceme)मुख्य अक्ष पर डंठलयुक्त पुष्पसरसों
स्पाइक (Spike)मुख्य अक्ष पर बिना डंठल के पुष्पAchyranthes
स्पैडिक्स (Spadix)मांसल अक्ष पर छोटे पुष्प; प्रायः आवरणअरबी, केला
कोरिम्ब (Corymb)निचले पुष्पों के डंठल लंबे, शीर्ष लगभग समतलCandytuft
अम्बेल (Umbel)सभी पुष्प डंठल एक बिंदु से निकलते हैंधनिया, गाजर
कैपिटुलम (Capitulum)चपटी पुष्पासन पर अनेक छोटे पुष्पसूरजमुखी

B. ससीमाक्षी पुष्पक्रम (Cymose)

इसमें मुख्य अक्ष का अंत एक पुष्प में हो जाता है। पुराने पुष्प शीर्ष या केंद्र में और नए पुष्प नीचे या बाहरी ओर विकसित होते हैं। इसे प्रतिगामी क्रम (Basipetal succession) कहा जाता है।

प्रकारविशेषताउदाहरण
एकशाखी ससीमाक्षी (Monochasial)एक समय में एक पार्श्व शाखा विकसित होती हैHeliotropium के कुछ पुष्पक्रम
द्विशाखी ससीमाक्षी (Dichasial)मुख्य पुष्प के नीचे दो शाखाएँचमेली की कुछ प्रजातियाँ
बहुशाखी ससीमाक्षी (Polychasial)मुख्य पुष्प के नीचे कई शाखाएँCalotropis

विशेष पुष्पक्रम

  • साइनोथियम (Cyathium): प्याले जैसी संरचना में एक मादा पुष्प और अनेक नर पुष्प व्यवस्थित होते हैं। उदाहरण – Euphorbia।
  • वर्टिसिलास्टर (Verticillaster): विपरीत पत्तियों के कक्ष में सघन पुष्प समूह बनता है। उदाहरण – तुलसी।
  • हाइपैन्थोडियम (Hypanthodium): मांसल खोखली पुष्पासन संरचना में पुष्प व्यवस्थित होते हैं। उदाहरण – अंजीर।
याद रखने योग्य: सरसों – असीमाक्ष; सूरजमुखी – कैपिटुलम; धनिया – अम्बेल; तुलसी – वर्टिसिलास्टर; अंजीर – हाइपैन्थोडियम; Euphorbia – साइनोथियम।
Topic 11

11. परागण – स्वपरागण एवं परपरागण

परागकोष से परागकणों का वर्तिकाग्र तक पहुँचना परागण (Pollination) कहलाता है। यह आवृतबीजी पौधों में लैंगिक प्रजनन की एक महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया है। परागण के बाद परागकण अंकुरित होकर पराग नलिका बनाता है, जिसके माध्यम से नर युग्मक बीजांड तक पहुँचते हैं।

परागण के प्रमुख प्रकार

1. स्वपरागण (Self Pollination)

जब परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र या उसी पौधे के दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र तक पहुँचता है, तो इसे स्वपरागण कहते हैं।

  • स्वयुग्मन (Autogamy): एक ही पुष्प के परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं।
  • सजातपुष्पी परागण (Geitonogamy): एक ही पौधे के एक पुष्प से दूसरे पुष्प तक परागकण पहुँचता है। आनुवंशिक रूप से यह स्वपरागण के समान है, लेकिन इसमें परागणकर्ता की आवश्यकता हो सकती है।

2. परपरागण (Cross Pollination)

जब एक पौधे के पुष्प से परागकण उसी प्रजाति के दूसरे पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं, तो इसे परपरागण कहते हैं। इससे आनुवंशिक विविधता बढ़ने की संभावना रहती है।

परागण के माध्यम

माध्यमनामउदाहरण
वायुवायुपरागण (Anemophily)मक्का, गेहूँ, घास
जलजलपरागण (Hydrophily)Vallisneria, Zostera
कीटकीटपरागण (Entomophily)सूरजमुखी, साल्विया
पक्षीपक्षीपरागण (Ornithophily)कुछ Bignonia प्रजातियाँ
चमगादड़काइरोप्टेरोफिली (Chiropterophily)कुछ रात्रिकालीन पुष्प

स्वपरागण एवं परपरागण में अंतर

आधारस्वपरागणपरपरागण
पौधेएक ही पौधे मेंदो अलग पौधों में
बाहरी माध्यमआवश्यक नहीं भी हो सकताअधिकतर किसी माध्यम की आवश्यकता
आनुवंशिक विविधतासामान्यतः कमसामान्यतः अधिक
परागकण की बर्बादीतुलनात्मक रूप से कमअधिक हो सकती है
उदाहरणमटर के कुछ पुष्पमक्का, पपीता के पौधों के बीच
विशेष तथ्य: क्लिस्टोगैमस पुष्प बंद रहते हैं और उनमें स्वपरागण होता है। ऐसे पुष्पों में परागण के लिए बाहरी परागणकर्ता की आवश्यकता नहीं होती। उदाहरण – Viola, Oxalis और Commelina की कुछ प्रजातियाँ।
Topic 12

12. निषेचन की प्रक्रिया (Fertilization)

परागण के बाद परागकण अनुकूल वर्तिकाग्र पर पहुँचकर अंकुरित होता है। इससे पराग नलिका विकसित होती है, जो वर्तिका से होकर अंडाशय में स्थित बीजांड तक पहुँचती है। आवृतबीजी पौधों में पराग नलिका सामान्यतः बीजांड के बीजांडद्वार (Micropyle) से प्रवेश करती है। इसके माध्यम से दो नर युग्मक भ्रूणकोष में पहुँचते हैं।

निषेचन के प्रमुख चरण

  1. परागकण का वर्तिकाग्र पर पहुँचना।
  2. परागकण का अंकुरण और पराग नलिका का निर्माण।
  3. पराग नलिका का वर्तिका से होते हुए अंडाशय तक पहुँचना।
  4. बीजांड में पराग नलिका का प्रवेश।
  5. दो नर युग्मकों का भ्रूणकोष में पहुँचना।
  6. एक नर युग्मक का अंड कोशिका से संलयन और दूसरे का केंद्रीय कोशिका के ध्रुवीय केंद्रकों से संलयन।

द्विनिषेचन (Double Fertilization)

आवृतबीजी पौधों की विशेष प्रक्रिया को द्विनिषेचन कहते हैं। इसमें दो संलयन घटनाएँ होती हैं:

  • युग्मक संलयन (Syngamy): एक नर युग्मक (n) अंड कोशिका (n) से मिलकर द्विगुणित युग्मनज (2n) बनाता है।
  • त्रिसंलयन (Triple Fusion): दूसरा नर युग्मक (n) भ्रूणकोष की केंद्रीय कोशिका में उपस्थित दो ध्रुवीय केंद्रकों (n+n) से मिलकर प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक (3n) बनाता है।
युग्मक संलयन: n + n = 2n (युग्मनज)
त्रिसंलयन: n + n + n = 3n (प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक)

निषेचन के बाद परिवर्तन

निषेचन से पहले की संरचनानिषेचन के बाद बनने वाली संरचना
अंड कोशिकायुग्मनज → भ्रूण
बीजांडबीज
अंडाशयफल
अंडाशय भित्तिफलभित्ति (Pericarp)
केंद्रीय कोशिकाभ्रूणपोष का विकास
बीजांडावरणबीजावरण
अति महत्वपूर्ण: द्विनिषेचन आवृतबीजी पौधों की विशिष्ट विशेषता है। युग्मक संलयन से द्विगुणित युग्मनज और त्रिसंलयन से सामान्यतः त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक बनता है।
Topic 13

13. फल – प्रकार एवं वर्गीकरण

निषेचन के बाद सामान्यतः अंडाशय विकसित होकर फल बनाता है। अंडाशय की भित्ति फलभित्ति में बदल जाती है। फल के भीतर बीज उपस्थित होते हैं। कुछ पौधों में बिना निषेचन के भी फल बन सकते हैं, इस प्रक्रिया को अनिषेकफलन (Parthenocarpy) कहते हैं। ऐसे फलों में सामान्यतः बीज नहीं बनते या बीज अविकसित हो सकते हैं।

फल के प्रमुख भाग

  • फलभित्ति (Pericarp): अंडाशय की भित्ति से बनती है।
  • बीज: निषेचित बीजांड से विकसित होता है।
  • बाह्य फलभित्ति (Epicarp): फल की बाहरी परत।
  • मध्य फलभित्ति (Mesocarp): फलभित्ति का मध्य भाग।
  • अंतः फलभित्ति (Endocarp): फलभित्ति की भीतरी परत।

फल के प्रमुख प्रकार

1. सरल फल (Simple Fruit)

एक ही पुष्प के एक अंडाशय से विकसित होने वाला फल सरल फल कहलाता है। यह शुष्क या मांसल हो सकता है।

2. पुंज फल (Aggregate Fruit)

एक ही पुष्प के अनेक स्वतंत्र अंडपों से विकसित होने वाले छोटे-छोटे फल मिलकर पुंज फल बनाते हैं। उदाहरण – स्ट्रॉबेरी, रसभरी, सीताफल।

3. संग्रथित फल (Multiple/Composite Fruit)

एक पुष्पक्रम के अनेक पुष्पों के अंडाशय और कभी-कभी अन्य पुष्पीय भाग मिलकर एक फल जैसी संरचना बनाते हैं। उदाहरण – अनानास, कटहल, शहतूत।

सरल फलों के उदाहरण

फल का प्रकारविशेषताउदाहरण
बेरी (Berry)मांसल फलभित्ति; सामान्यतः कई बीजटमाटर, अंगूर
ड्रूप (Drupe)कठोर अंतःफलभित्तिआम, नारियल, आड़ू
पोम (Pome)सहायक पुष्पीय भाग भी फल में योगदान करते हैंसेब, नाशपाती
पेपो (Pepo)कठोर बाहरी छिलका, अधिजायांगी अंडाशय सेखीरा, तरबूज, कद्दू
हेस्पेरिडियमविशेष प्रकार का बेरी फलसंतरा, नींबू
लेग्यूम (Legume)एक अंडप से, सामान्यतः दो सिवनी से फटता हैमटर, चना
कैप्सूलशुष्क, अनेक बीज वाला फलकपास, धतूरा
कैरियोप्सिसफलभित्ति बीजावरण से जुड़ी रहती हैगेहूँ, धान, मक्का

अनिषेकफलन (Parthenocarpy)

जब निषेचन के बिना अंडाशय फल में विकसित हो जाता है, तो इसे अनिषेकफलन कहते हैं। ऐसे फल सामान्यतः बीजरहित होते हैं। उदाहरण – केला और कुछ किस्मों के अंगूर।

परीक्षा तथ्य: आम – ड्रूप; टमाटर – बेरी; सेब – पोम; संतरा – हेस्पेरिडियम; गेहूँ – कैरियोप्सिस; अनानास – संग्रथित फल; स्ट्रॉबेरी – पुंज फल।
Topic 14

14. बीज – संरचना एवं प्रकार

निषेचन के बाद बीजांड विकसित होकर बीज बनता है। बीज में भ्रूण उपस्थित होता है, जो अनुकूल परिस्थितियों में अंकुरित होकर नया पौधा बनाता है। सामान्य बीज में बीजावरण, भ्रूण और भोजन संग्रह करने वाला ऊतक पाया जाता है।

बीज के प्रमुख भाग

  • बीजावरण (Seed Coat): बीज की बाहरी सुरक्षात्मक परत। यह सामान्यतः बीजांडावरण से विकसित होता है।
  • बीजचोल/टेस्टा (Testa): बीजावरण की बाहरी परत।
  • टेगमेन (Tegmen): बीजावरण की भीतरी परत।
  • बीजपत्र (Cotyledons): भ्रूण के पत्तीनुमा भाग, जो भोजन संग्रह या पोषण में सहायता करते हैं।
  • मूलांकुर (Radicle): भ्रूण का वह भाग जिससे प्राथमिक जड़ विकसित होती है।
  • प्रांकुर (Plumule): भ्रूण का वह भाग जिससे प्ररोह विकसित होता है।
  • भ्रूणपोष (Endosperm): कुछ बीजों में भोजन संग्रह करने वाला ऊतक।

बीज के अन्य महत्त्वपूर्ण चिह्न

  • नाभिका (Hilum): बीज पर वह निशान जहाँ बीजांड का डंठल जुड़ा था।
  • बीजांडद्वार (Micropyle): बीजावरण पर छोटा छिद्र, जिसके माध्यम से जल प्रवेश कर सकता है।
  • रैफे (Raphe): कुछ बीजों में बीजांड के डंठल के संलयन से बना निशान।

भ्रूणपोष की उपस्थिति के आधार पर बीज

प्रकारविशेषताउदाहरण
भ्रूणपोषी (Albuminous)परिपक्व बीज में भ्रूणपोष बना रहता हैमक्का, गेहूँ, अरंडी
अभ्रूणपोषी (Non-albuminous)परिपक्व बीज में भ्रूणपोष का अधिकांश भाग उपयोग हो जाता हैमटर, चना, मूँगफली
परिभ्रूणपोषी (Perispermic)न्यूसेलस का कुछ भाग भोजन संग्रह के रूप में बना रहता हैकाली मिर्च, चुकंदर
परीक्षा तथ्य: मूलांकुर से जड़ और प्रांकुर से प्ररोह विकसित होता है। बीजांड से बीज तथा अंडाशय से फल बनता है।
Topic 15

15. एकबीजपत्री एवं द्विबीजपत्री बीज

आवृतबीजी पौधों में बीजपत्रों की संख्या के आधार पर परंपरागत रूप से एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री समूहों का अध्ययन किया जाता है। एकबीजपत्री बीज में एक बीजपत्र और द्विबीजपत्री बीज में दो बीजपत्र पाए जाते हैं। बीजपत्र भ्रूण का हिस्सा होते हैं।

आधारएकबीजपत्री बीजद्विबीजपत्री बीज
बीजपत्रएकदो
उदाहरणमक्का, गेहूँ, धानचना, मटर, सेम
भ्रूणपोषअधिकांश में परिपक्व बीज में बना रहता हैअनेक में परिपक्व बीज में उपयोग हो जाता है
भ्रूणएक बीजपत्रदो बीजपत्र
विशेष संरचनाघास कुल में स्क्यूटेलम, कोलिओप्टाइल एवं कोलिओराइजादो बीजपत्रों के बीच प्रांकुर एवं मूलांकुर

मक्का के बीज की संरचना

मक्का का बीज वास्तव में कैरियोप्सिस प्रकार का फल है, जिसमें फलभित्ति और बीजावरण आपस में जुड़े रहते हैं। इसके भ्रूण में एक बीजपत्र होता है, जिसे स्क्यूटेलम कहते हैं। भ्रूणपोष भोजन का मुख्य भंडार है। प्रांकुर को कोलिओप्टाइल और मूलांकुर को कोलिओराइजा ढकते हैं।

चना एवं मटर के बीज की संरचना

चना और मटर के बीज सामान्यतः अभ्रूणपोषी होते हैं। इनमें दो बीजपत्र होते हैं, जिनमें भोजन संग्रह रहता है। भ्रूणपोष का अधिकांश भाग बीज विकास के दौरान उपयोग हो जाता है।

ध्यान दें: सभी द्विबीजपत्री बीज अभ्रूणपोषी नहीं होते। अरंडी जैसे द्विबीजपत्री पौधों के बीज भ्रूणपोषी होते हैं। इसलिए एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री के बीच मुख्य अंतर बीजपत्रों की संख्या है, न कि केवल भ्रूणपोष की उपस्थिति।
Topic 16

16. पौधों के प्रमुख परिवार एवं उदाहरण

पादप वर्गिकी में समान संरचनात्मक एवं प्रजनन लक्षणों वाले पौधों को परिवारों में रखा जाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में परिवारों की पहचान उनके पुष्पीय लक्षणों, अंडाशय, पुंकेसर, फल, बीज तथा प्रमुख उदाहरणों के आधार पर की जाती है।

1. फैबेसी (Fabaceae) – मटर कुल

  • पौधे प्रायः शाक, झाड़ी या वृक्ष होते हैं।
  • पत्तियाँ सामान्यतः संयुक्त और अनुपर्णयुक्त होती हैं।
  • पुष्प प्रायः द्विलिंगी, एकव्याससममित और पंचतयी होते हैं।
  • दलपुंज में ध्वज, पंख और नौतल संरचना होती है; इसे वैक्सिलरी एस्टिवेशन कहते हैं।
  • पुंकेसर प्रायः 10 होते हैं और कई सदस्यों में 9+1 व्यवस्था होती है।
  • अंडाशय ऊर्ध्ववर्ती और एकांडपी होता है।
  • फल सामान्यतः फली (Legume) होता है।

उदाहरण: मटर, चना, अरहर, मूँग, उड़द, सोयाबीन, मूँगफली।

आर्थिक महत्त्व: दलहनी खाद्य फसलें, प्रोटीन स्रोत, चारा और मिट्टी की उर्वरता में योगदान।

2. सोलेनेसी (Solanaceae) – आलू कुल

  • अधिकांश पौधे शाक या झाड़ी होते हैं।
  • पत्तियाँ सामान्यतः एकांतर और बिना अनुपर्ण की होती हैं।
  • पुष्प प्रायः द्विलिंगी, नियमित एवं पंचतयी होते हैं।
  • दलपुंज और बाह्यदलपुंज सामान्यतः संयुक्त होते हैं।
  • पुंकेसर सामान्यतः पाँच और दललग्न होते हैं।
  • अंडाशय ऊर्ध्ववर्ती, द्विअंडपी और सामान्यतः द्विकोष्ठीय होता है।
  • फल बेरी या कैप्सूल हो सकता है।

उदाहरण: आलू, टमाटर, बैंगन, मिर्च, तंबाकू, धतूरा, अश्वगंधा।

आर्थिक महत्त्व: सब्जियाँ, मसाले, औषधीय पौधे और तंबाकू।

3. लिलिएसी (Liliaceae) – लिली कुल

  • मुख्यतः एकबीजपत्री पौधे।
  • पत्तियाँ सामान्यतः समानांतर शिरा विन्यास वाली होती हैं।
  • पुष्प प्रायः त्रितयी होते हैं।
  • परिदल छह, सामान्यतः 3+3 व्यवस्था में।
  • पुंकेसर छह और अंडाशय सामान्यतः ऊर्ध्ववर्ती होता है।
  • अंडाशय प्रायः त्रिअंडपी एवं त्रिकोष्ठीय होता है।

उदाहरण: लिली, एलोवेरा, शतावरी (पारंपरिक वर्गीकरण में), प्याज एवं लहसुन का संबंध परंपरागत रूप से इस कुल से बताया जाता रहा है; आधुनिक वर्गिकी में कुछ पौधों का परिवार बदला गया है।

4. मालवेसी (Malvaceae) – गुड़हल कुल

  • पत्तियाँ प्रायः एकांतर और अनुपर्णयुक्त होती हैं।
  • पुष्प द्विलिंगी, नियमित एवं पंचतयी होते हैं।
  • एपिकैलिक्स अनेक सदस्यों में पाया जाता है।
  • पुंकेसर अनेक और एकसंघी (Monadelphous) होते हैं।
  • अंडाशय ऊर्ध्ववर्ती और बहुअंडपी होता है।

उदाहरण: गुड़हल, कपास, भिंडी, ककड़ी कुल के पौधे नहीं – यह अंतर ध्यान रखें।

5. ब्रैसिकेसी (Brassicaceae) – सरसों कुल

  • पुष्प प्रायः द्विलिंगी और नियमित होते हैं।
  • चार बाह्यदल और चार पंखुड़ियाँ क्रॉस जैसी व्यवस्था में।
  • पुंकेसर छह, जिनमें चार लंबे और दो छोटे – चतुःदीर्घी (Tetradynamous)।
  • अंडाशय ऊर्ध्ववर्ती और द्विअंडपी होता है।
  • फल सिलिक्वा या सिलिक्युला होता है।

उदाहरण: सरसों, मूली, पत्तागोभी, फूलगोभी, शलजम।

6. पोएसी (Poaceae) – घास कुल

  • अधिकांश पौधे शाकीय और एकबीजपत्री होते हैं।
  • तना सामान्यतः पर्वयुक्त होता है; पर्व प्रायः ठोस और पर्वसंधियाँ कई पौधों में खोखली होती हैं।
  • पत्तियाँ संकरी, समानांतर शिरा विन्यास वाली और पर्णाधार म्यानयुक्त होती हैं।
  • पुष्प छोटे होते हैं और स्पाइकलेट में व्यवस्थित रहते हैं।
  • फल कैरियोप्सिस होता है।

उदाहरण: गेहूँ, धान, मक्का, जौ, गन्ना, बाँस।

प्रमुख पादप परिवारों की तुलना

परिवारप्रमुख पहचानफलउदाहरण
Fabaceaeतितलीनुमा पुष्प, वैक्सिलरी एस्टिवेशनफलीमटर, चना
Solanaceaeपाँच दललग्न पुंकेसरबेरी/कैप्सूलआलू, टमाटर
Liliaceaeत्रितयी पुष्प, छह परिदलकैप्सूल/बेरीलिली
Malvaceaeएकसंघी पुंकेसर, एपिकैलिक्सकैप्सूल/विभिन्नगुड़हल, कपास
Brassicaceaeचतुःदीर्घी पुंकेसरसिलिक्वा/सिलिक्युलासरसों, मूली
Poaceaeस्पाइकलेट, कैरियोप्सिस फलकैरियोप्सिसगेहूँ, धान
परीक्षा में विशेष: Fabaceae – 9+1 पुंकेसर; Brassicaceae – 4 लंबे + 2 छोटे पुंकेसर; Solanaceae – 5 दललग्न पुंकेसर; Poaceae – कैरियोप्सिस फल।
Topic 17

17. पौधों की आंतरिक संरचना – जड़, तना एवं पत्ती

पादप शरीर की कोशिकाएँ अलग-अलग कार्यों के लिए ऊतकों में व्यवस्थित होती हैं। किसी अंग को काटकर उसके अंदर उपस्थित ऊतकों और संवहनी बंडलों का अध्ययन पादप शरीर रचना (Plant Anatomy) कहलाता है। जड़, तना और पत्ती की आंतरिक संरचना में बाहरी समानताओं के बावजूद अनेक महत्त्वपूर्ण अंतर पाए जाते हैं।

पादप ऊतकों का सामान्य वर्गीकरण

ऊतकप्रमुख प्रकारकार्य
विभज्योतक ऊतकशीर्षस्थ, अंतर्वेशी, पार्श्वकोशिका विभाजन एवं वृद्धि
सरल स्थायी ऊतकमृदूतक, स्थूलकोण ऊतक, दृढ़ोतकभोजन संग्रह, लचीलापन, मजबूती
जटिल स्थायी ऊतकजाइलम एवं फ्लोएमजल, खनिज एवं भोजन का परिवहन
रक्षी ऊतकएपिडर्मिस, कॉर्कसुरक्षा एवं जल हानि कम करना

जाइलम (Xylem)

जाइलम मुख्यतः जल और खनिज लवणों का परिवहन करता है। इसके प्रमुख घटक वाहिकाएँ, वाहिनिकाएँ, जाइलम तंतु और जाइलम मृदूतक हैं। जाइलम की अधिकांश कोशिकाएँ परिपक्व अवस्था में मृत होती हैं, जबकि जाइलम मृदूतक जीवित होता है।

फ्लोएम (Phloem)

फ्लोएम पत्तियों में निर्मित कार्बनिक भोजन को पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाता है। इसके प्रमुख घटक चालनी नलिकाएँ, सहचर कोशिकाएँ, फ्लोएम मृदूतक और फ्लोएम तंतु हैं। अधिकांश घटक जीवित होते हैं, लेकिन फ्लोएम तंतु सामान्यतः मृत होते हैं।

द्विबीजपत्री जड़ की आंतरिक संरचना

  • बाहरी एपिब्लेमा या पिलिफेरस परत से मूल रोम निकलते हैं।
  • कॉर्टेक्स मुख्यतः मृदूतक से बना होता है।
  • एंडोडर्मिस कॉर्टेक्स की सबसे भीतरी परत है।
  • परिरंभ (Pericycle) से पार्श्व जड़ों का निर्माण होता है।
  • जाइलम और फ्लोएम अलग-अलग त्रिज्यीय क्रम में व्यवस्थित होते हैं।
  • जाइलम सामान्यतः बाह्यादिदारुक (Exarch) होता है।
  • द्विबीजपत्री जड़ में कैम्बियम विकसित होने पर द्वितीयक वृद्धि हो सकती है।

एकबीजपत्री जड़ की आंतरिक संरचना

  • कॉर्टेक्स सामान्यतः विकसित होता है।
  • एंडोडर्मिस और परिरंभ स्पष्ट होते हैं।
  • संवहनी बंडल अनेक होते हैं; जाइलम बहुआदिदारुक (Polyarch) हो सकता है।
  • जाइलम बाह्यादिदारुक होता है।
  • मज्जा सामान्यतः बड़ी और विकसित होती है।
  • सामान्यतः द्वितीयक वृद्धि नहीं होती।

द्विबीजपत्री तने की आंतरिक संरचना

  • सबसे बाहरी परत एपिडर्मिस होती है।
  • कॉर्टेक्स में हाइपोडर्मिस, सामान्य कॉर्टेक्स और एंडोडर्मिस शामिल हो सकते हैं।
  • संवहनी बंडल एक वलय में व्यवस्थित होते हैं।
  • संवहनी बंडल संयुक्त, सहपार्श्वीय और खुले होते हैं।
  • जाइलम अंतःआदिदारुक (Endarch) होता है।
  • संवहनी बंडलों के बीच मज्जा किरणें होती हैं।

एकबीजपत्री तने की आंतरिक संरचना

  • संवहनी बंडल पूरे भरण ऊतक में बिखरे रहते हैं।
  • संवहनी बंडल सामान्यतः बंद होते हैं, उनमें कैम्बियम नहीं होता।
  • प्रत्येक संवहनी बंडल के चारों ओर स्क्लेरेन्काइमा का बंडल आवरण हो सकता है।
  • जाइलम अंतःआदिदारुक होता है।
  • सामान्यतः द्वितीयक वृद्धि अनुपस्थित होती है।

द्विबीजपत्री पत्ती की संरचना

द्विबीजपत्री पत्ती सामान्यतः पृष्ठाधारी (Dorsiventral) होती है। इसमें ऊपरी और निचली सतहों की संरचना अलग होती है। ऊपरी एपिडर्मिस के नीचे पैलिसेड मृदूतक और उसके नीचे स्पंजी मृदूतक पाया जाता है। रंध्र सामान्यतः निचली सतह पर अधिक होते हैं।

एकबीजपत्री पत्ती की संरचना

एकबीजपत्री पत्ती सामान्यतः समद्विपार्श्वीय (Isobilateral) होती है। इसमें दोनों सतहों की संरचना लगभग समान हो सकती है। घास कुल की पत्तियों में बुलीफॉर्म कोशिकाएँ पाई जाती हैं, जो जल की कमी के समय पत्ती को मोड़ने में सहायता करती हैं।

आधारद्विबीजपत्री तनाएकबीजपत्री तना
संवहनी बंडलएक वलय मेंबिखरे हुए
कैम्बियमसामान्यतः उपस्थितसामान्यतः अनुपस्थित
संवहनी बंडलखुलेबंद
द्वितीयक वृद्धिसामान्यतः संभवसामान्यतः अनुपस्थित
याद रखें: जड़ में जाइलम सामान्यतः Exarch होता है, जबकि तने में Endarch। द्विबीजपत्री तने में संवहनी बंडल वलय में और एकबीजपत्री तने में बिखरे होते हैं।
Topic 18

18. वार्षिक वलय एवं आयु निर्धारण

काष्ठीय द्विबीजपत्री पौधों में संवहनी कैम्बियम की सक्रियता के कारण द्वितीयक जाइलम बनता है। ऋतुओं के अनुसार कैम्बियम की सक्रियता बदलती रहती है। अनुकूल वृद्धि काल में बनने वाला जाइलम सामान्यतः हल्का और बड़े ल्यूमेन वाला होता है, जबकि कम अनुकूल काल में बनने वाला जाइलम अपेक्षाकृत गहरा और छोटे ल्यूमेन वाला हो सकता है। इन दोनों के अंतर से वार्षिक वलय बनते हैं।

वार्षिक वलय (Annual Rings)

एक वर्ष में बनने वाली वसंत काष्ठ (Spring Wood/Early Wood) और शरद काष्ठ (Autumn Wood/Late Wood) की परतों का समूह वार्षिक वलय कहलाता है। कई समशीतोष्ण क्षेत्रों के वृक्षों में ये वलय स्पष्ट दिखाई देते हैं।

वसंत काष्ठ एवं शरद काष्ठ में अंतर

आधारवसंत काष्ठशरद काष्ठ
निर्माण कालवृद्धि ऋतु के अनुकूल भाग मेंवृद्धि ऋतु के बाद के भाग में
वाहिका कोशिकाएँसामान्यतः बड़ीसामान्यतः छोटी
कोशिका भित्तितुलनात्मक रूप से पतलीतुलनात्मक रूप से मोटी
रंगहल्कागहरा
घनत्वकमअधिक

वृक्ष की आयु का निर्धारण

वृक्ष के तने के अनुप्रस्थ काट में उपस्थित वार्षिक वलयों की गणना करके उसकी आयु का अनुमान लगाया जा सकता है। इस विधि को वृक्षवलय कालक्रमिकी (Dendrochronology) कहते हैं। सामान्य परिस्थितियों में एक स्पष्ट वार्षिक वलय लगभग एक वर्ष की वृद्धि को दर्शाता है।

सीमा: सभी वृक्षों में हर वर्ष एक स्पष्ट वलय बने, यह आवश्यक नहीं। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में ऋतु परिवर्तन कम स्पष्ट होने के कारण वलय अस्पष्ट या अनियमित हो सकते हैं। इसलिए आयु निर्धारण में पर्यावरणीय परिस्थितियों का ध्यान रखा जाता है।
परीक्षा तथ्य: वार्षिक वलय द्वितीयक जाइलम की वृद्धि से बनते हैं। वृक्ष की आयु के अध्ययन को Dendrochronology कहते हैं।
Topic 19

19. प्रमुख आर्थिक महत्त्व वाले पौधे

मनुष्य भोजन, वस्त्र, औषधि, ईंधन, लकड़ी, रेशा, तेल, मसाले, पेय पदार्थ और औद्योगिक कच्चे माल के लिए पौधों पर निर्भर करता है। आर्थिक वनस्पति विज्ञान में ऐसे पौधों तथा उनके उपयोगी भागों का अध्ययन किया जाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में पौधे, उनसे प्राप्त उत्पाद और उपयोगी भागों का मिलान महत्त्वपूर्ण है।

खाद्यान्न एवं अनाज

पौधावानस्पतिक नामउपयोगी भाग
गेहूँTriticum aestivumबीज/कैरियोप्सिस
धानOryza sativaबीज/कैरियोप्सिस
मक्काZea maysबीज/कैरियोप्सिस
चनाCicer arietinumबीज
मटरPisum sativumबीज एवं कोमल फलियाँ

रेशा प्रदान करने वाले पौधे

पौधावानस्पतिक नामरेशे का स्रोत
कपासGossypiumबीजों के बाहरी रोम
जूटCorchorus capsularis / olitoriusतने का फ्लोएम रेशा
सनLinum usitatissimumतने का फ्लोएम रेशा
नारियलCocos nuciferaफल की मध्य फलभित्ति से कॉयर

तेल देने वाले पौधे

पौधावानस्पतिक नामउपयोगी भाग
सरसोंBrassica junceaबीज
मूँगफलीArachis hypogaeaबीज
तिलSesamum indicumबीज
सूरजमुखीHelianthus annuusबीज
नारियलCocos nuciferaभ्रूणपोष/गिरी
अलसीLinum usitatissimumबीज

मसाले एवं पेय पदार्थ

पौधा/मसालावानस्पतिक नामउपयोगी भाग
हल्दीCurcuma longaप्रकंद
अदरकZingiber officinaleप्रकंद
काली मिर्चPiper nigrumफल
लौंगSyzygium aromaticumसूखी पुष्प कलिका
दालचीनीCinnamomum verumतने की छाल
इलायचीElettaria cardamomumफल/बीज
चायCamellia sinensisकोमल पत्तियाँ एवं कलियाँ
कॉफीCoffea arabicaबीज

लकड़ी, रबर एवं अन्य उत्पाद

  • सागौन: Tectona grandis – इमारती लकड़ी।
  • साल: Shorea robusta – मजबूत लकड़ी।
  • शीशम: Dalbergia sissoo – फर्नीचर एवं निर्माण।
  • रबर: Hevea brasiliensis – लेटेक्स से प्राकृतिक रबर।
  • नीलगिरी: Eucalyptus – लकड़ी, तेल एवं कागज उद्योग में उपयोग।
  • गन्ना: Saccharum officinarum – तने में सुक्रोज का संग्रह।
परीक्षा में मिलान: कपास – बीज रोम; जूट – तने का फ्लोएम; लौंग – पुष्प कलिका; दालचीनी – छाल; हल्दी – प्रकंद; कॉफी – बीज; चाय – पत्तियाँ; रबर – लेटेक्स।
Topic 20

20. औषधीय पौधे एवं उनके उपयोग

भारत में अनेक पौधों का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में किया जाता रहा है। इनके विभिन्न भागों – जड़, तना, पत्ती, छाल, फूल, फल और बीज – में जैव सक्रिय रासायनिक पदार्थ पाए जा सकते हैं। औषधीय पौधों का वैज्ञानिक अध्ययन फार्माकोग्नोसी और औषधीय वनस्पति विज्ञान के अंतर्गत किया जाता है।

पौधावानस्पतिक नामपरंपरागत/प्रमुख उपयोग
तुलसीOcimum tenuiflorum (syn. O. sanctum)पारंपरिक रूप से सर्दी-जुकाम एवं श्वसन संबंधी उपयोग
नीमAzadirachta indicaपारंपरिक त्वचा देखभाल एवं कीट नियंत्रण
अश्वगंधाWithania somniferaआयुर्वेद में रसायन एवं बलवर्धक उपयोग
आँवलाPhyllanthus emblicaफल विटामिन C का स्रोत; पारंपरिक उपयोग
घृतकुमारीAloe veraत्वचा संबंधी बाहरी उपयोग
सर्पगंधाRauvolfia serpentinaइससे प्राप्त रेसरपीन का ऐतिहासिक औषधीय उपयोग
अर्जुनTerminalia arjunaपारंपरिक हृदय स्वास्थ्य संबंधी उपयोग
गिलोयTinospora cordifoliaआयुर्वेदिक पारंपरिक उपयोग
ब्राह्मीBacopa monnieriपारंपरिक स्मृति एवं तंत्रिका संबंधी उपयोग
इसबगोलPlantago ovataबीजावरण से प्राप्त घुलनशील रेशा; कब्ज में उपयोग
अदरकZingiber officinaleपाचन एवं मतली में पारंपरिक उपयोग
हल्दीCurcuma longaमसाले एवं पारंपरिक त्वचा उपयोग

महत्त्वपूर्ण औषधीय रासायनिक पदार्थ

रासायनिक पदार्थस्रोत पौधापरीक्षा तथ्य
क्विनीन (Quinine)Cinchonaमलेरिया के उपचार में ऐतिहासिक महत्त्व
रेसरपीन (Reserpine)Rauvolfia serpentinaरक्तचाप पर प्रभाव डालने वाली औषधि के रूप में ऐतिहासिक उपयोग
एट्रोपीन (Atropine)Atropa belladonnaऔषधीय अल्कलॉइड
मॉर्फीन (Morphine)Papaver somniferumप्रबल दर्दनाशक अल्कलॉइड
मेंटॉल (Menthol)Mentha arvensis आदिसुगंध एवं शीतल अनुभूति देने वाला पदार्थ
कर्क्यूमिन (Curcumin)Curcuma longaहल्दी का प्रमुख पीला वर्णक
स्वास्थ्य संबंधी सावधानी: किसी पौधे का पारंपरिक औषधीय उपयोग होना यह प्रमाणित नहीं करता कि वह हर रोग में प्रभावी या सभी व्यक्तियों के लिए सुरक्षित है। औषधीय पौधों और उनसे बने उत्पादों का उपयोग चिकित्सकीय सलाह के बिना उपचार के विकल्प के रूप में न करें।

अति महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य (One-Liner Revision)

  1. पादप आकारिकी में पौधों के बाहरी स्वरूप एवं अंगों का अध्ययन किया जाता है।
  2. पौधे के दो प्रमुख तंत्र – जड़ तंत्र और प्ररोह तंत्र।
  3. जड़ का विकास मूलांकुर से होता है।
  4. तने का विकास प्रांकुर से होता है।
  5. मूल रोम जड़ के परिपक्वन क्षेत्र में पाए जाते हैं।
  6. मूसला जड़ सामान्यतः द्विबीजपत्री पौधों में होती है।
  7. रेशेदार जड़ सामान्यतः एकबीजपत्री पौधों में होती है।
  8. गाजर – शंक्वाकार जड़।
  9. मूली – धुरीनुमा जड़।
  10. शलजम – नेपिफॉर्म जड़।
  11. बरगद – स्तंभ जड़।
  12. मक्का एवं गन्ना – अवस्तंभ जड़ें।
  13. मैंग्रोव – श्वसन मूल।
  14. ऑर्किड – वेलामेन युक्त वायवीय जड़ें।
  15. आलू – तने का कंद।
  16. अदरक – प्रकंद।
  17. प्याज – शल्ककंद।
  18. अरबी – घनकंद।
  19. अंगूर – तना प्रतान।
  20. नींबू – तने के काँटे।
  21. Opuntia – पत्ती के काँटे और प्रकाश संश्लेषी तना।
  22. मटर – पत्ती प्रतान।
  23. नेपेन्थीज – कीटभक्षी पत्ती।
  24. पर्णविन्यास के प्रकार – एकांतर, सम्मुख और चक्रिक।
  25. आम – एकांतर पर्णविन्यास।
  26. अमरूद – सम्मुख पर्णविन्यास।
  27. सप्तपर्णी – चक्रिक पर्णविन्यास।
  28. द्विबीजपत्री पौधों में सामान्यतः जालिकावत शिरा विन्यास।
  29. एकबीजपत्री पौधों में सामान्यतः समानांतर शिरा विन्यास।
  30. पुष्प का नर जनन अंग – पुंकेसर।
  31. पुष्प का मादा जनन अंग – स्त्रीकेसर।
  32. परागकण परागकोष में बनते हैं।
  33. बीजांड अंडाशय में उपस्थित होते हैं।
  34. सरसों – असीमाक्ष पुष्पक्रम।
  35. सूरजमुखी – कैपिटुलम पुष्पक्रम।
  36. धनिया – अम्बेल पुष्पक्रम।
  37. तुलसी – वर्टिसिलास्टर पुष्पक्रम।
  38. अंजीर – हाइपैन्थोडियम पुष्पक्रम।
  39. Euphorbia – साइनोथियम पुष्पक्रम।
  40. परागकोष से वर्तिकाग्र तक परागकण का पहुँचना परागण है।
  41. मक्का में वायुपरागण होता है।
  42. Vallisneria में जलपरागण होता है।
  43. आवृतबीजी पौधों में द्विनिषेचन होता है।
  44. युग्मक संलयन से द्विगुणित युग्मनज बनता है।
  45. त्रिसंलयन से सामान्यतः त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक बनता है।
  46. बीजांड से बीज बनता है।
  47. अंडाशय से सामान्यतः फल बनता है।
  48. आम – ड्रूप फल।
  49. टमाटर – बेरी फल।
  50. गेहूँ – कैरियोप्सिस फल।
  51. अनानास – संग्रथित फल।
  52. मटर – अभ्रूणपोषी बीज।
  53. मक्का – भ्रूणपोषी बीज।
  54. Fabaceae – फली फल।
  55. Brassicaceae – चतुःदीर्घी पुंकेसर।
  56. Solanaceae – पाँच दललग्न पुंकेसर।
  57. Poaceae – कैरियोप्सिस फल।
  58. वार्षिक वलय द्वितीयक जाइलम की वृद्धि से बनते हैं।
  59. वृक्षवलय अध्ययन को Dendrochronology कहते हैं।
  60. कपास का रेशा बीज के बाहरी रोमों से प्राप्त होता है।
  61. जूट का रेशा तने के फ्लोएम से प्राप्त होता है।
  62. लौंग – सूखी पुष्प कलिका।
  63. दालचीनी – तने की छाल।
  64. हल्दी एवं अदरक – प्रकंद।
  65. चाय – पत्तियाँ; कॉफी – बीज।
  66. क्विनीन – Cinchona।
  67. रेसरपीन – Rauvolfia serpentina।
  68. मॉर्फीन – Papaver somniferum।

50 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

इस अभ्यास सेट में जड़, तना, पत्ती, पुष्प, परागण, निषेचन, फल, बीज, पादप परिवार, आंतरिक संरचना और आर्थिक वनस्पति विज्ञान के प्रश्न शामिल हैं। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर और संक्षिप्त व्याख्या देखने के लिए View Answer पर क्लिक करें।

प्रश्न 1. पादप आकारिकी (Plant Morphology) में किसका अध्ययन किया जाता है?
(A) कोशिका के रासायनिक पदार्थों का
(B) पौधों के बाहरी स्वरूप एवं अंगों का
(C) केवल आनुवंशिक पदार्थ का
(D) केवल प्रकाश संश्लेषण का
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सही उत्तर: (B) पौधों के बाहरी स्वरूप एवं अंगों का।
पादप आकारिकी में जड़, तना, पत्ती, पुष्प, फल और बीज की बाहरी संरचना तथा रूपांतरणों का अध्ययन किया जाता है।
प्रश्न 2. पौधे की प्राथमिक जड़ का विकास किससे होता है?
(A) प्रांकुर
(B) मूलांकुर
(C) बीजपत्र
(D) पुष्पासन
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सही उत्तर: (B) मूलांकुर।
भ्रूण में उपस्थित मूलांकुर अंकुरण के समय विकसित होकर प्राथमिक जड़ बनाता है।
प्रश्न 3. मूसला जड़ सामान्यतः किसमें पाई जाती है?
(A) एकबीजपत्री पौधों में
(B) द्विबीजपत्री पौधों में
(C) केवल शैवाल में
(D) केवल कवक में
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सही उत्तर: (B) द्विबीजपत्री पौधों में।
मूलांकुर से विकसित मुख्य जड़ और उससे निकलने वाली पार्श्व जड़ें मिलकर मूसला जड़ तंत्र बनाती हैं। सरसों, मटर और आम इसके उदाहरण हैं।
प्रश्न 4. गाजर में किस प्रकार की जड़ पाई जाती है?
(A) धुरीनुमा
(B) शंक्वाकार
(C) नेपिफॉर्म
(D) स्तंभ जड़
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सही उत्तर: (B) शंक्वाकार।
गाजर की जड़ ऊपर से चौड़ी और नीचे की ओर क्रमशः पतली होती है। यह भोजन संग्रह करने वाली रूपांतरित मूसला जड़ है।
प्रश्न 5. मूली में किस प्रकार की संग्रह जड़ होती है?
(A) शंक्वाकार
(B) धुरीनुमा
(C) नेपिफॉर्म
(D) श्वसन मूल
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सही उत्तर: (B) धुरीनुमा।
मूली की जड़ बीच में मोटी और दोनों सिरों की ओर पतली होती है। इसे Fusiform root कहते हैं।
प्रश्न 6. बरगद में सहारा देने वाली जड़ें क्या कहलाती हैं?
(A) श्वसन मूल
(B) स्तंभ जड़ें
(C) परजीवी जड़ें
(D) मूल रोम
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सही उत्तर: (B) स्तंभ जड़ें।
बरगद की शाखाओं से नीचे लटककर भूमि में प्रवेश करने वाली जड़ें मोटी होकर स्तंभ जैसी संरचना बनाती हैं और शाखाओं को सहारा देती हैं।
प्रश्न 7. मैंग्रोव पौधों में श्वसन के लिए भूमि से ऊपर निकलने वाली जड़ें क्या कहलाती हैं?
(A) स्तंभ जड़
(B) श्वसन मूल
(C) संग्रह जड़
(D) अवस्तंभ जड़
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सही उत्तर: (B) श्वसन मूल।
जलभराव वाली मिट्टी में ऑक्सीजन की कमी होती है। Pneumatophores भूमि से ऊपर निकलकर गैसों के आदान-प्रदान में सहायता करती हैं।
प्रश्न 8. मक्का के पौधे में तने को सहारा देने वाली जड़ें कौन-सी हैं?
(A) स्तंभ जड़
(B) अवस्तंभ जड़
(C) श्वसन मूल
(D) परजीवी जड़
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सही उत्तर: (B) अवस्तंभ जड़।
मक्का में तने के निचले पर्वों से तिरछी निकलने वाली जड़ें पौधे को अतिरिक्त यांत्रिक सहारा प्रदान करती हैं।
प्रश्न 9. आलू का कंद किसका रूपांतरण है?
(A) जड़
(B) तना
(C) पत्ती
(D) फल
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सही उत्तर: (B) तना।
आलू भूमिगत तने का कंद है। इसकी आँखों में कलियाँ होती हैं, जो नए पौधे का निर्माण कर सकती हैं।
प्रश्न 10. अदरक किस प्रकार का तना है?
(A) घनकंद
(B) प्रकंद
(C) शल्ककंद
(D) रनर
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सही उत्तर: (B) प्रकंद।
अदरक भूमिगत क्षैतिज तना है, जिसमें पर्व, पर्वसंधियाँ और कलियाँ पाई जाती हैं। हल्दी भी प्रकंद का उदाहरण है।
प्रश्न 11. प्याज में किस प्रकार का भूमिगत तना पाया जाता है?
(A) प्रकंद
(B) शल्ककंद
(C) घनकंद
(D) कंद
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सही उत्तर: (B) शल्ककंद।
प्याज में छोटा तना और उसके चारों ओर मांसल भोजन संग्रह करने वाली शल्क पत्तियाँ होती हैं।
प्रश्न 12. Opuntia में प्रकाश संश्लेषण मुख्यतः किस भाग द्वारा होता है?
(A) जड़
(B) काँटे
(C) हरे रूपांतरित तने
(D) पुष्प
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सही उत्तर: (C) हरे रूपांतरित तने।
Opuntia में पत्तियाँ काँटों में बदल जाती हैं और हरा चपटा तना प्रकाश संश्लेषण करता है। यह फाइलोक्लेड का उदाहरण है।
प्रश्न 13. मटर में प्रतान किसका रूपांतरण है?
(A) जड़
(B) तना
(C) पत्ती
(D) पुष्प
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सही उत्तर: (C) पत्ती।
मटर में पत्ती का अंतिम भाग प्रतान में बदल जाता है, जो पौधे को सहारा लेकर ऊपर चढ़ने में सहायता करता है।
प्रश्न 14. नेपेन्थीज (Pitcher Plant) में कौन-सा अंग कीट पकड़ने के लिए रूपांतरित होता है?
(A) जड़
(B) तना
(C) पत्ती
(D) पुष्प
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सही उत्तर: (C) पत्ती।
नेपेन्थीज में पत्ती का भाग घड़े जैसी संरचना में बदल जाता है। इसमें कीट फँसकर पाचक द्रव के संपर्क में आते हैं।
प्रश्न 15. निम्न में से किस पौधे में सम्मुख पर्णविन्यास पाया जाता है?
(A) गुड़हल
(B) अमरूद
(C) सरसों
(D) सूरजमुखी
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सही उत्तर: (B) अमरूद।
सम्मुख पर्णविन्यास में प्रत्येक पर्व पर दो पत्तियाँ आमने-सामने निकलती हैं। अमरूद इसका सामान्य उदाहरण है।
प्रश्न 16. सप्तपर्णी (Alstonia) में किस प्रकार का पर्णविन्यास पाया जाता है?
(A) एकांतर
(B) सम्मुख
(C) चक्रिक
(D) अनियमित
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सही उत्तर: (C) चक्रिक।
चक्रिक पर्णविन्यास में एक पर्व से दो से अधिक पत्तियाँ निकलती हैं। Alstonia इसका उदाहरण है।
प्रश्न 17. एकबीजपत्री पौधों में सामान्यतः किस प्रकार का शिरा विन्यास होता है?
(A) जालिकावत
(B) समानांतर
(C) द्विशाखित
(D) अनियमित
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सही उत्तर: (B) समानांतर।
गेहूँ, धान और मक्का जैसे एकबीजपत्री पौधों की पत्तियों में सामान्यतः समानांतर शिरा विन्यास पाया जाता है।
प्रश्न 18. पुष्प का नर जनन अंग कौन-सा है?
(A) जायांग
(B) पुमंग
(C) दलपुंज
(D) बाह्यदलपुंज
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सही उत्तर: (B) पुमंग।
पुमंग पुंकेसरों का समूह है। प्रत्येक पुंकेसर में पुंतंतु और परागकोष होते हैं।
प्रश्न 19. परागकणों का निर्माण पुष्प के किस भाग में होता है?
(A) वर्तिकाग्र
(B) अंडाशय
(C) परागकोष
(D) बीजांड
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सही उत्तर: (C) परागकोष।
परागकोष में सूक्ष्मबीजाणुधानियाँ होती हैं, जिनमें पराग मातृ कोशिकाओं से परागकण बनते हैं।
प्रश्न 20. बीजांड पुष्प के किस भाग में पाया जाता है?
(A) परागकोष
(B) अंडाशय
(C) वर्तिकाग्र
(D) पंखुड़ी
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सही उत्तर: (B) अंडाशय।
अंडाशय के भीतर एक या अनेक बीजांड पाए जाते हैं। निषेचन के बाद बीजांड बीज में विकसित होता है।
प्रश्न 21. सूरजमुखी का पुष्पक्रम किस प्रकार का है?
(A) स्पाइक
(B) अम्बेल
(C) कैपिटुलम
(D) स्पैडिक्स
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सही उत्तर: (C) कैपिटुलम।
सूरजमुखी में अनेक छोटे पुष्प एक चपटी पुष्पासन पर व्यवस्थित होते हैं। इस प्रकार के पुष्पक्रम को कैपिटुलम कहते हैं।
प्रश्न 22. धनिया में सामान्यतः कौन-सा पुष्पक्रम पाया जाता है?
(A) अम्बेल
(B) स्पाइक
(C) कैपिटुलम
(D) स्पैडिक्स
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सही उत्तर: (A) अम्बेल।
अम्बेल में पुष्प डंठल लगभग एक ही बिंदु से निकलते हैं। धनिया और गाजर इसके उदाहरण हैं।
प्रश्न 23. तुलसी में विशेष प्रकार का पुष्पक्रम कौन-सा पाया जाता है?
(A) साइनोथियम
(B) वर्टिसिलास्टर
(C) हाइपैन्थोडियम
(D) कैपिटुलम
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सही उत्तर: (B) वर्टिसिलास्टर।
तुलसी में सघन पुष्प समूह विपरीत पत्तियों के कक्षों में बनते हैं, जिसे वर्टिसिलास्टर कहते हैं।
प्रश्न 24. अंजीर में कौन-सा विशेष पुष्पक्रम पाया जाता है?
(A) साइनोथियम
(B) हाइपैन्थोडियम
(C) अम्बेल
(D) स्पाइक
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सही उत्तर: (B) हाइपैन्थोडियम।
अंजीर में खोखली, मांसल पुष्पासन संरचना के भीतर अनेक छोटे पुष्प व्यवस्थित होते हैं।
प्रश्न 25. परागकोष से वर्तिकाग्र तक परागकणों के स्थानांतरण को क्या कहते हैं?
(A) निषेचन
(B) परागण
(C) अंकुरण
(D) वाष्पोत्सर्जन
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सही उत्तर: (B) परागण।
परागण में परागकण परागकोष से उसी या किसी दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं। इसके बाद निषेचन की प्रक्रिया हो सकती है।
प्रश्न 26. मक्का में परागण का प्रमुख माध्यम क्या है?
(A) जल
(B) वायु
(C) पक्षी
(D) चमगादड़
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सही उत्तर: (B) वायु।
मक्का में वायुपरागण होता है। इसके परागकण हल्के और अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में बनते हैं।
प्रश्न 27. Vallisneria में किस प्रकार का परागण होता है?
(A) वायुपरागण
(B) जलपरागण
(C) पक्षीपरागण
(D) चमगादड़ परागण
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सही उत्तर: (B) जलपरागण।
Vallisneria में परागण जल की सतह पर होता है। नर पुष्प जल की सतह तक पहुँचते हैं और मादा पुष्प के वर्तिकाग्र तक परागकण पहुँचते हैं।
प्रश्न 28. आवृतबीजी पौधों की विशिष्ट प्रजनन प्रक्रिया कौन-सी है?
(A) द्विखंडन
(B) द्विनिषेचन
(C) मुकुलन
(D) बीजाणु निर्माण
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सही उत्तर: (B) द्विनिषेचन।
आवृतबीजी पौधों में युग्मक संलयन और त्रिसंलयन दोनों होते हैं। इन दोनों घटनाओं को संयुक्त रूप से द्विनिषेचन कहते हैं।
प्रश्न 29. युग्मक संलयन से क्या बनता है?
(A) प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक
(B) द्विगुणित युग्मनज
(C) बीजावरण
(D) फलभित्ति
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सही उत्तर: (B) द्विगुणित युग्मनज।
एक नर युग्मक और अंड कोशिका के संलयन से 2n युग्मनज बनता है, जो आगे भ्रूण में विकसित होता है।
प्रश्न 30. त्रिसंलयन से सामान्यतः कौन-सी संरचना बनती है?
(A) द्विगुणित युग्मनज
(B) त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक
(C) बीजावरण
(D) फलभित्ति
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सही उत्तर: (B) त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक।
दूसरा नर युग्मक और दो ध्रुवीय केंद्रक मिलकर सामान्यतः 3n प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक बनाते हैं।
प्रश्न 31. निषेचन के बाद बीजांड किसमें विकसित होता है?
(A) फल
(B) बीज
(C) पत्ती
(D) तना
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सही उत्तर: (B) बीज।
निषेचन के बाद बीजांड बीज और अंडाशय सामान्यतः फल में विकसित होता है।
प्रश्न 32. आम किस प्रकार का फल है?
(A) बेरी
(B) ड्रूप
(C) कैप्सूल
(D) कैरियोप्सिस
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सही उत्तर: (B) ड्रूप।
आम में बाहरी एवं मध्य फलभित्ति मांसल होती है और अंतःफलभित्ति कठोर गुठली बनाती है। इसलिए यह ड्रूप फल है।
प्रश्न 33. गेहूँ का फल किस प्रकार का होता है?
(A) बेरी
(B) ड्रूप
(C) कैरियोप्सिस
(D) पोम
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सही उत्तर: (C) कैरियोप्सिस।
कैरियोप्सिस में फलभित्ति और बीजावरण आपस में जुड़े रहते हैं। गेहूँ, धान और मक्का इसके उदाहरण हैं।
प्रश्न 34. अनानास किस प्रकार का फल है?
(A) सरल फल
(B) पुंज फल
(C) संग्रथित फल
(D) शुष्क फल
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सही उत्तर: (C) संग्रथित फल।
अनानास एक पुष्पक्रम के अनेक पुष्पों से विकसित होता है। इसलिए इसे Multiple या Composite Fruit कहते हैं।
प्रश्न 35. बिना निषेचन के फल बनने की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
(A) परागण
(B) अनिषेकफलन
(C) द्विनिषेचन
(D) अंकुरण
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सही उत्तर: (B) अनिषेकफलन।
अनिषेकफलन में निषेचन के बिना अंडाशय फल में विकसित हो जाता है। केले में सामान्यतः बीजरहित फल पाए जाते हैं।
प्रश्न 36. मक्का के भ्रूण में उपस्थित एकमात्र बीजपत्र को क्या कहते हैं?
(A) टेस्टा
(B) स्क्यूटेलम
(C) कोलिओराइजा
(D) कोलिओप्टाइल
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सही उत्तर: (B) स्क्यूटेलम।
मक्का के भ्रूण में एक बीजपत्र होता है, जिसे स्क्यूटेलम कहते हैं। यह भ्रूणपोष से भोजन के अवशोषण में सहायता करता है।
प्रश्न 37. मटर का बीज सामान्यतः किस प्रकार का होता है?
(A) भ्रूणपोषी
(B) अभ्रूणपोषी
(C) परिभ्रूणपोषी
(D) बीजरहित
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सही उत्तर: (B) अभ्रूणपोषी।
मटर के बीज में विकास के दौरान भ्रूणपोष का अधिकांश भाग उपयोग हो जाता है और भोजन दो बीजपत्रों में संग्रहित रहता है।
प्रश्न 38. Fabaceae परिवार का विशिष्ट फल कौन-सा है?
(A) कैप्सूल
(B) फली
(C) कैरियोप्सिस
(D) बेरी
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सही उत्तर: (B) फली।
Fabaceae या मटर कुल के पौधों में सामान्यतः लेग्यूम प्रकार का फल पाया जाता है। मटर, चना और अरहर इसके उदाहरण हैं।
प्रश्न 39. Brassicaceae परिवार की पहचान के लिए कौन-सा लक्षण महत्त्वपूर्ण है?
(A) एकसंघी पुंकेसर
(B) चतुःदीर्घी पुंकेसर
(C) छह समान पुंकेसर
(D) पुंकेसर अनुपस्थित
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सही उत्तर: (B) चतुःदीर्घी पुंकेसर।
सरसों कुल में छह पुंकेसर होते हैं, जिनमें चार लंबे और दो छोटे होते हैं। इस व्यवस्था को Tetradynamous कहते हैं।
प्रश्न 40. Solanaceae परिवार में सामान्यतः कितने पुंकेसर होते हैं?
(A) तीन
(B) चार
(C) पाँच
(D) दस
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सही उत्तर: (C) पाँच।
आलू कुल में सामान्यतः पाँच पुंकेसर होते हैं, जो पंखुड़ियों से जुड़े होते हैं। आलू, टमाटर और बैंगन इसके उदाहरण हैं।
प्रश्न 41. कपास का रेशा पौधे के किस भाग से प्राप्त होता है?
(A) तने की छाल
(B) बीज के बाहरी रोम
(C) जड़
(D) पुष्प की पंखुड़ी
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सही उत्तर: (B) बीज के बाहरी रोम।
कपास के रेशे बीज की एपिडर्मल कोशिकाओं के लंबे रोम होते हैं। यह एक महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक वस्त्र रेशा है।
प्रश्न 42. जूट का रेशा मुख्यतः किस भाग से प्राप्त होता है?
(A) जड़
(B) तने का फ्लोएम
(C) पत्ती
(D) बीजावरण
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सही उत्तर: (B) तने का फ्लोएम।
जूट का रेशा तने के बास्ट या फ्लोएम क्षेत्र से प्राप्त होता है। इसका उपयोग बोरे, रस्सी और पैकिंग सामग्री बनाने में किया जाता है।
प्रश्न 43. लौंग पौधे का कौन-सा भाग है?
(A) सूखी जड़
(B) सूखी पुष्प कलिका
(C) सूखा फल
(D) बीज
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सही उत्तर: (B) सूखी पुष्प कलिका।
लौंग Syzygium aromaticum की सूखी अपरिपक्व पुष्प कलिका है। इसका उपयोग मसाले के रूप में किया जाता है।
प्रश्न 44. दालचीनी मुख्यतः किस भाग से प्राप्त होती है?
(A) जड़
(B) तने की छाल
(C) पत्ती
(D) पुष्प
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सही उत्तर: (B) तने की छाल।
दालचीनी Cinnamomum की छाल से प्राप्त की जाती है। यह एक महत्त्वपूर्ण मसाला है।
प्रश्न 45. चाय का व्यावसायिक उत्पाद पौधे के किस भाग से प्राप्त होता है?
(A) जड़
(B) कोमल पत्तियाँ एवं कलियाँ
(C) फल
(D) तने की छाल
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सही उत्तर: (B) कोमल पत्तियाँ एवं कलियाँ।
चाय Camellia sinensis पौधे की कोमल पत्तियों और कलियों से बनाई जाती है।
प्रश्न 46. जड़ में जाइलम की व्यवस्था सामान्यतः कैसी होती है?
(A) Endarch
(B) Exarch
(C) Mesarch
(D) इनमें से कोई नहीं
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सही उत्तर: (B) Exarch।
जड़ में प्रोटोजाइलम बाहर और मेटाजाइलम भीतर की ओर होता है। इसे बाह्यादिदारुक या Exarch व्यवस्था कहते हैं।
प्रश्न 47. द्विबीजपत्री तने में संवहनी बंडल सामान्यतः किस प्रकार व्यवस्थित होते हैं?
(A) पूरे तने में बिखरे हुए
(B) एक वलय में
(C) केवल केंद्र में
(D) केवल बाहरी सतह पर
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सही उत्तर: (B) एक वलय में।
द्विबीजपत्री तने में संवहनी बंडल सामान्यतः वलय में व्यवस्थित होते हैं और प्रायः खुले होते हैं।
प्रश्न 48. एकबीजपत्री तने में संवहनी बंडल सामान्यतः कैसे होते हैं?
(A) वलय में व्यवस्थित
(B) बिखरे हुए
(C) केवल बाहरी भाग में
(D) अनुपस्थित
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सही उत्तर: (B) बिखरे हुए।
एकबीजपत्री तने में संवहनी बंडल भरण ऊतक में बिखरे होते हैं और सामान्यतः बंद होते हैं।
प्रश्न 49. वृक्ष की आयु का अनुमान लगाने के लिए वार्षिक वलयों का अध्ययन क्या कहलाता है?
(A) फाइटोजियोग्राफी
(B) डेंड्रोक्रोनोलॉजी
(C) साइटोलॉजी
(D) पैलियॉन्टोलॉजी
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सही उत्तर: (B) डेंड्रोक्रोनोलॉजी।
वृक्षों के वार्षिक वलयों का अध्ययन करके उनकी आयु तथा पर्यावरणीय परिस्थितियों का अनुमान लगाया जाता है।
प्रश्न 50. क्विनीन किस पौधे से प्राप्त किया जाता है?
(A) Rauvolfia serpentina
(B) Cinchona
(C) Papaver somniferum
(D) Withania somnifera
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सही उत्तर: (B) Cinchona।
क्विनीन Cinchona वृक्ष की छाल से प्राप्त एक ऐतिहासिक मलेरियारोधी अल्कलॉइड है।
प्रश्नों के स्रोत संबंधी नोट: इस सेट के प्रश्न मौलिक अभ्यास प्रश्न हैं, जिन्हें NCERT आधारित अवधारणाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं में महत्त्वपूर्ण वनस्पति-विज्ञान तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया है। इन्हें UPSSSC PET 2026 या UP Police के वास्तविक प्रश्न बताकर प्रस्तुत नहीं किया गया है। किसी प्रश्न को वास्तविक PYQ के रूप में तभी जोड़ा जाना चाहिए जब उसके परीक्षा-वर्ष, प्रश्नपत्र और उत्तर की पुष्टि उपलब्ध हो।

अंतिम त्वरित पुनरावृत्ति – एक नजर में

जड़: गाजर – शंक्वाकार; मूली – धुरीनुमा; बरगद – स्तंभ जड़; मक्का – अवस्तंभ जड़; मैंग्रोव – श्वसन मूल।

तना: आलू – कंद; अदरक – प्रकंद; प्याज – शल्ककंद; अरबी – घनकंद; अंगूर – तना प्रतान।

पत्ती: मटर – पत्ती प्रतान; Opuntia – काँटे; नेपेन्थीज – कीटभक्षी पत्ती; Bryophyllum – प्रजनन पत्ती।

पर्णविन्यास: गुड़हल – एकांतर; अमरूद – सम्मुख; सप्तपर्णी – चक्रिक।

पुष्पक्रम: सरसों – असीमाक्ष; सूरजमुखी – कैपिटुलम; धनिया – अम्बेल; तुलसी – वर्टिसिलास्टर; अंजीर – हाइपैन्थोडियम।

परागण: मक्का – वायु; Vallisneria – जल; क्लिस्टोगैमस पुष्प – स्वपरागण।

फल: आम – ड्रूप; टमाटर – बेरी; सेब – पोम; गेहूँ – कैरियोप्सिस; अनानास – संग्रथित फल।

बीज: मक्का – एकबीजपत्री; मटर – द्विबीजपत्री; अरंडी – भ्रूणपोषी द्विबीजपत्री।

परिवार: Fabaceae – फली; Brassicaceae – चतुःदीर्घी; Solanaceae – पाँच दललग्न पुंकेसर; Poaceae – कैरियोप्सिस।

आंतरिक संरचना: जड़ – Exarch; तना – Endarch; द्विबीजपत्री तना – वलय में संवहनी बंडल; एकबीजपत्री तना – बिखरे बंडल।

आर्थिक वनस्पति: कपास – बीज रोम; जूट – फ्लोएम; लौंग – पुष्प कलिका; दालचीनी – छाल; हल्दी – प्रकंद।

औषधीय पौधे: क्विनीन – Cinchona; रेसरपीन – Rauvolfia; मॉर्फीन – Papaver।

संदर्भ एवं अध्ययन सामग्री

इस अध्याय की अवधारणाओं, पादप अंगों की संरचना, पुष्पीय लक्षणों, फल एवं बीज के वर्गीकरण और आंतरिक संरचना के लिए निम्नलिखित प्रामाणिक स्रोत उपयोगी हैं।

  • NCERT जीव विज्ञान, कक्षा 11: Morphology of Flowering Plants – जड़, तना, पत्ती, पुष्प, फल, बीज और पादप परिवार।
  • NCERT जीव विज्ञान, कक्षा 11: Anatomy of Flowering Plants – पादप ऊतक, जड़, तना एवं पत्ती की आंतरिक संरचना तथा द्वितीयक वृद्धि।
  • NCERT जीव विज्ञान: पादप प्रजनन एवं आवृतबीजी पौधों में निषेचन संबंधी पाठ्य सामग्री।
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR): आर्थिक पौधों, कृषि फसलों और उपयोगी वनस्पति संसाधनों की जानकारी।
  • भारत सरकार – आयुष मंत्रालय: औषधीय पौधों एवं पारंपरिक औषधीय उपयोग से संबंधित जानकारी।

आधिकारिक NCERT पाठ्यपुस्तक: NCERT Textbooks – Biology

NCERT जीव विज्ञान का आधिकारिक पाठ्यक्रम: NCERT Official Website

नोट: पौधों के कुछ परिवारों का पारंपरिक वर्गीकरण आधुनिक वर्गिकी में संशोधित हुआ है। परीक्षा की तैयारी में NCERT की पारंपरिक पाठ्यपुस्तक-आधारित शब्दावली के साथ आधुनिक नामों की जानकारी भी रखें।

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