अध्याय 19. मानव स्वास्थ्य, रोग एवं पोषण विज्ञान
Human Health and Diseases
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1. स्वास्थ्य की परिभाषा एवं अवधारणा (Concept of Health)
स्वास्थ्य केवल रोग या शारीरिक कमजोरी का अभाव नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कुशलता की व्यापक अवस्था है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के संविधान में स्वास्थ्य को पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण की अवस्था के रूप में परिभाषित किया गया है, न कि केवल रोग या दुर्बलता की अनुपस्थिति के रूप में।
स्वास्थ्य एक बहुआयामी अवधारणा है। किसी व्यक्ति का स्वस्थ होना उसके शरीर की कार्यक्षमता, मानसिक संतुलन, सामाजिक संबंधों, पोषण, स्वच्छता, पर्यावरण तथा स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर निर्भर करता है। आधुनिक स्वास्थ्य अवधारणा में मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, जीवन की गुणवत्ता और रोगों की रोकथाम को भी विशेष महत्त्व दिया जाता है।
स्वास्थ्य के प्रमुख आयाम
- शारीरिक स्वास्थ्य: शरीर के अंगों एवं तंत्रों का सामान्य रूप से कार्य करना, पर्याप्त ऊर्जा और रोगों से लड़ने की क्षमता।
- मानसिक स्वास्थ्य: तनाव का सामना करने, सोचने, निर्णय लेने और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने की क्षमता।
- सामाजिक स्वास्थ्य: परिवार, समुदाय और समाज के साथ स्वस्थ संबंध स्थापित करने की क्षमता।
- भावनात्मक स्वास्थ्य: अपनी भावनाओं को समझना और संतुलित ढंग से व्यक्त करना।
- पर्यावरणीय स्वास्थ्य: स्वच्छ जल, वायु, सुरक्षित आवास और स्वस्थ वातावरण की उपलब्धता।
2. स्वास्थ्य के निर्धारक तत्व (Determinants of Health)
स्वास्थ्य के निर्धारक वे व्यक्तिगत, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय कारक हैं जो किसी व्यक्ति या समुदाय के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। केवल अस्पताल या दवाओं की उपलब्धता से स्वास्थ्य सुनिश्चित नहीं होता। स्वच्छ पेयजल, पोषण, शिक्षा, आय, रोजगार, आवास, स्वच्छता और सामाजिक सुरक्षा भी स्वास्थ्य के महत्त्वपूर्ण निर्धारक हैं।
प्रमुख निर्धारक
| निर्धारक | स्वास्थ्य पर प्रभाव |
|---|---|
| आनुवंशिकता | कुछ रोगों एवं शारीरिक विशेषताओं की प्रवृत्ति को प्रभावित करती है। |
| पोषण | शरीर की वृद्धि, प्रतिरक्षा और सामान्य कार्यों के लिए आवश्यक। |
| स्वच्छता | संक्रामक रोगों के प्रसार को कम करती है। |
| स्वच्छ पेयजल | जलजनित रोगों जैसे हैजा और टाइफाइड की रोकथाम में सहायक। |
| शिक्षा | स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता एवं सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाती है। |
| आय एवं रोजगार | भोजन, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच को प्रभावित करते हैं। |
| पर्यावरण | वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, तापमान और आवासीय परिस्थितियाँ स्वास्थ्य पर प्रभाव डालती हैं। |
| स्वास्थ्य सेवाएँ | रोकथाम, निदान, उपचार, पुनर्वास और टीकाकरण उपलब्ध कराती हैं। |
| जीवनशैली | व्यायाम, नींद, नशीले पदार्थों का सेवन और भोजन संबंधी आदतें स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। |
3. रोगों का वर्गीकरण (Classification of Diseases)
रोग शरीर की सामान्य संरचना या कार्य में उत्पन्न ऐसी असामान्य स्थिति है जो व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। रोगों को उनके कारण, संक्रमण की क्षमता, अवधि और प्रभावित अंगों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
कारण के आधार पर रोग
- संक्रामक रोग (Communicable Diseases)
- असंक्रामक रोग (Non-communicable Diseases)
- आनुवंशिक रोग (Genetic Diseases)
- पोषण-अभावजन्य रोग (Deficiency Diseases)
- एलर्जी एवं स्वप्रतिरक्षी रोग (Allergic and Autoimmune Diseases)
- व्यावसायिक एवं पर्यावरणीय रोग।
अवधि के आधार पर
- तीव्र रोग (Acute): कम अवधि में शुरू होकर अपेक्षाकृत कम समय तक रहने वाले रोग, जैसे सामान्य सर्दी-जुकाम।
- दीर्घकालिक रोग (Chronic): लंबे समय तक रहने वाले रोग, जैसे मधुमेह और उच्च रक्तचाप।
4. संक्रामक एवं असंक्रामक रोग
संक्रामक रोग वे रोग हैं जो रोगजनक सूक्ष्मजीवों या परजीवियों के कारण उत्पन्न होते हैं और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से फैल सकते हैं। इनके प्रसार में वायु, जल, भोजन, रक्त, शारीरिक संपर्क, यौन संपर्क और वाहक जीवों की भूमिका हो सकती है।
असंक्रामक रोग सामान्यतः एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रामक तरीके से नहीं फैलते। इनमें आनुवंशिकता, जीवनशैली, पर्यावरण, पोषण, आयु और चयापचय संबंधी कारण महत्त्वपूर्ण होते हैं।
| आधार | संक्रामक रोग | असंक्रामक रोग |
|---|---|---|
| कारण | जीवाणु, विषाणु, कवक, प्रोटोजोआ, कृमि आदि | आनुवंशिक, चयापचय, जीवनशैली, पर्यावरण आदि |
| प्रसार | एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैल सकते हैं | सामान्यतः व्यक्ति से व्यक्ति में नहीं फैलते |
| उदाहरण | TB, मलेरिया, डेंगू, हैजा | मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कैंसर |
| रोकथाम | टीकाकरण, स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण | स्वस्थ जीवनशैली, जाँच, जोखिम कारकों का नियंत्रण |
5. जीवाणु जनित रोग (Bacterial Diseases)
जीवाणु (Bacteria) सूक्ष्म, एककोशिकीय प्रोकैरियोटिक जीव होते हैं। कुछ जीवाणु मानव शरीर के लिए उपयोगी हैं, जबकि कुछ रोग उत्पन्न करते हैं। रोगजनक जीवाणु शरीर में प्रवेश करके विषाक्त पदार्थ उत्पन्न कर सकते हैं या ऊतकों को सीधे नुकसान पहुँचा सकते हैं।
| रोग | रोगजनक जीवाणु | प्रमुख लक्षण/तथ्य |
|---|---|---|
| तपेदिक (TB) | Mycobacterium tuberculosis | लगातार खाँसी, बुखार, वजन घटना, रात में पसीना। |
| टाइफाइड | Salmonella Typhi | लंबे समय तक बुखार, कमजोरी, पेट संबंधी लक्षण। |
| हैजा (Cholera) | Vibrio cholerae | अत्यधिक पानी जैसे दस्त और गंभीर निर्जलीकरण। |
| डिप्थीरिया | Corynebacterium diphtheriae | गले में झिल्ली बनना, साँस लेने में कठिनाई। |
| काली खाँसी | Bordetella pertussis | तेज दौरे जैसी खाँसी। |
| टिटनेस | Clostridium tetani | मांसपेशियों में अकड़न एवं ऐंठन। |
| प्लेग | Yersinia pestis | बुखार, लिम्फ नोड में सूजन; पिस्सू से संक्रमण फैल सकता है। |
| कुष्ठ रोग | Mycobacterium leprae | त्वचा पर संवेदना कम होने वाले धब्बे एवं तंत्रिका प्रभावित होना। |
| गोनोरिया | Neisseria gonorrhoeae | यौन संचारित संक्रमण; जनन-मूत्र मार्ग प्रभावित हो सकता है। |
| सिफिलिस | Treponema pallidum | यौन संचारित संक्रमण; उपचार न होने पर कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। |
| जीवाणुजनित निमोनिया | Streptococcus pneumoniae सहित कई जीवाणु | खाँसी, बुखार, साँस लेने में कठिनाई। |
जीवाणु रोगों की रोकथाम
- स्वच्छ पेयजल और सुरक्षित भोजन का उपयोग।
- हाथों की नियमित सफाई।
- टीकाकरण द्वारा रोके जा सकने वाले रोगों के टीके लगवाना।
- खाँसी और छींक के समय श्वसन स्वच्छता अपनाना।
- संक्रमण की स्थिति में उचित चिकित्सकीय जाँच और उपचार।
- एंटीबायोटिक का उपयोग केवल चिकित्सकीय सलाह से करना।
6. विषाणु जनित रोग (Viral Diseases)
विषाणु (Virus) अकोशिकीय संक्रामक कण होते हैं। इनमें आनुवंशिक पदार्थ DNA या RNA में से कोई एक तथा उसके चारों ओर प्रोटीन आवरण होता है। कुछ विषाणुओं में बाहरी लिपिड आवरण भी पाया जाता है। विषाणु अपनी प्रतिकृति बनाने के लिए जीवित पोषक कोशिका पर निर्भर होते हैं।
| रोग | रोगजनक विषाणु | प्रमुख तथ्य |
|---|---|---|
| डेंगू | Dengue virus | Aedes मच्छर से फैलता है। |
| चिकनगुनिया | Chikungunya virus | Aedes मच्छर से फैलता है; जोड़ों में तेज दर्द हो सकता है। |
| पोलियो | Poliovirus | मुख्यतः मल-मुख मार्ग से संक्रमण; कुछ मामलों में पक्षाघात। |
| एड्स | HIV | प्रतिरक्षा तंत्र की CD4 कोशिकाओं को प्रभावित करता है। |
| रेबीज | Rabies virus | संक्रमित स्तनधारी के काटने या लार के संपर्क से संक्रमण। |
| खसरा | Measles virus | अत्यधिक संक्रामक श्वसन संक्रमण। |
| चेचक (Smallpox) | Variola virus | टीकाकरण के कारण विश्व से उन्मूलित रोग। |
| इन्फ्लुएंजा | Influenza virus | श्वसन तंत्र का संक्रमण। |
| हेपेटाइटिस B | Hepatitis B virus | यकृत को प्रभावित करता है; रक्त एवं शारीरिक द्रवों से फैल सकता है। |
| हेपेटाइटिस A | Hepatitis A virus | मुख्यतः दूषित भोजन एवं जल से फैलता है। |
| चिकनपॉक्स | Varicella-zoster virus | फफोलेदार चकत्ते एवं बुखार। |
| COVID-19 | SARS-CoV-2 | श्वसन संक्रमण। |
7. प्रोटोजोआ जनित रोग (Protozoan Diseases)
प्रोटोजोआ सूक्ष्म, एककोशिकीय यूकेरियोटिक जीव होते हैं। कुछ प्रोटोजोआ परजीवी के रूप में मानव शरीर में प्रवेश करके रोग उत्पन्न करते हैं। इनके जीवन चक्र में एक या अधिक पोषक तथा वाहक जीव शामिल हो सकते हैं।
| रोग | रोगजनक | वाहक/प्रसार | मुख्य तथ्य |
|---|---|---|---|
| मलेरिया | Plasmodium | मादा Anopheles मच्छर | लाल रक्त कोशिकाएँ प्रभावित होती हैं। |
| अमीबायसिस | Entamoeba histolytica | दूषित भोजन एवं जल | आँतों में संक्रमण, पेचिश। |
| कालाजार | Leishmania donovani | सैंडफ्लाई (बालू मक्खी) | बुखार, प्लीहा एवं यकृत का बढ़ना। |
| नींद रोग | Trypanosoma brucei | Tsetse मक्खी | अफ्रीका में पाया जाने वाला रोग। |
| जियार्डियासिस | Giardia duodenalis | दूषित जल एवं भोजन | दस्त, पेट फूलना एवं अवशोषण में समस्या। |
| टॉक्सोप्लाज्मोसिस | Toxoplasma gondii | दूषित भोजन, मिट्टी एवं बिल्ली के मल से संपर्क आदि | गर्भावस्था में संक्रमण विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण। |
8. कवक जनित रोग (Fungal Diseases)
कवक (Fungi) यूकेरियोटिक जीव हैं। कुछ कवक मानव शरीर की त्वचा, नाखून, बाल, श्लेष्म झिल्लियों या आंतरिक अंगों में संक्रमण उत्पन्न कर सकते हैं। कवक संक्रमण को सामान्यतः माइकोसिस (Mycosis) कहा जाता है।
| रोग | कारक कवक/समूह | प्रभावित भाग |
|---|---|---|
| दाद (Ringworm) | Trichophyton, Microsporum, Epidermophyton | त्वचा, बाल एवं नाखून। |
| कैंडिडायसिस | Candida albicans सहित Candida प्रजातियाँ | मुख, त्वचा, जननांग एवं अन्य भाग। |
| एस्परजिलोसिस | Aspergillus प्रजातियाँ | मुख्यतः फेफड़े; कमजोर प्रतिरक्षा में गंभीर हो सकता है। |
| क्रिप्टोकोकोसिस | Cryptococcus neoformans आदि | फेफड़े एवं मस्तिष्क की झिल्लियाँ प्रभावित हो सकती हैं। |
त्वचा के कवक संक्रमण गर्म एवं नम वातावरण में अधिक फैल सकते हैं। व्यक्तिगत स्वच्छता, त्वचा को सूखा रखना, संक्रमित वस्तुओं को साझा न करना और आवश्यकता के अनुसार चिकित्सकीय उपचार रोकथाम में सहायक हैं।
9. कृमि जनित रोग (Helminthic Diseases)
कृमि (Helminths) बहुकोशिकीय परजीवी होते हैं। ये मानव की आँतों, रक्त, लसीका तंत्र या अन्य ऊतकों में रहकर रोग उत्पन्न कर सकते हैं। इनके अंडे या लार्वा दूषित भोजन, जल, मिट्टी अथवा वाहक जीवों के माध्यम से शरीर में पहुँच सकते हैं।
| रोग | कारक कृमि | प्रसार/विशेषता |
|---|---|---|
| एस्कारियासिस | Ascaris lumbricoides | दूषित भोजन एवं मिट्टी से अंडों का प्रवेश। |
| फाइलेरिया | Wuchereria bancrofti, Brugia malayi | मच्छरों द्वारा फैलने वाला परजीवी रोग; हाथ-पैर में सूजन हो सकती है। |
| टीनियासिस | Taenia solium, Taenia saginata | अधपके संक्रमित सूअर या गोमांस से संक्रमण हो सकता है। |
| हुकवर्म संक्रमण | Ancylostoma duodenale, Necator americanus | लार्वा त्वचा, विशेषकर नंगे पैर, से प्रवेश कर सकते हैं। |
| पिनवर्म संक्रमण | Enterobius vermicularis | रात में गुदा के आसपास खुजली। |
| शिस्टोसोमियासिस | Schistosoma प्रजातियाँ | संक्रमित मीठे पानी के संपर्क से लार्वा त्वचा में प्रवेश कर सकते हैं। |
10. मलेरिया, डेंगू एवं चिकनगुनिया
मलेरिया (Malaria)
मलेरिया एक परजीवी जनित रोग है जो Plasmodium नामक प्रोटोजोआ के कारण होता है। इसका संक्रमण संक्रमित मादा Anopheles मच्छर के काटने से मनुष्य में पहुँचता है। मलेरिया परजीवी पहले यकृत की कोशिकाओं में और फिर लाल रक्त कोशिकाओं में विकसित होता है। लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने से बुखार के दौरे तथा अन्य लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं।
मलेरिया की प्रमुख प्रजातियाँ
- Plasmodium vivax
- Plasmodium falciparum
- Plasmodium malariae
- Plasmodium ovale
- Plasmodium knowlesi
Plasmodium falciparum गंभीर मलेरिया का कारण बन सकता है। P. vivax और P. ovale में यकृत में निष्क्रिय अवस्था (Hypnozoite) के कारण दोबारा संक्रमण यानी relapse हो सकता है।
मलेरिया के प्रमुख लक्षण
- ठंड लगकर बुखार आना।
- तेज बुखार के बाद पसीना आना।
- सिरदर्द एवं शरीर में दर्द।
- कमजोरी एवं थकान।
- गंभीर स्थिति में मस्तिष्क, गुर्दे या अन्य अंग प्रभावित हो सकते हैं।
मलेरिया का जीवन चक्र – परीक्षा तथ्य
मलेरिया परजीवी का लैंगिक प्रजनन मादा Anopheles मच्छर में होता है, इसलिए मच्छर इसका Definitive Host होता है। मानव में अलैंगिक वृद्धि होती है, इसलिए मानव Intermediate Host होता है। संक्रमित मच्छर के काटने पर स्पोरोजोइट मानव शरीर में प्रवेश करते हैं।
डेंगू (Dengue)
डेंगू एक विषाणुजनित रोग है जो Dengue virus के कारण होता है। यह मुख्यतः संक्रमित मादा Aedes aegypti मच्छर के काटने से फैलता है। Aedes albopictus भी डेंगू का वाहक हो सकता है।
डेंगू के सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, आँखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते और कमजोरी शामिल हैं। कुछ रोगियों में गंभीर डेंगू विकसित हो सकता है, जिसमें रक्तस्राव, प्लाज्मा रिसाव और शॉक जैसी जटिलताएँ हो सकती हैं।
डेंगू में चेतावनी संकेत
- पेट में तेज दर्द।
- लगातार उल्टी।
- नाक या मसूड़ों से रक्तस्राव।
- अत्यधिक सुस्ती या बेचैनी।
- साँस लेने में कठिनाई या शरीर में तरल का असामान्य जमाव।
चिकनगुनिया (Chikungunya)
चिकनगुनिया Chikungunya virus के कारण होता है और Aedes मच्छरों द्वारा फैलता है। इसमें अचानक तेज बुखार तथा जोड़ों में तीव्र दर्द प्रमुख लक्षण हैं। कुछ रोगियों में जोड़ों का दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है।
| आधार | मलेरिया | डेंगू | चिकनगुनिया |
|---|---|---|---|
| रोगजनक | Plasmodium | Dengue virus | Chikungunya virus |
| वाहक | मादा Anopheles | Aedes मच्छर | Aedes मच्छर |
| रोग का प्रकार | प्रोटोजोआ जनित | विषाणुजनित | विषाणुजनित |
| विशेष लक्षण | बुखार के दौरे | तेज बुखार, शरीर दर्द, गंभीर स्थिति में रक्तस्राव/प्लाज्मा रिसाव | तेज बुखार और जोड़ों का दर्द |
11. तपेदिक, टाइफाइड एवं हैजा
तपेदिक (Tuberculosis – TB)
तपेदिक एक संक्रामक जीवाणुजनित रोग है जिसका प्रमुख कारक Mycobacterium tuberculosis है। यह मुख्यतः फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन मस्तिष्क, हड्डियों, गुर्दे और अन्य अंगों में भी हो सकता है। फेफड़ों के सक्रिय TB रोगी के खाँसने, छींकने या बोलने पर हवा में निकलने वाले सूक्ष्म संक्रामक कणों को साँस के साथ लेने से संक्रमण फैल सकता है।
TB के प्रमुख लक्षण
- दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खाँसी।
- खाँसी के साथ बलगम या कभी-कभी रक्त आना।
- शाम के समय बुखार।
- रात में पसीना आना।
- वजन कम होना और कमजोरी।
TB की जाँच एवं रोकथाम
TB की जाँच में बलगम की सूक्ष्मदर्शी जाँच, छाती का एक्स-रे और आणविक परीक्षण (NAAT) का उपयोग किया जा सकता है। उपचार रोग के प्रकार और दवा संवेदनशीलता के अनुसार निर्धारित किया जाता है। निर्धारित दवाओं का पूरा कोर्स लेना आवश्यक है। अधूरा उपचार दवा प्रतिरोध की समस्या बढ़ा सकता है।
टाइफाइड (Typhoid)
टाइफाइड Salmonella enterica serovar Typhi नामक जीवाणु से होता है। यह मुख्यतः दूषित भोजन एवं पानी के माध्यम से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के मल से पर्यावरण में जीवाणु पहुँच सकते हैं और अस्वच्छता की स्थिति में भोजन या पानी दूषित हो सकता है।
इसके लक्षणों में लंबे समय तक बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, पेट दर्द, भूख में कमी और कभी-कभी दस्त या कब्ज शामिल हो सकते हैं। सुरक्षित पानी, स्वच्छ भोजन, हाथों की सफाई और उपयुक्त टीकाकरण रोकथाम में सहायक हैं।
हैजा (Cholera)
हैजा Vibrio cholerae नामक जीवाणु से होने वाला तीव्र आंत्र संक्रमण है। यह मुख्यतः दूषित पानी या भोजन के माध्यम से फैलता है। इसमें अत्यधिक पानी जैसे दस्त हो सकते हैं, जिससे शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की गंभीर कमी हो सकती है।
हैजा में ORS और आवश्यकता के अनुसार अंतःशिरा द्रव (IV Fluids) द्वारा निर्जलीकरण का उपचार अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। गंभीर रोगी को तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है।
| रोग | रोगजनक | प्रसार |
|---|---|---|
| TB | Mycobacterium tuberculosis | हवा में मौजूद संक्रामक कणों से |
| टाइफाइड | Salmonella Typhi | दूषित भोजन एवं जल |
| हैजा | Vibrio cholerae | दूषित भोजन एवं जल |
12. एड्स एवं HIV
HIV का पूरा नाम Human Immunodeficiency Virus है। यह मानव की प्रतिरक्षा प्रणाली, विशेषकर CD4 T-लिम्फोसाइट कोशिकाओं को प्रभावित करता है। HIV संक्रमण का उपचार न होने पर प्रतिरक्षा प्रणाली धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है। संक्रमण की उन्नत अवस्था में AIDS विकसित हो सकता है।
AIDS का पूरा नाम Acquired Immunodeficiency Syndrome है। यह HIV संक्रमण की उन्नत अवस्था से संबंधित सिंड्रोम है। HIV और AIDS समानार्थी शब्द नहीं हैं; HIV वायरस है, जबकि AIDS संक्रमण की उन्नत अवस्था में विकसित होने वाली स्थिति है।
HIV संक्रमण के प्रमुख मार्ग
- असुरक्षित यौन संपर्क।
- संक्रमित रक्त या रक्त उत्पाद का संपर्क।
- संक्रमित सुई या सिरिंज साझा करना।
- संक्रमित माता से बच्चे में गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान के दौरान संक्रमण।
HIV सामान्यतः किनसे नहीं फैलता?
- हाथ मिलाने से नहीं।
- गले मिलने से नहीं।
- एक साथ भोजन करने से नहीं।
- सामान्य बातचीत या साथ बैठने से नहीं।
- मच्छर के काटने से नहीं।
- सामान्य सामाजिक संपर्क से नहीं।
HIV की जाँच एवं उपचार
HIV की जाँच स्वीकृत परीक्षण एल्गोरिद्म के अनुसार की जाती है। एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) HIV के प्रजनन को नियंत्रित करती है। नियमित उपचार से व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकता है। प्रभावी ART से वायरल लोड इतना कम हो सकता है कि वह लगातार undetectable रहे; ऐसी स्थिति में यौन संपर्क से HIV संक्रमण का जोखिम शून्य होता है (U=U)।
13. हेपेटाइटिस एवं पोलियो
हेपेटाइटिस (Hepatitis)
हेपेटाइटिस का अर्थ यकृत (Liver) में सूजन है। यह विषाणु संक्रमण, शराब, कुछ दवाओं, विषैले पदार्थों और स्वप्रतिरक्षी कारणों से हो सकता है। विषाणुजनित हेपेटाइटिस के प्रमुख प्रकार A, B, C, D और E हैं।
| प्रकार | मुख्य प्रसार | महत्त्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|---|
| Hepatitis A | दूषित भोजन एवं जल | अधिकांश मामलों में तीव्र संक्रमण; टीका उपलब्ध। |
| Hepatitis B | रक्त, असुरक्षित यौन संपर्क, संक्रमित सुई, माता से शिशु | तीव्र या दीर्घकालिक संक्रमण; टीका उपलब्ध। |
| Hepatitis C | मुख्यतः संक्रमित रक्त | दीर्घकालिक संक्रमण हो सकता है; प्रभावी उपचार उपलब्ध, लेकिन सामान्य उपयोग का टीका उपलब्ध नहीं। |
| Hepatitis D | संक्रमित रक्त एवं शारीरिक द्रव | इसके संक्रमण के लिए Hepatitis B का होना आवश्यक है। |
| Hepatitis E | मुख्यतः दूषित पानी | गर्भवती महिलाओं में गंभीर रोग का जोखिम बढ़ सकता है। |
पोलियो (Poliomyelitis)
पोलियो Poliovirus के कारण होने वाला संक्रामक रोग है। यह मुख्यतः मल-मुख मार्ग से फैलता है। वायरस आँतों में वृद्धि कर सकता है और कुछ मामलों में तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करके स्थायी पक्षाघात उत्पन्न कर सकता है।
पोलियो की रोकथाम के लिए टीकाकरण अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। OPV (Oral Polio Vaccine) मुँह से दी जाती है, जबकि IPV (Inactivated Polio Vaccine) इंजेक्शन के रूप में दी जाती है। भारत में नियमित टीकाकरण के अतिरिक्त पल्स पोलियो अभियान भी चलाया जाता है।
14. मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप
मधुमेह (Diabetes Mellitus)
मधुमेह एक चयापचय संबंधी दीर्घकालिक रोग है जिसमें रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। यह इंसुलिन हार्मोन के अपर्याप्त उत्पादन, शरीर की कोशिकाओं द्वारा इंसुलिन का ठीक से उपयोग न कर पाने या दोनों कारणों से हो सकता है। इंसुलिन अग्न्याशय (Pancreas) की बीटा कोशिकाओं से स्रावित होता है।
मधुमेह के प्रमुख प्रकार
- टाइप-1 मधुमेह: प्रतिरक्षा तंत्र द्वारा अग्न्याशय की बीटा कोशिकाओं को नष्ट करने के कारण इंसुलिन की गंभीर कमी हो जाती है।
- टाइप-2 मधुमेह: इंसुलिन प्रतिरोध और समय के साथ इंसुलिन उत्पादन में कमी से संबंधित। यह मधुमेह का सबसे सामान्य प्रकार है।
- गर्भावधि मधुमेह: गर्भावस्था के दौरान पहली बार पहचाना जाने वाला उच्च रक्त ग्लूकोज।
मधुमेह के प्रमुख लक्षण
- बार-बार पेशाब आना।
- अधिक प्यास लगना।
- अधिक भूख लगना।
- बिना कारण वजन घटना, विशेषकर टाइप-1 में।
- थकान एवं कमजोरी।
- घाव भरने में देरी और संक्रमण की प्रवृत्ति।
मधुमेह की जटिलताएँ
अनियंत्रित मधुमेह से आँखों की रेटिना, गुर्दे, तंत्रिकाएँ, हृदय और रक्त वाहिकाएँ प्रभावित हो सकती हैं। नियमित जाँच, संतुलित भोजन, शारीरिक गतिविधि और चिकित्सकीय उपचार से जोखिम कम किया जा सकता है।
उच्च रक्तचाप (Hypertension)
उच्च रक्तचाप वह स्थिति है जिसमें धमनियों में रक्त का दबाव लगातार सामान्य से अधिक बना रहता है। रक्तचाप को सिस्टोलिक और डायस्टोलिक दो संख्याओं में मापा जाता है। इसे सामान्यतः mmHg में व्यक्त किया जाता है।
120/80 mmHg
120 = सिस्टोलिक रक्तचाप
80 = डायस्टोलिक रक्तचाप
सिस्टोलिक दबाव हृदय के संकुचन के समय धमनियों में रक्त का दबाव है। डायस्टोलिक दबाव हृदय के शिथिल होने के समय का दबाव है। उच्च रक्तचाप की सीमा विभिन्न दिशानिर्देशों में अलग हो सकती है और इसका निदान बार-बार माप तथा चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है।
उच्च रक्तचाप के जोखिम कारक
- अधिक नमक का सेवन।
- मोटापा एवं शारीरिक निष्क्रियता।
- तंबाकू और अत्यधिक शराब का सेवन।
- आनुवंशिकता एवं बढ़ती आयु।
- दीर्घकालिक गुर्दा रोग और कुछ अन्य चिकित्सकीय स्थितियाँ।
15. कैंसर एवं उसके प्रकार (Cancer)
कैंसर रोगों का एक समूह है जिसमें शरीर की कुछ कोशिकाएँ अनियंत्रित रूप से विभाजित होने लगती हैं। सामान्य कोशिकाओं में कोशिका विभाजन और मृत्यु का नियंत्रण होता है, लेकिन आनुवंशिक परिवर्तन के कारण यह नियंत्रण बाधित हो सकता है। कुछ कैंसरों में कोशिकाएँ आसपास के ऊतकों में प्रवेश कर सकती हैं और रक्त या लसीका के माध्यम से शरीर के अन्य भागों में फैल सकती हैं। इसे मेटास्टेसिस (Metastasis) कहते हैं।
कैंसर के प्रमुख कारण एवं जोखिम कारक
- तंबाकू एवं धूम्रपान।
- अत्यधिक शराब का सेवन।
- कुछ विषाणु संक्रमण, जैसे HPV और Hepatitis B/C।
- पराबैंगनी एवं आयनीकरण विकिरण।
- कुछ रासायनिक पदार्थ एवं प्रदूषक।
- आनुवंशिक प्रवृत्ति और बढ़ती आयु।
- मोटापा, असंतुलित भोजन और शारीरिक निष्क्रियता।
कैंसर के प्रमुख प्रकार
| प्रकार | उत्पत्ति/प्रभावित ऊतक | उदाहरण |
|---|---|---|
| कार्सिनोमा (Carcinoma) | उपकला ऊतक | फेफड़े, स्तन, बड़ी आँत एवं त्वचा के अनेक कैंसर। |
| सार्कोमा (Sarcoma) | संयोजी एवं सहायक ऊतक | हड्डी एवं मांसपेशी के कैंसर। |
| ल्यूकेमिया (Leukemia) | रक्त निर्माण करने वाले ऊतक | रक्त कैंसर। |
| लिम्फोमा (Lymphoma) | लसीका तंत्र | हॉजकिन एवं नॉन-हॉजकिन लिम्फोमा। |
| मेलानोमा (Melanoma) | मेलानोसाइट कोशिकाएँ | त्वचा का मेलानोमा। |
| ग्लियोमा | मस्तिष्क एवं तंत्रिका तंत्र की ग्लियल कोशिकाएँ | मस्तिष्क के कुछ ट्यूमर। |
कैंसर की जाँच एवं उपचार
कैंसर की जाँच में शारीरिक परीक्षण, इमेजिंग, रक्त परीक्षण, बायोप्सी और अन्य विशेष परीक्षण शामिल हो सकते हैं। उपचार कैंसर के प्रकार, अवस्था और रोगी की स्थिति पर निर्भर करता है। प्रमुख उपचार विधियाँ सर्जरी, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी, हार्मोन थेरेपी, लक्षित उपचार और इम्यूनोथेरेपी हैं।
16. एलर्जी एवं प्रतिरक्षा संबंधी रोग
एलर्जी (Allergy)
एलर्जी प्रतिरक्षा तंत्र की किसी सामान्यतः हानिरहित पदार्थ के प्रति अत्यधिक या अनुचित प्रतिक्रिया है। ऐसे पदार्थों को एलर्जेन (Allergen) कहा जाता है। धूल, परागकण, कुछ खाद्य पदार्थ, औषधियाँ और कीटों के विष एलर्जी उत्पन्न कर सकते हैं।
एलर्जी में छींक, नाक बहना, आँखों में खुजली, त्वचा पर चकत्ते, सूजन या साँस लेने में कठिनाई हो सकती है। गंभीर एलर्जी प्रतिक्रिया को एनाफिलैक्सिस (Anaphylaxis) कहते हैं, जो आपातकालीन चिकित्सा स्थिति है।
प्रतिरक्षा (Immunity)
प्रतिरक्षा शरीर की वह क्षमता है जिसके द्वारा वह रोगजनकों एवं अन्य हानिकारक बाहरी पदार्थों की पहचान कर उनसे रक्षा करता है। प्रतिरक्षा तंत्र में श्वेत रक्त कोशिकाएँ, प्रतिरक्षी (Antibodies), लसीका अंग और अनेक रासायनिक पदार्थ शामिल होते हैं।
प्रतिरक्षा के प्रमुख प्रकार
| प्रकार | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|
| जन्मजात प्रतिरक्षा (Innate) | जन्म से उपस्थित, गैर-विशिष्ट रक्षा | त्वचा, श्लेष्मा, फागोसाइट कोशिकाएँ, पेट का अम्ल। |
| अर्जित प्रतिरक्षा (Acquired) | विशिष्ट रोगजनक के विरुद्ध विकसित होती है | विशिष्ट प्रतिरक्षी एवं स्मृति कोशिकाएँ। |
| सक्रिय प्रतिरक्षा | शरीर स्वयं प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया विकसित करता है | संक्रमण या टीकाकरण के बाद। |
| निष्क्रिय प्रतिरक्षा | तैयार प्रतिरक्षी बाहर से प्राप्त होते हैं | माता से शिशु को प्रतिरक्षी; इम्युनोग्लोबुलिन देना। |
प्रतिरक्षा तंत्र की प्रमुख कोशिकाएँ
- लिम्फोसाइट: B कोशिकाएँ एवं T कोशिकाएँ विशिष्ट प्रतिरक्षा में महत्त्वपूर्ण हैं।
- B-लिम्फोसाइट: प्लाज्मा कोशिकाओं में विकसित होकर प्रतिरक्षी बना सकती हैं।
- T-लिम्फोसाइट: कोशिका-मध्यस्थित प्रतिरक्षा में भूमिका निभाती हैं।
- मैक्रोफेज: रोगजनकों को निगलकर नष्ट करने और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में सहायता करते हैं।
- न्यूट्रोफिल: संक्रमण स्थल पर पहुँचकर रोगजनकों को नष्ट करते हैं।
स्वप्रतिरक्षी रोग (Autoimmune Diseases)
जब प्रतिरक्षा तंत्र गलती से शरीर की अपनी कोशिकाओं या ऊतकों को ही बाहरी समझकर उन पर हमला करने लगता है, तो ऐसी स्थिति स्वप्रतिरक्षी रोग कहलाती है।
- रूमेटॉइड आर्थराइटिस – जोड़ों को प्रभावित करता है।
- टाइप-1 मधुमेह – अग्न्याशय की बीटा कोशिकाओं का प्रतिरक्षा-जनित विनाश।
- सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस – अनेक अंगों को प्रभावित कर सकता है।
- मल्टीपल स्क्लेरोसिस – केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के मायलिन को प्रभावित करता है।
17. कुपोषण एवं अभावजन्य रोग (Malnutrition)
कुपोषण वह स्थिति है जिसमें शरीर को ऊर्जा, प्रोटीन या सूक्ष्म पोषक तत्त्व आवश्यकता के अनुरूप नहीं मिलते अथवा उनका सेवन आवश्यकता से अधिक या असंतुलित होता है। कुपोषण केवल कम भोजन करने तक सीमित नहीं है। इसमें अल्पपोषण, सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की कमी, अधिक वजन और मोटापा भी शामिल हैं।
कुपोषण के प्रमुख प्रकार
- अल्पपोषण (Undernutrition): शरीर की आवश्यकता से कम ऊर्जा या पोषक तत्त्व मिलना।
- स्टंटिंग (Stunting): आयु के अनुसार लंबाई कम होना; दीर्घकालिक कुपोषण का संकेत हो सकता है।
- वेस्टिंग (Wasting): लंबाई के अनुपात में वजन कम होना; तीव्र कुपोषण का संकेत हो सकता है।
- अंडरवेट (Underweight): आयु के अनुसार वजन कम होना।
- सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की कमी: विटामिन एवं खनिजों की कमी।
- अधिक पोषण: आवश्यकता से अधिक ऊर्जा सेवन के कारण अधिक वजन या मोटापा।
प्रोटीन-ऊर्जा कुपोषण
प्रोटीन-ऊर्जा कुपोषण विशेषकर बच्चों में गंभीर समस्या है। इसमें ऊर्जा और प्रोटीन की कमी से वृद्धि, प्रतिरक्षा और शारीरिक विकास प्रभावित हो सकता है। इसके दो पारंपरिक गंभीर रूप मैरास्मस और क्वाशियोरकर हैं।
| आधार | मैरास्मस (Marasmus) | क्वाशियोरकर (Kwashiorkor) |
|---|---|---|
| मुख्य कारण | ऊर्जा एवं प्रोटीन दोनों की गंभीर कमी | मुख्यतः प्रोटीन की गंभीर कमी, अक्सर ऊर्जा की कमी भी साथ हो सकती है |
| शारीरिक रूप | अत्यधिक दुबलापन एवं मांसपेशियों का क्षय | सूजन (Edema) प्रमुख विशेषता |
| वसा | शरीर की वसा बहुत कम | वसा की कमी हो सकती है, लेकिन सूजन से दुबलापन छिप सकता है |
| अन्य लक्षण | वृद्धि रुकना, कमजोरी | बाल एवं त्वचा में बदलाव, यकृत में वसा जमा होना |
18. विटामिन एवं खनिज की कमी से होने वाले रोग
विटामिन और खनिज सूक्ष्म पोषक तत्त्व हैं। इनकी आवश्यकता शरीर को कम मात्रा में होती है, लेकिन वृद्धि, चयापचय, प्रतिरक्षा, रक्त निर्माण, हड्डियों और तंत्रिका तंत्र के सामान्य कार्य के लिए ये अत्यंत आवश्यक हैं।
विटामिन का वर्गीकरण
- वसा में घुलनशील: विटामिन A, D, E और K।
- जल में घुलनशील: विटामिन B समूह और विटामिन C।
विटामिन, स्रोत एवं अभावजन्य रोग
| विटामिन | मुख्य कार्य | कमी से होने वाला रोग/लक्षण | स्रोत |
|---|---|---|---|
| A (रेटिनॉल) | दृष्टि, त्वचा एवं प्रतिरक्षा | रतौंधी, गंभीर कमी में जेरोफ्थैल्मिया | गाजर, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, दूध, अंडा, यकृत |
| B1 (थायमिन) | ऊर्जा चयापचय एवं तंत्रिका कार्य | बेरी-बेरी | साबुत अनाज, दालें, मेवे |
| B2 (राइबोफ्लेविन) | ऊर्जा चयापचय | मुख के कोनों पर दरार, ग्लोसाइटिस | दूध, अंडे, हरी सब्जियाँ |
| B3 (नियासिन) | ऊर्जा चयापचय | पेलाग्रा – डर्मेटाइटिस, डायरिया, डिमेंशिया | मांस, मछली, मूँगफली, अनाज |
| B6 (पाइरिडॉक्सिन) | अमीनो अम्ल चयापचय, हीमोग्लोबिन निर्माण | एनीमिया, त्वचा एवं तंत्रिका संबंधी लक्षण | दालें, मछली, केला, अनाज |
| B9 (फोलेट) | DNA निर्माण एवं लाल रक्त कोशिका निर्माण | मेगालोब्लास्टिक एनीमिया; भ्रूण में न्यूरल ट्यूब दोष का जोखिम | हरी पत्तेदार सब्जियाँ, दालें |
| B12 (कोबालामिन) | तंत्रिका तंत्र एवं रक्त निर्माण | मेगालोब्लास्टिक एनीमिया, तंत्रिका क्षति | दूध, अंडे, मांस, मछली |
| C (एस्कॉर्बिक अम्ल) | कोलेजन निर्माण, घाव भरना, आयरन अवशोषण | स्कर्वी | आँवला, अमरूद, नींबू, संतरा |
| D (कैल्सीफेरॉल) | कैल्शियम एवं फॉस्फोरस का अवशोषण | बच्चों में रिकेट्स, वयस्कों में ऑस्टियोमलेशिया | सूर्य प्रकाश से त्वचा में निर्माण, मछली, अंडे की जर्दी, फोर्टिफाइड खाद्य |
| E (टोकोफेरॉल) | एंटीऑक्सिडेंट कार्य | दुर्लभ कमी में तंत्रिका एवं मांसपेशी संबंधी समस्याएँ | वनस्पति तेल, मेवे, बीज |
| K | रक्त का थक्का बनने में सहायता | रक्तस्राव की प्रवृत्ति | हरी पत्तेदार सब्जियाँ; आंतों के कुछ जीवाणु भी निर्माण में योगदान करते हैं |
खनिज एवं उनकी कमी
| खनिज | मुख्य कार्य | कमी के प्रभाव | स्रोत |
|---|---|---|---|
| लोहा (Iron) | हीमोग्लोबिन निर्माण | आयरन की कमी से एनीमिया | हरी सब्जियाँ, दालें, मांस, फोर्टिफाइड अनाज |
| आयोडीन (Iodine) | थायरॉइड हार्मोन निर्माण | घेंघा (Goitre), भ्रूण एवं बाल विकास प्रभावित | आयोडीन युक्त नमक, समुद्री खाद्य |
| कैल्शियम (Calcium) | हड्डियाँ, दाँत, मांसपेशी संकुचन | हड्डियों का कमजोर होना; गंभीर कमी में टेटनी | दूध, दही, पनीर, कुछ हरी सब्जियाँ |
| फॉस्फोरस | हड्डियाँ, ATP, DNA और RNA | गंभीर कमी में हड्डियों एवं मांसपेशियों की समस्या | दूध, दालें, मेवे, मांस |
| जिंक (Zinc) | प्रतिरक्षा, वृद्धि एवं घाव भरना | वृद्धि में कमी, घाव भरने में देरी | दालें, मेवे, बीज, मांस |
| फ्लोराइड (Fluoride) | दाँतों के इनेमल को मजबूत करना | अत्यधिक कमी से दंत क्षय का जोखिम बढ़ सकता है | पेयजल, चाय एवं कुछ खाद्य |
| पोटैशियम | तंत्रिका संकेत एवं मांसपेशी कार्य | कमी में कमजोरी एवं हृदय की लय प्रभावित हो सकती है | फल, सब्जियाँ, दालें |
| सोडियम | द्रव संतुलन एवं तंत्रिका कार्य | कमी में Hyponatremia | नमक एवं भोजन |
महत्त्वपूर्ण अभावजन्य रोग – एक नजर में
- विटामिन A – रतौंधी।
- विटामिन B1 – बेरी-बेरी।
- विटामिन B3 – पेलाग्रा।
- विटामिन C – स्कर्वी।
- विटामिन D – रिकेट्स/ऑस्टियोमलेशिया।
- विटामिन K – रक्त का थक्का बनने में समस्या।
- आयरन – एनीमिया।
- आयोडीन – घेंघा।
- प्रोटीन की गंभीर कमी – क्वाशियोरकर।
- ऊर्जा एवं प्रोटीन की गंभीर कमी – मैरास्मस।
19. टीकाकरण कार्यक्रम एवं प्रमुख टीके (Immunization Programme)
टीकाकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा शरीर में किसी विशिष्ट रोगजनक के विरुद्ध प्रतिरक्षा विकसित की जाती है। टीके में कमजोर या निष्क्रिय रोगजनक, उसका कोई घटक, टॉक्सॉइड अथवा आनुवंशिक निर्देश जैसे mRNA या वायरल वेक्टर का उपयोग किया जा सकता है। टीकाकरण से प्रतिरक्षा तंत्र रोगजनक को पहचानना सीखता है और भविष्य में संक्रमण होने पर तेजी से प्रतिक्रिया कर सकता है।
टीकाकरण के प्रमुख प्रकार
- जीवित कमजोर टीका (Live Attenuated): कमजोर किए गए जीवित रोगजनक का उपयोग। उदाहरण – BCG, OPV, MR।
- निष्क्रिय टीका (Inactivated): निष्क्रिय रोगजनक का उपयोग। उदाहरण – IPV।
- टॉक्सॉइड टीका: निष्क्रिय किए गए विष का उपयोग। उदाहरण – टिटनेस टॉक्सॉइड।
- सबयूनिट/कंजुगेट टीका: रोगजनक के विशेष घटकों का उपयोग। उदाहरण – Hepatitis B और PCV।
- रिकॉम्बिनेंट टीका: जैव प्रौद्योगिकी से तैयार एंटीजन का उपयोग।
भारत का सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP)
भारत में Universal Immunization Programme (UIP) के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं और बच्चों को विभिन्न वैक्सीन निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। राष्ट्रीय टीकाकरण समय-सारणी (National Immunization Schedule) में आयु के अनुसार टीके एवं उनकी खुराक निर्धारित की गई हैं।
राष्ट्रीय टीकाकरण समय-सारणी – परीक्षा उपयोगी सार
| लाभार्थी की आयु | प्रमुख टीके |
|---|---|
| जन्म के समय | BCG, OPV-0, Hepatitis B Birth Dose |
| 6 सप्ताह | OPV-1, Pentavalent-1, Rotavirus-1, fIPV-1, PCV-1 |
| 10 सप्ताह | OPV-2, Pentavalent-2, Rotavirus-2 |
| 14 सप्ताह | OPV-3, Pentavalent-3, Rotavirus-3, fIPV-2, PCV-2 |
| 9–12 माह | MR-1, JE-1 (जहाँ लागू), PCV Booster |
| 16–24 माह | MR-2, DPT Booster-1, OPV Booster, JE-2 (जहाँ लागू) |
| 5–6 वर्ष | DPT Booster-2 |
| 10 वर्ष | Td |
| 16 वर्ष | Td |
| गर्भवती महिला | Td-1, Td-2 या Td Booster, पूर्व टीकाकरण स्थिति के अनुसार |
प्रमुख टीके एवं उनसे बचाव
| टीका | मुख्य सुरक्षा |
|---|---|
| BCG | बच्चों में गंभीर TB के कुछ रूपों से सुरक्षा। |
| OPV/IPV | पोलियो। |
| Hepatitis B | हेपेटाइटिस B। |
| Pentavalent | डिप्थीरिया, काली खाँसी, टिटनेस, हेपेटाइटिस B एवं Hib संक्रमण। |
| MR | खसरा एवं रूबेला। |
| PCV | न्यूमोकोकल संक्रमण। |
| Rotavirus Vaccine | रोटावायरस से होने वाले गंभीर दस्त। |
| JE Vaccine | जापानी इंसेफेलाइटिस; कार्यक्रम के अंतर्गत निर्धारित स्थानों पर। |
| DPT | डिप्थीरिया, काली खाँसी एवं टिटनेस। |
| Td | टिटनेस एवं वयस्क डिप्थीरिया। |
भारत के प्रमुख स्वास्थ्य कार्यक्रम
| कार्यक्रम | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|
| Universal Immunization Programme (UIP) | गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों का टीकाकरण। |
| National Tuberculosis Elimination Programme (NTEP) | TB की शीघ्र पहचान, उपचार, रोकथाम और नियंत्रण। |
| National AIDS Control Programme (NACP) | HIV संक्रमण की रोकथाम, जाँच, उपचार एवं देखभाल। |
| National Vector Borne Disease Control Programme | मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, फाइलेरिया एवं अन्य वेक्टर जनित रोगों का नियंत्रण। |
| Integrated Disease Surveillance Programme (IDSP) | रोगों की निगरानी, प्रकोप की पहचान और त्वरित प्रतिक्रिया। |
| National Viral Hepatitis Control Programme | वायरल हेपेटाइटिस की रोकथाम, जाँच एवं उपचार सेवाओं को बढ़ावा देना। |
| National Programme for Prevention and Control of Non-Communicable Diseases | मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कैंसर और अन्य असंक्रामक रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण। |
20. महामारी, रोग नियंत्रण एवं जनस्वास्थ्य
महामारी (Epidemic)
जब किसी निश्चित क्षेत्र या समुदाय में किसी रोग के मामलों की संख्या अपेक्षित स्तर से अधिक हो जाती है, तो इसे महामारी या Epidemic कहा जाता है। यह वृद्धि किसी संक्रामक रोग, पर्यावरणीय कारण या अन्य स्वास्थ्य जोखिम के कारण हो सकती है।
स्थानिक रोग (Endemic)
किसी विशेष क्षेत्र या आबादी में किसी रोग का लगातार सामान्य या अपेक्षित स्तर पर मौजूद रहना स्थानिक रोग कहलाता है।
विश्वव्यापी महामारी (Pandemic)
जब कोई संक्रामक रोग अनेक देशों या महाद्वीपों में व्यापक रूप से फैल जाता है, तो उसे Pandemic कहा जाता है। COVID-19 इसका प्रमुख उदाहरण है।
प्रकोप (Outbreak)
किसी सीमित स्थान, समुदाय या संस्था में अपेक्षा से अधिक रोगियों का अचानक सामने आना प्रकोप कहलाता है। प्रकोप की जाँच करके रोग के स्रोत, प्रसार और रोकथाम के उपायों का पता लगाया जाता है।
| शब्द | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| Endemic | किसी क्षेत्र में रोग का नियमित/लगातार मौजूद रहना | किसी क्षेत्र में मलेरिया का स्थायी रूप से पाया जाना। |
| Epidemic | अपेक्षित स्तर से अधिक मामलों का बढ़ना | किसी जिले में अचानक हैजा के मामले बढ़ना। |
| Pandemic | कई देशों या महाद्वीपों में व्यापक प्रसार | COVID-19। |
| Outbreak | सीमित क्षेत्र या समूह में रोग का असामान्य बढ़ना | किसी विद्यालय में खाद्य विषाक्तता के अनेक मामले। |
रोग नियंत्रण के प्रमुख उपाय
- रोग की शीघ्र पहचान और प्रयोगशाला जाँच।
- संक्रमण के स्रोत और प्रसार के मार्ग की पहचान।
- रोगी का उचित उपचार और आवश्यकता के अनुसार पृथक्करण।
- टीकाकरण और प्रतिरक्षण।
- स्वच्छ पेयजल, सुरक्षित भोजन और स्वच्छता।
- मच्छर एवं अन्य वाहक जीवों का नियंत्रण।
- स्वास्थ्य शिक्षा और समुदाय की भागीदारी।
- रोग निगरानी एवं प्रकोप की सूचना।
- संपर्कों की पहचान और जोखिम के अनुसार जाँच।
महामारी विज्ञान (Epidemiology)
महामारी विज्ञान वह विज्ञान है जिसमें किसी आबादी में रोगों के वितरण, आवृत्ति, कारणों और नियंत्रण के उपायों का अध्ययन किया जाता है। यह जनस्वास्थ्य नीति, रोग निगरानी, प्रकोप जाँच और स्वास्थ्य कार्यक्रमों के मूल्यांकन का आधार है।
रोग निगरानी के प्रमुख संकेतक
- Incidence: किसी निर्धारित अवधि में किसी आबादी में सामने आए नए रोग मामलों की संख्या या दर।
- Prevalence: किसी निश्चित समय या अवधि में आबादी में मौजूद कुल रोग मामलों का अनुपात या दर।
- Morbidity: रोगग्रस्तता या बीमारी की स्थिति।
- Mortality: मृत्यु से संबंधित माप।
- Case Fatality Rate: किसी रोग से पीड़ित पहचाने गए मामलों में मृत्यु का अनुपात।
- Attack Rate: किसी प्रकोप के दौरान जोखिम में रही आबादी में बीमार हुए लोगों का अनुपात।
महत्त्वपूर्ण रोग, रोगजनक एवं वाहक – त्वरित सारणी
| रोग | कारक | वाहक/प्रसार |
|---|---|---|
| मलेरिया | Plasmodium | मादा Anopheles |
| डेंगू | Dengue virus | Aedes मच्छर |
| चिकनगुनिया | Chikungunya virus | Aedes मच्छर |
| फाइलेरिया | Wuchereria bancrofti आदि | मच्छर |
| कालाजार | Leishmania donovani | सैंडफ्लाई |
| प्लेग | Yersinia pestis | संक्रमित पिस्सू |
| टाइफाइड | Salmonella Typhi | दूषित भोजन एवं जल |
| हैजा | Vibrio cholerae | दूषित भोजन एवं जल |
| TB | Mycobacterium tuberculosis | हवा में संक्रामक कण |
| रेबीज | Rabies virus | संक्रमित पशु की लार/काटना |
| पोलियो | Poliovirus | मुख्यतः मल-मुख मार्ग |
| अमीबायसिस | Entamoeba histolytica | दूषित भोजन एवं जल |
| दाद | Dermatophyte fungi | त्वचा संपर्क एवं संक्रमित वस्तुएँ |
| कुष्ठ रोग | Mycobacterium leprae | लंबे समय तक निकट संपर्क; संचरण जटिल |
| एड्स | HIV | रक्त, यौन संपर्क, माता से शिशु |
महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक एवं सामान्य तथ्य
- स्वास्थ्य की WHO परिभाषा – शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक कल्याण।
- मलेरिया का रोगजनक – Plasmodium।
- मलेरिया का वाहक – मादा Anopheles मच्छर।
- डेंगू का वाहक – Aedes मच्छर।
- चिकनगुनिया का वाहक – Aedes मच्छर।
- कालाजार का कारक – Leishmania donovani।
- फाइलेरिया का प्रमुख कारक – Wuchereria bancrofti।
- TB का कारक – Mycobacterium tuberculosis।
- टाइफाइड का कारक – Salmonella Typhi।
- हैजा का कारक – Vibrio cholerae।
- प्लेग का कारक – Yersinia pestis।
- कुष्ठ रोग का कारक – Mycobacterium leprae।
- HIV – Retrovirus।
- HIV का प्रमुख लक्ष्य – CD4 T कोशिकाएँ।
- पोलियो का कारक – Poliovirus।
- रेबीज का कारक – Rabies virus।
- रतौंधी – विटामिन A की कमी।
- बेरी-बेरी – विटामिन B1 की कमी।
- पेलाग्रा – विटामिन B3 की कमी।
- स्कर्वी – विटामिन C की कमी।
- रिकेट्स – बच्चों में विटामिन D की कमी।
- ऑस्टियोमलेशिया – वयस्कों में विटामिन D की कमी।
- रक्त का थक्का बनने में सहायक – विटामिन K।
- घेंघा – आयोडीन की कमी।
- एनीमिया – आयरन की कमी इसका एक प्रमुख कारण है।
- मैरास्मस – गंभीर ऊर्जा एवं प्रोटीन की कमी।
- क्वाशियोरकर – गंभीर प्रोटीन कुपोषण और सूजन।
- मधुमेह – इंसुलिन की कमी/प्रतिरोध से संबंधित।
- इंसुलिन – अग्न्याशय की बीटा कोशिकाओं से।
- कैंसर का अन्य अंगों में फैलना – मेटास्टेसिस।
- TB कार्यक्रम – NTEP।
- टीकाकरण कार्यक्रम – UIP।
- रोग निगरानी कार्यक्रम – IDSP।
हालिया परीक्षा प्रश्न – UPSSSC PET 2026
(A) 100/60 mmHg
(B) 120/80 mmHg
(C) 140/100 mmHg
(D) 160/110 mmHg
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सिस्टोलिक दबाव 120 और डायस्टोलिक दबाव 80 mmHg है। यह प्रश्न UPSSSC PET 2026 की 25 अक्टूबर, दूसरी पाली के उपलब्ध प्रश्न-पत्र विश्लेषण में दर्ज है।
अभ्यास प्रश्न – 50 महत्त्वपूर्ण MCQs
निर्देश: नीचे दिए गए प्रश्न मौलिक अभ्यास प्रश्न हैं। वास्तविक PYQ के रूप में केवल वही प्रश्न चिह्नित हैं जिनकी परीक्षा-पत्र से पुष्टि की गई है।
(A) केवल रोगों का अभाव
(B) केवल शारीरिक स्वास्थ्य
(C) शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक कल्याण
(D) केवल आर्थिक समृद्धि
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WHO स्वास्थ्य को पूर्ण शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक कल्याण की अवस्था मानता है।
(A) मधुमेह
(B) उच्च रक्तचाप
(C) तपेदिक
(D) कैंसर
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TB जीवाणुजनित संक्रामक रोग है।
(A) Entamoeba
(B) Plasmodium
(C) Salmonella
(D) Vibrio
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मलेरिया Plasmodium नामक प्रोटोजोआ परजीवी से होता है।
(A) नर Anopheles
(B) मादा Anopheles
(C) मादा Culex
(D) घरेलू मक्खी
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संक्रमित मादा Anopheles मच्छर मलेरिया परजीवी को फैलाती है।
(A) जीवाणु
(B) कवक
(C) विषाणु
(D) कृमि
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डेंगू Dengue virus से होता है।
(A) Aedes aegypti
(B) Anopheles stephensi
(C) Culex quinquefasciatus
(D) घरेलू मक्खी
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Aedes aegypti डेंगू का प्रमुख वाहक है।
(A) Anopheles
(B) Aedes
(C) Culex
(D) Mansonia
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चिकनगुनिया विषाणु Aedes मच्छरों से फैलता है।
(A) Leishmania donovani
(B) Plasmodium vivax
(C) Giardia
(D) Taenia solium
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यह प्रोटोजोआ परजीवी कालाजार का कारण है।
(A) Vibrio cholerae
(B) Mycobacterium tuberculosis
(C) Salmonella Typhi
(D) Clostridium tetani
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Mycobacterium tuberculosis तपेदिक का प्रमुख कारक है।
(A) Salmonella Typhi
(B) Vibrio cholerae
(C) Yersinia pestis
(D) Bordetella pertussis
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टाइफाइड दूषित भोजन एवं जल से फैलने वाला Salmonella Typhi संक्रमण है।
(A) Salmonella
(B) Vibrio cholerae
(C) Mycobacterium
(D) Streptococcus
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Vibrio cholerae हैजा उत्पन्न करता है।
(A) Clostridium tetani
(B) Salmonella Typhi
(C) Neisseria gonorrhoeae
(D) E. coli
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Clostridium tetani का विष तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करके मांसपेशियों में अकड़न उत्पन्न करता है।
(A) Mycobacterium leprae
(B) Mycobacterium tuberculosis
(C) Vibrio cholerae
(D) Treponema pallidum
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Mycobacterium leprae कुष्ठ रोग का कारक है।
(A) विषाणु
(B) कवक
(C) जीवाणु
(D) प्रोटोजोआ
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दाद Dermatophyte समूह के कवकों से होता है।
(A) लाल रक्त कोशिका
(B) CD4 T-लिम्फोसाइट
(C) प्लेटलेट
(D) अस्थि कोशिका
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HIV प्रतिरक्षा तंत्र की CD4 T कोशिकाओं को प्रभावित करता है।
(A) Retrovirus
(B) Adenovirus
(C) Poxvirus
(D) Bacteriophage
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HIV एक Retrovirus है, जिसमें RNA आनुवंशिक पदार्थ होता है।
(A) Acquired Immunodeficiency Syndrome
(B) Active Immune Disease Syndrome
(C) Acquired Infection Disease System
(D) Auto Immune Deficiency System
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AIDS का पूरा नाम Acquired Immunodeficiency Syndrome है।
(A) हृदय
(B) यकृत
(C) फेफड़े
(D) गुर्दा
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हेपेटाइटिस यकृत की सूजन है।
(A) Poliovirus
(B) Rabies virus
(C) Dengue virus
(D) HIV
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Poliovirus तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर पक्षाघात उत्पन्न कर सकता है।
(A) दूषित जल
(B) संक्रमित पशु की लार एवं काटने से
(C) मच्छर के काटने से
(D) हवा से सामान्य संपर्क
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संक्रमित स्तनधारी की लार के काटने या घाव में प्रवेश से रेबीज फैल सकता है।
(A) थायरॉक्सिन
(B) इंसुलिन
(C) एड्रेनालिन
(D) एस्ट्रोजन
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इंसुलिन रक्त ग्लूकोज के नियंत्रण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
(A) अल्फा कोशिकाएँ
(B) बीटा कोशिकाएँ
(C) डेल्टा कोशिकाएँ
(D) तंत्रिका कोशिकाएँ
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अग्न्याशय की लैंगरहैंस द्वीपिकाओं की बीटा कोशिकाएँ इंसुलिन स्रावित करती हैं।
(A) मेटास्टेसिस
(B) माइटोसिस
(C) निषेचन
(D) परासरण
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कैंसर कोशिकाओं का मूल स्थान से दूर अन्य ऊतकों में फैलना मेटास्टेसिस कहलाता है।
(A) A
(B) B1
(C) C
(D) K
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विटामिन A की कमी से रतौंधी और गंभीर स्थिति में जेरोफ्थैल्मिया हो सकता है।
(A) B1
(B) B2
(C) B12
(D) D
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थायमिन की कमी से बेरी-बेरी रोग होता है।
(A) B1
(B) B3
(C) B6
(D) C
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नियासिन की कमी से पेलाग्रा होता है। इसके पारंपरिक लक्षण डर्मेटाइटिस, डायरिया और डिमेंशिया हैं।
(A) A
(B) C
(C) D
(D) E
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एस्कॉर्बिक अम्ल की कमी से स्कर्वी होता है।
(A) A
(B) B12
(C) D
(D) K
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विटामिन D की कमी से बच्चों में हड्डियों का खनिजीकरण प्रभावित होता है।
(A) A
(B) C
(C) D
(D) K
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विटामिन K रक्त जमने वाले कई कारकों के निर्माण/सक्रियण में आवश्यक है।
(A) लोहा
(B) आयोडीन
(C) कैल्शियम
(D) जिंक
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आयोडीन की कमी से थायरॉइड ग्रंथि बढ़ सकती है, जिसे घेंघा कहते हैं।
(A) एनीमिया
(B) रिकेट्स
(C) स्कर्वी
(D) बेरी-बेरी
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आयरन हीमोग्लोबिन निर्माण के लिए आवश्यक है। इसकी कमी से आयरन-डिफिशिएंसी एनीमिया हो सकता है।
(A) सूजन (Edema)
(B) रतौंधी
(C) रक्तस्राव
(D) उच्च रक्तचाप
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क्वाशियोरकर में प्रोटीन की गंभीर कमी से सूजन प्रमुख लक्षण के रूप में दिखाई दे सकती है।
(A) केवल विटामिन C की कमी
(B) ऊर्जा एवं प्रोटीन की गंभीर कमी
(C) आयोडीन की अधिकता
(D) विटामिन K की कमी
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मैरास्मस गंभीर ऊर्जा एवं प्रोटीन कुपोषण का रूप है।
(A) B, C
(B) A, D, E, K
(C) B1, B2, B12
(D) C, D, B6
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विटामिन A, D, E और K वसा में घुलनशील हैं।
(A) A
(B) D
(C) E
(D) C
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विटामिन C तथा B समूह के विटामिन जल में घुलनशील होते हैं।
(A) 80/40 mmHg
(B) 120/80 mmHg
(C) 160/120 mmHg
(D) 180/140 mmHg
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120 सिस्टोलिक तथा 80 डायस्टोलिक दबाव को दर्शाता है।
(A) पोलियो
(B) तपेदिक
(C) डेंगू
(D) हैजा
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BCG बच्चों में TB के गंभीर रूपों से सुरक्षा प्रदान करने में सहायक है।
(A) पोलियो
(B) खसरा
(C) टिटनेस
(D) डिप्थीरिया
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OPV का पूरा नाम Oral Polio Vaccine है।
(A) तीन
(B) चार
(C) पाँच
(D) छह
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यह डिप्थीरिया, काली खाँसी, टिटनेस, हेपेटाइटिस B और Hib से सुरक्षा देता है।
(A) मलेरिया एवं रूबेला
(B) खसरा एवं रूबेला
(C) TB एवं खसरा
(D) पोलियो एवं डेंगू
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MR का अर्थ Measles-Rubella है।
(A) कृत्रिम सक्रिय प्रतिरक्षा
(B) प्राकृतिक निष्क्रिय प्रतिरक्षा
(C) केवल जन्मजात प्रतिरक्षा
(D) कोई प्रतिरक्षा नहीं
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टीका शरीर को प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया विकसित करने के लिए प्रेरित करता है।
(A) सक्रिय प्रतिरक्षा
(B) प्राकृतिक निष्क्रिय प्रतिरक्षा
(C) कृत्रिम सक्रिय प्रतिरक्षा
(D) जन्मजात कोशिकीय प्रतिरक्षा
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माता के IgG प्रतिरक्षी प्लेसेंटा से भ्रूण तक पहुँचते हैं।
(A) कुल पुराने एवं नए रोगियों को
(B) निश्चित अवधि में नए रोग मामलों को
(C) केवल मृत्यु को
(D) केवल स्वस्थ व्यक्तियों को
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Incidence निर्धारित अवधि में उत्पन्न नए रोग मामलों को दर्शाता है।
(A) केवल नए मामले
(B) किसी समय या अवधि में कुल मौजूद मामले
(C) केवल मृत्यु दर
(D) जन्म दर
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Prevalence किसी समय या अवधि में आबादी के कुल मौजूद रोग मामलों को दर्शाता है।
(A) Endemic
(B) Pandemic
(C) Sporadic
(D) केवल Outbreak
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विश्वव्यापी या अनेक देशों में व्यापक रूप से फैली महामारी को Pandemic कहा जाता है।
(A) UIP
(B) NTEP
(C) IDSP
(D) NACP
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National Tuberculosis Elimination Programme भारत का राष्ट्रीय TB कार्यक्रम है।
(A) IDSP
(B) NTEP
(C) UIP
(D) PM-KISAN
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Integrated Disease Surveillance Programme रोग निगरानी एवं प्रकोप प्रतिक्रिया में सहायता करता है।
(A) मलेरिया
(B) हैजा
(C) उच्च रक्तचाप
(D) टाइफाइड
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उच्च रक्तचाप एक दीर्घकालिक असंक्रामक रोग है।
(A) टाइफाइड
(B) मलेरिया
(C) हैजा
(D) टिटनेस
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मलेरिया संक्रमित मादा Anopheles मच्छर से फैलता है।
(A) निर्जलीकरण की रोकथाम एवं उपचार
(B) उच्च रक्तचाप बढ़ाने
(C) रक्त का थक्का बनाने
(D) कैंसर उपचार
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ORS दस्त के कारण शरीर से निकले पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी को पूरा करने में मदद करता है।
अंतिम समय की त्वरित पुनरावृत्ति
- स्वास्थ्य – शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण।
- मलेरिया – Plasmodium – मादा Anopheles।
- डेंगू – Dengue virus – Aedes।
- चिकनगुनिया – Chikungunya virus – Aedes।
- कालाजार – Leishmania donovani – सैंडफ्लाई।
- फाइलेरिया – Wuchereria bancrofti – मच्छर।
- TB – Mycobacterium tuberculosis।
- टाइफाइड – Salmonella Typhi।
- हैजा – Vibrio cholerae।
- प्लेग – Yersinia pestis।
- कुष्ठ रोग – Mycobacterium leprae।
- HIV – Retrovirus – CD4 कोशिकाएँ।
- पोलियो – Poliovirus।
- रेबीज – Rabies virus।
- रतौंधी – विटामिन A।
- बेरी-बेरी – B1।
- पेलाग्रा – B3।
- स्कर्वी – C।
- रिकेट्स – D।
- रक्त जमना – K।
- घेंघा – आयोडीन।
- एनीमिया – आयरन की कमी।
- क्वाशियोरकर – प्रोटीन की गंभीर कमी।
- मैरास्मस – ऊर्जा एवं प्रोटीन की गंभीर कमी।
- मधुमेह – इंसुलिन से संबंधित।
- कैंसर का फैलना – मेटास्टेसिस।
- BCG – TB से सुरक्षा।
- OPV/IPV – पोलियो से सुरक्षा।
- MR – खसरा एवं रूबेला।
- UIP – सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम।
- NTEP – राष्ट्रीय TB उन्मूलन कार्यक्रम।
- IDSP – रोग निगरानी कार्यक्रम।
- Incidence – नए मामले।
- Prevalence – कुल मौजूद मामले।
- Pandemic – अनेक देशों/महाद्वीपों में व्यापक प्रसार।
संदर्भ एवं अध्ययन आधार
- NCERT कक्षा 12 जीव विज्ञान – Human Health and Disease.
- NCERT – मानव स्वास्थ्य, प्रतिरक्षा, रोगजनक एवं रोग नियंत्रण संबंधी पाठ्य सामग्री।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) – स्वास्थ्य की परिभाषा, रोग एवं पोषण संबंधी तथ्य।
- भारत सरकार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय – National Immunization Schedule.
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) – Universal Immunization Programme.
- Central Tuberculosis Division, भारत सरकार – National Tuberculosis Elimination Programme.
- National Centre for Disease Control (NCDC) – Integrated Disease Surveillance Programme.
- भारत सरकार – National AIDS Control Organisation (NACO).
