सूक्ष्मजीव विज्ञान (Microbiology) – सम्पूर्ण नोट्स, महत्वपूर्ण तथ्य एवं 50 MCQ | UP PET, UPSSSC, SSC, Railway

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प्रारंभिक जीव विज्ञान
अध्याय 6. सूक्ष्मजीव विज्ञान (Microbiology)

सूक्ष्मजीवों की संरचना, प्रकार, रोग, प्रतिजैविक, टीकाकरण, खाद्य उत्पादन, जैव उर्वरक एवं औद्योगिक उपयोग का सम्पूर्ण अध्ययन।

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Complete Hindi Notes Concept + Facts Exam Oriented 50 MCQ Practice

अध्याय की विषय-सूची

  1. सूक्ष्मजीवों का परिचय एवं वर्गीकरण
  2. जीवाणु – संरचना, प्रकार एवं प्रजनन
  3. विषाणु – संरचना एवं विशेषताएँ
  4. जीवाणुभोजी (Bacteriophage)
  5. विषाणु एवं जीवाणु में अंतर
  6. कवक एवं यीस्ट
  7. शैवाल एवं प्रोटोजोआ
  8. लाभदायक एवं हानिकारक सूक्ष्मजीव
  9. रोग उत्पन्न करने वाले प्रमुख सूक्ष्मजीव
  10. सूक्ष्मजीवों द्वारा होने वाले रोग
  11. प्रतिजैविक (Antibiotics)
  12. पेनिसिलिन एवं उसकी खोज
  13. टीकाकरण एवं प्रतिरक्षण
  14. किण्वन एवं खाद्य उत्पादन
  15. दही, पनीर, ब्रेड एवं शराब निर्माण
  16. नाइट्रोजन स्थिरीकरण
  17. जैव उर्वरक एवं जैव कीटनाशक
  18. अपशिष्ट उपचार एवं बायोगैस उत्पादन
  19. सूक्ष्मजीव एवं औद्योगिक उपयोग
  20. प्रमुख सूक्ष्मजीव वैज्ञानिक एवं उनकी खोजें
  21. अति महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य
  22. 50 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न
Topic 01

1. सूक्ष्मजीवों का परिचय एवं वर्गीकरण

सूक्ष्मजीव (Microorganisms) ऐसे जीव या जैविक कारक हैं जिन्हें सामान्यतः नग्न आँखों से स्पष्ट रूप से नहीं देखा जा सकता। इन्हें देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी (Microscope) की आवश्यकता होती है। सूक्ष्मजीव मिट्टी, जल, वायु, भोजन, समुद्र, गर्म जलस्रोतों तथा मनुष्य एवं अन्य जीवों के शरीर में पाए जाते हैं। कुछ सूक्ष्मजीव स्वतंत्र रूप से रहते हैं, जबकि कुछ दूसरे जीवों पर निर्भर रहते हैं।

सूक्ष्मजीव विज्ञान (Microbiology) जीवाणु, विषाणु, कवक, सूक्ष्म शैवाल, प्रोटोजोआ तथा अन्य सूक्ष्म जैविक इकाइयों के अध्ययन से संबंधित विज्ञान है। सभी सूक्ष्मजीव हानिकारक नहीं होते। अनेक सूक्ष्मजीव भोजन बनाने, औषधि उत्पादन, कृषि, पर्यावरण संरक्षण और अपशिष्ट उपचार में अत्यंत उपयोगी हैं।

सूक्ष्मजीवों के प्रमुख समूह

समूहमुख्य विशेषताउदाहरण
जीवाणु (Bacteria)एककोशिकीय प्रोकैरियोटिक जीवई. कोलाई, लैक्टोबैसिलस
विषाणु (Virus)अकोशिकीय, अनिवार्य अंतःकोशिकीय परजीवीइन्फ्लुएंजा वायरस, HIV
कवक (Fungi)यूकैरियोटिक, परपोषी; कोशिका भित्ति में काइटिनयीस्ट, पेनिसिलियम
प्रोटोजोआ (Protozoa)अधिकांश एककोशिकीय यूकैरियोटिक जीवअमीबा, प्लाज्मोडियम
सूक्ष्म शैवालप्रकाश संश्लेषण करने वाले सूक्ष्म जीवक्लैमाइडोमोनास, डायटम
आर्किया (Archaea)विशिष्ट प्रकार के प्रोकैरियोटमेथेनोजेन्स, हैलोफाइल्स

प्रोकैरियोटिक एवं यूकैरियोटिक कोशिका

प्रोकैरियोटिक कोशिका में वास्तविक झिल्ली-बद्ध केंद्रक नहीं होता। इसका आनुवंशिक पदार्थ न्यूक्लॉइड क्षेत्र में पाया जाता है। जीवाणु और आर्किया इसके उदाहरण हैं। इसके विपरीत यूकैरियोटिक कोशिका में स्पष्ट केंद्रक तथा माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जी तंत्र जैसे झिल्ली-बद्ध कोशिकांग पाए जाते हैं। कवक, प्रोटोजोआ तथा शैवाल के अनेक समूह यूकैरियोटिक होते हैं।

परीक्षा तथ्य: विषाणु को सामान्य कोशिकीय जीव नहीं माना जाता। यह स्वयं स्वतंत्र रूप से प्रजनन नहीं कर सकता और केवल जीवित पोषक कोशिका के भीतर अपनी संख्या बढ़ाता है।
Topic 02

2. जीवाणु – संरचना, प्रकार एवं प्रजनन

जीवाणु (Bacteria) सूक्ष्म, एककोशिकीय तथा प्रोकैरियोटिक जीव हैं। ये पृथ्वी पर लगभग सभी प्रकार के वातावरण में पाए जाते हैं। कुछ जीवाणु रोग उत्पन्न करते हैं, जबकि अनेक जीवाणु पाचन, नाइट्रोजन स्थिरीकरण, खाद्य निर्माण तथा औद्योगिक प्रक्रियाओं में उपयोगी होते हैं।

जीवाणु कोशिका की संरचना

  • कैप्सूल/श्लेष्मिक आवरण: कुछ जीवाणुओं में बाहरी सुरक्षात्मक परत होती है। यह सूखने और प्रतिरक्षा तंत्र से बचाव में सहायता कर सकती है।
  • कोशिका भित्ति: आकार और सुरक्षा प्रदान करती है। अधिकांश जीवाणुओं की कोशिका भित्ति में पेप्टिडोग्लाइकैन पाया जाता है।
  • प्लाज्मा झिल्ली: पदार्थों के आवागमन और अनेक चयापचयी क्रियाओं को नियंत्रित करती है।
  • साइटोप्लाज्म: कोशिका के भीतर का द्रव्य, जिसमें विभिन्न जैव रासायनिक क्रियाएँ होती हैं।
  • न्यूक्लॉइड: मुख्य DNA सामान्यतः वृत्ताकार होता है। इसमें वास्तविक केंद्रकीय झिल्ली नहीं होती।
  • प्लाज्मिड: अतिरिक्त छोटे DNA अणु, जिनमें कुछ विशेष गुणों, जैसे प्रतिजैविक प्रतिरोध, से संबंधित जीन हो सकते हैं।
  • राइबोसोम: प्रोटीन संश्लेषण का स्थान; जीवाणुओं में 70S राइबोसोम पाए जाते हैं।
  • कशाभिका (Flagella): अनेक जीवाणुओं में गति के लिए उपस्थित होती है।
  • पिली/फिम्ब्रिया: सतह से चिपकने तथा कुछ जीवाणुओं में संयुग्मन जैसी प्रक्रियाओं में सहायक।

आकार के आधार पर जीवाणुओं के प्रकार

प्रकारआकारउदाहरण/पहचान
कोक्कस (Coccus)गोलाकारStaphylococcus
बैसिलस (Bacillus)दंडाकारBacillus anthracis
स्पिरिलम (Spirillum)सर्पिलाकारSpirillum समूह
विब्रियो (Vibrio)अल्पविराम जैसाVibrio cholerae

पोषण के आधार पर जीवाणु

स्वपोषी जीवाणु अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। इनमें प्रकाश संश्लेषी तथा रसायन संश्लेषी जीवाणु शामिल हैं। कुछ जीवाणु सूर्य के प्रकाश का उपयोग करते हैं, जबकि कुछ अकार्बनिक पदार्थों के ऑक्सीकरण से ऊर्जा प्राप्त करते हैं।

परपोषी जीवाणु भोजन के लिए अन्य जीवों या कार्बनिक पदार्थों पर निर्भर रहते हैं। इनमें मृतोपजीवी, परजीवी और सहजीवी जीवाणु शामिल हैं।

जीवाणुओं में प्रजनन

जीवाणुओं में सामान्यतः अलैंगिक प्रजनन द्विखंडन (Binary Fission) द्वारा होता है। इसमें DNA की प्रतिकृति बनती है, कोशिका लंबी होती है और बीच में विभाजन पट बनकर एक कोशिका से दो संतति कोशिकाएँ बनती हैं। अनुकूल परिस्थितियों में कुछ जीवाणु बहुत तेजी से विभाजित हो सकते हैं।

जीवाणुओं में आनुवंशिक पदार्थ का आदान-प्रदान तीन प्रमुख प्रक्रियाओं से हो सकता है:

  • संयुग्मन (Conjugation): एक जीवाणु से दूसरे जीवाणु में DNA का स्थानांतरण, प्रायः संपर्क के माध्यम से।
  • रूपांतरण (Transformation): वातावरण में उपस्थित मुक्त DNA का जीवाणु द्वारा ग्रहण।
  • पारगमन (Transduction): बैक्टीरियोफेज के माध्यम से DNA का एक जीवाणु से दूसरे में पहुँचना।
महत्वपूर्ण अंतर: जीवाणु बीजाणु (Endospore) का निर्माण प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवित रहने की संरचना है; इसे सामान्य प्रजनन या संख्या-वृद्धि की प्रक्रिया नहीं समझना चाहिए।
Topic 03

3. विषाणु – संरचना एवं विशेषताएँ

विषाणु (Virus) अत्यंत सूक्ष्म अकोशिकीय संक्रामक कारक हैं। इनमें आनुवंशिक पदार्थ के रूप में DNA अथवा RNA में से कोई एक पाया जाता है, जिसके चारों ओर प्रोटीन का आवरण होता है। कुछ विषाणुओं में इस प्रोटीन आवरण के बाहर लिपिडयुक्त बाहरी आवरण (Envelope) भी होता है।

विषाणु की संरचना

  • न्यूक्लिक अम्ल: DNA या RNA, जो आनुवंशिक सूचना रखता है।
  • कैप्सिड (Capsid): प्रोटीन से बना आवरण, जो आनुवंशिक पदार्थ की रक्षा करता है।
  • कैप्सोमियर: कैप्सिड की संरचनात्मक प्रोटीन इकाइयाँ।
  • एनवेलप: कुछ विषाणुओं में बाहरी लिपिड झिल्ली होती है, जिस पर ग्लाइकोप्रोटीन स्पाइक्स हो सकते हैं।

विषाणुओं की प्रमुख विशेषताएँ

  1. ये कोशिकीय संरचना से रहित होते हैं।
  2. इनमें DNA या RNA में से एक प्रकार का आनुवंशिक पदार्थ होता है।
  3. इनमें अपना पूर्ण प्रोटीन संश्लेषण तंत्र और स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादन तंत्र नहीं होता।
  4. ये केवल जीवित पोषक कोशिका के भीतर अपनी प्रतिकृति बनाते हैं।
  5. पोषक कोशिका के बाहर ये निष्क्रिय कणों की तरह व्यवहार कर सकते हैं।
  6. विषाणु पौधों, पशुओं, मनुष्यों और जीवाणुओं को भी संक्रमित कर सकते हैं।

विषाणुओं के उदाहरण

विषाणुसंबंधित रोग/प्रभाव
HIVएड्स
इन्फ्लुएंजा वायरसफ्लू
डेंगू वायरसडेंगू
रेबीज वायरसरेबीज
पोलियो वायरसपोलियो
हेपेटाइटिस B वायरसहेपेटाइटिस-B
TMVतंबाकू में मोजेक रोग
कोरोना वायरस (SARS-CoV-2)COVID-19
परीक्षा तथ्य: विषाणु की खोज का ऐतिहासिक श्रेय दिमित्री इवानोवस्की को 1892 में तंबाकू मोजेक रोग पर किए गए अध्ययन के लिए दिया जाता है। मार्टिनस बेइजेरिंक ने 1898 में संक्रामक कारक की प्रकृति को स्पष्ट किया और इसे Contagium vivum fluidum कहा।
Topic 04

4. जीवाणुभोजी (Bacteriophage)

जीवाणुभोजी या बैक्टीरियोफेज ऐसे विषाणु हैं जो जीवाणुओं को संक्रमित करते हैं। 'Phage' शब्द का अर्थ भक्षण करना है। ये जीवाणु कोशिका से जुड़कर अपना आनुवंशिक पदार्थ उसमें प्रवेश करा सकते हैं और मेजबान कोशिका की जैविक मशीनरी का उपयोग करके नए विषाणु कण बनाते हैं।

बैक्टीरियोफेज की सामान्य संरचना

  • शीर्ष (Head): इसमें आनुवंशिक पदार्थ, सामान्यतः DNA, रहता है।
  • कैप्सिड: शीर्ष का प्रोटीन आवरण।
  • पूँछ (Tail): आनुवंशिक पदार्थ पहुँचाने में सहायक।
  • टेल फाइबर्स: जीवाणु की सतह को पहचानने और उससे जुड़ने में सहायक।
  • बेस प्लेट: कुछ फेज में जुड़ने और प्रवेश प्रक्रिया में भूमिका निभाती है।

लाइटिक चक्र (Lytic Cycle)

लाइटिक चक्र में विषाणु जीवाणु कोशिका से जुड़ता है, अपना आनुवंशिक पदार्थ प्रवेश कराता है, नए विषाणु घटकों का निर्माण करवाता है और अंत में जीवाणु कोशिका का विघटन (Lysis) हो जाता है। इससे नए फेज बाहर निकलते हैं।

लाइसोजेनिक चक्र (Lysogenic Cycle)

कुछ बैक्टीरियोफेज अपना DNA जीवाणु के DNA में समाहित कर लेते हैं। यह अवस्था प्रोफेज (Prophage) कहलाती है। जीवाणु विभाजित होता है तो विषाणु DNA भी उसके साथ प्रतिलिपित हो सकता है। कुछ परिस्थितियों में यह DNA सक्रिय होकर लाइटिक चक्र में प्रवेश कर सकता है।

याद रखें: बैक्टीरियोफेज जीवाणुओं को संक्रमित करते हैं; ये स्वयं जीवाणु नहीं होते, बल्कि विषाणु होते हैं।
Topic 05

5. विषाणु एवं जीवाणु में अंतर

आधारजीवाणु (Bacteria)विषाणु (Virus)
प्रकृतिकोशिकीय जीवअकोशिकीय संक्रामक कारक
कोशिका प्रकारप्रोकैरियोटिककोशिका नहीं होती
आनुवंशिक पदार्थDNA और RNA दोनोंDNA या RNA में से एक
कोशिका भित्तिअधिकांश में पेप्टिडोग्लाइकैनकोशिका भित्ति नहीं; प्रोटीन कैप्सिड
राइबोसोम70S राइबोसोमअनुपस्थित
चयापचयअपना चयापचय तंत्रस्वतंत्र चयापचय तंत्र नहीं
प्रजननमुख्यतः द्विखंडनकेवल पोषक कोशिका के भीतर प्रतिकृति
प्रतिजैविककुछ जीवाणुओं पर प्रभावीसामान्य प्रतिजैविक प्रभावी नहीं
उदाहरणE. coli, LactobacillusHIV, Influenza virus
परीक्षा में सामान्य प्रश्न: प्रतिजैविक (Antibiotics) सामान्यतः जीवाणुओं के विरुद्ध उपयोग किए जाते हैं, विषाणुओं के विरुद्ध नहीं। विषाणुजनित रोगों में विशिष्ट एंटीवायरल दवाओं का उपयोग किया जा सकता है।
Topic 06

6. कवक एवं यीस्ट

कवक (Fungi) यूकैरियोटिक तथा परपोषी जीव हैं। इनमें क्लोरोफिल नहीं होता, इसलिए ये सामान्यतः प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन नहीं बनाते। इनकी कोशिका भित्ति में काइटिन पाया जाता है। ये मृत कार्बनिक पदार्थों का अपघटन करके पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुछ कवक रोग उत्पन्न करते हैं, जबकि कुछ औषधि और खाद्य उद्योग में उपयोगी हैं।

कवक की प्रमुख विशेषताएँ

  • अधिकांश कवक बहुकोशिकीय होते हैं, लेकिन यीस्ट एककोशिकीय होता है।
  • इनका शरीर प्रायः धागेनुमा संरचनाओं से बना होता है जिन्हें हाइफा (Hyphae) कहते हैं।
  • हाइफा के जाल को माइसीलियम (Mycelium) कहते हैं।
  • इनकी कोशिका भित्ति में काइटिन पाया जाता है।
  • ये बीजाणुओं द्वारा प्रजनन कर सकते हैं।
  • भोजन का अवशोषण करके पोषण प्राप्त करते हैं।

यीस्ट (Yeast)

यीस्ट एक एककोशिकीय कवक है। इसका प्रसिद्ध उदाहरण Saccharomyces cerevisiae है। यह शर्करा के किण्वन द्वारा एथिल अल्कोहल और कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न करता है। इसी गुण के कारण इसका उपयोग ब्रेड, शराब और अन्य किण्वित उत्पादों के निर्माण में होता है।

कवक के प्रमुख उदाहरण एवं उपयोग

कवकमहत्त्व/उपयोग
Penicilliumपेनिसिलिन के उत्पादन से संबंधित
Saccharomyces cerevisiaeब्रेड एवं अल्कोहल किण्वन
Aspergillus nigerसिट्रिक अम्ल का औद्योगिक उत्पादन
Rhizopusब्रेड मोल्ड; कुछ खाद्य किण्वन में उपयोग
Trichodermaजैव नियंत्रण एजेंट
Pucciniaगेहूँ में रतुआ रोग का कारक
याद रखें: यीस्ट एककोशिकीय कवक है। यह जीवाणु नहीं है। Saccharomyces cerevisiae का उपयोग ब्रेड और अल्कोहल निर्माण में किया जाता है।
Topic 07

7. शैवाल एवं प्रोटोजोआ

शैवाल (Algae)

शैवाल मुख्यतः जलीय, प्रकाश संश्लेषी जीवों का विविध समूह है। इनमें क्लोरोफिल और अन्य प्रकाश संश्लेषी वर्णक पाए जाते हैं। ये जल पारितंत्र में प्राथमिक उत्पादक होते हैं तथा ऑक्सीजन उत्पादन में योगदान करते हैं। शैवाल एककोशिकीय, कॉलोनी बनाने वाले या बहुकोशिकीय हो सकते हैं।

शैवाल समूहप्रमुख वर्णकउदाहरण
हरित शैवालक्लोरोफिल a एवं bChlamydomonas, Spirogyra, Volvox
भूरे शैवालफ्यूकोजैंथिनSargassum, Laminaria
लाल शैवालफाइकोएरिथ्रिनPolysiphonia, Gelidium

शैवाल के उपयोग

  • जल में प्राथमिक उत्पादक के रूप में खाद्य शृंखला का आधार बनते हैं।
  • कुछ शैवाल भोजन और पोषक पूरक के रूप में उपयोग किए जाते हैं।
  • Gelidium और Gracilaria से अगर (Agar) प्राप्त किया जाता है।
  • कुछ भूरे शैवाल से एल्जिनेट प्राप्त किया जाता है।
  • कुछ लाल शैवाल से कैरेजीनन प्राप्त किया जाता है।

प्रोटोजोआ (Protozoa)

प्रोटोजोआ सामान्यतः एककोशिकीय यूकैरियोटिक जीव होते हैं। इनमें भोजन ग्रहण करने, गति करने और प्रजनन की विभिन्न विधियाँ पाई जाती हैं। कुछ स्वतंत्र रूप से रहते हैं, जबकि कुछ परजीवी होते हैं।

प्रकारगति का माध्यमउदाहरण
अमीबीयकूटपाद (Pseudopodia)Amoeba
कशाभिकीयकशाभिका (Flagella)Trypanosoma
पक्ष्माभिकीयपक्ष्माभ (Cilia)Paramecium
स्पोरोजोआविशिष्ट गति अंग सामान्यतः अनुपस्थितPlasmodium
परीक्षा तथ्य: मलेरिया का कारक Plasmodium एक प्रोटोजोआ परजीवी है। इसका संचरण संक्रमित मादा Anopheles मच्छर के काटने से होता है।
Topic 08

8. लाभदायक एवं हानिकारक सूक्ष्मजीव

सूक्ष्मजीवों का प्रभाव उनके प्रकार, स्थान और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। कुछ सूक्ष्मजीव रोग उत्पन्न करते हैं, खाद्य पदार्थों को खराब करते हैं और फसलों को नुकसान पहुँचाते हैं। दूसरी ओर अनेक सूक्ष्मजीव मानव जीवन और पर्यावरण के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

लाभदायक सूक्ष्मजीव

  • दही निर्माण: लैक्टिक अम्ल जीवाणु दूध की लैक्टोज शर्करा को लैक्टिक अम्ल में बदलते हैं।
  • ब्रेड निर्माण: यीस्ट द्वारा उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड आटे को फुलाती है।
  • औषधि उत्पादन: Penicillium से पेनिसिलिन जैसे प्रतिजैविक का उत्पादन।
  • नाइट्रोजन स्थिरीकरण: Rhizobium और कुछ सायनोबैक्टीरिया वायुमंडलीय नाइट्रोजन को उपयोगी रूप में बदलते हैं।
  • अपघटन: जीवाणु और कवक मृत जैव पदार्थों को विघटित करते हैं।
  • अपशिष्ट उपचार: सूक्ष्मजीव सीवेज के कार्बनिक पदार्थों का अपघटन करते हैं।

हानिकारक सूक्ष्मजीव

  • मनुष्य, पशुओं और पौधों में संक्रामक रोग उत्पन्न कर सकते हैं।
  • भोजन में वृद्धि करके उसे खराब कर सकते हैं।
  • कुछ कवक विषैले पदार्थ (Mycotoxins) उत्पन्न करते हैं।
  • फसलों में रोग उत्पन्न करके कृषि उत्पादन कम कर सकते हैं।
  • कुछ सूक्ष्मजीव जल और खाद्य पदार्थों को दूषित कर सकते हैं।
मुख्य अवधारणा: सभी जीवाणु रोगकारक नहीं होते और सभी सूक्ष्मजीव हानिकारक नहीं होते। Lactobacillus, Rhizobium और कई अपघटक सूक्ष्मजीव मानव उपयोग और पर्यावरण के लिए लाभदायक हैं।
Topic 09

9. रोग उत्पन्न करने वाले प्रमुख सूक्ष्मजीव

रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीवों को रोगजनक (Pathogens) कहा जाता है। ये जीवाणु, विषाणु, कवक या प्रोटोजोआ हो सकते हैं। प्रत्येक रोग का रोगकारक अलग हो सकता है। रोग के संचरण का माध्यम भी अलग-अलग होता है, जैसे दूषित जल, भोजन, वायु, संक्रमित व्यक्ति, रक्त या वाहक जीव।

सूक्ष्मजीवरोगसूक्ष्मजीव का प्रकार
Mycobacterium tuberculosisक्षय रोग (TB)जीवाणु
Vibrio choleraeहैजाजीवाणु
Salmonella Typhiटाइफाइडजीवाणु
Clostridium tetaniधनुष्टंकार (टिटनेस)जीवाणु
Bacillus anthracisएंथ्रेक्सजीवाणु
Yersinia pestisप्लेगजीवाणु
Corynebacterium diphtheriaeडिप्थीरियाजीवाणु
Plasmodiumमलेरियाप्रोटोजोआ
Entamoeba histolyticaअमीबायसिसप्रोटोजोआ
Leishmania donovaniकालाजारप्रोटोजोआ
HIVएड्सविषाणु
Dengue virusडेंगूविषाणु
Rabies virusरेबीजविषाणु
Hepatitis B virusहेपेटाइटिस-Bविषाणु
Influenza virusइन्फ्लुएंजाविषाणु
Trichophytonदाद/रिंगवर्मकवक
Pucciniaगेहूँ का रतुआकवक
Topic 10

10. सूक्ष्मजीवों द्वारा होने वाले रोग

संक्रामक रोग वे रोग हैं जो रोगजनक सूक्ष्मजीवों के कारण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति या संक्रमित स्रोत से व्यक्ति तक पहुँच सकते हैं। संक्रमण का प्रसार प्रत्यक्ष संपर्क, वायु की बूंदों, दूषित जल, भोजन, रक्त अथवा वाहक जीवों से हो सकता है।

मनुष्य के प्रमुख सूक्ष्मजीवजनित रोग

रोगकारकप्रमुख संचरण/वाहक
मलेरियाPlasmodiumमादा Anopheles मच्छर
डेंगूDengue virusAedes मच्छर
चिकनगुनियाChikungunya virusAedes मच्छर
फाइलेरियाWuchereria bancrofti आदिमच्छर
हैजाVibrio choleraeदूषित जल/भोजन
टाइफाइडSalmonella Typhiदूषित जल/भोजन
टीबीMycobacterium tuberculosisवायुजनित कण
रेबीजRabies virusसंक्रमित पशु की लार, काटना
एड्सHIVसंक्रमित रक्त/यौन संपर्क/माँ से शिशु
कालाजारLeishmania donovaniसैंडफ्लाई
अमीबायसिसEntamoeba histolyticaदूषित भोजन/जल
दादडर्मेटोफाइट कवकसंपर्क/दूषित वस्तुएँ

पशुओं एवं पौधों के कुछ प्रमुख रोग

रोगकारकप्रभावित जीव/फसल
एंथ्रेक्सBacillus anthracisपशु एवं मनुष्य
खुरपका-मुँहपकाFoot-and-mouth disease virusखुर वाले पशु
सिट्रस कैंकरXanthomonas citriनींबू वर्गीय पौधे
गेहूँ का रतुआPucciniaगेहूँ
आलू का पछेती झुलसाPhytophthora infestansआलू
धान का जीवाणु झुलसाXanthomonas oryzae pv. oryzaeधान
विशेष ध्यान: मलेरिया प्रोटोजोआ से, डेंगू विषाणु से, टाइफाइड जीवाणु से तथा दाद कवक से होता है। रोग और रोगकारक का यह मिलान प्रतियोगी परीक्षाओं में महत्त्वपूर्ण है।
Topic 11

11. प्रतिजैविक (Antibiotics)

प्रतिजैविक (Antibiotics) ऐसे पदार्थ हैं जो सूक्ष्मजीवों द्वारा प्राकृतिक रूप से उत्पन्न हो सकते हैं या आधुनिक तकनीक से बनाए जा सकते हैं और संवेदनशील सूक्ष्मजीवों, विशेषकर जीवाणुओं, की वृद्धि रोकते हैं अथवा उन्हें नष्ट करते हैं। आधुनिक चिकित्सा में प्रतिजैविकों का अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है।

प्रतिजैविकों की कार्यविधि

  • कोशिका भित्ति निर्माण रोकना: पेनिसिलिन जैसे प्रतिजैविक जीवाणु कोशिका भित्ति के निर्माण को बाधित करते हैं।
  • प्रोटीन संश्लेषण रोकना: कुछ प्रतिजैविक जीवाणु राइबोसोम पर कार्य करते हैं।
  • DNA/RNA प्रक्रियाओं में बाधा: कुछ दवाएँ आनुवंशिक पदार्थ के निर्माण या कार्य को प्रभावित करती हैं।
  • चयापचयी मार्ग रोकना: कुछ प्रतिजैविक आवश्यक जैव रासायनिक मार्गों को बाधित करते हैं।

कुछ प्रमुख प्रतिजैविक

प्रतिजैविकसंबंधित तथ्य
PenicillinPenicillium कवक से प्राप्त; कोशिका भित्ति निर्माण बाधित करता है।
StreptomycinStreptomyces griseus से संबंधित
Tetracyclineजीवाणु प्रोटीन संश्लेषण रोकता है
Erythromycinजीवाणु राइबोसोम पर कार्य करता है
Chloramphenicolजीवाणु प्रोटीन संश्लेषण को बाधित करता है
Cephalosporinबीटा-लैक्टम प्रतिजैविक समूह

प्रतिजैविक प्रतिरोध (Antibiotic Resistance)

जब जीवाणु किसी प्रतिजैविक के प्रभाव के बावजूद जीवित रहने और वृद्धि करने की क्षमता विकसित कर लेते हैं, तो इसे प्रतिजैविक प्रतिरोध कहते हैं। यह प्राकृतिक चयन और आनुवंशिक परिवर्तन से विकसित हो सकता है। प्रतिजैविक का अनावश्यक उपयोग, गलत दवा लेना, बिना चिकित्सकीय सलाह दवा शुरू या बंद करना तथा अनुचित उपयोग प्रतिरोध की समस्या को बढ़ाते हैं।

परीक्षा तथ्य: प्रतिजैविक सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे विषाणुजनित रोगों का उपचार नहीं करते। प्रतिजैविकों का उपयोग चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही होना चाहिए।
Topic 12

12. पेनिसिलिन एवं उसकी खोज

पेनिसिलिन विश्व के सबसे महत्त्वपूर्ण प्रारंभिक प्रतिजैविकों में से एक है। इसकी खोज का श्रेय स्कॉटिश वैज्ञानिक अलेक्जेंडर फ्लेमिंग को दिया जाता है। वर्ष 1928 में उन्होंने देखा कि Penicillium कवक की वृद्धि वाले क्षेत्र के आसपास जीवाणुओं की वृद्धि रुक गई थी। इससे उन्हें यह समझने में सहायता मिली कि कवक कोई ऐसा पदार्थ उत्पन्न करता है जो जीवाणुओं को रोकता है। इस पदार्थ को पेनिसिलिन नाम दिया गया।

पेनिसिलिन से जुड़े प्रमुख वैज्ञानिक

  • Alexander Fleming: 1928 में पेनिसिलिन की खोज की।
  • Ernst Boris Chain: पेनिसिलिन के शुद्धीकरण और चिकित्सकीय उपयोग के विकास में योगदान।
  • Howard Florey: पेनिसिलिन को प्रभावी औषधि के रूप में विकसित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका।

फ्लेमिंग, चेन और फ्लोरे को 1945 में पेनिसिलिन की खोज और उसके उपचारात्मक प्रभाव के लिए शरीर क्रिया विज्ञान या चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

अति महत्वपूर्ण: पेनिसिलिन की खोज – अलेक्जेंडर फ्लेमिंग – 1928। पेनिसिलिन के चिकित्सकीय विकास में – चेन एवं फ्लोरे। नोबेल पुरस्कार – 1945।
Topic 13

13. टीकाकरण एवं प्रतिरक्षण

प्रतिरक्षण (Immunization) वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से शरीर में किसी विशिष्ट रोग के विरुद्ध सुरक्षा विकसित की जाती है। टीकाकरण (Vaccination) में वैक्सीन दी जाती है, जिससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली रोगजनक या उसके किसी घटक को पहचानना सीखती है और भविष्य में संक्रमण होने पर तेज प्रतिक्रिया दे सकती है।

प्रतिरक्षा के प्रकार

जन्मजात प्रतिरक्षा (Innate Immunity): यह जन्म से उपस्थित सामान्य सुरक्षा व्यवस्था है। त्वचा, श्लेष्मा झिल्ली, पेट का अम्ल, फागोसाइटिक कोशिकाएँ और प्राकृतिक रक्षक तंत्र इसमें शामिल हैं।

अर्जित प्रतिरक्षा (Acquired Immunity): यह जीवन के दौरान विकसित होती है और विशिष्ट रोगजनकों को पहचानने की क्षमता रखती है। इसमें एंटीबॉडी और प्रतिरक्षा स्मृति की भूमिका होती है।

अर्जित प्रतिरक्षा के प्रकार

प्रकारकैसे प्राप्त होती हैउदाहरण
प्राकृतिक सक्रियसंक्रमण के बाद शरीर स्वयं प्रतिरक्षा विकसित करता हैकिसी संक्रमण के बाद बनी प्रतिरक्षा
कृत्रिम सक्रियटीकाकरण द्वारापोलियो, खसरा आदि के टीके
प्राकृतिक निष्क्रियमाँ से शिशु को एंटीबॉडी मिलनाप्लेसेंटा और स्तनपान से एंटीबॉडी
कृत्रिम निष्क्रियतैयार एंटीबॉडी देनाकुछ इम्यूनोग्लोबुलिन/एंटीटॉक्सिन

वैक्सीन के प्रमुख प्रकार

  • जीवित कमजोर वैक्सीन: कमजोर किए गए जीवित रोगजनक का उपयोग।
  • निष्क्रिय वैक्सीन: निष्क्रिय या मारे गए रोगजनक का उपयोग।
  • टॉक्सॉइड वैक्सीन: निष्क्रिय किए गए विष (Toxin) का उपयोग।
  • सबयूनिट/रिकॉम्बिनेंट वैक्सीन: रोगजनक के विशिष्ट घटक या प्रोटीन का उपयोग।
  • न्यूक्लिक अम्ल आधारित वैक्सीन: DNA या mRNA जैसी आनुवंशिक सूचना का उपयोग।
  • वेक्टर वैक्सीन: आनुवंशिक सूचना पहुँचाने के लिए संशोधित वाहक विषाणु का उपयोग।

महत्त्वपूर्ण टीके एवं रोग

टीकारोगपरीक्षा तथ्य
BCGक्षय रोग (TB)मुख्यतः गंभीर बाल्यकालीन TB रूपों से सुरक्षा के लिए
OPV/IPVपोलियोOPV मौखिक; IPV इंजेक्शन द्वारा
DPTडिप्थीरिया, काली खाँसी, टिटनेससंयुक्त टीका
MRखसरा एवं रूबेलादो रोगों से सुरक्षा
Hepatitis Bहेपेटाइटिस-Bविषाणुजनित यकृत रोग
Rabies vaccineरेबीजसंभावित जोखिम के बाद भी उपयोग
TT/Tdटिटनेस एवं डिप्थीरियाटॉक्सॉइड आधारित सुरक्षा
ध्यान दें: वैक्सीन और एंटीबायोटिक एक ही चीज नहीं हैं। वैक्सीन प्रतिरक्षा विकसित करने में सहायता करती है, जबकि एंटीबायोटिक संवेदनशील जीवाणुओं के विरुद्ध औषधि के रूप में कार्य करता है।
Topic 14

14. किण्वन एवं खाद्य उत्पादन

किण्वन (Fermentation) एक जैव रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें सूक्ष्मजीव एंजाइमों की सहायता से शर्करा और अन्य कार्बनिक पदार्थों का अपघटन करते हैं। ऑक्सीजन की अनुपस्थिति या सीमित उपलब्धता में होने वाली किण्वन प्रक्रियाओं से अल्कोहल, कार्बन डाइऑक्साइड, लैक्टिक अम्ल और अन्य उत्पाद बन सकते हैं। औद्योगिक किण्वन में सूक्ष्मजीवों को नियंत्रित परिस्थितियों में बड़े पात्रों में उगाया जाता है।

किण्वन के प्रमुख प्रकार

  • अल्कोहलिक किण्वन: यीस्ट शर्करा से एथिल अल्कोहल और कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है।
  • लैक्टिक अम्ल किण्वन: लैक्टिक अम्ल जीवाणु शर्करा को लैक्टिक अम्ल में बदलते हैं।
  • एसिटिक अम्ल निर्माण: Acetobacter जैसे जीवाणु अल्कोहल को ऑक्सीकरण करके एसिटिक अम्ल बनाते हैं।
ग्लूकोज → एथिल अल्कोहल + कार्बन डाइऑक्साइड + ऊर्जा

अल्कोहलिक किण्वन का सरल समीकरण:

C₆H₁₂O₆ → 2C₂H₅OH + 2CO₂

यह प्रक्रिया यीस्ट में होती है। किण्वन का उपयोग खाद्य पदार्थों, पेय पदार्थों, जैव ईंधन और अनेक औद्योगिक रसायनों के उत्पादन में किया जाता है।

Topic 15

15. दही, पनीर, ब्रेड एवं शराब निर्माण में सूक्ष्मजीव

उत्पादसूक्ष्मजीवप्रक्रिया/भूमिका
दहीLactobacillus तथा अन्य LABलैक्टोज को लैक्टिक अम्ल में बदलना
ब्रेडSaccharomyces cerevisiaeCO₂ बनाकर आटे को फुलाना
शराब/बीयरSaccharomyces cerevisiaeशर्करा का अल्कोहलिक किण्वन
सिरकाAcetobacterअल्कोहल का एसिटिक अम्ल में ऑक्सीकरण
स्विस चीजPropionibacterium shermaniiCO₂ के कारण छिद्र/आँखें बनना
कुछ चीज प्रकारPenicillium roquefortiविशिष्ट स्वाद एवं परिपक्वता
इडली/डोसाविभिन्न लैक्टिक अम्ल जीवाणु एवं अन्य सूक्ष्मजीवघोल का किण्वन

दही निर्माण

दूध में लैक्टिक अम्ल जीवाणु (LAB) वृद्धि करते हैं और लैक्टोज को लैक्टिक अम्ल में बदलते हैं। अम्लीयता बढ़ने से दूध का केसिन प्रोटीन जमने लगता है और दही बनता है। LAB कुछ पोषण संबंधी लाभ भी प्रदान कर सकते हैं।

ब्रेड निर्माण

ब्रेड बनाने में यीस्ट शर्करा का किण्वन करके कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न करता है। यह गैस आटे के भीतर फँसकर उसे फुलाती है। बेकिंग के दौरान गैस के कारण बनी संरचना स्थिर हो जाती है।

शराब एवं बीयर निर्माण

यीस्ट शर्करा का किण्वन करके एथिल अल्कोहल और CO₂ बनाता है। अंगूर जैसे फलों के रस से वाइन और अनाज के माल्ट से बीयर बनाने में किण्वन की भूमिका होती है। उत्पाद के अनुसार किण्वन और आगे की प्रसंस्करण प्रक्रिया अलग-अलग होती है।

एक पंक्ति में याद करें: दही – Lactobacillus; ब्रेड – Saccharomyces cerevisiae; स्विस चीज के छिद्र – Propionibacterium shermanii; सिरका – Acetobacter।
Topic 16

16. नाइट्रोजन स्थिरीकरण

वायुमंडल में लगभग 78 प्रतिशत नाइट्रोजन गैस पाई जाती है, लेकिन अधिकांश पौधे इसे सीधे N₂ गैस के रूप में उपयोग नहीं कर सकते। नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) वह प्रक्रिया है जिसमें वायुमंडलीय नाइट्रोजन को अमोनिया या अन्य उपयोगी नाइट्रोजन यौगिकों में बदला जाता है।

नाइट्रोजन स्थिरीकरण के प्रकार

  • जैविक स्थिरीकरण: कुछ जीवाणु और सायनोबैक्टीरिया नाइट्रोजनेज एंजाइम की सहायता से नाइट्रोजन स्थिर करते हैं।
  • वायुमंडलीय स्थिरीकरण: बिजली चमकने के दौरान नाइट्रोजन के यौगिक बन सकते हैं, जो वर्षा के साथ मिट्टी में पहुँचते हैं।
  • औद्योगिक स्थिरीकरण: हैबर-बॉश प्रक्रिया द्वारा अमोनिया का औद्योगिक उत्पादन किया जाता है।

प्रमुख नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले सूक्ष्मजीव

सूक्ष्मजीवप्रकृतिविशेषता
Rhizobiumसहजीवी जीवाणुदलहनी पौधों की जड़ ग्रंथियों में
Azotobacterमुक्तजीवी जीवाणुमिट्टी में स्वतंत्र रूप से नाइट्रोजन स्थिरीकरण
Azospirillumसहचारी/मुक्त संबंधघास एवं अनाज फसलों की जड़ों से जुड़ा
Anabaenaसायनोबैक्टीरियाकुछ प्रजातियाँ नाइट्रोजन स्थिरीकरण करती हैं
Nostocसायनोबैक्टीरियानाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाली प्रजातियाँ
Frankiaसहजीवी एक्टिनोबैक्टीरियाकुछ गैर-दलहनी पौधों की जड़ ग्रंथियों में

नाइट्रोजन चक्र की अन्य महत्त्वपूर्ण प्रक्रियाएँ

  • अमोनिकीकरण: कार्बनिक नाइट्रोजन का अमोनिया/अमोनियम में परिवर्तन।
  • नाइट्रीकरण: अमोनिया का नाइट्राइट तथा फिर नाइट्रेट में परिवर्तन।
  • विनाइट्रीकरण: नाइट्रेट का गैसीय नाइट्रोजन यौगिकों में परिवर्तन।
  • नाइट्रोजन स्थिरीकरण: वायुमंडलीय N₂ को जैविक उपयोग के योग्य रूप में बदलना।
मुख्य तथ्य: Rhizobium दलहनी पौधों की जड़ ग्रंथियों में सहजीवी रूप से नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है। Nitrosomonas अमोनिया को नाइट्राइट में और Nitrobacter नाइट्राइट को नाइट्रेट में बदलता है।
Topic 17

17. जैव उर्वरक एवं जैव कीटनाशक

जैव उर्वरक (Biofertilizers)

जैव उर्वरक ऐसे सूक्ष्मजीवी उत्पाद हैं जिनमें उपयोगी जीवित सूक्ष्मजीव होते हैं। ये पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराने, नाइट्रोजन स्थिरीकरण, फॉस्फेट घुलनशीलता या पोषक तत्वों के अवशोषण में सहायता करते हैं। जैव उर्वरक रासायनिक उर्वरकों का पूर्ण विकल्प हर परिस्थिति में नहीं होते, लेकिन संतुलित कृषि प्रणाली में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान हो सकता है।

जैव उर्वरककार्य
Rhizobiumदलहनी फसलों की जड़ ग्रंथियों में सहजीवी नाइट्रोजन स्थिरीकरण
Azotobacterमुक्तजीवी नाइट्रोजन स्थिरीकरण
Azospirillumजड़ों के साथ सहचारी संबंध; नाइट्रोजन स्थिरीकरण
Anabaena एवं Nostocसायनोबैक्टीरिया; नाइट्रोजन स्थिरीकरण
Azolla-Anabaenaधान के खेतों में जैव उर्वरक के रूप में उपयोग
माइकोराइजाफॉस्फोरस एवं जल अवशोषण में सहायता
फॉस्फेट घुलनशील जीवाणुअघुलनशील फॉस्फेट को पौधों के लिए उपलब्ध बनाने में सहायता

जैव कीटनाशक (Biopesticides)

जैव कीटनाशक वे जैविक एजेंट या उनसे प्राप्त उत्पाद हैं जिनका उपयोग हानिकारक कीटों, रोगजनकों और खरपतवारों के नियंत्रण में किया जाता है। इनका उपयोग समेकित कीट प्रबंधन (IPM) में किया जा सकता है।

जैव एजेंटउपयोग
Bacillus thuringiensis (Bt)कुछ कीट लार्वा के नियंत्रण में
Trichodermaमृदा जनित पौध रोगजनकों के जैव नियंत्रण में
NPV (Nucleopolyhedrovirus)विशिष्ट कीटों के नियंत्रण में
नीम आधारित उत्पादकीटों के नियंत्रण और वृद्धि पर प्रभाव
UPSSSC विशेष तथ्य: UPSSSC कृषि तकनीकी सहायक मुख्य परीक्षा 13 जुलाई 2025 में दलहनी पौधों के साथ सहजीवी नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले जैव उर्वरक के रूप में Rhizobium पर प्रश्न पूछा गया था। तरल Rhizobium जैव उर्वरक में न्यूनतम जीवित कोशिका संख्या से संबंधित प्रश्न भी पूछा गया था। उस प्रश्न में सही उत्तर 1 × 10⁸ CFU/ml था।
Topic 18

18. अपशिष्ट उपचार एवं बायोगैस उत्पादन

सीवेज उपचार (Sewage Treatment)

घरेलू और औद्योगिक अपशिष्ट जल में अनेक कार्बनिक पदार्थ, निलंबित कण तथा सूक्ष्मजीव हो सकते हैं। सीवेज उपचार का उद्देश्य प्रदूषकों को कम करके जल को सुरक्षित निस्तारण या उपयुक्त पुनः उपयोग के योग्य बनाना है। इसमें भौतिक, जैविक और रासायनिक प्रक्रियाएँ शामिल हो सकती हैं।

सीवेज उपचार के प्रमुख चरण

  1. प्राथमिक उपचार: स्क्रीनिंग, ग्रिट हटाना और अवसादन जैसी भौतिक प्रक्रियाओं से बड़े ठोस पदार्थ तथा निलंबित कण हटाए जाते हैं।
  2. द्वितीयक उपचार: सूक्ष्मजीव कार्बनिक पदार्थों का जैविक अपघटन करते हैं। वायवीय उपचार में सूक्ष्मजीवी फ्लॉक्स बनते हैं।
  3. सक्रिय कीचड़ प्रक्रिया: वायुयुक्त टैंक में सूक्ष्मजीव कार्बनिक पदार्थों का अपघटन करते हैं। बने फ्लॉक्स को अवसादन टैंक में अलग किया जाता है।
  4. तृतीयक उपचार: आवश्यकता के अनुसार पोषक तत्व, रोगजनक और अन्य विशिष्ट प्रदूषक हटाए जाते हैं।

BOD क्या है?

BOD का पूरा नाम Biochemical Oxygen Demand है। यह जल में उपस्थित जैव अपघटनीय कार्बनिक पदार्थों को विघटित करने के लिए सूक्ष्मजीवों द्वारा आवश्यक घुलित ऑक्सीजन की मात्रा का संकेतक है। सामान्यतः अधिक BOD का अर्थ अधिक जैव अपघटनीय कार्बनिक प्रदूषण होता है।

परीक्षा तथ्य: BOD का अधिक मान सामान्यतः जल में जैविक प्रदूषण की अधिकता का संकेत देता है।

बायोगैस उत्पादन

बायोगैस कार्बनिक पदार्थों के अवायवीय अपघटन से बनने वाली गैस है। इसमें मुख्यतः मीथेन (CH₄) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) होते हैं। इसके अतिरिक्त थोड़ी मात्रा में अन्य गैसें भी हो सकती हैं। गोबर, कृषि अपशिष्ट और जैविक कचरे का उपयोग बायोगैस उत्पादन में किया जा सकता है।

बायोगैस उत्पादन में मेथेनोजेनिक सूक्ष्मजीव महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। Methanobacterium जैसे आर्किया मीथेन निर्माण से संबंधित हैं।

घटकभूमिका
कार्बनिक अपशिष्टबायोगैस निर्माण के लिए कच्चा पदार्थ
अवायवीय सूक्ष्मजीवऑक्सीजन की अनुपस्थिति में अपघटन
मेथेनोजेन्समीथेन निर्माण
डाइजेस्टेट/स्लरीउपचार के बाद उपयोगी जैविक खाद के रूप में उपयोग
Topic 19

19. सूक्ष्मजीव एवं औद्योगिक उपयोग

सूक्ष्मजीवों का उपयोग खाद्य, औषधि, रसायन, ऊर्जा, कृषि और पर्यावरण उद्योगों में किया जाता है। नियंत्रित तापमान, pH, पोषक माध्यम और ऑक्सीजन की उपलब्धता जैसी परिस्थितियों में सूक्ष्मजीवों को बड़े स्तर पर उगाकर उपयोगी उत्पाद प्राप्त किए जाते हैं। इस प्रक्रिया में बायोरिएक्टर (Bioreactor) महत्त्वपूर्ण उपकरण है।

प्रमुख औद्योगिक उत्पाद

उत्पादसूक्ष्मजीवउपयोग
पेनिसिलिनPenicillium chrysogenumप्रतिजैविक
सिट्रिक अम्लAspergillus nigerखाद्य एवं औषधि उद्योग
एसिटिक अम्लAcetobacter acetiसिरका निर्माण
लैक्टिक अम्लLactobacillus आदिखाद्य एवं औद्योगिक उपयोग
अल्कोहलSaccharomyces cerevisiaeकिण्वन उद्योग
स्ट्रेप्टोमाइसिनStreptomyces griseusप्रतिजैविक
साइक्लोस्पोरिन-ATrichoderma polysporumअंग प्रत्यारोपण में प्रतिरक्षा-दमनकारी औषधि
स्टैटिनMonascus purpureusरक्त कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा के उत्पादन से संबंधित
एंजाइमविभिन्न जीवाणु एवं कवकखाद्य, डिटर्जेंट एवं औद्योगिक प्रक्रियाएँ

सिंगल सेल प्रोटीन (Single Cell Protein – SCP)

सूक्ष्मजीवों जैसे यीस्ट, शैवाल और कुछ जीवाणुओं के जैवभार को प्रोटीन स्रोत के रूप में उपयोग करने की अवधारणा सिंगल सेल प्रोटीन कहलाती है। यह खाद्य एवं पशु आहार के लिए वैकल्पिक प्रोटीन स्रोत के रूप में महत्त्वपूर्ण है। Chlorella, Spirulina और कुछ यीस्ट इसके उदाहरण हैं।

बायोरिएक्टर

बायोरिएक्टर एक ऐसा पात्र या प्रणाली है जिसमें सूक्ष्मजीवों अथवा कोशिकाओं को नियंत्रित परिस्थितियों में बड़े पैमाने पर विकसित किया जाता है। इसमें तापमान, pH, ऑक्सीजन, मिश्रण और पोषक तत्वों का नियंत्रण किया जाता है।

परीक्षा तथ्य: Aspergillus niger – सिट्रिक अम्ल; Monascus purpureus – स्टैटिन; Trichoderma polysporum – साइक्लोस्पोरिन-A; Saccharomyces cerevisiae – अल्कोहल एवं ब्रेड निर्माण।
Topic 20

20. प्रमुख सूक्ष्मजीव वैज्ञानिक एवं उनकी खोजें

वैज्ञानिकप्रमुख योगदान/खोजवर्ष/तथ्य
Antonie van Leeuwenhoekसूक्ष्मजीवों का प्रारंभिक अवलोकन; सूक्ष्मदर्शी से जीवाणु एवं प्रोटोजोआ देखे17वीं शताब्दी
Louis Pasteurकिण्वन, पाश्चुरीकरण एवं रोगाणु सिद्धांत में योगदान19वीं शताब्दी
Robert Kochएंथ्रेक्स, TB एवं हैजा के रोगकारकों पर कार्य; Koch के सिद्धांत19वीं शताब्दी
Edward Jennerचेचक के विरुद्ध टीकाकरण का प्रारंभिक वैज्ञानिक प्रयोग1796
Alexander Flemingपेनिसिलिन की खोज1928
Ernst Chainपेनिसिलिन के शुद्धीकरण एवं विकास में योगदान20वीं शताब्दी
Howard Floreyपेनिसिलिन के चिकित्सकीय उपयोग के विकास में योगदान20वीं शताब्दी
Dmitri Ivanovskyतंबाकू मोजेक रोग के संक्रामक कारक का अध्ययन1892
Martinus Beijerinckविषाणु की अवधारणा के विकास में योगदान1898
Sergei Winogradskyमृदा सूक्ष्मजीव विज्ञान एवं रसायन संश्लेषी पोषण के अध्ययन में योगदान19वीं–20वीं शताब्दी
Selman Waksmanस्ट्रेप्टोमाइसिन की खोज में प्रमुख भूमिका1943
Félix d'Herelleबैक्टीरियोफेज की खोज/पहचान का श्रेय1917
महत्त्वपूर्ण अंतर: एडवर्ड जेनर ने चेचक के विरुद्ध टीकाकरण की नींव रखी। लुई पाश्चर ने रेबीज और एन्थ्रेक्स के टीकों के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। दोनों वैज्ञानिकों के योगदान को आपस में न मिलाएँ।

अति महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य (One-Liner Revision)

  1. सूक्ष्मजीवों के अध्ययन को सूक्ष्मजीव विज्ञान कहते हैं।
  2. जीवाणु प्रोकैरियोटिक एवं सामान्यतः एककोशिकीय होते हैं।
  3. जीवाणु की कोशिका भित्ति में सामान्यतः पेप्टिडोग्लाइकैन पाया जाता है।
  4. जीवाणु में 70S राइबोसोम पाए जाते हैं।
  5. जीवाणुओं में सामान्य प्रजनन द्विखंडन द्वारा होता है।
  6. जीवाणु DNA का आदान-प्रदान संयुग्मन, रूपांतरण और पारगमन द्वारा हो सकता है।
  7. विषाणु अकोशिकीय संक्रामक कारक हैं।
  8. विषाणु में DNA या RNA में से एक प्रकार का आनुवंशिक पदार्थ होता है।
  9. जीवाणुभोजी जीवाणुओं को संक्रमित करने वाला विषाणु है।
  10. यीस्ट एककोशिकीय कवक है।
  11. कवक की कोशिका भित्ति में काइटिन पाया जाता है।
  12. Saccharomyces cerevisiae का उपयोग ब्रेड और अल्कोहल निर्माण में होता है।
  13. दही निर्माण में लैक्टिक अम्ल जीवाणु की भूमिका होती है।
  14. स्विस चीज के छिद्रों के निर्माण में Propionibacterium shermanii की भूमिका होती है।
  15. सिट्रिक अम्ल के औद्योगिक उत्पादन में Aspergillus niger उपयोगी है।
  16. पेनिसिलिन की खोज अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने 1928 में की।
  17. फ्लेमिंग, चेन और फ्लोरे को 1945 में नोबेल पुरस्कार मिला।
  18. मलेरिया का कारक Plasmodium है।
  19. मलेरिया का वाहक मादा Anopheles मच्छर है।
  20. डेंगू का वाहक Aedes मच्छर है।
  21. टाइफाइड का कारक Salmonella Typhi है।
  22. हैजा का कारक Vibrio cholerae है।
  23. क्षय रोग का कारक Mycobacterium tuberculosis है।
  24. एंथ्रेक्स का कारक Bacillus anthracis है।
  25. रेबीज विषाणु से होता है।
  26. एड्स का कारक HIV है।
  27. दाद सामान्यतः डर्मेटोफाइट कवक से होता है।
  28. प्रतिजैविक सामान्यतः जीवाणुओं के विरुद्ध कार्य करते हैं, विषाणुओं के विरुद्ध नहीं।
  29. Rhizobium दलहनी पौधों की जड़ ग्रंथियों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है।
  30. Azotobacter मुक्तजीवी नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाला जीवाणु है।
  31. Anabaena एवं Nostoc नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले सायनोबैक्टीरिया के उदाहरण हैं।
  32. Nitrosomonas अमोनिया को नाइट्राइट में बदलता है।
  33. Nitrobacter नाइट्राइट को नाइट्रेट में बदलता है।
  34. नाइट्रोजनेज एंजाइम जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण में कार्य करता है।
  35. बायोगैस में मुख्यतः मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड होती है।
  36. मेथेनोजेन्स मीथेन निर्माण से संबंधित आर्किया हैं।
  37. BOD का अधिक मान सामान्यतः अधिक जैविक प्रदूषण का संकेत देता है।
  38. Trichoderma जैव नियंत्रण एजेंट के रूप में उपयोगी है।
  39. Bacillus thuringiensis (Bt) जैव कीटनाशक के रूप में उपयोगी है।
  40. साइक्लोस्पोरिन-A का उत्पादन Trichoderma polysporum से संबंधित है।
  41. स्टैटिन का उत्पादन Monascus purpureus से संबंधित है।
  42. Louis Pasteur ने पाश्चुरीकरण एवं किण्वन के अध्ययन में योगदान दिया।
  43. Robert Koch ने रोगाणु विज्ञान में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।
  44. Edward Jenner ने चेचक के विरुद्ध टीकाकरण का प्रारंभिक प्रयोग किया।
  45. Félix d'Herelle को बैक्टीरियोफेज की खोज/पहचान का श्रेय दिया जाता है।

50 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

इन प्रश्नों में परीक्षा-आधारित तथ्य, अवधारणात्मक प्रश्न, वैज्ञानिकों के योगदान, रोगकारक, कृषि उपयोग तथा औद्योगिक सूक्ष्मजीव शामिल हैं। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर देखने के लिए View Answer पर क्लिक करें।

प्रश्न 1. सूक्ष्मजीवों के अध्ययन से संबंधित विज्ञान को क्या कहते हैं?
(A) आनुवंशिकी
(B) सूक्ष्मजीव विज्ञान
(C) पारिस्थितिकी
(D) भ्रूण विज्ञान
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सही उत्तर: (B) सूक्ष्मजीव विज्ञान।
सूक्ष्मजीव विज्ञान में जीवाणु, विषाणु, कवक, प्रोटोजोआ और सूक्ष्म शैवाल जैसे सूक्ष्म जैविक समूहों का अध्ययन किया जाता है।
प्रश्न 2. जीवाणु किस प्रकार की कोशिका वाले जीव हैं?
(A) यूकैरियोटिक
(B) प्रोकैरियोटिक
(C) बहुकेंद्रकीय
(D) अकोशिकीय
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सही उत्तर: (B) प्रोकैरियोटिक।
जीवाणुओं में झिल्ली से घिरा वास्तविक केंद्रक नहीं होता। उनका आनुवंशिक पदार्थ न्यूक्लॉइड क्षेत्र में रहता है।
प्रश्न 3. अधिकांश जीवाणुओं की कोशिका भित्ति का प्रमुख घटक क्या है?
(A) सेल्यूलोज
(B) काइटिन
(C) पेप्टिडोग्लाइकैन
(D) लिग्निन
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सही उत्तर: (C) पेप्टिडोग्लाइकैन।
पेप्टिडोग्लाइकैन जीवाणु कोशिका भित्ति को मजबूती प्रदान करता है। आर्किया की कोशिका भित्ति में यह सामान्यतः नहीं पाया जाता।
प्रश्न 4. जीवाणुओं में सामान्यतः किस प्रकार का प्रजनन होता है?
(A) मुकुलन
(B) द्विखंडन
(C) निषेचन
(D) बीज निर्माण
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सही उत्तर: (B) द्विखंडन।
द्विखंडन में एक जीवाणु कोशिका विभाजित होकर दो संतति कोशिकाएँ बनाती है। अनुकूल दशाओं में यह प्रक्रिया तेजी से हो सकती है।
प्रश्न 5. जीवाणु में प्रोटीन संश्लेषण का कार्य कौन करता है?
(A) लाइसोसोम
(B) राइबोसोम
(C) गॉल्जी बॉडी
(D) केंद्रिका
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सही उत्तर: (B) राइबोसोम।
जीवाणुओं में 70S राइबोसोम पाए जाते हैं। ये mRNA के निर्देशों के अनुसार प्रोटीन बनाते हैं।
प्रश्न 6. विषाणु में आनुवंशिक पदार्थ के रूप में क्या पाया जाता है?
(A) हमेशा DNA और RNA दोनों
(B) DNA या RNA में से एक
(C) केवल प्रोटीन
(D) केवल लिपिड
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सही उत्तर: (B) DNA या RNA में से एक।
विषाणु का जीनोम DNA या RNA हो सकता है। उसके चारों ओर प्रोटीन कैप्सिड पाया जाता है।
प्रश्न 7. जीवाणुओं को संक्रमित करने वाले विषाणु को क्या कहते हैं?
(A) रेट्रोवायरस
(B) बैक्टीरियोफेज
(C) राइनोवायरस
(D) एडेनोवायरस
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सही उत्तर: (B) बैक्टीरियोफेज।
बैक्टीरियोफेज जीवाणुओं को संक्रमित करने वाले विषाणु हैं। ये लाइटिक या लाइसोजेनिक चक्र अपना सकते हैं।
प्रश्न 8. विषाणु की प्रोटीनयुक्त बाहरी संरचना क्या कहलाती है?
(A) कैप्सिड
(B) न्यूक्लॉइड
(C) राइबोसोम
(D) कोशिका भित्ति
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सही उत्तर: (A) कैप्सिड।
कैप्सिड प्रोटीन से बना आवरण है जो विषाणु के आनुवंशिक पदार्थ की रक्षा करता है। कुछ विषाणुओं में इसके बाहर अतिरिक्त एनवेलप भी होता है।
प्रश्न 9. यीस्ट किस समूह का सदस्य है?
(A) जीवाणु
(B) कवक
(C) प्रोटोजोआ
(D) विषाणु
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सही उत्तर: (B) कवक।
यीस्ट एककोशिकीय यूकैरियोटिक कवक है। Saccharomyces cerevisiae इसका प्रसिद्ध उदाहरण है।
प्रश्न 10. कवक की कोशिका भित्ति में प्रमुख रूप से क्या पाया जाता है?
(A) पेप्टिडोग्लाइकैन
(B) काइटिन
(C) लिग्निन
(D) स्टार्च
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सही उत्तर: (B) काइटिन।
कवक की कोशिका भित्ति में काइटिन पाया जाता है। यह उन्हें संरचनात्मक मजबूती देता है।
प्रश्न 11. मलेरिया का रोगकारक कौन है?
(A) Salmonella
(B) Plasmodium
(C) Vibrio
(D) HIV
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सही उत्तर: (B) Plasmodium।
मलेरिया Plasmodium नामक प्रोटोजोआ परजीवी से होता है। इसका संचरण संक्रमित मादा Anopheles मच्छर से होता है।
प्रश्न 12. मलेरिया का वाहक कौन है?
(A) नर Anopheles
(B) मादा Anopheles
(C) मादा Aedes
(D) घरेलू मक्खी
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सही उत्तर: (B) मादा Anopheles।
मलेरिया परजीवी का संचरण संक्रमित मादा Anopheles मच्छर के काटने से होता है।
प्रश्न 13. डेंगू रोग किसके कारण होता है?
(A) जीवाणु
(B) कवक
(C) विषाणु
(D) प्रोटोजोआ
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सही उत्तर: (C) विषाणु।
डेंगू एक विषाणुजनित रोग है। इसका प्रमुख वाहक Aedes मच्छर है।
प्रश्न 14. हैजा रोग का कारक कौन है?
(A) Vibrio cholerae
(B) Salmonella Typhi
(C) Bacillus anthracis
(D) Plasmodium vivax
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सही उत्तर: (A) Vibrio cholerae।
हैजा दूषित जल और भोजन से फैलने वाला जीवाणुजनित रोग है। इसका कारक Vibrio cholerae है।
प्रश्न 15. टाइफाइड का रोगकारक कौन है?
(A) Salmonella Typhi
(B) Vibrio cholerae
(C) Clostridium tetani
(D) Mycobacterium leprae
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सही उत्तर: (A) Salmonella Typhi।
टाइफाइड दूषित भोजन एवं जल से फैल सकता है। इसका रोगकारक Salmonella enterica serovar Typhi है।
प्रश्न 16. क्षय रोग (TB) किस जीवाणु से होता है?
(A) Bacillus anthracis
(B) Mycobacterium tuberculosis
(C) Vibrio cholerae
(D) Escherichia coli
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सही उत्तर: (B) Mycobacterium tuberculosis।
क्षय रोग का प्रमुख कारक Mycobacterium tuberculosis है। यह सामान्यतः वायुजनित संक्रामक रोग है।
प्रश्न 17. एंथ्रेक्स रोग का कारक कौन है?
(A) Bacillus anthracis
(B) Plasmodium
(C) HIV
(D) Entamoeba histolytica
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सही उत्तर: (A) Bacillus anthracis।
एंथ्रेक्स एक गंभीर जीवाणुजनित रोग है। इसका कारक दंडाकार, बीजाणु बनाने वाला जीवाणु Bacillus anthracis है।
प्रश्न 18. एड्स का कारक कौन-सा विषाणु है?
(A) HBV
(B) HIV
(C) HPV
(D) TMV
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सही उत्तर: (B) HIV।
HIV शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की CD4 कोशिकाओं को प्रभावित करता है। अनुपचारित संक्रमण उन्नत अवस्था में एड्स का कारण बन सकता है।
प्रश्न 19. दाद (Ringworm) सामान्यतः किसके कारण होता है?
(A) विषाणु
(B) जीवाणु
(C) कवक
(D) प्रोटोजोआ
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सही उत्तर: (C) कवक।
दाद त्वचा का कवकीय संक्रमण है। इसके सामान्य कारक Trichophyton, Microsporum और Epidermophyton जैसे डर्मेटोफाइट कवक हैं।
प्रश्न 20. पेनिसिलिन की खोज किसने की?
(A) लुई पाश्चर
(B) रॉबर्ट कोच
(C) अलेक्जेंडर फ्लेमिंग
(D) एडवर्ड जेनर
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सही उत्तर: (C) अलेक्जेंडर फ्लेमिंग।
फ्लेमिंग ने 1928 में Penicillium कवक के आसपास जीवाणु वृद्धि रुकने का अवलोकन किया और पेनिसिलिन की खोज की।
प्रश्न 21. पेनिसिलिन की खोज किस वर्ष हुई थी?
(A) 1796
(B) 1885
(C) 1928
(D) 1945
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सही उत्तर: (C) 1928।
पेनिसिलिन की खोज अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने 1928 में की थी। 1945 में फ्लेमिंग, चेन और फ्लोरे को नोबेल पुरस्कार मिला।
प्रश्न 22. पेनिसिलिन किस सूक्ष्मजीव से संबंधित है?
(A) Penicillium
(B) Rhizobium
(C) Lactobacillus
(D) Plasmodium
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सही उत्तर: (A) Penicillium।
पेनिसिलिन Penicillium कवक से प्राप्त प्रतिजैविक है। औद्योगिक उत्पादन में Penicillium chrysogenum का उपयोग किया गया है।
प्रश्न 23. पेनिसिलिन की खोज और विकास के लिए नोबेल पुरस्कार किस वर्ष दिया गया?
(A) 1935
(B) 1940
(C) 1945
(D) 1950
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सही उत्तर: (C) 1945।
अलेक्जेंडर फ्लेमिंग, अर्न्स्ट चेन और हॉवर्ड फ्लोरे को 1945 में चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।
प्रश्न 24. प्रतिजैविक सामान्यतः किसके विरुद्ध प्रभावी होते हैं?
(A) सभी विषाणु
(B) संवेदनशील जीवाणु
(C) सभी परजीवी
(D) सभी एलर्जी
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सही उत्तर: (B) संवेदनशील जीवाणु।
प्रतिजैविक जीवाणुओं के विशिष्ट जैविक तंत्रों पर कार्य करते हैं। सामान्य एंटीबायोटिक विषाणुजनित रोगों का उपचार नहीं करते।
प्रश्न 25. दही निर्माण में मुख्य भूमिका किसकी होती है?
(A) Lactobacillus
(B) Plasmodium
(C) Penicillium
(D) Rhizobium
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सही उत्तर: (A) Lactobacillus।
लैक्टिक अम्ल जीवाणु दूध की लैक्टोज शर्करा को लैक्टिक अम्ल में बदलते हैं, जिससे दूध जमकर दही बनता है।
प्रश्न 26. ब्रेड को फुलाने में कौन-सी गैस सहायक होती है?
(A) ऑक्सीजन
(B) नाइट्रोजन
(C) कार्बन डाइऑक्साइड
(D) हाइड्रोजन
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सही उत्तर: (C) कार्बन डाइऑक्साइड।
यीस्ट शर्करा का किण्वन करके CO₂ उत्पन्न करता है। गैस आटे में फँसकर उसे फुलाती है।
प्रश्न 27. ब्रेड निर्माण में प्रयुक्त प्रमुख यीस्ट कौन है?
(A) Saccharomyces cerevisiae
(B) Rhizobium leguminosarum
(C) Vibrio cholerae
(D) Plasmodium vivax
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सही उत्तर: (A) Saccharomyces cerevisiae।
यह एककोशिकीय कवक है जो शर्करा का किण्वन करके अल्कोहल और कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है।
प्रश्न 28. स्विस चीज में छिद्र बनने का प्रमुख कारण कौन-सा जीवाणु है?
(A) Lactobacillus acidophilus
(B) Propionibacterium shermanii
(C) Rhizobium
(D) Nitrobacter
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सही उत्तर: (B) Propionibacterium shermanii।
यह कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न करता है, जिससे स्विस चीज में विशिष्ट छिद्र या आँखें बनती हैं।
प्रश्न 29. सिरका निर्माण में किस जीवाणु की भूमिका होती है?
(A) Acetobacter
(B) Rhizobium
(C) Nitrosomonas
(D) Clostridium tetani
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सही उत्तर: (A) Acetobacter।
Acetobacter अल्कोहल का ऑक्सीकरण करके एसिटिक अम्ल बनाता है। एसिटिक अम्ल सिरके का प्रमुख अम्ल है।
प्रश्न 30. दलहनी पौधों की जड़ ग्रंथियों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण कौन करता है?
(A) Nitrobacter
(B) Rhizobium
(C) Lactobacillus
(D) Acetobacter
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सही उत्तर: (B) Rhizobium।
Rhizobium दलहनी पौधों की जड़ ग्रंथियों में सहजीवी रूप से रहता है और वायुमंडलीय नाइट्रोजन को उपयोगी रूप में बदलता है।
प्रश्न 31. मुक्तजीवी नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाला जीवाणु कौन है?
(A) Azotobacter
(B) Salmonella Typhi
(C) Vibrio cholerae
(D) Staphylococcus aureus
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सही उत्तर: (A) Azotobacter।
Azotobacter मिट्टी में स्वतंत्र रूप से रहने वाला नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाला जीवाणु है।
प्रश्न 32. नाइट्रोजन स्थिरीकरण में कौन-सा एंजाइम कार्य करता है?
(A) एमाइलेज
(B) नाइट्रोजनेज
(C) पेप्सिन
(D) लाइपेज
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सही उत्तर: (B) नाइट्रोजनेज।
नाइट्रोजनेज एंजाइम वायुमंडलीय नाइट्रोजन को अमोनिया में अपचयित करने की प्रक्रिया में आवश्यक है।
प्रश्न 33. अमोनिया को नाइट्राइट में बदलने वाला जीवाणु कौन है?
(A) Nitrobacter
(B) Nitrosomonas
(C) Rhizobium
(D) Azotobacter
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सही उत्तर: (B) Nitrosomonas।
Nitrosomonas नाइट्रीकरण की पहली अवस्था में अमोनिया/अमोनियम को नाइट्राइट में बदलता है।
प्रश्न 34. नाइट्राइट को नाइट्रेट में बदलने वाला जीवाणु कौन है?
(A) Nitrobacter
(B) Nitrosomonas
(C) Lactobacillus
(D) Clostridium
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सही उत्तर: (A) Nitrobacter।
Nitrobacter नाइट्राइट को नाइट्रेट में ऑक्सीकृत करता है। यह नाइट्रीकरण की दूसरी प्रमुख अवस्था है।
प्रश्न 35. बायोगैस में मुख्य ज्वलनशील गैस कौन-सी होती है?
(A) ऑक्सीजन
(B) मीथेन
(C) नाइट्रोजन
(D) क्लोरीन
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सही उत्तर: (B) मीथेन।
बायोगैस में मीथेन मुख्य ज्वलनशील घटक है। इसके साथ कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य गैसें भी उपस्थित हो सकती हैं।
प्रश्न 36. बायोगैस निर्माण में मीथेन उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीव किस समूह के हैं?
(A) मेथेनोजेन्स
(B) लैक्टोबैसिलस
(C) प्लाज्मोडियम
(D) पेनिसिलियम
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सही उत्तर: (A) मेथेनोजेन्स।
मेथेनोजेन्स आर्किया समूह के सूक्ष्मजीव हैं जो अवायवीय परिस्थितियों में मीथेन निर्माण करते हैं।
प्रश्न 37. BOD का पूरा नाम क्या है?
(A) Biological Oxygen Density
(B) Biochemical Oxygen Demand
(C) Bacterial Oxygen Demand
(D) Biotic Organic Density
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सही उत्तर: (B) Biochemical Oxygen Demand।
BOD जल में जैव अपघटनीय कार्बनिक पदार्थों को विघटित करने के लिए सूक्ष्मजीवों द्वारा आवश्यक ऑक्सीजन का संकेतक है।
प्रश्न 38. सिट्रिक अम्ल के औद्योगिक उत्पादन में किस कवक का उपयोग होता है?
(A) Aspergillus niger
(B) Rhizopus stolonifer
(C) Penicillium notatum
(D) Puccinia graminis
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सही उत्तर: (A) Aspergillus niger।
Aspergillus niger का औद्योगिक उपयोग सिट्रिक अम्ल के उत्पादन में किया जाता है।
प्रश्न 39. साइक्लोस्पोरिन-A किस सूक्ष्मजीव से प्राप्त किया जाता है?
(A) Trichoderma polysporum
(B) Lactobacillus
(C) Rhizobium
(D) Nitrobacter
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सही उत्तर: (A) Trichoderma polysporum।
साइक्लोस्पोरिन-A एक प्रतिरक्षा-दमनकारी पदार्थ है, जिसका उपयोग अंग प्रत्यारोपण के बाद प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने में किया जाता है।
प्रश्न 40. स्टैटिन के उत्पादन से कौन-सा कवक संबंधित है?
(A) Monascus purpureus
(B) Penicillium roqueforti
(C) Rhizopus
(D) Aspergillus flavus
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सही उत्तर: (A) Monascus purpureus।
Monascus purpureus से प्राप्त स्टैटिन समूह के पदार्थ कोलेस्ट्रॉल निर्माण से संबंधित एंजाइम पर प्रभाव डालते हैं।
प्रश्न 41. चेचक के विरुद्ध टीकाकरण का प्रारंभिक वैज्ञानिक प्रयोग किसने किया?
(A) एडवर्ड जेनर
(B) लुई पाश्चर
(C) रॉबर्ट कोच
(D) अलेक्जेंडर फ्लेमिंग
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सही उत्तर: (A) एडवर्ड जेनर।
एडवर्ड जेनर ने 1796 में चेचक के विरुद्ध टीकाकरण का ऐतिहासिक प्रयोग किया।
प्रश्न 42. पाश्चुरीकरण प्रक्रिया किस वैज्ञानिक से संबंधित है?
(A) रॉबर्ट कोच
(B) लुई पाश्चर
(C) जेनर
(D) फ्लेमिंग
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सही उत्तर: (B) लुई पाश्चर।
पाश्चुरीकरण नियंत्रित ताप उपचार की प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य खाद्य पदार्थों में रोगजनक एवं खराबी उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीवों को कम करना है।
प्रश्न 43. TB के रोगकारक की पहचान से किस वैज्ञानिक का नाम प्रमुख रूप से जुड़ा है?
(A) रॉबर्ट कोच
(B) जेनर
(C) फ्लेमिंग
(D) बेइजेरिंक
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सही उत्तर: (A) रॉबर्ट कोच।
रॉबर्ट कोच ने 1882 में TB के जीवाणु की पहचान की। रोगाणु विज्ञान के विकास में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान है।
प्रश्न 44. तंबाकू मोजेक रोग के विषाणु संबंधी अध्ययन में 1892 में किस वैज्ञानिक का योगदान था?
(A) दिमित्री इवानोवस्की
(B) लुई पाश्चर
(C) रॉबर्ट कोच
(D) फ्लोरे
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सही उत्तर: (A) दिमित्री इवानोवस्की।
इवानोवस्की ने तंबाकू मोजेक रोग के संक्रामक कारक का अध्ययन किया। इस कार्य ने विषाणु विज्ञान के विकास की नींव रखी।
प्रश्न 45. जैव कीटनाशक Bt किस जीवाणु से संबंधित है?
(A) Bacillus thuringiensis
(B) Bacillus anthracis
(C) Lactobacillus
(D) Nitrosomonas
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सही उत्तर: (A) Bacillus thuringiensis।
Bt एक जीवाणु है जिसके कुछ प्रोटीन विशिष्ट कीट लार्वा के लिए विषाक्त होते हैं। इसका उपयोग जैविक कीट नियंत्रण में किया जाता है।
प्रश्न 46. निम्न में से कौन-सा जीवाणु दलहनी पौधों की जड़ों में सहजीवी रूप से पाया जाता है?
(A) Rhizobium
(B) Vibrio cholerae
(C) Salmonella Typhi
(D) Clostridium tetani
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सही उत्तर: (A) Rhizobium।
Rhizobium दलहनी पौधों की जड़ों में ग्रंथियाँ बनाकर सहजीवी संबंध स्थापित करता है और नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सहायता करता है।
प्रश्न 47. जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले सायनोबैक्टीरिया का उदाहरण कौन है?
(A) Anabaena
(B) Plasmodium
(C) Amoeba
(D) Penicillium
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सही उत्तर: (A) Anabaena।
Anabaena एक सायनोबैक्टीरिया है। इसकी कुछ प्रजातियाँ विशेष कोशिकाओं (हेटेरोसिस्ट) की सहायता से नाइट्रोजन स्थिरीकरण करती हैं।
प्रश्न 48. जैव उर्वरक का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
(A) मिट्टी को पूर्णतः निर्जीव बनाना
(B) पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराने में सूक्ष्मजीवों की सहायता लेना
(C) सभी कीटों को बढ़ाना
(D) मिट्टी की जलधारण क्षमता समाप्त करना
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सही उत्तर: (B) पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराने में सूक्ष्मजीवों की सहायता लेना।
जैव उर्वरक नाइट्रोजन स्थिरीकरण, फॉस्फेट घुलनशीलता और पोषक तत्व अवशोषण में सहायता कर सकते हैं।
प्रश्न 49. निम्न में से किसका उपयोग जैव नियंत्रण एजेंट के रूप में किया जाता है?
(A) Trichoderma
(B) HIV
(C) Plasmodium
(D) Salmonella Typhi
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सही उत्तर: (A) Trichoderma।
Trichoderma एक उपयोगी कवक है जिसका प्रयोग कई मृदा जनित पौध रोगजनकों के जैव नियंत्रण में किया जाता है।
प्रश्न 50. जीवाणुभोजी के लाइटिक चक्र के अंत में सामान्यतः क्या होता है?
(A) जीवाणु कोशिका का विघटन
(B) जीवाणु का पौधा बनना
(C) विषाणु का कवक में बदलना
(D) जीवाणु का निषेचन
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सही उत्तर: (A) जीवाणु कोशिका का विघटन।
लाइटिक चक्र में नए विषाणु कण बनते हैं और अंत में जीवाणु कोशिका टूट जाती है। इससे नए बैक्टीरियोफेज बाहर निकलते हैं।
प्रश्नों के स्रोत एवं वर्गीकरण संबंधी नोट: ऊपर दिए गए प्रश्नों में अवधारणात्मक एवं परीक्षा-पैटर्न आधारित मौलिक अभ्यास प्रश्न शामिल हैं। UPSSSC कृषि तकनीकी सहायक मुख्य परीक्षा 13 जुलाई 2025 के Rhizobium एवं जैव उर्वरक संबंधी प्रश्न तथा UP SI 2021 के एंथ्रेक्स संबंधी प्रश्न वास्तविक पूर्व-परीक्षा संदर्भ हैं। शेष प्रश्नों को वास्तविक PYQ बताकर प्रस्तुत नहीं किया गया है।

अंतिम त्वरित पुनरावृत्ति

जीवाणु: प्रोकैरियोटिक, पेप्टिडोग्लाइकैन कोशिका भित्ति, 70S राइबोसोम, द्विखंडन।

विषाणु: अकोशिकीय, DNA या RNA, कैप्सिड, अनिवार्य अंतःकोशिकीय परजीवी।

कवक: यूकैरियोटिक, काइटिन कोशिका भित्ति, यीस्ट एककोशिकीय।

रोग: मलेरिया–Plasmodium; हैजा–Vibrio; टाइफाइड–Salmonella Typhi; TB–Mycobacterium tuberculosis; एंथ्रेक्स–Bacillus anthracis।

औषधि: पेनिसिलिन–Penicillium; स्ट्रेप्टोमाइसिन–Streptomyces griseus।

खाद्य: दही–Lactobacillus; ब्रेड–Saccharomyces; स्विस चीज–Propionibacterium।

कृषि: Rhizobium–दलहनी पौधे; Azotobacter–मुक्तजीवी; Anabaena–सायनोबैक्टीरिया।

पर्यावरण: BOD–जैविक प्रदूषण; मेथेनोजेन्स–बायोगैस; Trichoderma–जैव नियंत्रण।

संदर्भ एवं अध्ययन सामग्री

इस अध्याय की वैज्ञानिक अवधारणाओं, सूक्ष्मजीवों के उपयोग, जैव उर्वरकों, अपशिष्ट उपचार और औद्योगिक उत्पादों के अध्ययन के लिए निम्नलिखित प्रामाणिक स्रोत उपयोगी हैं।

  • NCERT जीव विज्ञान, कक्षा 12: Microbes in Human Welfare – सूक्ष्मजीवों के घरेलू एवं औद्योगिक उपयोग, सीवेज उपचार, बायोगैस, जैव नियंत्रण और जैव उर्वरक।
  • NCERT जीव विज्ञान, कक्षा 11: Biological Classification – जीवाणु, प्रोटिस्टा एवं कवक के मूल वर्गीकरण संबंधी अध्ययन।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO): टीकाकरण, संक्रामक रोग एवं प्रतिजैविक प्रतिरोध संबंधी वैज्ञानिक जानकारी।
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR): जैव उर्वरक, कृषि सूक्ष्मजीव एवं टिकाऊ कृषि संबंधी जानकारी।
  • भारत सरकार का स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय: राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी।

नोट: रोगों के उपचार, टीकाकरण कार्यक्रम और औषधियों के उपयोग में समय के साथ दिशा-निर्देश बदल सकते हैं। वास्तविक स्वास्थ्य निर्णय के लिए वर्तमान सरकारी एवं चिकित्सकीय दिशा-निर्देश देखें।

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