प्रारंभिक जीव विज्ञान
अध्याय 8. पादप शरीर क्रिया विज्ञान
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अध्याय परिचय एवं अध्ययन उद्देश्य
पादप शरीर क्रिया विज्ञान (Plant Physiology) जीव विज्ञान की वह शाखा है जिसमें पौधों की जीवन-क्रियाओं, उनके नियंत्रण तथा पर्यावरण के साथ उनकी अंतःक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। पौधे प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलते हैं, जल एवं खनिजों का अवशोषण करते हैं, भोजन का निर्माण और परिवहन करते हैं तथा कोशिकीय श्वसन द्वारा ऊर्जा प्राप्त करते हैं। वृद्धि, विकास, बीज अंकुरण और पुष्पन भी इसी विषय के महत्त्वपूर्ण भाग हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं में इस अध्याय से प्रकाश संश्लेषण का समीकरण, क्लोरोप्लास्ट, C3 एवं C4 पादप, ATP, वाष्पोत्सर्जन, जाइलम-फ्लोएम, नाइट्रोजन स्थिरीकरण, पादप हार्मोन, प्रकाशकालिता तथा बीज अंकुरण से प्रश्न पूछे जाते हैं। विशेष रूप से वैज्ञानिकों, खोजों, स्थानों, हार्मोनों के कार्य और उदाहरणों का तुलनात्मक अध्ययन उपयोगी है।
अध्याय के 20 प्रमुख विषय
- पादप पोषण
- प्रकाश संश्लेषण – प्रक्रिया एवं महत्त्व
- प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ
- प्रकाश संश्लेषण का रासायनिक समीकरण
- प्रकाश अभिक्रिया एवं अंधकार अभिक्रिया
- C3, C4 एवं CAM पादप
- श्वसन – वायवीय एवं अवायवीय
- पौधों में ऊर्जा उत्पादन
- वाष्पोत्सर्जन एवं उसके प्रकार
- जल का अवशोषण एवं परिवहन
- जाइलम द्वारा जल परिवहन
- फ्लोएम द्वारा भोजन परिवहन
- खनिज पोषण एवं आवश्यक तत्व
- नाइट्रोजन चक्र एवं नाइट्रोजन स्थिरीकरण
- पादप वृद्धि एवं विकास
- पादप हार्मोन – ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकाइनिन
- एब्सिसिक अम्ल एवं एथिलीन
- प्रकाशानुवर्तन एवं गुरुत्वानुवर्तन
- बीज अंकुरण एवं प्रसुप्तावस्था
- पुष्पन एवं प्रकाशकालिता
01पादप पोषण (Plant Nutrition)
पौधों द्वारा वृद्धि, विकास, ऊर्जा उत्पादन तथा कोशिकीय संरचनाओं के निर्माण के लिए आवश्यक पदार्थ प्राप्त करने और उनका उपयोग करने की प्रक्रिया को पादप पोषण कहते हैं। हरे पौधे सामान्यतः स्वपोषी (Autotrophic) होते हैं, क्योंकि वे प्रकाश ऊर्जा की सहायता से कार्बन डाइऑक्साइड और जल से कार्बोहाइड्रेट बनाते हैं। इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं। पौधों को कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन मुख्यतः वायु तथा जल से प्राप्त होते हैं, जबकि नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम आदि मिट्टी से आयनों के रूप में मिलते हैं।
कुछ पौधे विशेष पोषण विधियाँ अपनाते हैं। अमरबेल (Cuscuta) परजीवी पौधा है, जो पोषक पौधे से भोजन प्राप्त करता है। नेपेंथीस (Pitcher Plant) कीटभक्षी पौधा है; यह प्रकाश संश्लेषण तो करता है, लेकिन नाइट्रोजन जैसे खनिजों की कमी की पूर्ति के लिए कीटों को पकड़ता है। राइजोबियम जीवाणु दलहनी पौधों की जड़ों की गाँठों में रहकर नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है।
| पोषण का प्रकार | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| स्वपोषी | अकार्बनिक पदार्थों से अपना भोजन बनाना | हरा पौधा |
| परपोषी | भोजन के लिए दूसरे जीव पर निर्भर रहना | अमरबेल |
| कीटभक्षी | कीटों से खनिज, विशेषकर नाइट्रोजन प्राप्त करना | नेपेंथीस, ड्रॉसेरा |
| सहजीवी | दो जीवों का पारस्परिक लाभ वाला संबंध | दलहनी पौधा एवं राइजोबियम |
02प्रकाश संश्लेषण – प्रक्रिया एवं महत्त्व
प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) वह जैव-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें हरे पौधे क्लोरोफिल की उपस्थिति में सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा का उपयोग करके कार्बन डाइऑक्साइड और जल से कार्बोहाइड्रेट का निर्माण करते हैं तथा ऑक्सीजन मुक्त करते हैं। यह पृथ्वी पर भोजन और वायुमंडलीय ऑक्सीजन का प्रमुख प्राकृतिक स्रोत है। प्रकाश संश्लेषण मुख्यतः पत्तियों की हरितलवक युक्त कोशिकाओं में होता है। पत्ती के क्लोरोप्लास्ट में उपस्थित क्लोरोफिल प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करता है।
इस प्रक्रिया के दो प्रमुख चरण माने जाते हैं। प्रकाश अभिक्रिया में प्रकाश ऊर्जा का उपयोग कर ATP और NADPH बनते हैं तथा जल के विघटन से ऑक्सीजन निकलती है। इसके बाद कार्बन स्थिरीकरण की प्रक्रिया में ATP और NADPH की सहायता से CO₂ से कार्बोहाइड्रेट का निर्माण होता है। इसे परंपरागत रूप से अंधकार अभिक्रिया या कैल्विन चक्र कहा जाता है।
प्रकाश संश्लेषण का महत्त्व
- पौधों में भोजन तथा जैव पदार्थों का निर्माण करता है।
- वायुमंडल में ऑक्सीजन की पूर्ति में योगदान देता है।
- कार्बन डाइऑक्साइड का स्थिरीकरण करके कार्बन चक्र को प्रभावित करता है।
- खाद्य श्रृंखला का आधार है; अधिकांश पारिस्थितिक तंत्रों में उत्पादक पौधे होते हैं।
- सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा के रूप में जैव पदार्थों में संचित करता है।
03प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ
प्रकाश संश्लेषण की दर अनेक बाहरी और आंतरिक कारकों से प्रभावित होती है। प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड और तापमान बाहरी कारकों में प्रमुख हैं। जल की उपलब्धता, क्लोरोफिल की मात्रा, पत्ती की आयु, रंध्रों की स्थिति तथा एंजाइमों की सक्रियता भी प्रक्रिया को प्रभावित करती है। प्रकाश की तीव्रता बढ़ने पर एक सीमा तक प्रकाश संश्लेषण की दर बढ़ती है, लेकिन संतृप्ति बिंदु के बाद वृद्धि रुक सकती है।
कार्बन डाइऑक्साइड की सांद्रता बढ़ाने से भी एक सीमा तक दर बढ़ती है। तापमान का प्रभाव एंजाइम-नियंत्रित अभिक्रियाओं के कारण होता है; अत्यधिक तापमान पर एंजाइम प्रभावित हो सकते हैं। जल की कमी होने पर रंध्र बंद हो सकते हैं, जिससे CO₂ का प्रवेश घटता है।
| कारक | भूमिका |
|---|---|
| प्रकाश | प्रकाश अभिक्रिया के लिए ऊर्जा प्रदान करता है। |
| CO₂ | कार्बन का प्रमुख स्रोत है। |
| जल | इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन का स्रोत; ऑक्सीजन मुक्त होती है। |
| क्लोरोफिल | प्रकाश ऊर्जा का अवशोषण करता है। |
| तापमान | एंजाइमों की क्रियाशीलता को प्रभावित करता है। |
ब्लैकमैन का सीमाकारी कारक नियम (Law of Limiting Factors) बताता है कि जब किसी प्रक्रिया को अनेक कारक प्रभावित करते हैं, तो उस समय सबसे कम उपलब्ध या सबसे अधिक सीमित कारक प्रक्रिया की दर को नियंत्रित कर सकता है।
04प्रकाश संश्लेषण का रासायनिक समीकरण
प्रकाश संश्लेषण का सामान्यीकृत समीकरण निम्न प्रकार लिखा जाता है। यह समीकरण प्रक्रिया का समग्र सार प्रस्तुत करता है; वास्तविक प्रक्रिया अनेक चरणों और मध्यवर्ती यौगिकों से होकर गुजरती है।
सरल रूप में इसे इस प्रकार भी लिखा जाता है:
यहाँ CO₂ कार्बन स्रोत है और जल से प्रकाशीय विघटन के दौरान ऑक्सीजन मुक्त होती है। निर्मित शर्करा का उपयोग पौधे ऊर्जा, वृद्धि और स्टार्च जैसे भंडारण पदार्थों के निर्माण में करते हैं।
05प्रकाश अभिक्रिया एवं अंधकार अभिक्रिया
प्रकाश अभिक्रिया (Light Reaction)
प्रकाश अभिक्रिया क्लोरोप्लास्ट की थायलाकोइड झिल्लियों, विशेषकर ग्राना में होती है। क्लोरोफिल प्रकाश ऊर्जा अवशोषित करता है और इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर पर पहुँचते हैं। जल का प्रकाशीय विघटन (Photolysis) होता है, जिससे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन तथा ऑक्सीजन प्राप्त होते हैं। इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र के माध्यम से ATP का निर्माण फोटॉफॉस्फोराइलेशन द्वारा होता है तथा NADP⁺ अपचयित होकर NADPH बनाता है।
अंधकार अभिक्रिया / कैल्विन चक्र (Calvin Cycle)
यह क्लोरोप्लास्ट के स्ट्रोमा में होता है। इसे अंधकार अभिक्रिया कहने का अर्थ यह नहीं कि यह केवल रात में होती है। इसे प्रकाश अभिक्रिया से प्राप्त ATP और NADPH की आवश्यकता होती है। इसमें CO₂ का स्थिरीकरण, अपचयन और RuBP का पुनर्जनन होता है। प्रमुख एंजाइम RuBisCO है, जो CO₂ के स्थिरीकरण में भूमिका निभाता है।
| आधार | प्रकाश अभिक्रिया | कैल्विन चक्र |
|---|---|---|
| स्थान | थायलाकोइड झिल्ली | स्ट्रोमा |
| प्रकाश की आवश्यकता | प्रत्यक्ष रूप से आवश्यक | प्रत्यक्ष प्रकाश आवश्यक नहीं, पर ATP/NADPH चाहिए |
| मुख्य घटना | जल का विघटन, इलेक्ट्रॉन परिवहन | CO₂ स्थिरीकरण एवं शर्करा निर्माण |
| मुख्य उत्पाद | ATP, NADPH, O₂ | कार्बोहाइड्रेट के निर्माण हेतु मध्यवर्ती यौगिक |
फोटॉफॉस्फोराइलेशन: प्रकाश ऊर्जा के उपयोग से ADP और अकार्बनिक फॉस्फेट से ATP बनने की प्रक्रिया। यह चक्रीय या अचक्रीय हो सकती है। चक्रीय प्रवाह में मुख्यतः ATP बनता है; अचक्रीय प्रवाह में ATP, NADPH तथा ऑक्सीजन प्राप्त होते हैं।
06C3, C4 एवं CAM पादप
कार्बन स्थिरीकरण की पहली स्थायी उपज के आधार पर प्रकाश संश्लेषी पौधों को C3 और C4 समूहों में बाँटा जाता है। CAM पौधों में जल संरक्षण के लिए रात और दिन में CO₂ ग्रहण तथा उपयोग का समय अलग होता है।
| विशेषता | C3 पादप | C4 पादप | CAM पादप |
|---|---|---|---|
| प्रथम स्थायी उत्पाद | 3-कार्बन PGA | 4-कार्बन OAA | रात में 4-कार्बन कार्बनिक अम्ल |
| प्रारंभिक CO₂ स्वीकारक | RuBP | PEP | PEP |
| मुख्य एंजाइम | RuBisCO | PEP कार्बोक्सिलेज, फिर RuBisCO | PEP कार्बोक्सिलेज रात में |
| विशेषता | सामान्य कैल्विन चक्र | क्रांज संरचना सामान्यतः उपस्थित | रात में रंध्र खुलते हैं |
| उदाहरण | गेहूँ, धान, आलू | मक्का, गन्ना, ज्वार | कैक्टस, अनानास, एगेव |
C3 पौधों में CO₂ का स्थिरीकरण सीधे कैल्विन चक्र में होता है। C4 पौधों में पहले मेसोफिल कोशिकाओं में CO₂ का स्थिरीकरण ऑक्सालोएसीटिक अम्ल (OAA) में होता है, फिर CO₂ बंडल शीथ कोशिकाओं में पहुँचाई जाती है। इससे उच्च तापमान और तीव्र प्रकाश की स्थिति में फोटोरेस्पिरेशन कम होता है।
CAM (Crassulacean Acid Metabolism) पौधों में रात के समय रंध्र खुलते हैं और CO₂ कार्बनिक अम्ल के रूप में संचित होती है। दिन में रंध्र बंद रहते हैं और संचित अम्ल से CO₂ उपलब्ध कराई जाती है। इससे जल की हानि कम होती है।
07श्वसन – वायवीय एवं अवायवीय
श्वसन (Respiration) वह कोशिकीय प्रक्रिया है जिसमें कार्बनिक पदार्थों का विघटन करके ऊर्जा मुक्त की जाती है। यह ऊर्जा ATP के रूप में उपयोगी बनती है। पौधों की जीवित कोशिकाओं में श्वसन लगातार होता है। श्वसन के लिए पौधों में फेफड़ों जैसे विशेष अंग नहीं होते; गैसों का आदान-प्रदान रंध्रों, वातरंध्रों और जड़ों की सतह से विसरण द्वारा होता है।
वायवीय श्वसन में ऑक्सीजन की उपस्थिति में ग्लूकोज का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है। ग्लाइकोलाइसिस कोशिकाद्रव्य में, जबकि क्रेब्स चक्र और इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र मुख्यतः माइटोकॉन्ड्रिया में होते हैं। अवायवीय श्वसन में ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में अपूर्ण विघटन होता है। यीस्ट में अल्कोहल और CO₂ बनते हैं; कुछ परिस्थितियों में पौधों की कोशिकाओं में भी किण्वन जैसी प्रक्रिया हो सकती है।
| आधार | वायवीय श्वसन | अवायवीय श्वसन |
|---|---|---|
| ऑक्सीजन | आवश्यक | आवश्यक नहीं |
| विघटन | सामान्यतः पूर्ण | अपूर्ण |
| उत्पाद | CO₂ और जल | यीस्ट में एथेनॉल और CO₂ |
| ऊर्जा | अधिक ATP | कम ATP |
| प्रमुख स्थान | कोशिकाद्रव्य एवं माइटोकॉन्ड्रिया | कोशिकाद्रव्य |
08पौधों में ऊर्जा उत्पादन (ATP)
ATP (Adenosine Triphosphate) कोशिका की प्रमुख ऊर्जा मुद्रा कहलाता है। इसमें एडेनिन, राइबोज शर्करा और तीन फॉस्फेट समूह होते हैं। ATP के अंतिम फॉस्फेट बंध के जल-अपघटन से ऊर्जा मुक्त होती है, जिसका उपयोग जैव-संश्लेषण, सक्रिय परिवहन, कोशिका विभाजन और अन्य कार्यों में किया जाता है।
श्वसन में ग्लाइकोलाइसिस के दौरान ATP का कुछ भाग सब्सट्रेट-स्तरीय फॉस्फोराइलेशन से बनता है। क्रेब्स चक्र में भी GTP/ATP के रूप में ऊर्जा प्राप्त होती है। इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र में ऑक्सीडेटिव फॉस्फोराइलेशन से अधिकांश ATP बनता है। प्रकाश संश्लेषण में ATP का निर्माण फोटॉफॉस्फोराइलेशन से होता है।
परीक्षा में कभी-कभी एक ग्लूकोज से बनने वाले ATP की संख्या पूछी जाती है। आधुनिक जैव-रसायन में यूकैरियोटिक कोशिकाओं के लिए सामान्य अनुमान लगभग 30–32 ATP है; पुराने पाठ्य-संदर्भों में 36 या 38 ATP भी दिए मिल सकते हैं। वास्तविक उपज कोशिका और शटल प्रणालियों पर निर्भर करती है।
09वाष्पोत्सर्जन एवं उसके प्रकार
पौधों के वायवीय भागों से जल का जलवाष्प के रूप में बाहर निकलना वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) कहलाता है। यह मुख्यतः पत्तियों के रंध्रों से होता है। इसके अतिरिक्त तने की कॉर्कयुक्त सतह के वातरंध्रों तथा पत्तियों की क्यूटिकल से भी कुछ जलवाष्प निकल सकती है।
- रंध्रीय वाष्पोत्सर्जन: पत्तियों के रंध्रों से जलवाष्प का निकलना; सामान्यतः सबसे बड़ा योगदान।
- क्यूटिकुलर वाष्पोत्सर्जन: क्यूटिकल से जलवाष्प का निकलना।
- लेंटिकुलर वाष्पोत्सर्जन: तने के वातरंध्रों से जलवाष्प का निकलना।
वाष्पोत्सर्जन पौधे को ठंडा रखने, जाइलम में जल के ऊपर उठने में सहायता करने और खनिजों के परिवहन में योगदान देता है। इसकी दर तापमान, आर्द्रता, वायु की गति, प्रकाश, मिट्टी में जल की उपलब्धता तथा रंध्रों की खुली अवस्था से प्रभावित होती है। अधिक तापमान, कम आर्द्रता और तेज हवा सामान्यतः वाष्पोत्सर्जन बढ़ाते हैं।
10जल का अवशोषण एवं परिवहन
पौधे मिट्टी से जल का अवशोषण मुख्यतः जड़ों के मूलरोम (Root Hairs) द्वारा करते हैं। मूलरोम जड़ की बाहरी कोशिकाओं के पतले विस्तार होते हैं, जो अवशोषण के लिए सतह क्षेत्र बढ़ाते हैं। जल का प्रवेश मुख्यतः परासरण (Osmosis) द्वारा होता है। मिट्टी के विलयन और जड़ कोशिकाओं के जल विभव में अंतर जल के प्रवेश को प्रभावित करता है।
जड़ में जल दो प्रमुख मार्गों से आगे बढ़ सकता है। एपोप्लास्ट मार्ग में जल कोशिका भित्तियों और अंतरकोशिकीय स्थानों से गुजरता है, जबकि सिम्प्लास्ट मार्ग में जल कोशिकाद्रव्य के माध्यम से प्लाज्मोडेस्माटा द्वारा आगे बढ़ता है। एंडोडर्मिस की कैस्पेरियन पट्टियाँ एपोप्लास्ट प्रवाह को नियंत्रित कर जल को चयनात्मक झिल्ली मार्ग से गुजरने के लिए बाध्य करती हैं।
जड़ से जल जाइलम में पहुँचता है और तने से होते हुए पत्तियों तक पहुँचाया जाता है। जल के परिवहन में वाष्पोत्सर्जन खिंचाव, जल अणुओं का संसंजन (Cohesion), जाइलम भित्तियों से आसंजन (Adhesion) और कुछ सीमा तक जड़-दाब योगदान करते हैं।
11जाइलम द्वारा जल परिवहन
जाइलम एक जटिल स्थायी ऊतक है, जो जड़ों से जल और घुले हुए खनिजों का परिवहन मुख्यतः ऊपर की ओर करता है। इसके प्रमुख घटक ट्रैकिड, वाहिकाएँ (Vessels), जाइलम पैरेंकाइमा और जाइलम फाइबर हैं। ट्रैकिड और वाहिकाएँ जल संवहन में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
जल के ऊपर उठने का सर्वाधिक स्वीकार्य सिद्धांत संसंजन-तनाव-वाष्पोत्सर्जन खिंचाव सिद्धांत (Cohesion-Tension/Transpiration Pull Theory) है। पत्तियों से जलवाष्प निकलने पर पत्ती के जाइलम में तनाव उत्पन्न होता है। जल अणुओं के बीच संसंजन के कारण यह खिंचाव जड़ तक जल के सतत स्तंभ में संचारित होता है। जाइलम की दीवारों से जल का आसंजन स्तंभ को सहारा देता है।
जड़-दाब कुछ पौधों में जल को ऊपर धकेलने में सहायता कर सकता है, लेकिन ऊँचे वृक्षों में जल के लंबी दूरी तक उठने का प्रमुख कारण वाष्पोत्सर्जन खिंचाव है।
12फ्लोएम द्वारा भोजन परिवहन
फ्लोएम एक जटिल स्थायी ऊतक है, जो पत्तियों में निर्मित कार्बनिक भोजन को पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाता है। इसमें चालनी नलिकाएँ (Sieve Tubes), सहचर कोशिकाएँ (Companion Cells), फ्लोएम पैरेंकाइमा और फ्लोएम फाइबर होते हैं। आवृतबीजी पौधों में चालनी नलिकाओं और सहचर कोशिकाओं का घनिष्ठ संबंध होता है।
भोजन के परिवहन को स्थानांतरण (Translocation) कहते हैं। पत्तियाँ स्रोत (Source) हो सकती हैं, जहाँ शर्करा बनती है; जड़, फल, बीज और बढ़ते भाग उपभोग या भंडारण के कारण सिंक (Sink) हो सकते हैं। स्रोत और सिंक की भूमिका विकास अवस्था के अनुसार बदल सकती है।
दाब-प्रवाह परिकल्पना (Pressure Flow Hypothesis) के अनुसार स्रोत पर सुक्रोज की लोडिंग से फ्लोएम में जल विभव घटता है और जाइलम से जल प्रवेश करता है। इससे दाब बनता है और भोजन का विलयन सिंक की ओर प्रवाहित होता है।
13खनिज पोषण एवं आवश्यक तत्व
पौधों को सामान्य वृद्धि और प्रजनन के लिए अनेक खनिज तत्वों की आवश्यकता होती है। किसी तत्व को आवश्यक तभी माना जाता है जब उसकी अनुपस्थिति में पौधा अपना जीवन-चक्र पूरा न कर सके, उसका कार्य किसी दूसरे तत्व से पूरी तरह प्रतिस्थापित न हो सके और वह सीधे पौधे के पोषण या चयापचय में भूमिका निभाए।
आवश्यक तत्वों को उनकी मात्रा के आधार पर वृहद पोषक (Macronutrients) और सूक्ष्म पोषक (Micronutrients) में बाँटा जाता है। वृहद पोषक तत्व अधिक मात्रा में चाहिए; सूक्ष्म पोषक कम मात्रा में, लेकिन वे भी अनिवार्य हैं।
| वर्ग | तत्व | प्रमुख भूमिका |
|---|---|---|
| वृहद पोषक | N, P, K, Ca, Mg, S | प्रोटीन, ATP, क्लोरोफिल, झिल्ली एवं कोशिका भित्ति |
| सूक्ष्म पोषक | Fe, Mn, Zn, Cu, B, Mo, Cl, Ni | एंजाइम सक्रियता, इलेक्ट्रॉन परिवहन एवं अन्य चयापचयी कार्य |
नाइट्रोजन अमीनो अम्ल और न्यूक्लिक अम्ल का घटक है। फॉस्फोरस ATP, न्यूक्लिक अम्ल और फॉस्फोलिपिड में मिलता है। पोटैशियम एंजाइम सक्रियता और परासरणीय संतुलन में मदद करता है। मैग्नीशियम क्लोरोफिल अणु का केंद्रीय परमाणु है। लौह क्लोरोफिल का केंद्रीय परमाणु नहीं है, लेकिन क्लोरोफिल निर्माण और इलेक्ट्रॉन परिवहन में महत्त्वपूर्ण है।
14नाइट्रोजन चक्र एवं नाइट्रोजन स्थिरीकरण
वायुमंडल में नाइट्रोजन गैस (N₂) प्रचुर मात्रा में होती है, लेकिन अधिकांश पौधे इसे सीधे उपयोग नहीं कर सकते। नाइट्रोजन चक्र में वायुमंडलीय नाइट्रोजन विभिन्न प्रक्रियाओं से अमोनिया, अमोनियम, नाइट्राइट और नाइट्रेट जैसे रूपों में परिवर्तित होती है और पुनः वायुमंडल में लौटती है।
- नाइट्रोजन स्थिरीकरण: वायुमंडलीय N₂ को अमोनिया/उपयोगी यौगिकों में बदलना।
- अमोनीकरण: मृत जीवों और अपशिष्टों के कार्बनिक नाइट्रोजन का अमोनिया में परिवर्तन।
- नाइट्रीकरण: अमोनिया/अमोनियम का नाइट्राइट और फिर नाइट्रेट में परिवर्तन।
- अवशोषण: पौधों द्वारा नाइट्रेट या अमोनियम का ग्रहण।
- विनाइट्रीकरण: नाइट्रेट का गैसीय नाइट्रोजन यौगिकों में परिवर्तन और वायुमंडल में वापसी।
| जीवाणु | कार्य |
|---|---|
| Rhizobium | दलहनी पौधों की जड़ गाँठों में सहजीवी नाइट्रोजन स्थिरीकरण |
| Azotobacter | स्वतंत्र रूप से रहने वाला नाइट्रोजन स्थिरीकरण जीवाणु |
| Azospirillum | पौधों की जड़ों से संबंधित नाइट्रोजन स्थिरीकरण |
| Nitrosomonas | अमोनिया को नाइट्राइट में बदलने में भूमिका |
| Nitrobacter | नाइट्राइट को नाइट्रेट में बदलने में भूमिका |
| Pseudomonas | कुछ प्रजातियाँ विनाइट्रीकरण करती हैं |
नाइट्रोजनेज (Nitrogenase) एंजाइम नाइट्रोजन स्थिरीकरण में महत्त्वपूर्ण है। यह ऑक्सीजन के प्रति संवेदनशील होता है। दलहनी पौधों की जड़ गाँठों में लेगहीमोग्लोबिन ऑक्सीजन की उपलब्धता को नियंत्रित करने में सहायता करता है।
15पादप वृद्धि एवं विकास
पादप वृद्धि (Growth) पौधे के आकार, आयतन, लंबाई, द्रव्यमान या कोशिकाओं की संख्या में स्थायी और अपरिवर्तनीय वृद्धि है। यह कोशिका विभाजन, कोशिका दीर्घीकरण और कोशिका विभेदन के परिणामस्वरूप होती है। विकास (Development) वृद्धि के साथ-साथ विभेदन, परिपक्वता, पुष्पन, फलन और वृद्धावस्था जैसी समस्त परिवर्तनों की व्यापक प्रक्रिया है।
पौधों में वृद्धि सामान्यतः विभज्योतक (Meristematic) ऊतकों में होती है। शीर्षस्थ विभज्योतक जड़ और तने की लंबाई बढ़ाते हैं। पार्श्व विभज्योतक, जैसे संवहनी कैम्बियम और कॉर्क कैम्बियम, तने और जड़ की मोटाई बढ़ाने में योगदान करते हैं। अंतर्विष्ट विभज्योतक कुछ घासों में गांठों या पत्तियों के आधार के पास पाए जाते हैं।
वृद्धि को मापने के लिए लंबाई, क्षेत्रफल, आयतन, शुष्क भार या कोशिका संख्या का उपयोग किया जा सकता है। पौधों में वृद्धि की दर अंकगणितीय या ज्यामितीय हो सकती है। पर्यावरणीय कारक जैसे प्रकाश, तापमान, जल, ऑक्सीजन और खनिज पोषण वृद्धि को प्रभावित करते हैं।
16पादप हार्मोन – ऑक्सिन, जिबरेलिन एवं साइटोकाइनिन
पादप हार्मोन या फाइटोहॉर्मोन ऐसे कार्बनिक पदार्थ हैं जो बहुत कम सांद्रता में पौधों की वृद्धि, विकास और शारीरिक क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। ये पौधे के एक भाग में बनकर दूसरे भाग पर प्रभाव डाल सकते हैं या स्थानीय स्तर पर कार्य कर सकते हैं।
ऑक्सिन (Auxin)
ऑक्सिन कोशिका दीर्घीकरण, शीर्ष प्रभुत्व, जड़ निर्माण, प्रकाशानुवर्तन और फल विकास में भूमिका निभाता है। इंडोल-3-एसिटिक अम्ल (IAA) प्राकृतिक ऑक्सिन का प्रमुख उदाहरण है। कृत्रिम ऑक्सिन जैसे NAA और IBA का उपयोग कृषि एवं बागवानी में जड़ निर्माण तथा अन्य कार्यों के लिए किया जाता है। 2,4-D का उपयोग चयनात्मक खरपतवारनाशी के रूप में किया जाता है।
जिबरेलिन (Gibberellin)
जिबरेलिन तने की लंबाई बढ़ाने, बौने पौधों में लंबाई वृद्धि, बीज अंकुरण के समय एंजाइम सक्रियता, पुष्पन और फल विकास में भूमिका निभाता है। जौ के बीज में जिबरेलिन एल्यूरोन परत को अल्फा-अमाइलेज जैसे एंजाइम बनाने के लिए प्रेरित करता है। इससे संचित स्टार्च टूटकर अंकुर को ऊर्जा देता है।
साइटोकाइनिन (Cytokinin)
साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन को प्रोत्साहित करता है, पार्श्व कलिकाओं की वृद्धि को बढ़ावा देता है तथा पत्तियों की वृद्धावस्था को धीमा कर सकता है। काइनेटिन और जियाटिन इसके उदाहरण हैं। पौध ऊतक संवर्धन में ऑक्सिन और साइटोकाइनिन का अनुपात जड़ और प्ररोह निर्माण को प्रभावित करता है।
| हार्मोन | मुख्य कार्य | परीक्षा संकेत |
|---|---|---|
| ऑक्सिन | कोशिका दीर्घीकरण, शीर्ष प्रभुत्व, जड़ निर्माण | IAA |
| जिबरेलिन | तना लंबा करना, बीज अंकुरण | GA₃ |
| साइटोकाइनिन | कोशिका विभाजन, पत्ती की वृद्धावस्था में विलंब | जियाटिन |
17एब्सिसिक अम्ल एवं एथिलीन
एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid – ABA)
ABA को सामान्यतः तनाव हार्मोन (Stress Hormone) कहा जाता है। जल की कमी जैसी परिस्थितियों में यह रंध्रों को बंद कराने में सहायता करता है, जिससे वाष्पोत्सर्जन घटता है। यह बीज प्रसुप्तावस्था को बनाए रखने और प्रतिकूल परिस्थितियों में वृद्धि को रोकने में भी भूमिका निभाता है।
एथिलीन (Ethylene)
एथिलीन गैसीय पादप हार्मोन है। यह फलों के पकने, पत्तियों और फलों के विलगन, वृद्धावस्था तथा कुछ पौधों में पुष्पन संबंधी प्रतिक्रियाओं को प्रभावित करता है। एथीफोन (Ethephon) से एथिलीन मुक्त हो सकती है और कृषि में फल पकाने तथा अन्य नियंत्रित उपयोगों में इसका प्रयोग किया जाता है।
| हार्मोन | प्रमुख कार्य | विशेष तथ्य |
|---|---|---|
| ABA | रंध्र बंद करना, प्रसुप्तावस्था, तनाव प्रतिक्रिया | वृद्धि अवरोधक प्रभाव |
| एथिलीन | फल पकना, वृद्धावस्था, विलगन | गैसीय हार्मोन |
18प्रकाशानुवर्तन एवं गुरुत्वानुवर्तन
अनुवर्तन (Tropism) किसी बाहरी उद्दीपन की दिशा के अनुसार पौधे के अंगों की वृद्धि प्रतिक्रिया है। उद्दीपन की ओर वृद्धि धनात्मक अनुवर्तन तथा उससे दूर वृद्धि ऋणात्मक अनुवर्तन कहलाती है। यह वृद्धि-आधारित प्रतिक्रिया होती है।
प्रकाशानुवर्तन (Phototropism)
प्रकाश की दिशा के अनुसार पौधे के अंगों की वृद्धि प्रकाशानुवर्तन कहलाती है। तना सामान्यतः प्रकाश की ओर बढ़ता है, इसलिए उसमें धनात्मक प्रकाशानुवर्तन होता है। जड़ सामान्यतः प्रकाश से दूर बढ़ सकती है। तने के एकतरफा प्रकाश में ऑक्सिन छायादार भाग में अधिक एकत्रित होकर कोशिका दीर्घीकरण बढ़ाता है, जिससे तना प्रकाश की ओर मुड़ता है।
गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism/Gravitropism)
गुरुत्वाकर्षण के प्रति वृद्धि प्रतिक्रिया गुरुत्वानुवर्तन कहलाती है। जड़ सामान्यतः धनात्मक गुरुत्वानुवर्ती होती है, क्योंकि वह गुरुत्व की दिशा में बढ़ती है। तना सामान्यतः ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्ती होता है, क्योंकि वह गुरुत्व की विपरीत दिशा में बढ़ता है।
| अनुवर्तन | उद्दीपन | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्रकाशानुवर्तन | प्रकाश | तने का प्रकाश की ओर मुड़ना |
| गुरुत्वानुवर्तन | गुरुत्वाकर्षण | जड़ का नीचे बढ़ना |
| जलानुवर्तन | जल | जड़ का नमी की ओर बढ़ना |
| स्पर्शानुवर्तन | स्पर्श | लता के प्रतान का सहारे से लिपटना |
| रसायनानुवर्तन | रासायनिक पदार्थ | परागनलिका का बीजांड की ओर बढ़ना |
19बीज अंकुरण एवं प्रसुप्तावस्था
अनुकूल परिस्थितियों में बीज से भ्रूण का सक्रिय होकर नया पौधा बनने की प्रक्रिया बीज अंकुरण (Seed Germination) कहलाती है। अंकुरण के लिए सामान्यतः जल, ऑक्सीजन और उपयुक्त तापमान आवश्यक होते हैं। कुछ बीजों को प्रकाश या अंधकार की विशेष परिस्थितियों की भी आवश्यकता होती है। जल ग्रहण करने की प्रारंभिक प्रक्रिया को इम्बिबिशन (Imbibition) कहते हैं। इसके बाद एंजाइम सक्रिय होते हैं, संचित भोजन टूटता है और भ्रूण की वृद्धि शुरू होती है।
अंकुरण में सबसे पहले सामान्यतः मूलांकुर (Radicle) बाहर निकलता है और प्राथमिक जड़ बनाता है। इसके बाद प्रांकुर (Plumule) विकसित होकर प्ररोह बनाता है। द्विबीजपत्री पौधों में अंकुरण एपिजियल या हाइपोजियल हो सकता है। एपिजियल अंकुरण में बीजपत्र भूमि के ऊपर आ जाते हैं, जैसे सेम; हाइपोजियल में बीजपत्र भूमि के नीचे रहते हैं, जैसे मटर।
बीज प्रसुप्तावस्था (Seed Dormancy)
जीवित और अनुकूलन क्षमता वाले बीज का अनुकूल परिस्थितियाँ होने पर भी कुछ समय तक अंकुरित न होना प्रसुप्तावस्था कहलाता है। इसका कारण कठोर बीजावरण, भ्रूण की अपरिपक्वता, अंकुरण अवरोधक रसायन या विशिष्ट पर्यावरणीय आवश्यकता हो सकती है। प्रसुप्तावस्था बीज को प्रतिकूल मौसम में जीवित रहने और उपयुक्त समय पर अंकुरित होने में सहायता करती है।
20पुष्पन एवं प्रकाशकालिता
पौधों में पुष्प निर्माण की प्रक्रिया पुष्पन (Flowering) कहलाती है। पुष्पन का समय आनुवंशिक नियंत्रण के साथ-साथ प्रकाश की अवधि, तापमान, आयु और अन्य पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित होता है। दिन और रात की सापेक्ष अवधि के प्रति पौधों की पुष्पन प्रतिक्रिया को प्रकाशकालिता (Photoperiodism) कहते हैं।
प्रकाशकालिता के आधार पर पौधों को लघु-दिवसीय, दीर्घ-दिवसीय और दिवस-तटस्थ पौधों में बाँटा जाता है। लघु-दिवसीय पौधों में पुष्पन तब होता है जब दिन की अवधि एक निश्चित सीमा से कम और लगातार अंधकार अवधि पर्याप्त लंबी हो। दीर्घ-दिवसीय पौधों में पुष्पन के लिए अपेक्षाकृत लंबा दिन या छोटी रात अनुकूल होती है। दिवस-तटस्थ पौधों का पुष्पन दिन की अवधि पर विशेष रूप से निर्भर नहीं करता।
| समूह | पुष्पन की सामान्य शर्त | उदाहरण |
|---|---|---|
| लघु-दिवसीय पौधे | लंबी सतत रात / छोटा दिन | गुलदाउदी, सोयाबीन की कुछ किस्में |
| दीर्घ-दिवसीय पौधे | छोटी रात / लंबा दिन | गेहूँ, पालक, मूली की कुछ किस्में |
| दिवस-तटस्थ पौधे | दिन की अवधि से अपेक्षाकृत स्वतंत्र | टमाटर, खीरा की कई किस्में |
प्रकाशकालिता को पहचानने में पत्तियाँ महत्त्वपूर्ण होती हैं। पत्तियों में बनने वाला पुष्पन संकेत प्ररोह शीर्ष तक पहुँचता है। फ्लोरीजन (Florigen) शब्द का उपयोग पुष्पन को प्रेरित करने वाले संकेत के लिए किया गया है। कुछ पौधों में पुष्पन से पहले कम तापमान के संपर्क की आवश्यकता होती है, जिसे वसंतन (Vernalization) कहते हैं।
अति महत्त्वपूर्ण तुलनात्मक तथ्य
| विषय | मुख्य तथ्य |
|---|---|
| प्रकाश संश्लेषण का स्थान | क्लोरोप्लास्ट |
| प्रकाश अभिक्रिया | थायलाकोइड झिल्ली |
| कैल्विन चक्र | स्ट्रोमा |
| प्रकाश संश्लेषण में मुक्त ऑक्सीजन | जल से |
| कैल्विन चक्र का प्रमुख एंजाइम | RuBisCO |
| C3 का प्रथम स्थायी उत्पाद | 3-PGA |
| C4 का प्रथम स्थायी उत्पाद | OAA |
| CAM पौधों में रंध्र | रात में खुलते हैं |
| ग्लाइकोलाइसिस | कोशिकाद्रव्य |
| क्रेब्स चक्र | माइटोकॉन्ड्रिया का मैट्रिक्स |
| ATP का पूरा नाम | Adenosine Triphosphate |
| जल परिवहन | जाइलम |
| भोजन परिवहन | फ्लोएम |
| रंध्रों का खुलना-बंद होना | रक्षक कोशिकाएँ |
| वाष्पोत्सर्जन का प्रमुख मार्ग | रंध्र |
| मैग्नीशियम | क्लोरोफिल का केंद्रीय तत्व |
| नाइट्रोजन स्थिरीकरण | नाइट्रोजनेज एंजाइम |
| फल पकना | एथिलीन |
| कोशिका विभाजन | साइटोकाइनिन |
| कोशिका दीर्घीकरण | ऑक्सिन |
| तने की लंबाई बढ़ना | जिबरेलिन |
| रंध्र बंद होना | ABA |
| बीज प्रसुप्तावस्था | ABA का योगदान |
| बीज अंकुरण | जल, ऑक्सीजन और उपयुक्त तापमान |
| प्रकाशकालिता | दिन-रात की अवधि के प्रति प्रतिक्रिया |
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए 50 महत्त्वपूर्ण MCQ
प्रश्नों में NCERT-आधारित अवधारणाएँ, सामान्य प्रतियोगी परीक्षा स्तर के तथ्य और विभिन्न परीक्षाओं में बार-बार महत्त्व पाने वाले टॉपिक शामिल हैं। प्रत्येक प्रश्न के नीचे उत्तर और संक्षिप्त व्याख्या दी गई है।
नोट: ये अभ्यास एवं अवधारणा-आधारित प्रश्न हैं। इन्हें किसी विशेष परीक्षा के शब्दशः प्रश्नपत्र या सत्यापित UPSSSC PET 2026 PYQ के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है।
1. प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया मुख्यतः किस कोशिकांग में होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
क्लोरोप्लास्ट में क्लोरोफिल उपस्थित होता है, जो प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करता है। प्रकाश अभिक्रिया थायलाकोइड झिल्ली पर तथा कैल्विन चक्र स्ट्रोमा में होता है।
2. प्रकाश संश्लेषण के दौरान मुक्त होने वाली ऑक्सीजन का स्रोत क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
प्रकाश अभिक्रिया में जल का प्रकाशीय विघटन होता है। इससे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और ऑक्सीजन प्राप्त होते हैं। मुक्त O₂ जल से आती है।
3. कैल्विन चक्र क्लोरोप्लास्ट के किस भाग में होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
कैल्विन चक्र में CO₂ का स्थिरीकरण और कार्बोहाइड्रेट निर्माण से संबंधित अभिक्रियाएँ होती हैं। इसका स्थान क्लोरोप्लास्ट का स्ट्रोमा है।
4. प्रकाश अभिक्रिया का प्रमुख स्थान कौन-सा है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
प्रकाश तंत्र और इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र थायलाकोइड झिल्ली में स्थित होते हैं। यहीं प्रकाश ऊर्जा से ATP और NADPH बनते हैं।
5. C3 पादपों में प्रथम स्थायी प्रकाश संश्लेषी उत्पाद कौन-सा है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
C3 चक्र में RuBisCO द्वारा CO₂ का स्थिरीकरण होता है। इसका प्रथम स्थायी उत्पाद तीन कार्बन वाला 3-PGA है।
6. निम्न में से कौन C4 पौधे का उदाहरण है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
मक्का, गन्ना और ज्वार प्रमुख C4 पौधे हैं। इनमें प्रारंभिक CO₂ स्थिरीकरण से चार कार्बन वाला OAA बनता है।
7. CAM पौधों में रंध्र सामान्यतः कब खुलते हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
CAM पौधे रात में CO₂ ग्रहण करके कार्बनिक अम्ल के रूप में संचित करते हैं। दिन में रंध्र बंद रखकर जल की हानि कम करते हैं।
8. प्रकाश संश्लेषण में कार्बन डाइऑक्साइड के स्थिरीकरण का प्रमुख एंजाइम कौन है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
RuBisCO का पूरा नाम Ribulose-1,5-bisphosphate carboxylase/oxygenase है। यह कैल्विन चक्र में CO₂ स्थिरीकरण का प्रमुख एंजाइम है।
9. प्रकाश संश्लेषण का मुख्य वर्णक कौन-सा है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
क्लोरोफिल प्रकाश ऊर्जा अवशोषित करता है। क्लोरोफिल-a प्रमुख प्रकाश संश्लेषी वर्णक है, जबकि अन्य वर्णक सहायक भूमिका निभाते हैं।
10. वायवीय श्वसन में ग्लाइकोलाइसिस कहाँ होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
ग्लाइकोलाइसिस में ग्लूकोज का विघटन होकर पाइरुवेट बनता है। यह प्रक्रिया कोशिकाद्रव्य में होती है और ऑक्सीजन की प्रत्यक्ष आवश्यकता नहीं होती।
11. क्रेब्स चक्र का प्रमुख स्थान कौन-सा है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
यूकेरियोटिक कोशिकाओं में क्रेब्स चक्र माइटोकॉन्ड्रिया के मैट्रिक्स में होता है। यह श्वसन का महत्त्वपूर्ण चक्र है।
12. ATP का पूरा नाम क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
ATP कोशिका की ऊर्जा मुद्रा है। इसका उपयोग सक्रिय परिवहन, जैव-संश्लेषण, गति और अन्य कोशिकीय कार्यों में होता है।
13. यीस्ट में अवायवीय श्वसन से सामान्यतः क्या बनता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
यीस्ट में अल्कोहलिक किण्वन के दौरान पाइरुवेट से एथेनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड बनते हैं। इस प्रक्रिया में ऊर्जा की उपज कम होती है।
14. पौधों में जल का परिवहन किस ऊतक द्वारा होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
जाइलम जड़ों से जल और घुले हुए खनिजों को तने तथा पत्तियों तक पहुँचाता है। इसमें वाहिकाएँ और ट्रैकिड प्रमुख संवाहक तत्व हैं।
15. पत्तियों में निर्मित भोजन का परिवहन किस ऊतक द्वारा होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
फ्लोएम सुक्रोज जैसे कार्बनिक पदार्थों को स्रोत से उपयोग या भंडारण वाले भागों तक पहुँचाता है। इस प्रक्रिया को स्थानांतरण कहते हैं।
16. वाष्पोत्सर्जन मुख्यतः किस संरचना द्वारा होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
पत्तियों के रंध्रों से जलवाष्प का निकलना रंध्रीय वाष्पोत्सर्जन कहलाता है। सामान्यतः वाष्पोत्सर्जन का सबसे बड़ा भाग इसी मार्ग से होता है।
17. पत्तियों के किनारों से तरल जल की बूंदों का निकलना क्या कहलाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
गुटेशन में हाइडैथोड से तरल जल निकलता है। यह प्रायः रात या सुबह जड़-दाब अधिक होने पर देखा जाता है।
18. पौधों में जल के अवशोषण का प्रमुख स्थान कौन-सा है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
मूलरोम मिट्टी के संपर्क का सतह क्षेत्र बढ़ाते हैं। जल का प्रवेश मुख्यतः परासरण द्वारा होता है।
19. जाइलम में जल के ऊपर उठने का प्रमुख कारण क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
पत्तियों से जल के वाष्पन के कारण जाइलम में तनाव पैदा होता है। संसंजन और आसंजन के सहयोग से जल स्तंभ ऊपर खिंचता है।
20. क्लोरोफिल अणु के केंद्र में कौन-सा तत्व होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
क्लोरोफिल की संरचना में Mg केंद्रीय धातु आयन है। मैग्नीशियम की कमी से पत्तियों में हरिमाहीनता (क्लोरोसिस) हो सकती है।
21. दलहनी पौधों की जड़ों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण किस जीवाणु द्वारा किया जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
राइजोबियम दलहनी पौधों की जड़ गाँठों में सहजीवी रूप से रहता है। यह नाइट्रोजनेज एंजाइम की सहायता से वायुमंडलीय नाइट्रोजन स्थिर करता है।
22. अमोनिया को नाइट्राइट में बदलने वाला जीवाणु कौन है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
नाइट्रीकरण में Nitrosomonas अमोनिया/अमोनियम को नाइट्राइट में बदलता है। Nitrobacter आगे नाइट्राइट को नाइट्रेट में बदलता है।
23. नाइट्राइट को नाइट्रेट में बदलने वाला जीवाणु कौन है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
Nitrobacter नाइट्रीकरण की दूसरी प्रमुख अवस्था में नाइट्राइट को नाइट्रेट में ऑक्सीकृत करता है। नाइट्रेट पौधों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है।
24. नाइट्रोजन स्थिरीकरण में कौन-सा एंजाइम कार्य करता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
नाइट्रोजनेज वायुमंडलीय N₂ को अमोनिया में परिवर्तित करने वाली एंजाइम प्रणाली का प्रमुख घटक है। यह ऑक्सीजन के प्रति संवेदनशील है।
25. पौधों में कोशिका दीर्घीकरण को मुख्यतः कौन-सा हार्मोन प्रोत्साहित करता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
ऑक्सिन कोशिका दीर्घीकरण, शीर्ष प्रभुत्व और जड़ निर्माण सहित अनेक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। IAA प्राकृतिक ऑक्सिन है।
26. तने की लंबाई बढ़ाने वाला प्रमुख पादप हार्मोन कौन है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
जिबरेलिन तने की लंबाई और अंतःपर्व वृद्धि को प्रोत्साहित कर सकता है। यह बीज अंकुरण और कुछ पौधों में पुष्पन में भी योगदान देता है।
27. कोशिका विभाजन को प्रोत्साहित करने वाला हार्मोन कौन है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन को बढ़ावा देता है। यह पार्श्व कलिकाओं की वृद्धि और पत्तियों की वृद्धावस्था में विलंब से भी संबंधित है।
28. फलों को पकाने में प्रमुख भूमिका किस हार्मोन की है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
एथिलीन एक गैसीय पादप हार्मोन है। यह विशेष रूप से अनेक फलों के पकने, वृद्धावस्था और अंगों के विलगन को प्रभावित करता है।
29. पौधों में तनाव हार्मोन किसे कहा जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
ABA जल की कमी जैसी परिस्थितियों में रंध्र बंद कराने तथा बीज प्रसुप्तावस्था बनाए रखने में सहायता करता है।
30. बीज प्रसुप्तावस्था बनाए रखने में कौन-सा हार्मोन महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
ABA बीज में प्रसुप्तावस्था को बनाए रखने में योगदान देता है। जिबरेलिन कई बीजों में अंकुरण को प्रोत्साहित करता है।
31. प्रकाश की दिशा में तने का मुड़ना क्या कहलाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
तना सामान्यतः धनात्मक प्रकाशानुवर्तन दिखाता है। असमान ऑक्सिन वितरण के कारण छायादार भाग की कोशिकाएँ अधिक लंबी हो सकती हैं।
32. जड़ सामान्यतः किस प्रकार का गुरुत्वानुवर्तन दिखाती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
जड़ गुरुत्व की दिशा में बढ़ती है, इसलिए वह धनात्मक गुरुत्वानुवर्ती है। तना सामान्यतः ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्तन दिखाता है।
33. बीज अंकुरण के लिए निम्न में से कौन-सा सामान्यतः आवश्यक नहीं है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
अधिकांश बीजों के अंकुरण के लिए जल, ऑक्सीजन और उपयुक्त तापमान आवश्यक होते हैं। प्रकाश की आवश्यकता प्रजाति के अनुसार बदलती है।
34. बीज द्वारा जल का प्रारंभिक अवशोषण क्या कहलाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
इम्बिबिशन में सूखे बीज के कोलॉइडी पदार्थ जल ग्रहण करके फूलते हैं। यह अंकुरण की प्रारंभिक घटनाओं में शामिल है।
35. प्रकाशकालिता का संबंध किससे है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
प्रकाशकालिता पौधों की पुष्पन प्रतिक्रिया है जो प्रकाश और अंधकार की अवधि से प्रभावित होती है।
36. निम्न में से कौन-सा लघु-दिवसीय पौधे का उदाहरण है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
गुलदाउदी सामान्यतः लघु-दिवसीय पौधे का उदाहरण है। इसमें पर्याप्त लंबी सतत रात पुष्पन के लिए अनुकूल होती है।
37. वसंतन (Vernalization) किससे संबंधित है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
कुछ पौधों में पुष्पन की क्षमता विकसित करने के लिए कम तापमान का संपर्क आवश्यक होता है। इस प्रक्रिया को वसंतन कहते हैं।
38. पौधों में भोजन का प्रमुख परिवहन किस पदार्थ के रूप में होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
फ्लोएम में परिवहन होने वाली प्रमुख शर्करा सुक्रोज है। यह स्रोत से सिंक तक पहुँचाई जाती है।
39. क्लोरोफिल के निर्माण में कौन-सा खनिज तत्व आवश्यक है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
मैग्नीशियम क्लोरोफिल अणु का केंद्रीय तत्व है। इसकी कमी से पत्तियों में हरिमाहीनता के लक्षण दिख सकते हैं।
40. निम्न में से कौन सूक्ष्म पोषक तत्व है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
जिंक सूक्ष्म पोषक तत्व है। पौधों को इसकी कम मात्रा चाहिए, लेकिन यह एंजाइमों और वृद्धि नियमन में आवश्यक है।
41. निम्न में से कौन स्वतंत्र रूप से नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाला जीवाणु है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
Azotobacter मिट्टी में स्वतंत्र रूप से रहने वाला नाइट्रोजन स्थिरीकरण जीवाणु है। राइजोबियम दलहनी पौधों के साथ सहजीवी संबंध बनाता है।
42. पौधों में जल विभव का मापन सामान्यतः किस इकाई में व्यक्त किया जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
जल विभव ऊर्जा-स्थिति को दर्शाता है और इसे सामान्यतः दाब की इकाइयों में व्यक्त किया जाता है। जल उच्च जल विभव से निम्न जल विभव की ओर जा सकता है।
43. जाइलम में जल के ऊपर उठने के सिद्धांत से मुख्यतः किस वैज्ञानिक अवधारणा का संबंध है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
वाष्पोत्सर्जन से उत्पन्न तनाव, जल अणुओं के बीच संसंजन और जाइलम भित्तियों से आसंजन जल स्तंभ को ऊपर उठाने में सहायता करते हैं।
44. फ्लोएम में भोजन परिवहन की व्याख्या करने वाला प्रमुख सिद्धांत कौन-सा है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
स्रोत पर शर्करा लोडिंग से जल प्रवेश और दाब उत्पन्न होता है। दाब-अंतर के कारण फ्लोएम विलयन सिंक की ओर बढ़ता है।
45. प्रकाश संश्लेषण में जल का विघटन किस प्रक्रिया का भाग है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
प्रकाश ऊर्जा की सहायता से जल का विघटन होता है। इससे इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन उपलब्ध होते हैं तथा ऑक्सीजन मुक्त होती है।
46. C4 पौधों में प्रारंभिक CO₂ स्वीकारक कौन-सा है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
C4 पौधों में फॉस्फोइनॉल पाइरुवेट (PEP) प्रारंभिक CO₂ स्वीकारक होता है। इससे चार कार्बन वाला ऑक्सालोएसीटिक अम्ल बनता है।
47. निम्न में से कौन-सा पौधा CAM प्रकाश संश्लेषण का उदाहरण है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
कैक्टस जैसे मरुस्थलीय पौधों में CAM मार्ग जल संरक्षण में सहायक होता है। रात में CO₂ ग्रहण करके कार्बनिक अम्ल के रूप में संचित की जाती है।
48. पौधों में शीर्ष प्रभुत्व (Apical Dominance) मुख्यतः किस हार्मोन से संबंधित है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
शीर्षस्थ कलिका से बनने वाला ऑक्सिन पार्श्व कलिकाओं की वृद्धि को दबा सकता है। शीर्ष हटाने पर पार्श्व कलिकाएँ बढ़ने लगती हैं।
49. पौधों में पत्तियों की वृद्धावस्था को धीमा करने में कौन-सा हार्मोन सहायक है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
साइटोकाइनिन पत्तियों की वृद्धावस्था को धीमा कर सकता है। यह कोशिका विभाजन और पोषक तत्वों के पुनर्वितरण से भी संबंधित है।
50. प्रकाशकालिता में पौधे के किस अंग की भूमिका पुष्पन संकेत पहचानने में महत्त्वपूर्ण होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
पत्तियाँ प्रकाश और अंधकार की अवधि का संकेत ग्रहण करती हैं। इसके बाद पुष्पन से संबंधित संकेत प्ररोह शीर्ष तक पहुँच सकता है।
त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision)
- प्रकाश संश्लेषण – क्लोरोप्लास्ट; प्रकाश अभिक्रिया – थायलाकोइड; कैल्विन चक्र – स्ट्रोमा।
- प्रकाश संश्लेषण में मुक्त O₂ जल से आती है।
- C3 का प्रथम स्थायी उत्पाद 3-PGA और C4 का OAA है।
- मक्का और गन्ना C4; कैक्टस और अनानास CAM पौधे हैं।
- ग्लाइकोलाइसिस कोशिकाद्रव्य में तथा क्रेब्स चक्र माइटोकॉन्ड्रिया मैट्रिक्स में होता है।
- ATP कोशिका की ऊर्जा मुद्रा है।
- वाष्पोत्सर्जन का प्रमुख मार्ग रंध्र हैं; गुटेशन में तरल जल निकलता है।
- जाइलम जल और खनिज तथा फ्लोएम भोजन का परिवहन करता है।
- राइजोबियम दलहनी पौधों की जड़ों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है।
- मैग्नीशियम क्लोरोफिल का केंद्रीय तत्व है।
- ऑक्सिन – कोशिका दीर्घीकरण; जिबरेलिन – तना वृद्धि; साइटोकाइनिन – कोशिका विभाजन।
- ABA – प्रसुप्तावस्था एवं तनाव प्रतिक्रिया; एथिलीन – फल पकना।
- जड़ धनात्मक गुरुत्वानुवर्ती और तना ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्ती होता है।
- अंकुरण के लिए सामान्यतः जल, ऑक्सीजन और उपयुक्त तापमान आवश्यक हैं।
- प्रकाशकालिता का संबंध दिन-रात की अवधि से है; वसंतन का संबंध कम तापमान से है।
संदर्भ एवं अध्ययन सामग्री
इस अध्याय की वैज्ञानिक अवधारणाओं और पाठ्यक्रम-स्तरीय तथ्यों के लिए निम्नलिखित आधिकारिक शैक्षणिक स्रोत उपयोगी हैं:
- NCERT – कक्षा 11 जीव विज्ञान, पादप शरीर क्रिया विज्ञान (Plant Physiology)
- NCERT – Exemplar Problems
- NCERT – आधिकारिक वेबसाइट
ये नोट्स प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मौलिक, परीक्षा-उन्मुख अध्ययन सामग्री के रूप में तैयार किए गए हैं। प्रश्नों को अभ्यास हेतु व्यवस्थित किया गया है; किसी प्रश्न को वास्तविक PYQ मानने से पहले संबंधित आधिकारिक प्रश्नपत्र और उत्तर-कुंजी का मिलान करें।
