जैविक ऊतक (Biological Tissues) – सम्पूर्ण हिंदी नोट्स, प्रकार, कार्य एवं महत्वपूर्ण MCQ

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अध्याय 4. जैविक ऊतक (Biological Tissues)

पादप एवं जंतु ऊतक, विभज्योतक, स्थायी ऊतक, जाइलम, फ्लोएम, उपकला, संयोजी, पेशीय तथा तंत्रिका ऊतक के सम्पूर्ण हिंदी नोट्स।

प्रारंभिक जीव विज्ञान UP PET एवं UPSSSC SSC एवं Railway Police एवं UP SI RO/ARO एवं UPPSC TGT/PGT

अध्याय की विषय-सूची

  1. ऊतक की परिभाषा एवं प्रकार
  2. पादप ऊतक का वर्गीकरण
  3. विभज्योतक ऊतक – शीर्षस्थ, पार्श्व एवं अंतर्वेशी
  4. स्थायी ऊतक – सरल एवं जटिल
  5. मृदूतक, स्थूलकोण ऊतक एवं दृढ़ोतक
  6. जाइलम एवं फ्लोएम
  7. जंतु ऊतक का वर्गीकरण
  8. उपकला ऊतक
  9. संयोजी ऊतक
  10. रक्त एवं लसीका ऊतक
  11. पेशीय ऊतक – ऐच्छिक, अनैच्छिक एवं हृदय पेशी
  12. तंत्रिका ऊतक
  13. अस्थि एवं उपास्थि ऊतक
  14. विभिन्न ऊतकों के कार्य एवं स्थान

1. ऊतक की परिभाषा एवं प्रकार (Definition and Types of Tissues)

बहुकोशिकीय जीवों के शरीर में अनेक कोशिकाएँ विशेष कार्य करने के लिए संगठित रहती हैं। समान उत्पत्ति, समान या मिलती-जुलती संरचना तथा किसी विशेष कार्य में सहयोग करने वाली कोशिकाओं के समूह को ऊतक (Tissue) कहते हैं। ऊतक शरीर में श्रम-विभाजन (Division of Labour) को संभव बनाते हैं, जिससे विभिन्न जैविक कार्य अधिक दक्षता से संपन्न होते हैं।

उदाहरण के लिए, पौधों में जाइलम जल और खनिजों का परिवहन करता है, जबकि जंतुओं में पेशीय ऊतक गति उत्पन्न करता है तथा तंत्रिका ऊतक संदेशों का संचार करता है।

ऊतक निर्माण का संगठन स्तर

कोशिका → ऊतक → अंग → अंग तंत्र → जीव

समान प्रकार की कोशिकाएँ मिलकर ऊतक बनाती हैं। विभिन्न ऊतक मिलकर अंग बनाते हैं और कई अंग मिलकर अंग तंत्र का निर्माण करते हैं। उदाहरण के लिए, हृदय एक अंग है, जिसमें पेशीय, संयोजी, तंत्रिका और उपकला ऊतक पाए जाते हैं।

ऊतक के अध्ययन का महत्त्व

  • ऊतक शरीर में कार्यों का विभाजन करते हैं।
  • ये अंगों की संरचना एवं कार्यक्षमता का आधार हैं।
  • पौधों में वृद्धि, जल परिवहन, भोजन परिवहन और यांत्रिक मजबूती प्रदान करते हैं।
  • जंतुओं में सुरक्षा, गति, संवेदना, परिवहन एवं सहारा प्रदान करते हैं।

ऊतकों के मुख्य प्रकार

जीव-जगत में ऊतकों को मुख्यतः दो बड़े समूहों में बाँटा जाता है:

ऊतकमुख्य प्रकारउदाहरण
पादप ऊतक (Plant Tissue)विभज्योतक एवं स्थायी ऊतकशीर्षस्थ विभज्योतक, मृदूतक, जाइलम, फ्लोएम
जंतु ऊतक (Animal Tissue)उपकला, संयोजी, पेशीय एवं तंत्रिका ऊतकत्वचा की उपकला, रक्त, पेशी, न्यूरॉन
परीक्षा तथ्य: ऊतक समान या संबंधित कार्य करने वाली कोशिकाओं का संगठित समूह है। बहुकोशिकीय जीवों में ऊतक संगठन श्रम-विभाजन को संभव बनाता है।

2. पादप ऊतक का वर्गीकरण (Classification of Plant Tissues)

पौधों में ऊतकों का वर्गीकरण मुख्यतः कोशिकाओं की विभाजन क्षमता और उनके कार्य के आधार पर किया जाता है। पादप ऊतक दो प्रमुख प्रकार के होते हैं – विभज्योतक ऊतक और स्थायी ऊतक।

पादप ऊतकों का वर्गीकरण

मुख्य वर्गउपवर्गमुख्य कार्य
विभज्योतक ऊतकशीर्षस्थ, पार्श्व एवं अंतर्वेशीनई कोशिकाएँ बनाकर पौधे की वृद्धि करना
स्थायी ऊतकसरल, जटिल एवं विशेष/स्रावी ऊतकभंडारण, प्रकाश संश्लेषण, सहारा, परिवहन एवं स्राव

विभज्योतक ऊतक की कोशिकाएँ लगातार विभाजित होती हैं। इनसे बनी कोशिकाएँ आगे चलकर विभेदन (Differentiation) द्वारा विशेष संरचना और कार्य वाले स्थायी ऊतकों में परिवर्तित हो जाती हैं।

याद रखें: विभज्योतक ऊतक वृद्धि के लिए उत्तरदायी है, जबकि स्थायी ऊतक सामान्यतः विशिष्ट कार्य करते हैं और अधिकांशतः विभाजन की क्षमता खो चुके होते हैं।

3. विभज्योतक ऊतक – शीर्षस्थ, पार्श्व एवं अंतर्वेशी

विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue) ऐसी जीवित कोशिकाओं से बना होता है जो लगातार कोशिका विभाजन करने में सक्षम होती हैं। पौधे की लंबाई और मोटाई में वृद्धि मुख्यतः इसी ऊतक के कारण होती है। इसकी कोशिकाएँ सामान्यतः छोटी, पतली कोशिका भित्ति वाली, सघन कोशिकाद्रव्ययुक्त तथा स्पष्ट केंद्रक वाली होती हैं। इनमें रिक्तिकाएँ सामान्यतः अनुपस्थित या बहुत छोटी होती हैं।

विभज्योतक ऊतक की विशेषताएँ

  • कोशिकाएँ सामान्यतः छोटी और लगभग समान आकार की होती हैं।
  • कोशिका भित्ति पतली एवं प्राथमिक प्रकृति की होती है।
  • कोशिकाओं में सघन कोशिकाद्रव्य पाया जाता है।
  • केंद्रक अपेक्षाकृत बड़ा एवं स्पष्ट होता है।
  • कोशिकाओं के बीच अंतरकोशिकीय स्थान बहुत कम या अनुपस्थित होते हैं।
  • कोशिकाएँ सक्रिय रूप से विभाजित होती हैं।

विभाजन के स्थान के आधार पर प्रकार

1. शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem)

यह पौधे की जड़ और तने के शीर्ष पर पाया जाता है। यह प्राथमिक वृद्धि अर्थात पौधे की लंबाई बढ़ाने के लिए उत्तरदायी होता है। जड़ का अग्रभाग तथा तने की शीर्षस्थ कली इसके प्रमुख स्थान हैं।

  • जड़ और तने की लंबाई में वृद्धि करता है।
  • प्राथमिक ऊतकों एवं प्राथमिक पौध शरीर के निर्माण में सहायक है।
  • जड़ एवं तने के अग्रभाग में पाया जाता है।

2. पार्श्व विभज्योतक (Lateral Meristem)

यह तने और जड़ के पार्श्व भागों में पाया जाता है। यह पौधे की मोटाई या व्यास में वृद्धि करता है, जिसे द्वितीयक वृद्धि (Secondary Growth) कहते हैं। संवहनी कैम्बियम (Vascular Cambium) और कॉर्क कैम्बियम इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

  • तने एवं जड़ की मोटाई बढ़ाता है।
  • द्वितीयक जाइलम और द्वितीयक फ्लोएम के निर्माण में संवहनी कैम्बियम सहायक है।
  • कॉर्क कैम्बियम बाहरी सुरक्षात्मक ऊतकों के निर्माण में भाग लेता है।

3. अंतर्वेशी विभज्योतक (Intercalary Meristem)

यह परिपक्व ऊतकों के बीच, प्रायः पर्वसंधि (Node) या पत्ती के आधार के पास पाया जाता है। घास जैसे पौधों में यह विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है। चराई या कटाई के बाद घास के पुनः बढ़ने में इसकी भूमिका होती है।

  • पर्वों या पत्ती के आधार के निकट पाया जाता है।
  • घास एवं कुछ एकबीजपत्री पौधों में प्रमुख रूप से मिलता है।
  • अंतरपर्व (Internode) की लंबाई बढ़ाने में सहायता कर सकता है।
विभज्योतकस्थानवृद्धि का प्रकारउदाहरण
शीर्षस्थजड़ एवं तने का शीर्षलंबाई में वृद्धिजड़ का अग्रभाग
पार्श्वतने एवं जड़ के पार्श्व भागमोटाई में वृद्धिकैम्बियम
अंतर्वेशीपर्व, पर्वसंधि या पत्ती का आधारस्थानीय लंबाई वृद्धिघास
परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है: पौधे की लंबाई – शीर्षस्थ विभज्योतक; मोटाई – पार्श्व विभज्योतक; घास की पुनर्वृद्धि – अंतर्वेशी विभज्योतक।

4. स्थायी ऊतक – सरल एवं जटिल (Permanent Tissues)

विभज्योतक ऊतक से बनी कोशिकाएँ जब आकार, संरचना और कार्य में विशेषीकृत हो जाती हैं तथा सामान्यतः विभाजन की क्षमता खो देती हैं, तो वे स्थायी ऊतक (Permanent Tissue) बनाती हैं। स्थायी ऊतक पौधे में भोजन निर्माण, भंडारण, सुरक्षा, सहारा तथा पदार्थों के परिवहन जैसे कार्य करते हैं।

स्थायी ऊतक के प्रमुख प्रकार

1. सरल स्थायी ऊतक (Simple Permanent Tissue)

ऐसे ऊतक जो मुख्यतः एक ही प्रकार की कोशिकाओं से बने होते हैं, सरल स्थायी ऊतक कहलाते हैं। इनके तीन प्रमुख प्रकार हैं – मृदूतक, स्थूलकोण ऊतक और दृढ़ोतक।

2. जटिल स्थायी ऊतक (Complex Permanent Tissue)

ऐसे ऊतक जो एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बने होते हैं और सामूहिक रूप से किसी विशेष कार्य को पूरा करते हैं, जटिल स्थायी ऊतक कहलाते हैं। जाइलम और फ्लोएम इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

3. विशेष या स्रावी ऊतक

कुछ पादप कोशिकाएँ विशेष पदार्थों का निर्माण या स्राव करती हैं। जैसे तेल, रेजिन, गोंद, लेटेक्स तथा मधुरस का स्राव करने वाली संरचनाएँ। इन्हें विशेष या स्रावी ऊतक/संरचनाओं के अंतर्गत पढ़ा जाता है।

आधारसरल स्थायी ऊतकजटिल स्थायी ऊतक
कोशिकाओं का प्रकारमुख्यतः एक प्रकार की कोशिकाएँविभिन्न प्रकार की कोशिकाएँ
मुख्य कार्यभंडारण, प्रकाश संश्लेषण, सहाराजल एवं भोजन का परिवहन
उदाहरणमृदूतक, स्थूलकोण, दृढ़ोतकजाइलम एवं फ्लोएम
महत्त्वपूर्ण: जाइलम और फ्लोएम दोनों जटिल स्थायी ऊतक हैं। मृदूतक, स्थूलकोण ऊतक और दृढ़ोतक सरल स्थायी ऊतक हैं।

5. मृदूतक, स्थूलकोण ऊतक एवं दृढ़ोतक

मृदूतक, स्थूलकोण ऊतक तथा दृढ़ोतक पौधों के तीन प्रमुख सरल स्थायी ऊतक हैं। इनके बीच कोशिका भित्ति, कोशिकाओं की जीवित अवस्था और कार्य के आधार पर अंतर होता है।

1. मृदूतक (Parenchyma)

मृदूतक जीवित कोशिकाओं से बना सरल स्थायी ऊतक है। इसकी कोशिकाएँ सामान्यतः पतली कोशिका भित्ति वाली होती हैं और इनके बीच अंतरकोशिकीय स्थान पाए जा सकते हैं। पौधे के अनेक कोमल भागों में यह ऊतक उपस्थित रहता है।

  • भोजन एवं जल का भंडारण करता है।
  • हरी मृदूतक कोशिकाओं में क्लोरोप्लास्ट होने पर प्रकाश संश्लेषण होता है; ऐसे ऊतक को हरित ऊतक (Chlorenchyma) कहते हैं।
  • जलीय पौधों में वायु से भरे बड़े अंतरकोशिकीय स्थान वाला मृदूतक एरेन्काइमा (Aerenchyma) कहलाता है।
  • घाव भरने और ऊतकों की मरम्मत में भी इसकी भूमिका हो सकती है।

2. स्थूलकोण ऊतक (Collenchyma)

स्थूलकोण ऊतक जीवित कोशिकाओं से बना सरल स्थायी ऊतक है। इसकी कोशिका भित्ति के कोनों पर असमान रूप से मोटी होती है। यह पौधों के बढ़ते हुए भागों को लचीलापन और यांत्रिक सहारा प्रदान करता है।

  • कोशिकाएँ जीवित होती हैं।
  • कोशिका भित्ति के कोनों पर सेलुलोज एवं पेक्टिन के कारण मोटाई अधिक होती है।
  • पत्ती के डंठल और द्विबीजपत्री तने की बाहरी परत के नीचे पाया जा सकता है।
  • पौधे के कोमल भागों को टूटे बिना मुड़ने में सहायता करता है।

3. दृढ़ोतक (Sclerenchyma)

दृढ़ोतक पौधों को कठोरता और यांत्रिक मजबूती प्रदान करने वाला सरल स्थायी ऊतक है। इसकी परिपक्व कोशिकाएँ सामान्यतः मृत होती हैं और इनकी कोशिका भित्ति लिग्निन के जमाव के कारण मोटी हो जाती है।

  • परिपक्व कोशिकाएँ सामान्यतः मृत होती हैं।
  • कोशिका भित्ति मोटी एवं लिग्निनयुक्त होती है।
  • पौधे के कठोर भागों को मजबूती प्रदान करता है।
  • नारियल का रेशा दृढ़ोतक रेशों का उदाहरण है।
  • नाशपाती के गूदे में पाए जाने वाले कठोर कण (Sclereids) दृढ़ोतक के उदाहरण हैं।

मृदूतक, स्थूलकोण एवं दृढ़ोतक में अंतर

आधारमृदूतकस्थूलकोणदृढ़ोतक
कोशिका अवस्थाजीवितजीवितपरिपक्व अवस्था में सामान्यतः मृत
कोशिका भित्तिपतलीकोनों पर असमान मोटीबहुत मोटी, प्रायः लिग्निनयुक्त
अंतरकोशिकीय स्थानअक्सर उपस्थितबहुत कम या अनुपस्थितसामान्यतः अनुपस्थित
मुख्य कार्यभंडारण, प्रकाश संश्लेषणलचीलापन एवं सहाराकठोरता एवं मजबूती
उदाहरणफल का गूदापत्ती का डंठलनारियल का रेशा, कठोर बीजावरण
परीक्षा में भ्रम न करें: मृदूतक और स्थूलकोण ऊतक जीवित होते हैं। दृढ़ोतक की परिपक्व कोशिकाएँ सामान्यतः मृत होती हैं। स्थूलकोण लचीलापन देता है, जबकि दृढ़ोतक कठोरता देता है।

6. जाइलम एवं फ्लोएम (Xylem and Phloem)

जाइलम और फ्लोएम पौधों के जटिल स्थायी संवहनी ऊतक (Vascular Tissues) हैं। ये पौधे में पदार्थों के परिवहन का कार्य करते हैं। जाइलम मुख्यतः जल एवं खनिज लवणों का परिवहन करता है, जबकि फ्लोएम प्रकाश संश्लेषण से बने कार्बनिक भोजन का परिवहन करता है।

जाइलम (Xylem)

जाइलम जड़ द्वारा अवशोषित जल और खनिज लवणों को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है। जाइलम में सामान्यतः चार प्रकार के घटक पाए जाते हैं:

  1. वाहिनिकाएँ (Tracheids): लंबी, संकरी तथा सिरों पर नुकीली कोशिकाएँ। ये जल परिवहन और सहारा देती हैं।
  2. वाहिकाएँ (Vessels): नलिकाकार संरचनाएँ, जो अनेक वाहिका सदस्यों के सिरों के बीच छिद्रों/छिद्रित पट्टिकाओं से जुड़कर बनती हैं। ये जल परिवहन में अत्यंत प्रभावी हैं।
  3. जाइलम रेशे (Xylem Fibres): मुख्यतः यांत्रिक मजबूती प्रदान करते हैं।
  4. जाइलम मृदूतक (Xylem Parenchyma): जीवित कोशिकाएँ, जो भोजन भंडारण और पार्श्व परिवहन में सहायक हैं।

जाइलम की अधिकांश संवाहक कोशिकाएँ परिपक्व अवस्था में मृत होती हैं। जाइलम मृदूतक इसका प्रमुख जीवित घटक है।

फ्लोएम (Phloem)

फ्लोएम पत्तियों में निर्मित भोजन को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है। यह परिवहन स्रोत (Source) से उपयोग या भंडारण स्थल (Sink) की ओर होता है। परिवहन आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग दिशाओं में भी हो सकता है।

  1. चालनी नलिकाएँ (Sieve Tubes): आवृतबीजी पौधों में भोजन परिवहन करने वाली जीवित कोशिकाएँ। इनके सिरों पर चालनी पट्टिकाएँ होती हैं।
  2. सहचर कोशिकाएँ (Companion Cells): चालनी नलिकाओं के साथ जुड़ी जीवित कोशिकाएँ, जो इनके कार्य एवं भोजन लोडिंग-अनलोडिंग में सहायता करती हैं।
  3. फ्लोएम मृदूतक (Phloem Parenchyma): भोजन का भंडारण और पार्श्व परिवहन करता है।
  4. फ्लोएम रेशे (Phloem Fibres): मुख्यतः मृत कोशिकाएँ, जो यांत्रिक मजबूती देती हैं।
आधारजाइलमफ्लोएम
मुख्य कार्यजल एवं खनिजों का परिवहनकार्बनिक भोजन का परिवहन
परिवहन की दिशामुख्यतः जड़ से ऊपर की ओरस्रोत से उपयोग/भंडारण स्थल की ओर, आवश्यकता अनुसार दोनों दिशाओं में
मुख्य घटकवाहिकाएँ, वाहिनिकाएँ, जाइलम रेशे, जाइलम मृदूतकचालनी नलिकाएँ, सहचर कोशिकाएँ, फ्लोएम रेशे, फ्लोएम मृदूतक
जीवित/मृतअधिकांश घटक मृत; मृदूतक जीवितअधिकांश संवाहक घटक जीवित; रेशे मृत
ऊर्जा की आवश्यकताजल परिवहन में वाष्पोत्सर्जन खिंचाव सहित भौतिक प्रक्रियाएँ प्रमुखभोजन लोडिंग-अनलोडिंग में ऊर्जा की आवश्यकता हो सकती है
परीक्षा तथ्य: जाइलम जल का परिवहन करता है और फ्लोएम भोजन का। जाइलम में जाइलम मृदूतक प्रमुख जीवित घटक है, जबकि फ्लोएम की चालनी नलिकाएँ और सहचर कोशिकाएँ जीवित होती हैं।

7. जंतु ऊतक का वर्गीकरण (Classification of Animal Tissues)

जंतुओं में विभिन्न कोशिकाएँ विशेष कार्यों के लिए संगठित होकर ऊतक बनाती हैं। जंतु ऊतकों को मुख्यतः चार वर्गों में बाँटा जाता है – उपकला ऊतक, संयोजी ऊतक, पेशीय ऊतक और तंत्रिका ऊतक।

ऊतक का प्रकारमुख्य कार्यउदाहरण / स्थान
उपकला ऊतक (Epithelial)आवरण, सुरक्षा, अवशोषण, स्रावत्वचा, आँत, ग्रंथियाँ
संयोजी ऊतक (Connective)जोड़ना, सहारा, सुरक्षा, परिवहनरक्त, अस्थि, उपास्थि, वसा
पेशीय ऊतक (Muscular)संकुचन एवं गतिकंकालीय पेशी, हृदय, आँत
तंत्रिका ऊतक (Nervous)संदेश ग्रहण एवं संचारमस्तिष्क, मेरुरज्जु, तंत्रिकाएँ

जंतु ऊतकों में कोशिकाओं के बीच अंतरकोशिकीय पदार्थ की मात्रा अलग-अलग होती है। उपकला ऊतक में कोशिकाएँ सघन होती हैं, जबकि संयोजी ऊतक में कोशिकाओं के बीच मैट्रिक्स अधिक पाया जाता है।

याद रखें: जंतु ऊतकों के चार मुख्य प्रकार – उपकला, संयोजी, पेशीय और तंत्रिका।

8. उपकला ऊतक (Epithelial Tissue)

उपकला ऊतक शरीर की बाहरी सतह को ढकता है तथा शरीर के आंतरिक अंगों और गुहाओं की सतहों पर अस्तर बनाता है। यह कोशिकाओं की सघन परतों से बना होता है। कोशिकाओं के बीच अंतरकोशिकीय पदार्थ बहुत कम होता है। उपकला ऊतक सामान्यतः आधार झिल्ली (Basement Membrane) पर स्थित रहता है और इसमें रक्त वाहिकाएँ नहीं होतीं; पोषण नीचे स्थित संयोजी ऊतक से विसरण द्वारा मिलता है।

उपकला ऊतक के प्रमुख कार्य

  • शरीर और अंगों की सतह की सुरक्षा करना।
  • आँत में पोषक पदार्थों का अवशोषण करना।
  • ग्रंथियों द्वारा हार्मोन, एंजाइम, श्लेष्मा आदि का स्राव करना।
  • कुछ स्थानों पर पदार्थों का छनन एवं विसरण करना।
  • श्वसन मार्ग में सिलिया द्वारा कणों को बाहर की ओर ले जाने में सहायता करना।

उपकला ऊतक के प्रकार

1. शल्की उपकला (Squamous Epithelium)

यह चपटी और पतली कोशिकाओं की परत से बनी होती है। यह पदार्थों के तीव्र विसरण और छनन में सहायक है। फेफड़ों की वायुकोष्ठिकाओं तथा रक्त वाहिकाओं की आंतरिक सतह पर इसकी विशेष प्रकार की परत पाई जाती है।

2. घनाकार उपकला (Cuboidal Epithelium)

इसकी कोशिकाएँ घन के आकार की होती हैं। यह स्राव और अवशोषण में सहायक है। गुर्दे की नलिकाओं और अनेक ग्रंथियों की नलिकाओं में पाई जाती है।

3. स्तंभाकार उपकला (Columnar Epithelium)

इसकी कोशिकाएँ लंबी और स्तंभ जैसी होती हैं। यह मुख्यतः अवशोषण और स्राव में सहायक है। छोटी आँत की भीतरी सतह इसका उदाहरण है।

4. पक्ष्माभी उपकला (Ciliated Epithelium)

इसकी कोशिकाओं की मुक्त सतह पर सूक्ष्म बाल जैसी संरचनाएँ होती हैं, जिन्हें सिलिया कहते हैं। सिलिया की गति से पदार्थ आगे बढ़ते हैं। श्वसन मार्ग और स्त्री की अंडवाहिनी में यह पाई जाती है।

5. ग्रंथिल उपकला (Glandular Epithelium)

यह विशेष पदार्थों का स्राव करती है। इससे बहिःस्रावी (Exocrine) तथा अंतःस्रावी (Endocrine) ग्रंथियाँ बनती हैं। लार ग्रंथियाँ बहिःस्रावी तथा थायरॉइड अंतःस्रावी ग्रंथि का उदाहरण है।

6. स्तरित उपकला (Stratified Epithelium)

यह अनेक कोशिका परतों से बनी होती है। इसका प्रमुख कार्य घर्षण और चोट से सुरक्षा करना है। त्वचा की बाहरी परत में केराटिनयुक्त स्तरित शल्की उपकला पाई जाती है।

उपकला का प्रकारप्रमुख स्थानकार्य
शल्कीफेफड़ों की वायुकोष्ठिकाएँ, रक्त वाहिकाओं की आंतरिक परतविसरण एवं छनन
घनाकारगुर्दे की नलिकाएँ, ग्रंथियों की नलिकाएँअवशोषण एवं स्राव
स्तंभाकारछोटी आँत की आंतरिक सतहअवशोषण एवं स्राव
पक्ष्माभीश्वसन मार्ग, अंडवाहिनीपदार्थों को आगे बढ़ाना
ग्रंथिललार ग्रंथियाँ, अन्य स्रावी ग्रंथियाँस्राव
स्तरितत्वचा की बाहरी परतसुरक्षा
परीक्षा तथ्य: फेफड़ों की वायुकोष्ठिकाओं में सरल शल्की उपकला गैसों के आदान-प्रदान के लिए उपयुक्त होती है। आँत में स्तंभाकार उपकला अवशोषण में सहायक है।

9. संयोजी ऊतक (Connective Tissue)

संयोजी ऊतक शरीर के विभिन्न अंगों और ऊतकों को जोड़ता है, सहारा देता है, सुरक्षा प्रदान करता है तथा पदार्थों के परिवहन में सहायता करता है। इसकी प्रमुख विशेषता कोशिकाओं के बीच अपेक्षाकृत अधिक अंतरकोशिकीय पदार्थ या मैट्रिक्स का पाया जाना है। मैट्रिक्स तरल, अर्धठोस या ठोस हो सकता है।

संयोजी ऊतक के प्रमुख प्रकार

1. एरिओलर ऊतक (Areolar Tissue)

यह ढीला संयोजी ऊतक है। यह त्वचा और मांसपेशियों के बीच, अंगों के आसपास तथा विभिन्न ऊतकों के बीच पाया जाता है। यह अंगों को सहारा देता है, रिक्त स्थान भरता है तथा ऊतकों की मरम्मत में सहायता करता है।

2. वसा ऊतक (Adipose Tissue)

इस ऊतक की कोशिकाओं में वसा का संचय होता है। यह त्वचा के नीचे तथा आंतरिक अंगों के आसपास पाया जाता है। इसका प्रमुख कार्य ऊर्जा भंडारण, ऊष्मीय इन्सुलेशन और अंगों को यांत्रिक सुरक्षा देना है।

3. कण्डरा (Tendon)

कण्डरा मजबूत रेशेदार संयोजी ऊतक है, जो मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ती है। इसमें कोलेजन रेशे अधिक होते हैं और यह तनन बल सहन करने में सक्षम होती है।

4. स्नायुबंधन (Ligament)

स्नायुबंधन हड्डी को हड्डी से जोड़ता है। यह जोड़ों को स्थिरता प्रदान करता है। इसमें लचीले रेशे भी पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं।

5. अस्थि ऊतक (Bone)

अस्थि कठोर संयोजी ऊतक है। इसके मैट्रिक्स में कैल्शियम और फॉस्फेट के लवण जमा होते हैं। यह शरीर को आकार, सहारा और सुरक्षा देता है तथा मांसपेशियों के साथ मिलकर गति में सहायता करता है।

6. उपास्थि (Cartilage)

उपास्थि लचीला संयोजी ऊतक है। यह नाक, बाहरी कान, श्वासनली और जोड़ों की सतहों पर पाया जाता है। यह जोड़ों में घर्षण कम करता है और कुछ अंगों को लचीलापन देता है।

7. रक्त (Blood)

रक्त तरल संयोजी ऊतक है। इसका मैट्रिक्स प्लाज्मा कहलाता है। यह ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, पोषक पदार्थ, हार्मोन और अपशिष्ट पदार्थों के परिवहन में सहायता करता है।

8. लसीका (Lymph)

लसीका एक हल्का पीला या रंगहीन ऊतक द्रव है। यह ऊतकों से अतिरिक्त द्रव को वापस रक्त परिसंचरण में पहुँचाने तथा प्रतिरक्षा में सहायता करता है।

संयोजी ऊतककिसे जोड़ता / कहाँ पाया जाता हैमुख्य कार्य
एरिओलरत्वचा एवं मांसपेशियों के बीच, अंगों के आसपासरिक्त स्थान भरना, सहारा
वसा ऊतकत्वचा के नीचे, अंगों के आसपासऊर्जा संचय, ऊष्मा संरक्षण
कण्डरामांसपेशी से हड्डीमांसपेशी बल को हड्डी तक पहुँचाना
स्नायुबंधनहड्डी से हड्डीजोड़ों को स्थिरता देना
अस्थिकंकालसहारा, सुरक्षा, गति
उपास्थिकान, नाक, श्वासनली, जोड़ों की सतहलचीलापन, घर्षण कम करना
रक्तरक्त वाहिकाओं मेंपरिवहन, रक्षा, ताप नियंत्रण
लसीकालसीका वाहिकाओं मेंद्रव संतुलन एवं प्रतिरक्षा
अक्सर पूछा जाने वाला अंतर: कण्डरा मांसपेशी को हड्डी से जोड़ती है, जबकि स्नायुबंधन हड्डी को हड्डी से जोड़ता है।

10. रक्त एवं लसीका ऊतक (Blood and Lymph)

रक्त (Blood)

रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है, जो शरीर में पदार्थों का परिवहन करता है। यह मुख्यतः प्लाज्मा और रक्त कणिकाओं से बना होता है। वयस्क मानव में रक्त की मात्रा सामान्यतः शरीर के भार का लगभग 7–8 प्रतिशत होती है, हालांकि यह आयु, लिंग और शरीर की बनावट के अनुसार बदल सकती है।

रक्त के घटक

1. प्लाज्मा (Plasma)

प्लाज्मा रक्त का हल्का पीला तरल भाग है। इसमें जल, प्रोटीन, लवण, पोषक पदार्थ, हार्मोन और अपशिष्ट पदार्थ घुले रहते हैं। रक्त का लगभग 55 प्रतिशत भाग प्लाज्मा होता है।

2. लाल रक्त कणिकाएँ (RBC / Erythrocytes)

  • इनमें हीमोग्लोबिन पाया जाता है, जो ऑक्सीजन परिवहन में सहायक है।
  • परिपक्व मानव RBC सामान्यतः केंद्रक रहित और द्विअवतल (Biconcave) होती हैं।
  • इनका निर्माण मुख्यतः लाल अस्थि मज्जा में होता है।
  • इनका औसत जीवनकाल लगभग 120 दिन होता है।

3. श्वेत रक्त कणिकाएँ (WBC / Leucocytes)

  • ये शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का महत्त्वपूर्ण भाग हैं।
  • इनमें केंद्रक पाया जाता है।
  • ये रोगाणुओं से रक्षा और प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं में भाग लेती हैं।
  • इनकी संख्या सामान्यतः RBC से बहुत कम होती है।

4. प्लेटलेट्स (Platelets / Thrombocytes)

  • ये रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया में सहायक हैं।
  • मानव में ये वास्तविक पूर्ण कोशिकाएँ नहीं, बल्कि मेगाकैरियोसाइट से बने कोशिकीय खंड हैं।
  • इनकी कमी से रक्तस्राव का जोखिम बढ़ सकता है।
घटकमुख्य कार्यविशेष तथ्य
प्लाज्मापदार्थों का परिवहनरक्त का तरल मैट्रिक्स
RBCमुख्यतः ऑक्सीजन परिवहनपरिपक्व मानव RBC में केंद्रक नहीं
WBCप्रतिरक्षा एवं रोगों से रक्षाकेंद्रकयुक्त
प्लेटलेट्सरक्त का थक्का जमानाकोशिकीय खंड

लसीका (Lymph)

लसीका ऊतकों के बीच उपस्थित अंतरालीय द्रव से बनती है, जो लसीका वाहिकाओं में प्रवेश करता है। यह अतिरिक्त ऊतक द्रव को रक्त परिसंचरण में वापस पहुँचाती है। लसीका में सामान्यतः RBC नहीं होतीं और इसमें लिम्फोसाइट जैसे श्वेत रक्त कोशिकाएँ पाई जाती हैं।

लसीका के प्रमुख कार्य

  • ऊतकों से अतिरिक्त द्रव को रक्त में वापस पहुँचाना।
  • छोटी आँत से अवशोषित वसा के परिवहन में सहायता करना।
  • लिम्फोसाइट के माध्यम से प्रतिरक्षा में योगदान देना।
  • लसीका ग्रंथियों में रोगजनकों और बाहरी कणों को छानने में सहायता करना।
परीक्षा तथ्य: रक्त तरल संयोजी ऊतक है। RBC ऑक्सीजन परिवहन, WBC प्रतिरक्षा और प्लेटलेट्स रक्त का थक्का जमाने में सहायक हैं।

11. पेशीय ऊतक – ऐच्छिक, अनैच्छिक एवं हृदय पेशी

पेशीय ऊतक (Muscular Tissue) संकुचन और शिथिलन की क्षमता रखता है। इसकी कोशिकाएँ लंबी होती हैं और इन्हें पेशी तंतु भी कहा जाता है। पेशीय ऊतक शरीर की गति, आंतरिक अंगों की क्रिया तथा रक्त पंप करने जैसे कार्यों में सहायक है।

पेशीय ऊतक के तीन प्रमुख प्रकार

1. रेखित या कंकालीय पेशी (Striated / Skeletal Muscle)

यह हड्डियों से जुड़ी होती है और सामान्यतः ऐच्छिक नियंत्रण में कार्य करती है। इसके तंतु लंबे, बेलनाकार, अशाखित और बहुकेंद्रकीय होते हैं। सूक्ष्मदर्शी से देखने पर इनमें हल्की और गहरी धारियाँ दिखाई देती हैं।

  • इच्छानुसार गति में सहायता करती है।
  • चलना, दौड़ना, हाथ-पैर हिलाना इसके उदाहरण हैं।
  • हड्डियों से कण्डराओं द्वारा जुड़ी रहती है।

2. अरेखित या चिकनी पेशी (Smooth / Unstriated Muscle)

यह सामान्यतः अनैच्छिक नियंत्रण में कार्य करती है। इसकी कोशिकाएँ तर्कुरूपी (Spindle-shaped), एककेंद्रकीय और बिना धारियों वाली होती हैं। यह आँत, आमाशय, रक्त वाहिकाओं, मूत्राशय तथा अन्य आंतरिक अंगों की दीवारों में पाई जाती है।

  • इच्छा के बिना कार्य करती है।
  • भोजन को पाचन नली में आगे बढ़ाने में सहायक है।
  • रक्त वाहिकाओं के व्यास को नियंत्रित करने में भूमिका निभाती है।

3. हृदय पेशी (Cardiac Muscle)

हृदय पेशी केवल हृदय की दीवार (मायोकार्डियम) में पाई जाती है। इसकी कोशिकाएँ रेखित, शाखित और सामान्यतः एक या दो केंद्रक वाली होती हैं। इनमें इंटरकलेटेड डिस्क (Intercalated Discs) पाई जाती हैं, जो कोशिकाओं के बीच विद्युत एवं यांत्रिक समन्वय में सहायक होती हैं। यह अनैच्छिक रूप से लयबद्ध संकुचन करती है।

आधाररेखित / कंकालीयअरेखित / चिकनीहृदय पेशी
नियंत्रणऐच्छिकअनैच्छिकअनैच्छिक
धारियाँउपस्थितअनुपस्थितउपस्थित
कोशिका आकारलंबी, बेलनाकारतर्कुरूपीशाखित
केंद्रकअनेक, परिधि परएक, मध्य मेंसामान्यतः एक, कभी दो
स्थानहड्डियों से जुड़ी पेशियाँआँत, रक्त वाहिका, मूत्राशयहृदय की दीवार
विशेषतातेज एवं इच्छानुसार गतिधीमा, निरंतर संकुचनलयबद्ध संकुचन
परीक्षा में याद रखें: कंकालीय पेशी – ऐच्छिक और रेखित; चिकनी पेशी – अनैच्छिक और अरेखित; हृदय पेशी – अनैच्छिक, रेखित एवं शाखित।

12. तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue)

तंत्रिका ऊतक शरीर में संदेशों को ग्रहण करने, उनका विश्लेषण करने और उचित प्रतिक्रिया उत्पन्न करने का कार्य करता है। यह मुख्यतः मस्तिष्क, मेरुरज्जु और तंत्रिकाओं में पाया जाता है। इसकी संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई न्यूरॉन (Neuron) है।

न्यूरॉन की संरचना

  • कोशिका काय (Cell Body / Cyton): इसमें केंद्रक और कोशिकाद्रव्य होता है। यह न्यूरॉन का प्रमुख चयापचयी भाग है।
  • डेंड्राइट (Dendrites): शाखित प्रवर्ध जो सामान्यतः अन्य कोशिकाओं से संदेश ग्रहण करते हैं।
  • अक्षतंतु (Axon): लंबा प्रवर्ध जो तंत्रिका आवेग को कोशिका काय से दूर ले जाता है।
  • मायलिन आवरण (Myelin Sheath): कुछ अक्षतंतुओं के चारों ओर पाया जाने वाला आवरण, जो आवेग संचरण को तेज करने में सहायता करता है।
  • सिनेप्स (Synapse): दो न्यूरॉनों या न्यूरॉन और लक्ष्य कोशिका के बीच संचार का विशेष स्थान।

न्यूरॉन के प्रकार

प्रकारकार्य
संवेदी न्यूरॉन (Sensory Neuron)संवेदी अंगों या रिसेप्टर से संदेश केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक पहुँचाना।
प्रेरक न्यूरॉन (Motor Neuron)केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से मांसपेशियों या ग्रंथियों तक संदेश पहुँचाना।
सहचारी न्यूरॉन (Interneuron)केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में न्यूरॉनों के बीच संपर्क एवं सूचना प्रसंस्करण।

न्यूरॉन के प्रमुख कार्य

  • बाहरी और आंतरिक वातावरण से सूचना ग्रहण करना।
  • तंत्रिका आवेगों का संचार करना।
  • मांसपेशियों की गति और ग्रंथियों के स्राव को नियंत्रित करना।
  • सोचने, सीखने, स्मृति और संवेदना जैसी क्रियाओं में भाग लेना।
परीक्षा तथ्य: न्यूरॉन तंत्रिका ऊतक की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है। डेंड्राइट सामान्यतः संदेश ग्रहण करते हैं और अक्षतंतु संदेश आगे पहुँचाता है।

13. अस्थि एवं उपास्थि ऊतक (Bone and Cartilage)

अस्थि और उपास्थि दोनों विशेष प्रकार के संयोजी ऊतक हैं। ये कंकाल तंत्र का निर्माण करते हैं, लेकिन इनकी कठोरता, संरचना, मैट्रिक्स और रक्त आपूर्ति में अंतर होता है।

अस्थि ऊतक (Bone Tissue)

अस्थि कठोर एवं मजबूत संयोजी ऊतक है। इसकी कोशिकाएँ ऑस्टियोसाइट कहलाती हैं और ये कठोर मैट्रिक्स में स्थित रहती हैं। मैट्रिक्स में कोलेजन रेशों के साथ कैल्शियम फॉस्फेट जैसे खनिज लवण जमा होते हैं।

  • शरीर को आकार एवं सहारा प्रदान करती है।
  • मस्तिष्क, हृदय और फेफड़ों जैसे अंगों की सुरक्षा में सहायता करती है।
  • मांसपेशियों के साथ मिलकर गति उत्पन्न करती है।
  • अस्थि मज्जा में रक्त कोशिकाओं का निर्माण होता है।
  • कैल्शियम एवं फॉस्फेट का भंडार है।

अस्थि के प्रमुख प्रकार

सघन अस्थि (Compact Bone): कठोर एवं घनी संरचना वाली अस्थि, जो विशेष रूप से लंबी हड्डियों की बाहरी परत बनाती है। इसमें ऑस्टिऑन या हैवर्सियन तंत्र जैसी संरचनाएँ पाई जाती हैं।

स्पंजी अस्थि (Spongy Bone): इसमें अस्थि की पतली पट्टिकाओं या ट्रैबेकुला के बीच रिक्त स्थान होते हैं। यह विशेष रूप से लंबी हड्डियों के सिरों और कई चपटी हड्डियों के भीतर पाई जाती है।

उपास्थि ऊतक (Cartilage Tissue)

उपास्थि लचीला संयोजी ऊतक है। इसकी कोशिकाएँ कॉन्ड्रोसाइट (Chondrocytes) कहलाती हैं, जो मैट्रिक्स में स्थित रहती हैं। सामान्य उपास्थि में रक्त वाहिकाएँ नहीं होतीं और इसका पोषण विसरण द्वारा होता है।

  • नाक और बाहरी कान को आकार एवं लचीलापन देती है।
  • जोड़ों में हड्डियों के सिरों को ढककर घर्षण कम करती है।
  • श्वासनली को खुला रखने में सहायता करती है।
  • भ्रूण के कंकाल के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उपास्थि के प्रमुख प्रकार

प्रकारप्रमुख स्थानविशेषता
हायलिन उपास्थि (Hyaline)नाक, श्वासनली, पसलियों के अग्रभाग, जोड़ों की सतहचिकनी एवं पारदर्शी दिखने वाली मैट्रिक्स
लोचदार उपास्थि (Elastic)बाहरी कान, एपिग्लॉटिसअधिक लचीली
रेशेदार उपास्थि (Fibrocartilage)अंतराकशेरुका डिस्क, जघन संधिमजबूत, दबाव एवं खिंचाव सहन करने में सक्षम

अस्थि एवं उपास्थि में अंतर

आधारअस्थिउपास्थि
प्रकृतिकठोरलचीली
कोशिकाएँऑस्टियोसाइटकॉन्ड्रोसाइट
मैट्रिक्सकैल्शियम लवणों से कठोरचॉन्ड्रिनयुक्त लचीला मैट्रिक्स
रक्त वाहिकाएँउपस्थितसामान्यतः अनुपस्थित
मुख्य कार्यसहारा, सुरक्षा, गति, खनिज भंडारणलचीलापन, घर्षण कम करना, सहारा
कोशिका का स्थानलैकुना में ऑस्टियोसाइटलैकुना में कॉन्ड्रोसाइट
परीक्षा तथ्य: अस्थि कोशिका – ऑस्टियोसाइट; उपास्थि कोशिका – कॉन्ड्रोसाइट। उपास्थि में सामान्यतः रक्त वाहिकाएँ नहीं होतीं।

14. विभिन्न ऊतकों के कार्य एवं स्थान

प्रतियोगी परीक्षाओं में ऊतक का नाम, उसका स्थान, उसकी संरचना और कार्य को मिलाकर प्रश्न पूछे जाते हैं। नीचे दिए गए सारणीबद्ध तथ्यों से त्वरित पुनरावृत्ति की जा सकती है।

ऊतकस्थानमुख्य कार्य
शीर्षस्थ विभज्योतकजड़ एवं तने का शीर्षलंबाई में वृद्धि
पार्श्व विभज्योतकतने एवं जड़ के पार्श्व भागमोटाई में वृद्धि
अंतर्वेशी विभज्योतकघास में पर्व या पत्ती का आधारपुनर्वृद्धि एवं लंबाई वृद्धि
मृदूतकफल का गूदा, तना, पत्तीभंडारण एवं प्रकाश संश्लेषण
स्थूलकोण ऊतकपत्ती का डंठल, युवा तनालचीलापन एवं सहारा
दृढ़ोतकनारियल का रेशा, कठोर बीजावरणकठोरता एवं मजबूती
जाइलमसंवहनी बंडलजल एवं खनिज परिवहन
फ्लोएमसंवहनी बंडलभोजन परिवहन
शल्की उपकलाफेफड़ों की वायुकोष्ठिकाएँगैसों का विसरण
घनाकार उपकलागुर्दे की नलिकाएँअवशोषण एवं स्राव
स्तंभाकार उपकलाछोटी आँतअवशोषण
पक्ष्माभी उपकलाश्वसन मार्गश्लेष्मा एवं कणों को आगे बढ़ाना
एरिओलर ऊतकत्वचा और मांसपेशियों के बीचरिक्त स्थान भरना एवं सहारा
वसा ऊतकत्वचा के नीचे, अंगों के आसपासवसा संचय एवं ऊष्मा संरक्षण
कण्डरामांसपेशी एवं हड्डी के बीचमांसपेशी को हड्डी से जोड़ना
स्नायुबंधनजोड़ों परहड्डी को हड्डी से जोड़ना
रक्तरक्त वाहिकाएँपरिवहन एवं रक्षा
लसीकालसीका वाहिकाएँद्रव संतुलन एवं प्रतिरक्षा
कंकालीय पेशीहड्डियों से जुड़ीऐच्छिक गति
चिकनी पेशीआँत, रक्त वाहिकाअनैच्छिक संकुचन
हृदय पेशीहृदय की दीवाररक्त पंप करना
तंत्रिका ऊतकमस्तिष्क, मेरुरज्जु, तंत्रिकाएँसंदेश संचार
अस्थिकंकालसहारा एवं सुरक्षा
उपास्थिकान, नाक, श्वासनली, जोड़लचीलापन एवं घर्षण कम करना

परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण अंतर

पादप एवं जंतु ऊतक में अंतर

आधारपादप ऊतकजंतु ऊतक
मुख्य वर्गीकरणविभज्योतक एवं स्थायीउपकला, संयोजी, पेशीय एवं तंत्रिका
वृद्धिविशिष्ट क्षेत्रों में अधिक सक्रियशरीर के विभिन्न भागों में कोशिका विभाजन एवं वृद्धि
सहाराकोशिका भित्ति एवं दृढ़ ऊतकों सेकंकाल एवं संयोजी ऊतकों से
परिवहनजाइलम एवं फ्लोएमरक्त एवं लसीका परिसंचरण
गतिमुख्यतः वृद्धि या तुर्गर परिवर्तन आधारितपेशीय एवं तंत्रिका ऊतकों द्वारा

कण्डरा एवं स्नायुबंधन में अंतर

कण्डरा (Tendon)स्नायुबंधन (Ligament)
मांसपेशी को हड्डी से जोड़ती है।एक हड्डी को दूसरी हड्डी से जोड़ता है।
मुख्यतः मजबूत कोलेजन रेशों से बनी।कोलेजन के साथ लचीले रेशे भी हो सकते हैं।
मांसपेशी का बल हड्डी तक पहुँचाती है।जोड़ों को स्थिरता प्रदान करता है।

जाइलम एवं फ्लोएम के प्रमुख घटक

जाइलमफ्लोएम
वाहिनिकाएँ (Tracheids)चालनी नलिकाएँ (Sieve Tubes)
वाहिकाएँ (Vessels)सहचर कोशिकाएँ (Companion Cells)
जाइलम रेशेफ्लोएम रेशे
जाइलम मृदूतकफ्लोएम मृदूतक

हालिया परीक्षा प्रश्न एवं परीक्षा-आधारित अभ्यास

UPSSSC PET 2026 – 30 अक्टूबर, प्रथम पाली

प्रश्न: अखरोट के कठोर छिलके जैसी संरचनाओं को कठोरता एवं यांत्रिक मजबूती प्रदान करने वाला पादप ऊतक कौन-सा है?

(A) दृढ़ोतक (Sclerenchyma)
(B) एरेन्काइमा (Aerenchyma)
(C) स्थूलकोण ऊतक (Collenchyma)
(D) मृदूतक (Parenchyma)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) दृढ़ोतक (Sclerenchyma)।
दृढ़ोतक की परिपक्व कोशिकाओं की भित्ति मोटी और प्रायः लिग्निनयुक्त होती है। यह पौधों के कठोर भागों को यांत्रिक मजबूती देता है। अखरोट के कठोर खोल में स्क्लेराइड जैसे दृढ़ोतक पाए जाते हैं।

प्रश्न अभ्यास की नीति: नीचे दिए गए अन्य MCQ मूल अभ्यास प्रश्न हैं, जिन्हें NCERT-आधारित अवधारणाओं तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न-पैटर्न के अनुसार तैयार किया गया है। किसी प्रश्न को वास्तविक UP Police या UPSSSC पुराने प्रश्नपत्र का प्रश्न तभी माना जाए, जब उसका मूल प्रश्नपत्र/आधिकारिक स्रोत उपलब्ध हो।

अभ्यास प्रश्न (MCQs) – 50 महत्त्वपूर्ण प्रश्न

सभी प्रश्नों के उत्तर और संक्षिप्त व्याख्या देखने के लिए प्रत्येक प्रश्न के नीचे दिए गए विकल्प को खोलें।

प्रश्न 1. समान संरचना एवं कार्य करने वाली कोशिकाओं के समूह को क्या कहते हैं?

(A) अंग
(B) ऊतक
(C) अंग तंत्र
(D) जीव
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) ऊतक।
समान या संबंधित कार्य करने वाली कोशिकाओं का संगठित समूह ऊतक कहलाता है।

प्रश्न 2. पौधों में लंबाई में वृद्धि किस ऊतक के कारण होती है?

(A) पार्श्व विभज्योतक
(B) शीर्षस्थ विभज्योतक
(C) दृढ़ोतक
(D) जाइलम
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) शीर्षस्थ विभज्योतक।
यह जड़ और तने के शीर्ष पर पाया जाता है तथा प्राथमिक वृद्धि करता है।

प्रश्न 3. पौधे की मोटाई में वृद्धि किस विभज्योतक के कारण होती है?

(A) शीर्षस्थ
(B) अंतर्वेशी
(C) पार्श्व
(D) प्राथमिक
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) पार्श्व।
पार्श्व विभज्योतक, जैसे कैम्बियम, द्वितीयक वृद्धि द्वारा तने और जड़ की मोटाई बढ़ाता है।

प्रश्न 4. घास के कटने के बाद पुनः वृद्धि में कौन-सा ऊतक सहायक होता है?

(A) शीर्षस्थ विभज्योतक
(B) अंतर्वेशी विभज्योतक
(C) दृढ़ोतक
(D) फ्लोएम
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) अंतर्वेशी विभज्योतक।
यह घास में पर्व या पत्ती के आधार के पास पाया जाता है और पुनर्वृद्धि में मदद करता है।

प्रश्न 5. निम्नलिखित में से कौन-सा सरल स्थायी ऊतक है?

(A) जाइलम
(B) फ्लोएम
(C) मृदूतक
(D) रक्त
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) मृदूतक।
मृदूतक, स्थूलकोण ऊतक और दृढ़ोतक सरल स्थायी ऊतक हैं।

प्रश्न 6. जाइलम एवं फ्लोएम किस प्रकार के ऊतक हैं?

(A) सरल स्थायी
(B) जटिल स्थायी
(C) विभज्योतक
(D) पेशीय
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) जटिल स्थायी।
दोनों अनेक प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बने संवहनी ऊतक हैं।

प्रश्न 7. पौधों में जल एवं खनिज लवणों का परिवहन कौन करता है?

(A) फ्लोएम
(B) जाइलम
(C) मृदूतक
(D) दृढ़ोतक
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) जाइलम।
जाइलम जड़ों से जल और खनिजों का परिवहन करता है।

प्रश्न 8. पौधों में भोजन का परिवहन कौन-सा ऊतक करता है?

(A) जाइलम
(B) फ्लोएम
(C) दृढ़ोतक
(D) स्थूलकोण ऊतक
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) फ्लोएम।
फ्लोएम पत्तियों में निर्मित कार्बनिक भोजन को पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाता है।

प्रश्न 9. मृदूतक की कोशिकाएँ सामान्यतः कैसी होती हैं?

(A) मृत एवं मोटी भित्ति वाली
(B) जीवित एवं पतली भित्ति वाली
(C) केवल लिग्निनयुक्त
(D) केंद्रक रहित एवं मृत
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) जीवित एवं पतली भित्ति वाली।
मृदूतक की कोशिकाएँ जीवित होती हैं और सामान्यतः पतली प्राथमिक कोशिका भित्ति रखती हैं।

प्रश्न 10. स्थूलकोण ऊतक की कोशिका भित्ति कहाँ अधिक मोटी होती है?

(A) केवल मध्य में
(B) कोनों पर
(C) केवल केंद्रक के आसपास
(D) कहीं भी नहीं
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) कोनों पर।
स्थूलकोण ऊतक में कोशिका भित्ति के कोनों पर असमान मोटाई होती है।

प्रश्न 11. पौधों को कठोरता एवं यांत्रिक मजबूती प्रदान करने वाला ऊतक कौन-सा है?

(A) मृदूतक
(B) स्थूलकोण
(C) दृढ़ोतक
(D) विभज्योतक
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) दृढ़ोतक।
दृढ़ोतक की मोटी लिग्निनयुक्त कोशिका भित्ति पौधे को मजबूती प्रदान करती है।

प्रश्न 12. नारियल का रेशा किस ऊतक का उदाहरण है?

(A) मृदूतक
(B) दृढ़ोतक
(C) स्थूलकोण
(D) फ्लोएम
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) दृढ़ोतक।
नारियल के छिलके में दृढ़ोतक रेशे पाए जाते हैं, जो कठोरता प्रदान करते हैं।

प्रश्न 13. जलीय पौधों में वायु से भरे स्थान वाला मृदूतक क्या कहलाता है?

(A) क्लोरेन्काइमा
(B) एरेन्काइमा
(C) स्क्लेराइड
(D) कॉर्क
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) एरेन्काइमा।
एरेन्काइमा में बड़े वायु स्थान होते हैं, जो गैसों के आदान-प्रदान और तैरने में सहायता कर सकते हैं।

प्रश्न 14. जाइलम का कौन-सा घटक जीवित होता है?

(A) वाहिका
(B) वाहिनिका
(C) जाइलम रेशा
(D) जाइलम मृदूतक
उत्तर देखें
सही उत्तर: (D) जाइलम मृदूतक।
जाइलम मृदूतक जीवित होता है, जबकि परिपक्व वाहिकाएँ, वाहिनिकाएँ और अधिकांश जाइलम रेशे मृत होते हैं।

प्रश्न 15. फ्लोएम की चालनी नलिकाओं के साथ कौन-सी कोशिकाएँ जुड़ी रहती हैं?

(A) सहचर कोशिकाएँ
(B) वाहिकाएँ
(C) वाहिनिकाएँ
(D) कॉन्ड्रोसाइट
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) सहचर कोशिकाएँ।
सहचर कोशिकाएँ चालनी नलिकाओं के कार्य एवं भोजन के परिवहन में सहायता करती हैं।

प्रश्न 16. जंतु ऊतकों के मुख्य प्रकार कितने हैं?

(A) दो
(B) तीन
(C) चार
(D) पाँच
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) चार।
उपकला, संयोजी, पेशीय और तंत्रिका ऊतक जंतु ऊतकों के चार प्रमुख प्रकार हैं।

प्रश्न 17. शरीर की बाहरी सतह को ढकने वाला ऊतक कौन-सा है?

(A) संयोजी
(B) उपकला
(C) पेशीय
(D) तंत्रिका
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) उपकला।
उपकला ऊतक शरीर की बाहरी सतह और आंतरिक अंगों की सतहों को ढकता है।

प्रश्न 18. फेफड़ों की वायुकोष्ठिकाओं में किस प्रकार की उपकला पाई जाती है?

(A) सरल शल्की उपकला
(B) घनाकार उपकला
(C) स्तंभाकार उपकला
(D) स्तरित उपकला
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) सरल शल्की उपकला।
इसकी पतली कोशिका परत ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड के विसरण में सहायक है।

प्रश्न 19. गुर्दे की नलिकाओं में सामान्यतः कौन-सी उपकला पाई जाती है?

(A) शल्की
(B) घनाकार
(C) स्तरित
(D) पक्ष्माभी
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) घनाकार।
घनाकार उपकला अवशोषण और स्राव में सहायता करती है।

प्रश्न 20. छोटी आँत की भीतरी सतह पर प्रमुख रूप से कौन-सी उपकला होती है?

(A) स्तंभाकार
(B) शल्की
(C) संक्रमणीय
(D) स्तरित शल्की
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) स्तंभाकार।
छोटी आँत की सरल स्तंभाकार उपकला अवशोषण के लिए विशेषीकृत होती है।

प्रश्न 21. श्वसन मार्ग में धूल के कणों को आगे बढ़ाने में कौन-सी उपकला सहायक है?

(A) घनाकार
(B) पक्ष्माभी
(C) शल्की
(D) स्तरित
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) पक्ष्माभी।
सिलिया की गति श्लेष्मा में फँसे कणों को श्वसन मार्ग से बाहर की ओर ले जाती है।

प्रश्न 22. संयोजी ऊतक की प्रमुख विशेषता क्या है?

(A) कोशिकाएँ बहुत सघन होती हैं
(B) अंतरकोशिकीय मैट्रिक्स अपेक्षाकृत अधिक होता है
(C) केवल तंत्रिका आवेग संचरण
(D) केवल संकुचन करना
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) अंतरकोशिकीय मैट्रिक्स अपेक्षाकृत अधिक होता है।
संयोजी ऊतक में कोशिकाओं के बीच मैट्रिक्स अधिक मात्रा में पाया जाता है।

प्रश्न 23. कण्डरा किसे जोड़ती है?

(A) हड्डी को हड्डी से
(B) मांसपेशी को हड्डी से
(C) तंत्रिका को मांसपेशी से
(D) त्वचा को त्वचा से
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) मांसपेशी को हड्डी से।
कण्डरा मांसपेशी का बल हड्डी तक पहुँचाती है।

प्रश्न 24. स्नायुबंधन (Ligament) किसे जोड़ता है?

(A) मांसपेशी और हड्डी
(B) हड्डी और हड्डी
(C) त्वचा और मांसपेशी
(D) तंत्रिका और हड्डी
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) हड्डी और हड्डी।
स्नायुबंधन जोड़ों को स्थिरता प्रदान करता है।

प्रश्न 25. वसा का संचय करने वाला संयोजी ऊतक कौन-सा है?

(A) एरिओलर
(B) वसा ऊतक
(C) उपास्थि
(D) रक्त
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) वसा ऊतक।
वसा ऊतक ऊर्जा संचय, ऊष्मा संरक्षण और अंगों की सुरक्षा करता है।

प्रश्न 26. रक्त किस प्रकार का ऊतक है?

(A) पेशीय
(B) तंत्रिका
(C) तरल संयोजी
(D) उपकला
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) तरल संयोजी।
रक्त का तरल मैट्रिक्स प्लाज्मा होता है, इसलिए इसे तरल संयोजी ऊतक कहा जाता है।

प्रश्न 27. परिपक्व मानव लाल रक्त कणिकाओं की प्रमुख विशेषता क्या है?

(A) केंद्रकयुक्त होती हैं
(B) केंद्रक रहित होती हैं
(C) इनमें हीमोग्लोबिन नहीं होता
(D) ये प्रतिरक्षा का मुख्य कार्य करती हैं
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) केंद्रक रहित होती हैं।
परिपक्व मानव RBC द्विअवतल और केंद्रक रहित होती हैं तथा हीमोग्लोबिन के माध्यम से ऑक्सीजन का परिवहन करती हैं।

प्रश्न 28. मानव RBC का औसत जीवनकाल कितना होता है?

(A) 30 दिन
(B) 60 दिन
(C) 90 दिन
(D) 120 दिन
उत्तर देखें
सही उत्तर: (D) 120 दिन।
मानव लाल रक्त कणिकाओं का औसत जीवनकाल लगभग 120 दिन होता है।

प्रश्न 29. रक्त का थक्का जमाने में कौन-सा घटक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है?

(A) RBC
(B) WBC
(C) प्लेटलेट्स
(D) प्लाज्मा जल
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) प्लेटलेट्स।
प्लेटलेट्स रक्त जमने की प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रश्न 30. शरीर की प्रतिरक्षा में मुख्य रूप से कौन-सी रक्त कोशिकाएँ भाग लेती हैं?

(A) RBC
(B) WBC
(C) प्लेटलेट्स
(D) सभी समान रूप से
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) WBC।
श्वेत रक्त कणिकाएँ रोगजनकों से रक्षा और प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं में भाग लेती हैं।

प्रश्न 31. लसीका का प्रमुख कार्य कौन-सा है?

(A) ऑक्सीजन का मुख्य परिवहन
(B) ऊतकों का अतिरिक्त द्रव रक्त में लौटाना
(C) हड्डियों का निर्माण
(D) मांसपेशियों का संकुचन
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) ऊतकों का अतिरिक्त द्रव रक्त में लौटाना।
लसीका द्रव संतुलन बनाए रखने और प्रतिरक्षा में सहायता करती है।

प्रश्न 32. ऐच्छिक पेशी का उदाहरण कौन-सा है?

(A) आँत की पेशी
(B) हृदय पेशी
(C) कंकालीय पेशी
(D) रक्त वाहिका की पेशी
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) कंकालीय पेशी।
कंकालीय पेशियाँ सामान्यतः इच्छानुसार नियंत्रित होती हैं।

प्रश्न 33. चिकनी पेशियाँ कहाँ पाई जाती हैं?

(A) हृदय की दीवार
(B) आँत की दीवार
(C) हाथ की कंकालीय पेशी
(D) जीभ की कंकालीय पेशी
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) आँत की दीवार।
आँत की दीवार में अनैच्छिक चिकनी पेशियाँ पाई जाती हैं, जो क्रमाकुंचन में सहायता करती हैं।

प्रश्न 34. हृदय पेशी की कौन-सी विशेषता इसे विशिष्ट बनाती है?

(A) यह ऐच्छिक होती है
(B) इसमें धारियाँ नहीं होतीं
(C) यह शाखित एवं लयबद्ध संकुचन करने वाली होती है
(D) यह केवल हड्डियों से जुड़ी होती है
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) यह शाखित एवं लयबद्ध संकुचन करने वाली होती है।
हृदय पेशी रेखित, अनैच्छिक और शाखित होती है।

प्रश्न 35. तंत्रिका ऊतक की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई क्या है?

(A) नेफ्रॉन
(B) न्यूरॉन
(C) ऑस्टियोन
(D) सार्कोमियर
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) न्यूरॉन।
न्यूरॉन तंत्रिका संदेश ग्रहण और संचार करने वाली प्रमुख कोशिका है।

प्रश्न 36. न्यूरॉन का कौन-सा भाग सामान्यतः संदेश ग्रहण करता है?

(A) अक्षतंतु
(B) डेंड्राइट
(C) मायलिन
(D) सिनेप्सिक पुटिका
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) डेंड्राइट।
डेंड्राइट सामान्यतः अन्य कोशिकाओं से संदेश ग्रहण करते हैं।

प्रश्न 37. न्यूरॉन का कौन-सा भाग तंत्रिका आवेग को कोशिका काय से दूर ले जाता है?

(A) डेंड्राइट
(B) अक्षतंतु
(C) केंद्रक
(D) कोशिकाद्रव्य
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) अक्षतंतु।
अक्षतंतु तंत्रिका आवेग को कोशिका काय से दूर ले जाता है।

प्रश्न 38. अस्थि की परिपक्व कोशिकाएँ क्या कहलाती हैं?

(A) कॉन्ड्रोसाइट
(B) ऑस्टियोसाइट
(C) न्यूरॉन
(D) एरिथ्रोसाइट
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) ऑस्टियोसाइट।
ऑस्टियोसाइट अस्थि ऊतक की परिपक्व कोशिकाएँ हैं।

प्रश्न 39. उपास्थि की कोशिकाएँ क्या कहलाती हैं?

(A) ऑस्टियोसाइट
(B) कॉन्ड्रोसाइट
(C) ल्यूकोसाइट
(D) मायोसाइट
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) कॉन्ड्रोसाइट।
कॉन्ड्रोसाइट उपास्थि के मैट्रिक्स में स्थित कोशिकाएँ हैं।

प्रश्न 40. मानव शरीर में उपास्थि का कौन-सा स्थान उदाहरण है?

(A) बाहरी कान
(B) यकृत
(C) हृदय का निलय
(D) मस्तिष्क का केंद्रक
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) बाहरी कान।
बाहरी कान में लोचदार उपास्थि पाई जाती है।

प्रश्न 41. उपास्थि में सामान्यतः कौन-सी संरचना अनुपस्थित होती है?

(A) कोशिकाएँ
(B) मैट्रिक्स
(C) रक्त वाहिकाएँ
(D) लैकुना
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) रक्त वाहिकाएँ।
उपास्थि अवascular होती है; पोषण आसपास के ऊतकों से विसरण द्वारा प्राप्त होता है।

प्रश्न 42. अस्थि के मैट्रिक्स को कठोरता मुख्यतः किससे मिलती है?

(A) ग्लूकोज
(B) कैल्शियम एवं फॉस्फेट के लवण
(C) वसा
(D) हीमोग्लोबिन
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) कैल्शियम एवं फॉस्फेट के लवण।
अस्थि मैट्रिक्स में खनिज लवणों का जमाव उसे कठोरता प्रदान करता है।

प्रश्न 43. रक्त वाहिकाओं की भीतरी सतह पर कौन-सी विशेष उपकला पाई जाती है?

(A) एंडोथीलियम
(B) एपिडर्मिस
(C) कॉर्निया
(D) उपास्थि
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) एंडोथीलियम।
एंडोथीलियम सरल शल्की उपकला का विशेष रूप है, जो रक्त एवं लसीका वाहिकाओं की भीतरी सतह बनाता है।

प्रश्न 44. मस्तिष्क और मेरुरज्जु में मुख्य रूप से कौन-सा ऊतक पाया जाता है?

(A) पेशीय ऊतक
(B) तंत्रिका ऊतक
(C) उपकला ऊतक
(D) वसा ऊतक
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) तंत्रिका ऊतक।
मस्तिष्क और मेरुरज्जु केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के प्रमुख अंग हैं।

प्रश्न 45. निम्नलिखित में से कौन-सा ऊतक पौधे को लचीलापन प्रदान करता है?

(A) दृढ़ोतक
(B) स्थूलकोण ऊतक
(C) जाइलम
(D) फ्लोएम
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) स्थूलकोण ऊतक।
स्थूलकोण ऊतक युवा तनों और पत्तियों को लचीलापन एवं सहारा प्रदान करता है।

प्रश्न 46. पौधों में प्रकाश संश्लेषण करने वाला विशेष मृदूतक क्या कहलाता है?

(A) एरेन्काइमा
(B) क्लोरेन्काइमा
(C) दृढ़ोतक
(D) फ्लोएम
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) क्लोरेन्काइमा।
क्लोरोप्लास्टयुक्त मृदूतक प्रकाश संश्लेषण करता है और क्लोरेन्काइमा कहलाता है।

प्रश्न 47. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

(A) जाइलम भोजन का परिवहन करता है
(B) फ्लोएम जल का परिवहन करता है
(C) जाइलम मुख्यतः जल एवं खनिजों का परिवहन करता है
(D) दोनों केवल सहारा देते हैं
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C)।
जाइलम जल और खनिज लवणों का परिवहन करता है, जबकि फ्लोएम भोजन का परिवहन करता है।

प्रश्न 48. हृदय पेशी में पाई जाने वाली विशेष संयोजी संरचना कौन-सी है?

(A) चालनी पट्टिका
(B) इंटरकलेटेड डिस्क
(C) हैवर्सियन नलिका
(D) मायलिन आवरण
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) इंटरकलेटेड डिस्क।
ये हृदय पेशी कोशिकाओं के बीच यांत्रिक और विद्युत संपर्क में सहायता करती हैं।

प्रश्न 49. रक्त वाहिकाओं की दीवारों में पाई जाने वाली चिकनी पेशियों का नियंत्रण कैसा होता है?

(A) ऐच्छिक
(B) अनैच्छिक
(C) केवल चेतन अवस्था में
(D) इनमें संकुचन नहीं होता
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) अनैच्छिक।
रक्त वाहिकाओं की चिकनी पेशियाँ स्वायत्त तंत्रिका तंत्र एवं स्थानीय कारकों द्वारा नियंत्रित होती हैं।

प्रश्न 50. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?

(A) कण्डरा – हड्डी से हड्डी
(B) स्नायुबंधन – मांसपेशी से हड्डी
(C) जाइलम – जल परिवहन
(D) फ्लोएम – ऑक्सीजन परिवहन
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) जाइलम – जल परिवहन।
कण्डरा मांसपेशी को हड्डी से जोड़ती है, स्नायुबंधन हड्डी को हड्डी से जोड़ता है, जाइलम जल का और फ्लोएम भोजन का परिवहन करता है।

त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision)

  • ऊतक – समान या संबंधित कार्य करने वाली कोशिकाओं का समूह।
  • पादप ऊतक – विभज्योतक एवं स्थायी ऊतक।
  • शीर्षस्थ विभज्योतक – लंबाई में वृद्धि।
  • पार्श्व विभज्योतक – मोटाई में वृद्धि।
  • अंतर्वेशी विभज्योतक – घास की पुनर्वृद्धि।
  • सरल स्थायी ऊतक – मृदूतक, स्थूलकोण, दृढ़ोतक।
  • जटिल स्थायी ऊतक – जाइलम एवं फ्लोएम।
  • मृदूतक – भंडारण एवं प्रकाश संश्लेषण।
  • स्थूलकोण – लचीलापन एवं सहारा।
  • दृढ़ोतक – कठोरता एवं मजबूती।
  • जाइलम – जल एवं खनिजों का परिवहन।
  • फ्लोएम – भोजन का परिवहन।
  • जंतु ऊतक – उपकला, संयोजी, पेशीय एवं तंत्रिका।
  • उपकला – आवरण, सुरक्षा, अवशोषण एवं स्राव।
  • रक्त – तरल संयोजी ऊतक।
  • RBC – ऑक्सीजन परिवहन; WBC – प्रतिरक्षा; प्लेटलेट्स – रक्त जमना।
  • कण्डरा – मांसपेशी को हड्डी से जोड़ती है।
  • स्नायुबंधन – हड्डी को हड्डी से जोड़ता है।
  • कंकालीय पेशी – ऐच्छिक एवं रेखित।
  • चिकनी पेशी – अनैच्छिक एवं अरेखित।
  • हृदय पेशी – अनैच्छिक, रेखित एवं शाखित।
  • न्यूरॉन – तंत्रिका ऊतक की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई।
  • अस्थि कोशिका – ऑस्टियोसाइट।
  • उपास्थि कोशिका – कॉन्ड्रोसाइट।
  • उपास्थि – सामान्यतः रक्त वाहिकाविहीन।

संदर्भ एवं अध्ययन सामग्री

इस अध्याय की अवधारणाओं एवं वैज्ञानिक तथ्यों के अध्ययन के लिए निम्नलिखित शैक्षणिक और सरकारी स्रोत उपयोगी हैं।

PYQ संबंधी स्पष्टता: UPSSSC PET 2026, 30 अक्टूबर, प्रथम पाली का दृढ़ोतक संबंधी प्रश्न वास्तविक परीक्षा प्रश्न के रूप में शामिल है। शेष प्रश्न अभ्यास के लिए तैयार किए गए हैं। बिना मूल प्रश्नपत्र के किसी प्रश्न को UP Police या किसी अन्य परीक्षा का वास्तविक PYQ नहीं बताया गया है।

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