प्रागैतिहासिक + हड़प्पा काल : उत्तर प्रदेश MCQ
Q1. बेलन घाटी किस लिए प्रसिद्ध है?
उत्तर: B. निरंतर मानव बसावट
बेलन घाटी उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण प्रागैतिहासिक क्षेत्र है। यहाँ पुरापाषाण से लेकर नवपाषाण काल तक मानव निवास के प्रमाण मिलते हैं। इसलिए यह निरंतर मानव बसावट के लिए प्रसिद्ध है।
बेलन घाटी उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण प्रागैतिहासिक क्षेत्र है। यहाँ पुरापाषाण से लेकर नवपाषाण काल तक मानव निवास के प्रमाण मिलते हैं। इसलिए यह निरंतर मानव बसावट के लिए प्रसिद्ध है।
Q2. भारत में सबसे प्राचीन धान की खेती के साक्ष्य कहाँ से मिले हैं?
उत्तर: B. लहुरादेवा
लहुरादेवा उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर क्षेत्र से संबंधित महत्वपूर्ण स्थल है। यहाँ से धान की प्राचीन खेती के प्रमाण प्राप्त हुए हैं। इसे भारत में प्रारंभिक कृषि और धान उत्पादन के अध्ययन में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
लहुरादेवा उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर क्षेत्र से संबंधित महत्वपूर्ण स्थल है। यहाँ से धान की प्राचीन खेती के प्रमाण प्राप्त हुए हैं। इसे भारत में प्रारंभिक कृषि और धान उत्पादन के अध्ययन में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
Q3. सराय नाहर राय किस जिले में स्थित है?
उत्तर: B. प्रतापगढ़
सराय नाहर राय उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्थित है। यह मध्यपाषाण काल का प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल है। यहाँ से मानव कंकाल और सूक्ष्म पाषाण उपकरण प्राप्त हुए हैं।
सराय नाहर राय उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्थित है। यह मध्यपाषाण काल का प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल है। यहाँ से मानव कंकाल और सूक्ष्म पाषाण उपकरण प्राप्त हुए हैं।
Q4. माइक्रोलिथ उपकरण किस काल से संबंधित हैं?
उत्तर: B. मध्यपाषाण
माइक्रोलिथ छोटे आकार के पत्थर के औजार होते हैं। इनका व्यापक उपयोग मध्यपाषाण काल में हुआ। ये औजार शिकार, काटने और दैनिक कार्यों में काम आते थे।
माइक्रोलिथ छोटे आकार के पत्थर के औजार होते हैं। इनका व्यापक उपयोग मध्यपाषाण काल में हुआ। ये औजार शिकार, काटने और दैनिक कार्यों में काम आते थे।
Q5. महदहा स्थल किस लिए प्रसिद्ध है?
उत्तर: B. मानव कंकाल
महदहा मध्यपाषाण काल का महत्वपूर्ण स्थल है। यहाँ से मानव कंकालों के अवशेष प्राप्त हुए हैं। इनसे उस समय के मानव जीवन, भोजन और दफन संस्कारों की जानकारी मिलती है।
महदहा मध्यपाषाण काल का महत्वपूर्ण स्थल है। यहाँ से मानव कंकालों के अवशेष प्राप्त हुए हैं। इनसे उस समय के मानव जीवन, भोजन और दफन संस्कारों की जानकारी मिलती है।
Q6. आलमगीरपुर किस सभ्यता से संबंधित है?
उत्तर: B. हड़प्पा
आलमगीरपुर हड़प्पा सभ्यता से संबंधित स्थल है। यह उत्तर प्रदेश के मेरठ क्षेत्र में स्थित माना जाता है। इसे हड़प्पा संस्कृति के पूर्वी विस्तार का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है।
आलमगीरपुर हड़प्पा सभ्यता से संबंधित स्थल है। यह उत्तर प्रदेश के मेरठ क्षेत्र में स्थित माना जाता है। इसे हड़प्पा संस्कृति के पूर्वी विस्तार का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है।
Q7. निम्न में से कौन हड़प्पा का सबसे पूर्वी स्थल है?
उत्तर: B. आलमगीरपुर
आलमगीरपुर को हड़प्पा सभ्यता का सबसे पूर्वी स्थल माना जाता है। इससे पता चलता है कि हड़प्पा संस्कृति का प्रभाव उत्तर प्रदेश तक फैला था। यह स्थल यमुना नदी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
आलमगीरपुर को हड़प्पा सभ्यता का सबसे पूर्वी स्थल माना जाता है। इससे पता चलता है कि हड़प्पा संस्कृति का प्रभाव उत्तर प्रदेश तक फैला था। यह स्थल यमुना नदी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
Q8. सिनौली किस जिले में स्थित है?
उत्तर: A. बागपत
सिनौली उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित है। यह अपने उत्खनन से प्राप्त रथ, ताबूत और अन्य पुरावशेषों के लिए प्रसिद्ध है। इसे हड़प्पा पश्चात संस्कृति से जोड़ा जाता है।
सिनौली उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित है। यह अपने उत्खनन से प्राप्त रथ, ताबूत और अन्य पुरावशेषों के लिए प्रसिद्ध है। इसे हड़प्पा पश्चात संस्कृति से जोड़ा जाता है।
Q9. सिनौली उत्खनन में क्या प्रमुख मिला?
उत्तर: B. रथ
सिनौली उत्खनन में रथ जैसे अवशेष प्रमुख रूप से मिले हैं। इसके साथ ताबूत, हथियार और अन्य सामग्री भी मिली। इन खोजों ने प्राचीन उत्तर भारत के सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास पर नई चर्चा शुरू की।
सिनौली उत्खनन में रथ जैसे अवशेष प्रमुख रूप से मिले हैं। इसके साथ ताबूत, हथियार और अन्य सामग्री भी मिली। इन खोजों ने प्राचीन उत्तर भारत के सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास पर नई चर्चा शुरू की।
Q10. हुलास स्थल कहाँ स्थित है?
उत्तर: B. सहारनपुर
हुलास उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में स्थित एक पुरातात्विक स्थल है। यह हड़प्पा संस्कृति से संबंधित माना जाता है। यहाँ से कृषि और बस्ती से जुड़े साक्ष्य मिले हैं।
हुलास उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में स्थित एक पुरातात्विक स्थल है। यह हड़प्पा संस्कृति से संबंधित माना जाता है। यहाँ से कृषि और बस्ती से जुड़े साक्ष्य मिले हैं।
Q11. बेलन घाटी का उत्खनन किसने किया?
उत्तर: B. जी. आर. शर्मा
बेलन घाटी के अध्ययन और उत्खनन में जी. आर. शर्मा का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके कार्यों से उत्तर प्रदेश के प्रागैतिहासिक काल की जानकारी मिली। बेलन घाटी मानव विकास क्रम को समझने में महत्वपूर्ण है।
बेलन घाटी के अध्ययन और उत्खनन में जी. आर. शर्मा का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके कार्यों से उत्तर प्रदेश के प्रागैतिहासिक काल की जानकारी मिली। बेलन घाटी मानव विकास क्रम को समझने में महत्वपूर्ण है।
Q12. नवपाषाण काल की प्रमुख विशेषता क्या है?
उत्तर: B. कृषि
नवपाषाण काल में मानव ने कृषि और पशुपालन शुरू किया। इसी काल में स्थायी जीवन की शुरुआत हुई। घिसे हुए पत्थर के औजार भी इस काल की प्रमुख पहचान हैं।
नवपाषाण काल में मानव ने कृषि और पशुपालन शुरू किया। इसी काल में स्थायी जीवन की शुरुआत हुई। घिसे हुए पत्थर के औजार भी इस काल की प्रमुख पहचान हैं।
Q13. सिंगरौली घाटी कहाँ स्थित है?
उत्तर: A. सोनभद्र
सिंगरौली घाटी उत्तर प्रदेश के सोनभद्र क्षेत्र से संबंधित है। यह क्षेत्र प्रागैतिहासिक साक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण है। यहाँ मानव जीवन और उपकरणों से जुड़े प्रमाण मिलते हैं।
सिंगरौली घाटी उत्तर प्रदेश के सोनभद्र क्षेत्र से संबंधित है। यह क्षेत्र प्रागैतिहासिक साक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण है। यहाँ मानव जीवन और उपकरणों से जुड़े प्रमाण मिलते हैं।
Q14. निम्न में से कौन मध्यपाषाण स्थल है?
उत्तर: B. सराय नाहर राय
सराय नाहर राय मध्यपाषाण काल का प्रसिद्ध स्थल है। यहाँ से मानव कंकाल और माइक्रोलिथ उपकरण प्राप्त हुए। यह स्थल उत्तर प्रदेश के प्रागैतिहासिक अध्ययन में बहुत महत्वपूर्ण है।
सराय नाहर राय मध्यपाषाण काल का प्रसिद्ध स्थल है। यहाँ से मानव कंकाल और माइक्रोलिथ उपकरण प्राप्त हुए। यह स्थल उत्तर प्रदेश के प्रागैतिहासिक अध्ययन में बहुत महत्वपूर्ण है।
Q15. प्रागैतिहासिक काल का मुख्य आधार क्या है?
उत्तर: B. पुरातत्व
प्रागैतिहासिक काल में लिखित स्रोत उपलब्ध नहीं होते। इसलिए इस काल की जानकारी पुरातात्विक साक्ष्यों से मिलती है। औजार, अस्थियाँ, बस्तियाँ और अवशेष इसके मुख्य आधार हैं।
प्रागैतिहासिक काल में लिखित स्रोत उपलब्ध नहीं होते। इसलिए इस काल की जानकारी पुरातात्विक साक्ष्यों से मिलती है। औजार, अस्थियाँ, बस्तियाँ और अवशेष इसके मुख्य आधार हैं।
Q16. निम्न में से कौन सही सुमेल है?
उत्तर: A. लहुरादेवा – धान
लहुरादेवा धान की प्राचीन खेती के साक्ष्यों के लिए जाना जाता है। यहाँ से मिले प्रमाण भारत में प्रारंभिक कृषि को समझने में सहायक हैं। इसलिए लहुरादेवा और धान का युग्म सही है।
लहुरादेवा धान की प्राचीन खेती के साक्ष्यों के लिए जाना जाता है। यहाँ से मिले प्रमाण भारत में प्रारंभिक कृषि को समझने में सहायक हैं। इसलिए लहुरादेवा और धान का युग्म सही है।
Q17. मानव का स्थायी निवास किस काल में शुरू हुआ?
उत्तर: C. नवपाषाण
नवपाषाण काल में कृषि और पशुपालन के कारण मानव स्थायी रूप से बसने लगा। इससे गाँवों और नियमित बस्तियों का विकास हुआ। यह मानव जीवन में बड़ा परिवर्तन था।
नवपाषाण काल में कृषि और पशुपालन के कारण मानव स्थायी रूप से बसने लगा। इससे गाँवों और नियमित बस्तियों का विकास हुआ। यह मानव जीवन में बड़ा परिवर्तन था।
Q18. आलमगीरपुर किस नदी के किनारे है?
उत्तर: B. यमुना
आलमगीरपुर यमुना नदी क्षेत्र से संबंधित हड़प्पा स्थल है। नदी घाटियों के पास प्राचीन बस्तियों का विकास सामान्य था। इससे कृषि, जल और आवागमन की सुविधा मिलती थी।
आलमगीरपुर यमुना नदी क्षेत्र से संबंधित हड़प्पा स्थल है। नदी घाटियों के पास प्राचीन बस्तियों का विकास सामान्य था। इससे कृषि, जल और आवागमन की सुविधा मिलती थी।
Q19. निम्न में से कौन हड़प्पा स्थल नहीं है?
उत्तर: D. लहुरादेवा
लहुरादेवा मुख्य रूप से धान की प्राचीन खेती के साक्ष्यों के लिए प्रसिद्ध है। यह हड़प्पा सभ्यता का स्थल नहीं माना जाता। आलमगीरपुर और हुलास हड़प्पा संस्कृति से जुड़े स्थल हैं।
लहुरादेवा मुख्य रूप से धान की प्राचीन खेती के साक्ष्यों के लिए प्रसिद्ध है। यह हड़प्पा सभ्यता का स्थल नहीं माना जाता। आलमगीरपुर और हुलास हड़प्पा संस्कृति से जुड़े स्थल हैं।
Q20. ताम्रपाषाण काल का मुख्य लक्षण क्या है?
उत्तर: B. तांबा + पत्थर
ताम्रपाषाण काल में तांबे और पत्थर दोनों का उपयोग होता था। इसी कारण इसे ताम्रपाषाण कहा जाता है। यह नवपाषाण और धातु युग के बीच का संक्रमण काल माना जाता है।
ताम्रपाषाण काल में तांबे और पत्थर दोनों का उपयोग होता था। इसी कारण इसे ताम्रपाषाण कहा जाता है। यह नवपाषाण और धातु युग के बीच का संक्रमण काल माना जाता है।
Q21. सिनौली संस्कृति किससे संबंधित है?
उत्तर: B. हड़प्पा पश्चात
सिनौली को सामान्यतः हड़प्पा पश्चात सांस्कृतिक संदर्भ में देखा जाता है। यहाँ से रथ, ताबूत और युद्ध सामग्री जैसे अवशेष मिले हैं। ये खोजें उत्तर भारत के प्राचीन समाज को समझने में उपयोगी हैं।
सिनौली को सामान्यतः हड़प्पा पश्चात सांस्कृतिक संदर्भ में देखा जाता है। यहाँ से रथ, ताबूत और युद्ध सामग्री जैसे अवशेष मिले हैं। ये खोजें उत्तर भारत के प्राचीन समाज को समझने में उपयोगी हैं।
Q22. हुलास में क्या प्रमुख मिला?
उत्तर: A. कृषि साक्ष्य
हुलास स्थल से कृषि और बस्ती से जुड़े प्रमाण मिले हैं। यह उत्तर प्रदेश में हड़प्पा संस्कृति के प्रभाव को दिखाता है। कृषि साक्ष्य उस समय के जीवनयापन को समझने में मदद करते हैं।
हुलास स्थल से कृषि और बस्ती से जुड़े प्रमाण मिले हैं। यह उत्तर प्रदेश में हड़प्पा संस्कृति के प्रभाव को दिखाता है। कृषि साक्ष्य उस समय के जीवनयापन को समझने में मदद करते हैं।
Q23. बेलन घाटी किस नदी से संबंधित है?
उत्तर: B. बेलन
बेलन घाटी बेलन नदी से संबंधित है। यह क्षेत्र प्रागैतिहासिक मानव गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ से विभिन्न कालों के उपकरण और मानव जीवन के प्रमाण मिले हैं।
बेलन घाटी बेलन नदी से संबंधित है। यह क्षेत्र प्रागैतिहासिक मानव गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ से विभिन्न कालों के उपकरण और मानव जीवन के प्रमाण मिले हैं।
Q24. नवपाषाण काल का मुख्य उपकरण क्या था?
उत्तर: B. घिसा हुआ पत्थर
नवपाषाण काल में घिसे और चमकाए हुए पत्थर के औजारों का उपयोग होता था। ये औजार खेती और लकड़ी काटने जैसे कामों में उपयोगी थे। इसी काल में मानव जीवन अधिक स्थायी हुआ।
नवपाषाण काल में घिसे और चमकाए हुए पत्थर के औजारों का उपयोग होता था। ये औजार खेती और लकड़ी काटने जैसे कामों में उपयोगी थे। इसी काल में मानव जीवन अधिक स्थायी हुआ।
Q25. निम्न में से कौन सा स्थल सोनभद्र में है?
उत्तर: B. सिंगरौली
सिंगरौली क्षेत्र सोनभद्र से संबंधित है। यह प्रागैतिहासिक साक्ष्यों के लिए जाना जाता है। यहाँ से मानव गतिविधियों और उपकरणों के प्रमाण मिलते हैं।
सिंगरौली क्षेत्र सोनभद्र से संबंधित है। यह प्रागैतिहासिक साक्ष्यों के लिए जाना जाता है। यहाँ से मानव गतिविधियों और उपकरणों के प्रमाण मिलते हैं।
Q26. भारत में सबसे पुराने कृषि साक्ष्य किससे संबंधित हैं?
उत्तर: B. धान
भारत में प्राचीन कृषि साक्ष्यों में धान का विशेष महत्व है। उत्तर प्रदेश के लहुरादेवा से धान की खेती के पुराने प्रमाण मिले हैं। यह भारतीय कृषि इतिहास का महत्वपूर्ण आधार है।
भारत में प्राचीन कृषि साक्ष्यों में धान का विशेष महत्व है। उत्तर प्रदेश के लहुरादेवा से धान की खेती के पुराने प्रमाण मिले हैं। यह भारतीय कृषि इतिहास का महत्वपूर्ण आधार है।
Q27. निम्न में से कौन सही है?
उत्तर: B. महदहा – मध्यपाषाण
महदहा मध्यपाषाण काल का प्रसिद्ध स्थल है। यहाँ से मानव कंकाल और अन्य पुरातात्विक सामग्री मिली है। इसलिए महदहा और मध्यपाषाण का युग्म सही है।
महदहा मध्यपाषाण काल का प्रसिद्ध स्थल है। यहाँ से मानव कंकाल और अन्य पुरातात्विक सामग्री मिली है। इसलिए महदहा और मध्यपाषाण का युग्म सही है।
Q28. हड़प्पा संस्कृति की प्रमुख विशेषता क्या है?
उत्तर: A. नगर योजना
हड़प्पा संस्कृति अपनी व्यवस्थित नगर योजना के लिए प्रसिद्ध है। इसमें सड़कों, नालियों और घरों की योजना सुव्यवस्थित थी। यह प्राचीन भारत की उन्नत शहरी सभ्यता का प्रमाण है।
हड़प्पा संस्कृति अपनी व्यवस्थित नगर योजना के लिए प्रसिद्ध है। इसमें सड़कों, नालियों और घरों की योजना सुव्यवस्थित थी। यह प्राचीन भारत की उन्नत शहरी सभ्यता का प्रमाण है।
Q29. निम्न में से कौन युग्म सही है?
उत्तर: A. सिनौली – रथ
सिनौली उत्खनन में रथ जैसे महत्वपूर्ण अवशेष प्राप्त हुए हैं। यह खोज उत्तर भारत के प्राचीन इतिहास में विशेष महत्व रखती है। इसलिए सिनौली और रथ का युग्म सही है।
सिनौली उत्खनन में रथ जैसे महत्वपूर्ण अवशेष प्राप्त हुए हैं। यह खोज उत्तर भारत के प्राचीन इतिहास में विशेष महत्व रखती है। इसलिए सिनौली और रथ का युग्म सही है।
Q30. प्रागैतिहासिक काल का अंत किससे होता है?
उत्तर: A. लेखन
प्रागैतिहासिक काल वह काल है जिसमें लिखित स्रोत उपलब्ध नहीं होते। जब लेखन का विकास होता है, तब इतिहास को लिखित प्रमाणों से समझना शुरू होता है। इसलिए प्रागैतिहासिक काल का अंत लेखन से माना जाता है।
प्रागैतिहासिक काल वह काल है जिसमें लिखित स्रोत उपलब्ध नहीं होते। जब लेखन का विकास होता है, तब इतिहास को लिखित प्रमाणों से समझना शुरू होता है। इसलिए प्रागैतिहासिक काल का अंत लेखन से माना जाता है।
SET 2 (Q31–60) : वैदिक काल + महाजनपद
Q31. प्रारंभिक वैदिक काल का मुख्य क्षेत्र क्या था?
उत्तर: C. सप्तसिंधु क्षेत्र
प्रारंभिक वैदिक काल में आर्यों का मुख्य क्षेत्र सप्तसिंधु प्रदेश था। यह क्षेत्र पंजाब और उत्तर-पश्चिम भारत से संबंधित माना जाता है। ऋग्वेद में इसी क्षेत्र की नदियों और जीवन का वर्णन मिलता है।
प्रारंभिक वैदिक काल में आर्यों का मुख्य क्षेत्र सप्तसिंधु प्रदेश था। यह क्षेत्र पंजाब और उत्तर-पश्चिम भारत से संबंधित माना जाता है। ऋग्वेद में इसी क्षेत्र की नदियों और जीवन का वर्णन मिलता है।
Q32. उत्तर वैदिक काल में आर्यों का विस्तार मुख्यतः किस क्षेत्र में हुआ?
उत्तर: B. गंगा-यमुना दोआब
उत्तर वैदिक काल में आर्यों का विस्तार सप्तसिंधु क्षेत्र से आगे पूर्व की ओर हुआ। इस समय गंगा-यमुना दोआब वैदिक संस्कृति का प्रमुख केंद्र बना। कृषि और स्थायी बस्तियों का विकास भी इसी क्षेत्र में बढ़ा।
उत्तर वैदिक काल में आर्यों का विस्तार सप्तसिंधु क्षेत्र से आगे पूर्व की ओर हुआ। इस समय गंगा-यमुना दोआब वैदिक संस्कृति का प्रमुख केंद्र बना। कृषि और स्थायी बस्तियों का विकास भी इसी क्षेत्र में बढ़ा।
Q33. ‘मध्य देश’ का संबंध किससे है?
उत्तर: B. गंगा-यमुना क्षेत्र
मध्य देश का संबंध मुख्य रूप से गंगा-यमुना के मध्यवर्ती क्षेत्र से माना जाता है। उत्तर वैदिक काल में यह क्षेत्र वैदिक संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र बना। यहाँ राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ तेजी से विकसित हुईं।
मध्य देश का संबंध मुख्य रूप से गंगा-यमुना के मध्यवर्ती क्षेत्र से माना जाता है। उत्तर वैदिक काल में यह क्षेत्र वैदिक संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र बना। यहाँ राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ तेजी से विकसित हुईं।
Q34. कुरु और पांचाल किसके प्रमुख केंद्र थे?
उत्तर: B. वैदिक संस्कृति
कुरु और पांचाल उत्तर वैदिक काल के महत्वपूर्ण जनपद थे। इन्हें वैदिक संस्कृति, यज्ञ परंपरा और वैदिक शिक्षा का प्रमुख केंद्र माना जाता है। इन क्षेत्रों में सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं का विकास हुआ।
कुरु और पांचाल उत्तर वैदिक काल के महत्वपूर्ण जनपद थे। इन्हें वैदिक संस्कृति, यज्ञ परंपरा और वैदिक शिक्षा का प्रमुख केंद्र माना जाता है। इन क्षेत्रों में सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं का विकास हुआ।
Q35. शतपथ ब्राह्मण में किस क्षेत्र की विजय का वर्णन है?
उत्तर: B. कोसल और विदेह
शतपथ ब्राह्मण में आर्यों के पूर्व की ओर विस्तार का उल्लेख मिलता है। इसमें कोसल और विदेह क्षेत्र की विजय से संबंधित वर्णन है। यह उत्तर वैदिक काल में गंगा घाटी की ओर विस्तार को दिखाता है।
शतपथ ब्राह्मण में आर्यों के पूर्व की ओर विस्तार का उल्लेख मिलता है। इसमें कोसल और विदेह क्षेत्र की विजय से संबंधित वर्णन है। यह उत्तर वैदिक काल में गंगा घाटी की ओर विस्तार को दिखाता है।
Q36. निम्न में से कौन वैदिक नदी नहीं है?
उत्तर: C. गोदावरी
सरस्वती, वितस्ता और विपाशा जैसी नदियाँ वैदिक साहित्य में वर्णित हैं। गोदावरी दक्षिण भारत की प्रमुख नदी है और वैदिक प्रारंभिक क्षेत्र से संबंधित नहीं मानी जाती। इसलिए यह वैदिक नदी के रूप में उपयुक्त विकल्प नहीं है।
सरस्वती, वितस्ता और विपाशा जैसी नदियाँ वैदिक साहित्य में वर्णित हैं। गोदावरी दक्षिण भारत की प्रमुख नदी है और वैदिक प्रारंभिक क्षेत्र से संबंधित नहीं मानी जाती। इसलिए यह वैदिक नदी के रूप में उपयुक्त विकल्प नहीं है।
Q37. वैदिक काल में ‘जन’ का अर्थ क्या था?
उत्तर: B. जनजाति
वैदिक काल में ‘जन’ शब्द का प्रयोग जनजाति या लोगों के समूह के लिए होता था। उस समय राजनीतिक संगठन जन और विश के आधार पर विकसित थे। बाद में ये जन बड़े जनपदों में बदल गए।
वैदिक काल में ‘जन’ शब्द का प्रयोग जनजाति या लोगों के समूह के लिए होता था। उस समय राजनीतिक संगठन जन और विश के आधार पर विकसित थे। बाद में ये जन बड़े जनपदों में बदल गए।
Q38. महाजनपदों का उदय कब हुआ?
उत्तर: C. 600 ई.पू.
महाजनपदों का उदय लगभग 600 ई.पू. के आसपास माना जाता है। इस समय छोटे जनपद बड़े राजनीतिक राज्यों में बदलने लगे। कृषि अधिशेष, लोहे के उपयोग और नगरों के विकास ने इसमें मदद की।
महाजनपदों का उदय लगभग 600 ई.पू. के आसपास माना जाता है। इस समय छोटे जनपद बड़े राजनीतिक राज्यों में बदलने लगे। कृषि अधिशेष, लोहे के उपयोग और नगरों के विकास ने इसमें मदद की।
Q39. निम्न में से कौन महाजनपद नहीं था?
उत्तर: C. मौर्य
काशी, कोसल और वत्स प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में शामिल थे। मौर्य महाजनपद नहीं था, बल्कि बाद में स्थापित एक साम्राज्य था। इसलिए सही उत्तर मौर्य है।
काशी, कोसल और वत्स प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में शामिल थे। मौर्य महाजनपद नहीं था, बल्कि बाद में स्थापित एक साम्राज्य था। इसलिए सही उत्तर मौर्य है।
Q40. वत्स महाजनपद की राजधानी क्या थी?
उत्तर: B. कौशांबी
वत्स महाजनपद की राजधानी कौशांबी थी। कौशांबी वर्तमान प्रयागराज क्षेत्र के पास स्थित एक महत्वपूर्ण प्राचीन नगर था। यह व्यापार और राजनीति का प्रमुख केंद्र रहा।
वत्स महाजनपद की राजधानी कौशांबी थी। कौशांबी वर्तमान प्रयागराज क्षेत्र के पास स्थित एक महत्वपूर्ण प्राचीन नगर था। यह व्यापार और राजनीति का प्रमुख केंद्र रहा।
Q41. काशी महाजनपद का वर्तमान स्थान कौन सा है?
उत्तर: B. वाराणसी
काशी महाजनपद का केंद्र वर्तमान वाराणसी क्षेत्र था। वाराणसी प्राचीन काल से धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नगर रहा है। महाजनपद काल में भी इसका विशेष स्थान था।
काशी महाजनपद का केंद्र वर्तमान वाराणसी क्षेत्र था। वाराणसी प्राचीन काल से धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नगर रहा है। महाजनपद काल में भी इसका विशेष स्थान था।
Q42. कोसल की राजधानी क्या थी?
उत्तर: C. दोनों
कोसल महाजनपद से अयोध्या और श्रावस्ती दोनों महत्वपूर्ण रूप से जुड़े थे। अयोध्या प्राचीन परंपराओं में प्रसिद्ध नगर है, जबकि श्रावस्ती भी कोसल की राजधानी के रूप में जानी जाती है। इसलिए दोनों विकल्प सही माने जाते हैं।
कोसल महाजनपद से अयोध्या और श्रावस्ती दोनों महत्वपूर्ण रूप से जुड़े थे। अयोध्या प्राचीन परंपराओं में प्रसिद्ध नगर है, जबकि श्रावस्ती भी कोसल की राजधानी के रूप में जानी जाती है। इसलिए दोनों विकल्प सही माने जाते हैं।
Q43. निम्न में से कौन गणराज्य था?
उत्तर: C. मल्ल
मल्ल एक गणराज्य था, जहाँ शासन व्यवस्था सामूहिक निर्णयों पर आधारित थी। महाजनपद काल में राजतंत्रों के साथ-साथ गणतंत्र भी मौजूद थे। मल्ल गणराज्य उत्तर भारत के महत्वपूर्ण गणतांत्रिक राज्यों में गिना जाता है।
मल्ल एक गणराज्य था, जहाँ शासन व्यवस्था सामूहिक निर्णयों पर आधारित थी। महाजनपद काल में राजतंत्रों के साथ-साथ गणतंत्र भी मौजूद थे। मल्ल गणराज्य उत्तर भारत के महत्वपूर्ण गणतांत्रिक राज्यों में गिना जाता है।
Q44. सुरसेन महाजनपद की राजधानी क्या थी?
उत्तर: B. मथुरा
सुरसेन महाजनपद की राजधानी मथुरा थी। मथुरा प्राचीन काल में व्यापार, संस्कृति और धर्म का महत्वपूर्ण केंद्र था। यह उत्तर प्रदेश के प्रमुख प्राचीन नगरों में शामिल है।
सुरसेन महाजनपद की राजधानी मथुरा थी। मथुरा प्राचीन काल में व्यापार, संस्कृति और धर्म का महत्वपूर्ण केंद्र था। यह उत्तर प्रदेश के प्रमुख प्राचीन नगरों में शामिल है।
Q45. कुरु महाजनपद का प्रमुख क्षेत्र कौन था?
उत्तर: C. मेरठ क्षेत्र
कुरु महाजनपद का विस्तार दिल्ली-मेरठ और हरियाणा क्षेत्र तक माना जाता है। उत्तर वैदिक काल में यह वैदिक संस्कृति का प्रमुख केंद्र था। इस क्षेत्र में राजनीतिक और धार्मिक संस्थाओं का विकास हुआ।
कुरु महाजनपद का विस्तार दिल्ली-मेरठ और हरियाणा क्षेत्र तक माना जाता है। उत्तर वैदिक काल में यह वैदिक संस्कृति का प्रमुख केंद्र था। इस क्षेत्र में राजनीतिक और धार्मिक संस्थाओं का विकास हुआ।
Q46. पांचाल की राजधानी क्या थी?
उत्तर: A. अहिच्छत्र और कंम्पिल्य
पांचाल दो भागों में विभाजित माना जाता है। उत्तरी पांचाल की राजधानी अहिच्छत्र और दक्षिणी पांचाल की राजधानी कंम्पिल्य थी। यह क्षेत्र वैदिक संस्कृति और शिक्षा के लिए प्रसिद्ध था।
पांचाल दो भागों में विभाजित माना जाता है। उत्तरी पांचाल की राजधानी अहिच्छत्र और दक्षिणी पांचाल की राजधानी कंम्पिल्य थी। यह क्षेत्र वैदिक संस्कृति और शिक्षा के लिए प्रसिद्ध था।
Q47. निम्न में से कौन सही युग्म है?
उत्तर: C. कोसल – अयोध्या
कोसल महाजनपद का संबंध अयोध्या और श्रावस्ती से था। दिए गए विकल्पों में कोसल और अयोध्या का युग्म सही है। बाकी युग्म गलत राजधानी या क्षेत्र से जुड़े हैं।
कोसल महाजनपद का संबंध अयोध्या और श्रावस्ती से था। दिए गए विकल्पों में कोसल और अयोध्या का युग्म सही है। बाकी युग्म गलत राजधानी या क्षेत्र से जुड़े हैं।
Q48. महाजनपद काल में शासन का मुख्य रूप क्या था?
उत्तर: B. राजतंत्र और गणतंत्र
महाजनपद काल में दो प्रकार की शासन व्यवस्थाएँ देखने को मिलती हैं। कुछ महाजनपदों में राजतंत्र था, जबकि कुछ में गणतांत्रिक व्यवस्था थी। मल्ल और वज्जि जैसे गणराज्य इसके उदाहरण हैं।
महाजनपद काल में दो प्रकार की शासन व्यवस्थाएँ देखने को मिलती हैं। कुछ महाजनपदों में राजतंत्र था, जबकि कुछ में गणतांत्रिक व्यवस्था थी। मल्ल और वज्जि जैसे गणराज्य इसके उदाहरण हैं।
Q49. चेदि महाजनपद किस नदी के दक्षिण में था?
उत्तर: B. यमुना
चेदि महाजनपद यमुना नदी के दक्षिण में स्थित माना जाता है। इसका क्षेत्र बुंदेलखंड और आसपास के भागों से जुड़ा था। यह प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में से एक था।
चेदि महाजनपद यमुना नदी के दक्षिण में स्थित माना जाता है। इसका क्षेत्र बुंदेलखंड और आसपास के भागों से जुड़ा था। यह प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में से एक था।
Q50. निम्न में से कौन सही है?
उत्तर: C. वत्स – राजतंत्र
वत्स महाजनपद में राजतांत्रिक शासन व्यवस्था थी। इसकी राजधानी कौशांबी थी और यह राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य था। मल्ल गणराज्य था, जबकि काशी और कोसल राजतंत्र माने जाते हैं।
वत्स महाजनपद में राजतांत्रिक शासन व्यवस्था थी। इसकी राजधानी कौशांबी थी और यह राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य था। मल्ल गणराज्य था, जबकि काशी और कोसल राजतंत्र माने जाते हैं।
Q51. कपिलवस्तु किससे संबंधित है?
उत्तर: B. शाक्य गणराज्य
कपिलवस्तु शाक्य गणराज्य से संबंधित था। गौतम बुद्ध का संबंध भी शाक्य कुल से माना जाता है। इसलिए कपिलवस्तु बौद्ध और प्राचीन भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
कपिलवस्तु शाक्य गणराज्य से संबंधित था। गौतम बुद्ध का संबंध भी शाक्य कुल से माना जाता है। इसलिए कपिलवस्तु बौद्ध और प्राचीन भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
Q52. निम्न में से कौन पंचजन में शामिल नहीं था?
उत्तर: C. मौर्य
पंचजन में पुरु, यदु, तुर्वश, अनु और द्रुह्यु जैसे जनों का उल्लेख मिलता है। मौर्य इनमें शामिल नहीं थे। मौर्य बाद के काल का एक प्रमुख राजवंश था।
पंचजन में पुरु, यदु, तुर्वश, अनु और द्रुह्यु जैसे जनों का उल्लेख मिलता है। मौर्य इनमें शामिल नहीं थे। मौर्य बाद के काल का एक प्रमुख राजवंश था।
Q53. वैदिक संस्कृति का केंद्र कहाँ स्थानांतरित हुआ?
उत्तर: B. गंगा घाटी
उत्तर वैदिक काल में वैदिक संस्कृति का केंद्र पश्चिमोत्तर क्षेत्र से गंगा घाटी की ओर स्थानांतरित हुआ। इस क्षेत्र में कृषि, बस्तियों और राजनीतिक संगठनों का विकास हुआ। आगे चलकर यही क्षेत्र महाजनपदों का आधार बना।
उत्तर वैदिक काल में वैदिक संस्कृति का केंद्र पश्चिमोत्तर क्षेत्र से गंगा घाटी की ओर स्थानांतरित हुआ। इस क्षेत्र में कृषि, बस्तियों और राजनीतिक संगठनों का विकास हुआ। आगे चलकर यही क्षेत्र महाजनपदों का आधार बना।
Q54. कुरु-पांचाल किसके लिए प्रसिद्ध थे?
उत्तर: B. वैदिक शिक्षा
कुरु-पांचाल क्षेत्र वैदिक शिक्षा और यज्ञ परंपरा के लिए प्रसिद्ध था। यह उत्तर वैदिक काल में वैदिक संस्कृति का प्रमुख केंद्र बना। यहाँ से धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं का विकास हुआ।
कुरु-पांचाल क्षेत्र वैदिक शिक्षा और यज्ञ परंपरा के लिए प्रसिद्ध था। यह उत्तर वैदिक काल में वैदिक संस्कृति का प्रमुख केंद्र बना। यहाँ से धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं का विकास हुआ।
Q55. निम्न में से कौन सही नहीं है?
उत्तर: C. कोसल – मथुरा
कोसल का संबंध अयोध्या और श्रावस्ती से है, मथुरा से नहीं। मथुरा सुरसेन महाजनपद की राजधानी थी। इसलिए कोसल – मथुरा गलत युग्म है।
कोसल का संबंध अयोध्या और श्रावस्ती से है, मथुरा से नहीं। मथुरा सुरसेन महाजनपद की राजधानी थी। इसलिए कोसल – मथुरा गलत युग्म है।
Q56. महाजनपदों की कुल संख्या कितनी थी?
उत्तर: C. 16
प्राचीन भारत में कुल 16 महाजनपदों का उल्लेख मिलता है। ये बड़े राजनीतिक राज्य थे, जिनका उदय लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ। इनमें काशी, कोसल, वत्स, मगध आदि प्रमुख थे।
प्राचीन भारत में कुल 16 महाजनपदों का उल्लेख मिलता है। ये बड़े राजनीतिक राज्य थे, जिनका उदय लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ। इनमें काशी, कोसल, वत्स, मगध आदि प्रमुख थे।
Q57. निम्न में से कौन उत्तर प्रदेश में स्थित महाजनपद था?
उत्तर: B. काशी
काशी महाजनपद वर्तमान उत्तर प्रदेश के वाराणसी क्षेत्र से संबंधित था। गांधार और कम्बोज उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में स्थित थे। असक दक्षिण भारत से संबंधित महाजनपद माना जाता है।
काशी महाजनपद वर्तमान उत्तर प्रदेश के वाराणसी क्षेत्र से संबंधित था। गांधार और कम्बोज उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में स्थित थे। असक दक्षिण भारत से संबंधित महाजनपद माना जाता है।
Q58. निम्न में से कौन सही है?
उत्तर: B. पांचाल – पश्चिमी उत्तर प्रदेश
पांचाल महाजनपद का क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश से संबंधित था। यह वैदिक संस्कृति और शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र था। कुरु, मल्ल और वत्स के दिए गए विकल्प सही नहीं हैं।
पांचाल महाजनपद का क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश से संबंधित था। यह वैदिक संस्कृति और शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र था। कुरु, मल्ल और वत्स के दिए गए विकल्प सही नहीं हैं।
Q59. निम्न में से कौन गणराज्य था?
उत्तर: B. मल्ल
मल्ल महाजनपद गणराज्य था। महाजनपद काल में कुछ राज्यों में राजा का शासन था और कुछ में गणतांत्रिक व्यवस्था। मल्ल गणराज्य इसी गणतांत्रिक परंपरा का उदाहरण है।
मल्ल महाजनपद गणराज्य था। महाजनपद काल में कुछ राज्यों में राजा का शासन था और कुछ में गणतांत्रिक व्यवस्था। मल्ल गणराज्य इसी गणतांत्रिक परंपरा का उदाहरण है।
Q60. महाजनपद काल में नगरों के विकास का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: B. कृषि अधिशेष
महाजनपद काल में कृषि उत्पादन बढ़ने से अधिशेष पैदा हुआ। इसी अधिशेष से व्यापार, शिल्प और नगरों का विकास हुआ। इसलिए नगरों के विकास का मुख्य आधार कृषि अधिशेष माना जाता है।
महाजनपद काल में कृषि उत्पादन बढ़ने से अधिशेष पैदा हुआ। इसी अधिशेष से व्यापार, शिल्प और नगरों का विकास हुआ। इसलिए नगरों के विकास का मुख्य आधार कृषि अधिशेष माना जाता है।
SET 3 (Q61-100) : बौद्ध + जैन + महाकाव्य + नंद-मौर्य
Q61. बुद्ध का प्रथम उपदेश कहाँ हुआ था?
उत्तर: B. सारनाथ
गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना प्रथम उपदेश सारनाथ में दिया था। इसे धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है। सारनाथ वाराणसी के पास स्थित है और बौद्ध धर्म के प्रमुख तीर्थों में गिना जाता है।
गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना प्रथम उपदेश सारनाथ में दिया था। इसे धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है। सारनाथ वाराणसी के पास स्थित है और बौद्ध धर्म के प्रमुख तीर्थों में गिना जाता है।
Q62. बुद्ध का महापरिनिर्वाण स्थल कौन सा है?
उत्तर: B. कुशीनगर
कुशीनगर गौतम बुद्ध के महापरिनिर्वाण से संबंधित प्रमुख स्थल है। बौद्ध परंपरा में यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है। यहाँ महापरिनिर्वाण मंदिर और स्तूप बौद्ध विरासत के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं।
कुशीनगर गौतम बुद्ध के महापरिनिर्वाण से संबंधित प्रमुख स्थल है। बौद्ध परंपरा में यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है। यहाँ महापरिनिर्वाण मंदिर और स्तूप बौद्ध विरासत के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं।
Q63. बुद्ध ने सर्वाधिक वर्षावास कहाँ किया?
उत्तर: C. श्रावस्ती
श्रावस्ती बुद्ध के जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ स्थल है। बौद्ध परंपरा के अनुसार बुद्ध ने यहाँ जेतवन विहार में अनेक वर्षावास किए। यह स्थान उनके उपदेशों और संघ जीवन के कारण प्रसिद्ध है।
श्रावस्ती बुद्ध के जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ स्थल है। बौद्ध परंपरा के अनुसार बुद्ध ने यहाँ जेतवन विहार में अनेक वर्षावास किए। यह स्थान उनके उपदेशों और संघ जीवन के कारण प्रसिद्ध है।
Q64. जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर कौन थे?
उत्तर: C. महावीर
महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर माने जाते हैं। उनका मूल नाम वर्धमान था। उन्होंने अहिंसा, सत्य और संयम पर आधारित जैन सिद्धांतों को व्यवस्थित रूप दिया।
महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर माने जाते हैं। उनका मूल नाम वर्धमान था। उन्होंने अहिंसा, सत्य और संयम पर आधारित जैन सिद्धांतों को व्यवस्थित रूप दिया।
Q65. पार्श्वनाथ का संबंध किस स्थान से माना जाता है?
उत्तर: B. वाराणसी
पार्श्वनाथ जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर माने जाते हैं। परंपरा में उनका संबंध वाराणसी से बताया जाता है। उन्होंने चार व्रतों की शिक्षा दी, जिन्हें आगे महावीर ने पाँच महाव्रतों के रूप में व्यवस्थित किया।
पार्श्वनाथ जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर माने जाते हैं। परंपरा में उनका संबंध वाराणसी से बताया जाता है। उन्होंने चार व्रतों की शिक्षा दी, जिन्हें आगे महावीर ने पाँच महाव्रतों के रूप में व्यवस्थित किया।
Q66. कंकाली टीला (मथुरा) किस धर्म से संबंधित है?
उत्तर: B. जैन
कंकाली टीला मथुरा का प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल है। यह जैन धर्म से संबंधित मूर्तियों, आयागपट्टों और अभिलेखों के लिए जाना जाता है। मथुरा प्राचीन काल में जैन, बौद्ध और ब्राह्मण परंपराओं का महत्वपूर्ण केंद्र था।
कंकाली टीला मथुरा का प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल है। यह जैन धर्म से संबंधित मूर्तियों, आयागपट्टों और अभिलेखों के लिए जाना जाता है। मथुरा प्राचीन काल में जैन, बौद्ध और ब्राह्मण परंपराओं का महत्वपूर्ण केंद्र था।
Q67. निम्न में से कौन बौद्ध स्थल नहीं है?
उत्तर: D. कन्नौज
सारनाथ, कुशीनगर और श्रावस्ती बुद्ध के जीवन और बौद्ध धर्म से सीधे जुड़े प्रमुख स्थल हैं। कन्नौज प्राचीन और मध्यकालीन भारत का महत्वपूर्ण नगर रहा, लेकिन यह प्रमुख बौद्ध तीर्थों में नहीं गिना जाता। इसलिए सही उत्तर कन्नौज है।
सारनाथ, कुशीनगर और श्रावस्ती बुद्ध के जीवन और बौद्ध धर्म से सीधे जुड़े प्रमुख स्थल हैं। कन्नौज प्राचीन और मध्यकालीन भारत का महत्वपूर्ण नगर रहा, लेकिन यह प्रमुख बौद्ध तीर्थों में नहीं गिना जाता। इसलिए सही उत्तर कन्नौज है।
Q68. ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’ का संबंध किससे है?
उत्तर: B. बुद्ध का पहला उपदेश
धर्मचक्र प्रवर्तन का अर्थ है धर्म के चक्र को प्रवर्तित करना। यह घटना सारनाथ में बुद्ध के प्रथम उपदेश से संबंधित है। इसी उपदेश से बौद्ध संघ और बौद्ध शिक्षाओं के प्रचार की शुरुआत मानी जाती है।
धर्मचक्र प्रवर्तन का अर्थ है धर्म के चक्र को प्रवर्तित करना। यह घटना सारनाथ में बुद्ध के प्रथम उपदेश से संबंधित है। इसी उपदेश से बौद्ध संघ और बौद्ध शिक्षाओं के प्रचार की शुरुआत मानी जाती है।
Q69. निम्न में से कौन सही युग्म है?
उत्तर: B. कुशीनगर - निर्वाण
कुशीनगर बुद्ध के महापरिनिर्वाण का स्थल है। सारनाथ प्रथम उपदेश से और लुम्बिनी बुद्ध के जन्म से संबंधित है। इसलिए दिए गए विकल्पों में कुशीनगर - निर्वाण सही युग्म है।
कुशीनगर बुद्ध के महापरिनिर्वाण का स्थल है। सारनाथ प्रथम उपदेश से और लुम्बिनी बुद्ध के जन्म से संबंधित है। इसलिए दिए गए विकल्पों में कुशीनगर - निर्वाण सही युग्म है।
Q70. बुद्ध का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर: A. लुम्बिनी
गौतम बुद्ध का जन्म लुम्बिनी में हुआ था। लुम्बिनी वर्तमान नेपाल में स्थित है। कपिलवस्तु शाक्य गणराज्य से जुड़ा था, जहाँ बुद्ध का प्रारंभिक जीवन बीता।
गौतम बुद्ध का जन्म लुम्बिनी में हुआ था। लुम्बिनी वर्तमान नेपाल में स्थित है। कपिलवस्तु शाक्य गणराज्य से जुड़ा था, जहाँ बुद्ध का प्रारंभिक जीवन बीता।
Q71. रामायण के अनुसार अयोध्या किस राज्य की राजधानी थी?
उत्तर: B. कोसल
रामायण परंपरा में अयोध्या को कोसल राज्य की राजधानी बताया गया है। यह भगवान राम की जन्मभूमि और इक्ष्वाकु वंश से संबंधित नगर माना जाता है। प्राचीन उत्तर भारत के सांस्कृतिक इतिहास में अयोध्या का विशेष स्थान है।
रामायण परंपरा में अयोध्या को कोसल राज्य की राजधानी बताया गया है। यह भगवान राम की जन्मभूमि और इक्ष्वाकु वंश से संबंधित नगर माना जाता है। प्राचीन उत्तर भारत के सांस्कृतिक इतिहास में अयोध्या का विशेष स्थान है।
Q72. महाभारत युद्ध किस क्षेत्र से संबंधित है?
उत्तर: B. कुरुक्षेत्र
महाभारत युद्ध का संबंध कुरुक्षेत्र से माना जाता है। यह क्षेत्र कुरु जनपद और महाभारत परंपरा से जुड़ा हुआ है। भारतीय महाकाव्य परंपरा में कुरुक्षेत्र को धर्मक्षेत्र भी कहा गया है।
महाभारत युद्ध का संबंध कुरुक्षेत्र से माना जाता है। यह क्षेत्र कुरु जनपद और महाभारत परंपरा से जुड़ा हुआ है। भारतीय महाकाव्य परंपरा में कुरुक्षेत्र को धर्मक्षेत्र भी कहा गया है।
Q73. नैमिषारण्य कहाँ स्थित है?
उत्तर: B. सीतापुर
नैमिषारण्य उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह पुराणों और महाकाव्य परंपराओं से जुड़ा माना जाता है। यहाँ ऋषियों की सभाओं और कथाओं का उल्लेख मिलता है।
नैमिषारण्य उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह पुराणों और महाकाव्य परंपराओं से जुड़ा माना जाता है। यहाँ ऋषियों की सभाओं और कथाओं का उल्लेख मिलता है।
Q74. महाभारत की कथा किसने सुनाई थी?
उत्तर: B. सूत
महाभारत परंपरा में कथा का वाचन सूत या सूतजी द्वारा ऋषियों को सुनाए जाने से जुड़ा है। व्यास को महाभारत का रचयिता माना जाता है। इसलिए प्रश्न में कथा सुनाने के संदर्भ में सूत सही उत्तर है।
महाभारत परंपरा में कथा का वाचन सूत या सूतजी द्वारा ऋषियों को सुनाए जाने से जुड़ा है। व्यास को महाभारत का रचयिता माना जाता है। इसलिए प्रश्न में कथा सुनाने के संदर्भ में सूत सही उत्तर है।
Q75. मथुरा किससे संबंधित है?
उत्तर: B. कृष्ण
मथुरा भगवान कृष्ण से संबंधित प्रमुख नगर है। परंपरा के अनुसार कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था। प्राचीन काल में मथुरा धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा।
मथुरा भगवान कृष्ण से संबंधित प्रमुख नगर है। परंपरा के अनुसार कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था। प्राचीन काल में मथुरा धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा।
Q76. नंद वंश का संस्थापक कौन था?
उत्तर: B. महापद्म नंद
नंद वंश का संस्थापक महापद्म नंद माना जाता है। नंदों ने मगध को एक शक्तिशाली राज्य के रूप में विकसित किया। बाद में चंद्रगुप्त मौर्य ने नंद सत्ता को समाप्त कर मौर्य वंश की स्थापना की।
नंद वंश का संस्थापक महापद्म नंद माना जाता है। नंदों ने मगध को एक शक्तिशाली राज्य के रूप में विकसित किया। बाद में चंद्रगुप्त मौर्य ने नंद सत्ता को समाप्त कर मौर्य वंश की स्थापना की।
Q77. सिकंदर का भारत पर आक्रमण कब हुआ?
उत्तर: B. 326 ई.पू.
सिकंदर ने 326 ई.पू. में उत्तर-पश्चिम भारत पर आक्रमण किया था। उसका सामना झेलम नदी के पास राजा पोरस से हुआ। यह घटना मौर्य वंश के उदय से ठीक पहले की राजनीतिक परिस्थिति को समझने में महत्वपूर्ण है।
सिकंदर ने 326 ई.पू. में उत्तर-पश्चिम भारत पर आक्रमण किया था। उसका सामना झेलम नदी के पास राजा पोरस से हुआ। यह घटना मौर्य वंश के उदय से ठीक पहले की राजनीतिक परिस्थिति को समझने में महत्वपूर्ण है।
Q78. मौर्य वंश की स्थापना किसने की?
उत्तर: C. चंद्रगुप्त मौर्य
मौर्य वंश की स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने की थी। उन्होंने मगध में नंद वंश का अंत कर नई सत्ता स्थापित की। उनके शासन में भारत का पहला विशाल ऐतिहासिक साम्राज्य विकसित हुआ।
मौर्य वंश की स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने की थी। उन्होंने मगध में नंद वंश का अंत कर नई सत्ता स्थापित की। उनके शासन में भारत का पहला विशाल ऐतिहासिक साम्राज्य विकसित हुआ।
Q79. चंद्रगुप्त मौर्य का गुरु कौन था?
उत्तर: B. चाणक्य
चाणक्य को चंद्रगुप्त मौर्य का गुरु और मार्गदर्शक माना जाता है। उन्हें कौटिल्य और विष्णुगुप्त नामों से भी जाना जाता है। मौर्य साम्राज्य की स्थापना में उनकी राजनीतिक भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
चाणक्य को चंद्रगुप्त मौर्य का गुरु और मार्गदर्शक माना जाता है। उन्हें कौटिल्य और विष्णुगुप्त नामों से भी जाना जाता है। मौर्य साम्राज्य की स्थापना में उनकी राजनीतिक भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
Q80. अशोक का प्रसिद्ध स्तंभ कहाँ स्थित है?
उत्तर: B. सारनाथ
अशोक का प्रसिद्ध सिंह-शीर्ष स्तंभ सारनाथ में स्थित था। इसी सिंह-शीर्ष को भारत के राष्ट्रीय प्रतीक का आधार बनाया गया। सारनाथ में अशोक की संरक्षक भूमिका बौद्ध धर्म के प्रसार से जुड़ी हुई है।
अशोक का प्रसिद्ध सिंह-शीर्ष स्तंभ सारनाथ में स्थित था। इसी सिंह-शीर्ष को भारत के राष्ट्रीय प्रतीक का आधार बनाया गया। सारनाथ में अशोक की संरक्षक भूमिका बौद्ध धर्म के प्रसार से जुड़ी हुई है।
Q81. भारत का राष्ट्रीय प्रतीक किससे लिया गया है?
उत्तर: B. अशोक स्तंभ (सारनाथ)
भारत का राष्ट्रीय प्रतीक सारनाथ के अशोक स्तंभ के सिंह-शीर्ष से लिया गया है। इसमें चार सिंहों की आकृति है। यह मौर्य कला, शासन और धर्म नीति का प्रसिद्ध प्रतीक माना जाता है।
भारत का राष्ट्रीय प्रतीक सारनाथ के अशोक स्तंभ के सिंह-शीर्ष से लिया गया है। इसमें चार सिंहों की आकृति है। यह मौर्य कला, शासन और धर्म नीति का प्रसिद्ध प्रतीक माना जाता है।
Q82. धमेख स्तूप कहाँ स्थित है?
उत्तर: B. सारनाथ
धमेख स्तूप सारनाथ में स्थित है। यह उस स्थान से जुड़ा माना जाता है जहाँ बुद्ध ने प्रथम उपदेश दिया था। सारनाथ के बौद्ध स्मारकों में धमेख स्तूप सबसे प्रसिद्ध संरचनाओं में से एक है।
धमेख स्तूप सारनाथ में स्थित है। यह उस स्थान से जुड़ा माना जाता है जहाँ बुद्ध ने प्रथम उपदेश दिया था। सारनाथ के बौद्ध स्मारकों में धमेख स्तूप सबसे प्रसिद्ध संरचनाओं में से एक है।
Q83. निम्न में से कौन मौर्य शासक नहीं था?
उत्तर: D. कनिष्क
चंद्रगुप्त, बिंदुसार और अशोक मौर्य वंश के प्रमुख शासक थे। कनिष्क मौर्य शासक नहीं थे, वे कुषाण वंश के प्रसिद्ध शासक थे। इसलिए सही उत्तर कनिष्क है।
चंद्रगुप्त, बिंदुसार और अशोक मौर्य वंश के प्रमुख शासक थे। कनिष्क मौर्य शासक नहीं थे, वे कुषाण वंश के प्रसिद्ध शासक थे। इसलिए सही उत्तर कनिष्क है।
Q84. अशोक की मृत्यु कब हुई?
उत्तर: B. 232 ई.पू.
अशोक की मृत्यु लगभग 232 ई.पू. मानी जाती है। वे मौर्य साम्राज्य के सबसे प्रसिद्ध शासक थे। उनके बाद मौर्य साम्राज्य की शक्ति धीरे-धीरे कमजोर होने लगी।
अशोक की मृत्यु लगभग 232 ई.पू. मानी जाती है। वे मौर्य साम्राज्य के सबसे प्रसिद्ध शासक थे। उनके बाद मौर्य साम्राज्य की शक्ति धीरे-धीरे कमजोर होने लगी।
Q85. अशोक के शिलालेख कहाँ पाए जाते हैं?
उत्तर: C. पूरे भारत में
अशोक के शिलालेख और स्तंभलेख भारत के अनेक क्षेत्रों में पाए गए हैं। इनसे अशोक की धम्म नीति, प्रशासन और प्रजा के प्रति दृष्टिकोण की जानकारी मिलती है। ये मौर्य इतिहास के सबसे विश्वसनीय स्रोतों में शामिल हैं।
अशोक के शिलालेख और स्तंभलेख भारत के अनेक क्षेत्रों में पाए गए हैं। इनसे अशोक की धम्म नीति, प्रशासन और प्रजा के प्रति दृष्टिकोण की जानकारी मिलती है। ये मौर्य इतिहास के सबसे विश्वसनीय स्रोतों में शामिल हैं।
Q86. निम्न में से कौन अशोक स्तंभ का स्थान नहीं है?
उत्तर: D. मथुरा
सारनाथ, कौशांबी और मेरठ अशोक स्तंभों या उनसे संबंधित स्तंभ परंपरा के लिए प्रसिद्ध हैं। मथुरा प्राचीन कला और धार्मिक केंद्र के रूप में महत्वपूर्ण है, लेकिन दिए गए विकल्पों में अशोक स्तंभ का प्रमुख स्थान नहीं है। इसलिए सही उत्तर मथुरा है।
सारनाथ, कौशांबी और मेरठ अशोक स्तंभों या उनसे संबंधित स्तंभ परंपरा के लिए प्रसिद्ध हैं। मथुरा प्राचीन कला और धार्मिक केंद्र के रूप में महत्वपूर्ण है, लेकिन दिए गए विकल्पों में अशोक स्तंभ का प्रमुख स्थान नहीं है। इसलिए सही उत्तर मथुरा है।
Q87. बौद्ध धर्म का प्रचार किस शासक ने सबसे अधिक किया?
उत्तर: C. अशोक
अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद बौद्ध धर्म और धम्म नीति को अपनाया। उन्होंने शिलालेखों, स्तूपों और धर्म यात्राओं के माध्यम से बौद्ध विचारों का प्रसार किया। उनके शासन में बौद्ध धर्म भारत से बाहर भी पहुँचा।
अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद बौद्ध धर्म और धम्म नीति को अपनाया। उन्होंने शिलालेखों, स्तूपों और धर्म यात्राओं के माध्यम से बौद्ध विचारों का प्रसार किया। उनके शासन में बौद्ध धर्म भारत से बाहर भी पहुँचा।
Q88. ‘देवानांप्रिय’ उपाधि किसकी थी?
उत्तर: B. अशोक
अशोक अपने अभिलेखों में देवानांप्रिय प्रियदर्शी के रूप में संबोधित किए गए हैं। देवानांप्रिय का अर्थ देवताओं का प्रिय होता है। यह उपाधि अशोक के राजकीय अभिलेखों की पहचान है।
अशोक अपने अभिलेखों में देवानांप्रिय प्रियदर्शी के रूप में संबोधित किए गए हैं। देवानांप्रिय का अर्थ देवताओं का प्रिय होता है। यह उपाधि अशोक के राजकीय अभिलेखों की पहचान है।
Q89. महावीर का निर्वाण कहाँ हुआ?
उत्तर: A. पावापुरी
जैन परंपरा के अनुसार महावीर स्वामी का निर्वाण पावापुरी में हुआ था। पावापुरी वर्तमान बिहार में स्थित एक पवित्र जैन तीर्थ है। यह जैन धर्म के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
जैन परंपरा के अनुसार महावीर स्वामी का निर्वाण पावापुरी में हुआ था। पावापुरी वर्तमान बिहार में स्थित एक पवित्र जैन तीर्थ है। यह जैन धर्म के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
Q90. जैन धर्म का मुख्य सिद्धांत क्या है?
उत्तर: B. अहिंसा
जैन धर्म का सबसे प्रमुख सिद्धांत अहिंसा है। इसमें मन, वचन और कर्म से किसी भी जीव को हानि न पहुँचाने पर जोर दिया गया है। महावीर ने अहिंसा को आध्यात्मिक जीवन का आधार माना।
जैन धर्म का सबसे प्रमुख सिद्धांत अहिंसा है। इसमें मन, वचन और कर्म से किसी भी जीव को हानि न पहुँचाने पर जोर दिया गया है। महावीर ने अहिंसा को आध्यात्मिक जीवन का आधार माना।
Q91. निम्न में से कौन बौद्ध स्थल है?
उत्तर: B. सारनाथ
सारनाथ बौद्ध धर्म का प्रमुख स्थल है। यहाँ बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश दिया था। धमेख स्तूप और अशोक स्तंभ इसे बौद्ध इतिहास में विशेष महत्व देते हैं।
सारनाथ बौद्ध धर्म का प्रमुख स्थल है। यहाँ बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश दिया था। धमेख स्तूप और अशोक स्तंभ इसे बौद्ध इतिहास में विशेष महत्व देते हैं।
Q92. श्रावस्ती किससे संबंधित है?
उत्तर: B. बुद्ध
श्रावस्ती बुद्ध के जीवन और उपदेशों से संबंधित प्रमुख नगर है। यहाँ जेतवन विहार स्थित था, जहाँ बुद्ध ने अनेक उपदेश दिए। यह कोसल राज्य की राजधानी के रूप में भी प्रसिद्ध था।
श्रावस्ती बुद्ध के जीवन और उपदेशों से संबंधित प्रमुख नगर है। यहाँ जेतवन विहार स्थित था, जहाँ बुद्ध ने अनेक उपदेश दिए। यह कोसल राज्य की राजधानी के रूप में भी प्रसिद्ध था।
Q93. कौशांबी किससे संबंधित है?
उत्तर: D. सभी
कौशांबी प्राचीन वत्स महाजनपद की राजधानी थी और कई धार्मिक-ऐतिहासिक परंपराओं से जुड़ी है। यहाँ बौद्ध विहारों और अशोक स्तंभ से संबंधित प्रमाण मिलते हैं। जैन परंपरा में भी कौशांबी का उल्लेख महत्वपूर्ण माना जाता है।
कौशांबी प्राचीन वत्स महाजनपद की राजधानी थी और कई धार्मिक-ऐतिहासिक परंपराओं से जुड़ी है। यहाँ बौद्ध विहारों और अशोक स्तंभ से संबंधित प्रमाण मिलते हैं। जैन परंपरा में भी कौशांबी का उल्लेख महत्वपूर्ण माना जाता है।
Q94. निम्न में से कौन सही है?
उत्तर: A. सारनाथ - प्रथम उपदेश
सारनाथ बुद्ध के प्रथम उपदेश से संबंधित है। कुशीनगर महापरिनिर्वाण और लुम्बिनी जन्म से संबंधित स्थल हैं। इसलिए दिए गए विकल्पों में सारनाथ - प्रथम उपदेश सही युग्म है।
सारनाथ बुद्ध के प्रथम उपदेश से संबंधित है। कुशीनगर महापरिनिर्वाण और लुम्बिनी जन्म से संबंधित स्थल हैं। इसलिए दिए गए विकल्पों में सारनाथ - प्रथम उपदेश सही युग्म है।
Q95. बौद्ध धर्म का मूल उद्देश्य क्या है?
उत्तर: C. निर्वाण
बौद्ध धर्म का मूल उद्देश्य निर्वाण की प्राप्ति है। निर्वाण का अर्थ दुख, तृष्णा और पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति माना जाता है। बुद्ध ने अष्टांगिक मार्ग को निर्वाण की ओर ले जाने वाला मार्ग बताया।
बौद्ध धर्म का मूल उद्देश्य निर्वाण की प्राप्ति है। निर्वाण का अर्थ दुख, तृष्णा और पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति माना जाता है। बुद्ध ने अष्टांगिक मार्ग को निर्वाण की ओर ले जाने वाला मार्ग बताया।
Q96. निम्न में से कौन जैन स्थल है?
उत्तर: A. कंकाली टीला
कंकाली टीला मथुरा का जैन धर्म से संबंधित प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल है। यहाँ से जैन मूर्तियाँ, आयागपट्ट और अभिलेख प्राप्त हुए हैं। यह मथुरा की प्राचीन जैन कला और संस्कृति का महत्वपूर्ण प्रमाण है।
कंकाली टीला मथुरा का जैन धर्म से संबंधित प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल है। यहाँ से जैन मूर्तियाँ, आयागपट्ट और अभिलेख प्राप्त हुए हैं। यह मथुरा की प्राचीन जैन कला और संस्कृति का महत्वपूर्ण प्रमाण है।
Q97. अशोक ने किस धर्म को अपनाया?
उत्तर: B. बौद्ध
अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद बौद्ध धर्म को संरक्षण दिया। उन्होंने धम्म नीति के माध्यम से नैतिक जीवन, करुणा और अहिंसा पर जोर दिया। उनके प्रयासों से बौद्ध धर्म का व्यापक प्रचार हुआ।
अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद बौद्ध धर्म को संरक्षण दिया। उन्होंने धम्म नीति के माध्यम से नैतिक जीवन, करुणा और अहिंसा पर जोर दिया। उनके प्रयासों से बौद्ध धर्म का व्यापक प्रचार हुआ।
Q98. बिंदुसार किसका पुत्र था?
उत्तर: B. चंद्रगुप्त
बिंदुसार चंद्रगुप्त मौर्य का पुत्र था। चंद्रगुप्त के बाद बिंदुसार मौर्य साम्राज्य का शासक बना। बिंदुसार के बाद अशोक ने मौर्य सत्ता संभाली।
बिंदुसार चंद्रगुप्त मौर्य का पुत्र था। चंद्रगुप्त के बाद बिंदुसार मौर्य साम्राज्य का शासक बना। बिंदुसार के बाद अशोक ने मौर्य सत्ता संभाली।
Q99. निम्न में से कौन सही है?
उत्तर: B. बिंदुसार - पुत्र अशोक
अशोक बिंदुसार का पुत्र था। मौर्य वंश में क्रम चंद्रगुप्त मौर्य, बिंदुसार और फिर अशोक का माना जाता है। इसलिए बिंदुसार - पुत्र अशोक सही युग्म है।
अशोक बिंदुसार का पुत्र था। मौर्य वंश में क्रम चंद्रगुप्त मौर्य, बिंदुसार और फिर अशोक का माना जाता है। इसलिए बिंदुसार - पुत्र अशोक सही युग्म है।
Q100. मौर्य साम्राज्य का पतन किसके बाद शुरू हुआ?
उत्तर: C. अशोक
अशोक के बाद मौर्य साम्राज्य की केंद्रीय शक्ति कमजोर होने लगी। विशाल साम्राज्य पर नियंत्रण कठिन हो गया और उत्तराधिकारियों की क्षमता भी अपेक्षाकृत कम थी। इसलिए मौर्य साम्राज्य के पतन की शुरुआत अशोक के बाद मानी जाती है।
अशोक के बाद मौर्य साम्राज्य की केंद्रीय शक्ति कमजोर होने लगी। विशाल साम्राज्य पर नियंत्रण कठिन हो गया और उत्तराधिकारियों की क्षमता भी अपेक्षाकृत कम थी। इसलिए मौर्य साम्राज्य के पतन की शुरुआत अशोक के बाद मानी जाती है।
SET 4 (Q101-140) : शुंग + कण्व + कुषाण + गुप्त
Q101. शुंग वंश का संस्थापक कौन था?
उत्तर: B. पुष्यमित्र शुंग
शुंग वंश की स्थापना पुष्यमित्र शुंग ने लगभग 185 ई.पू. में की थी। वह मौर्य साम्राज्य का सेनापति था। मौर्य वंश के अंतिम शासक बृहद्रथ की हत्या के बाद उसने सत्ता प्राप्त की।
शुंग वंश की स्थापना पुष्यमित्र शुंग ने लगभग 185 ई.पू. में की थी। वह मौर्य साम्राज्य का सेनापति था। मौर्य वंश के अंतिम शासक बृहद्रथ की हत्या के बाद उसने सत्ता प्राप्त की।
Q102. पुष्यमित्र शुंग ने किसकी हत्या करके सत्ता प्राप्त की?
उत्तर: C. बृहद्रथ
बृहद्रथ मौर्य वंश का अंतिम शासक था। पुष्यमित्र शुंग ने सैनिक परेड के दौरान उसकी हत्या कर दी और शुंग वंश की स्थापना की। इस घटना से मौर्य सत्ता का अंत और शुंग सत्ता की शुरुआत हुई।
बृहद्रथ मौर्य वंश का अंतिम शासक था। पुष्यमित्र शुंग ने सैनिक परेड के दौरान उसकी हत्या कर दी और शुंग वंश की स्थापना की। इस घटना से मौर्य सत्ता का अंत और शुंग सत्ता की शुरुआत हुई।
Q103. पतंजलि के अनुसार यवनों ने किस स्थान पर आक्रमण किया था?
उत्तर: B. साकेत
पतंजलि के महाभाष्य में यवनों के साकेत पर आक्रमण का उल्लेख मिलता है। साकेत को प्राचीन अयोध्या क्षेत्र से जोड़ा जाता है। यह घटना शुंग काल में इंडो-ग्रीक गतिविधियों का महत्वपूर्ण प्रमाण मानी जाती है।
पतंजलि के महाभाष्य में यवनों के साकेत पर आक्रमण का उल्लेख मिलता है। साकेत को प्राचीन अयोध्या क्षेत्र से जोड़ा जाता है। यह घटना शुंग काल में इंडो-ग्रीक गतिविधियों का महत्वपूर्ण प्रमाण मानी जाती है।
Q104. शुंग काल में प्रमुख विदेशी आक्रमणकारी कौन थे?
उत्तर: C. यवन (इंडो-ग्रीक)
शुंग काल में उत्तर-पश्चिम से यवन या इंडो-ग्रीक आक्रमणों का उल्लेख मिलता है। ये आक्रमण मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद बनी राजनीतिक कमजोरी से जुड़े थे। पतंजलि और अन्य स्रोत इस काल की यवन गतिविधियों का संकेत देते हैं।
शुंग काल में उत्तर-पश्चिम से यवन या इंडो-ग्रीक आक्रमणों का उल्लेख मिलता है। ये आक्रमण मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद बनी राजनीतिक कमजोरी से जुड़े थे। पतंजलि और अन्य स्रोत इस काल की यवन गतिविधियों का संकेत देते हैं।
Q105. मिनांडर किससे संबंधित था?
उत्तर: C. इंडो-ग्रीक
मिनांडर, जिसे मिलिंद भी कहा जाता है, इंडो-ग्रीक शासक था। उसका संबंध बौद्ध ग्रंथ मिलिंदपन्हो से भी जोड़ा जाता है। वह उत्तर-पश्चिम भारत में ग्रीक प्रभाव का प्रसिद्ध प्रतिनिधि माना जाता है।
मिनांडर, जिसे मिलिंद भी कहा जाता है, इंडो-ग्रीक शासक था। उसका संबंध बौद्ध ग्रंथ मिलिंदपन्हो से भी जोड़ा जाता है। वह उत्तर-पश्चिम भारत में ग्रीक प्रभाव का प्रसिद्ध प्रतिनिधि माना जाता है।
Q106. शुंग वंश के बाद कौन सा वंश आया?
उत्तर: B. कण्व
शुंग वंश के बाद मगध में कण्व वंश का उदय हुआ। कण्व शासकों को पुराणों में शुंगों के उत्तराधिकारी के रूप में बताया गया है। यह वंश अल्पकालीन था, लेकिन मौर्योत्तर भारत की राजनीतिक श्रृंखला में महत्वपूर्ण है।
शुंग वंश के बाद मगध में कण्व वंश का उदय हुआ। कण्व शासकों को पुराणों में शुंगों के उत्तराधिकारी के रूप में बताया गया है। यह वंश अल्पकालीन था, लेकिन मौर्योत्तर भारत की राजनीतिक श्रृंखला में महत्वपूर्ण है।
Q107. कण्व वंश का संस्थापक कौन था?
उत्तर: B. वसुदेव कण्व
कण्व वंश का संस्थापक वसुदेव कण्व था। वह शुंग शासक देवभूति का मंत्री माना जाता है। परंपरा के अनुसार देवभूति की हत्या के बाद वसुदेव ने कण्व सत्ता स्थापित की।
कण्व वंश का संस्थापक वसुदेव कण्व था। वह शुंग शासक देवभूति का मंत्री माना जाता है। परंपरा के अनुसार देवभूति की हत्या के बाद वसुदेव ने कण्व सत्ता स्थापित की।
Q108. कण्व वंश की स्थापना कब हुई?
उत्तर: B. 75 ई.पू.
कण्व वंश की स्थापना सामान्यतः लगभग 75 या 72 ई.पू. के आसपास मानी जाती है। परीक्षा दृष्टि से 75 ई.पू. उत्तर के रूप में लिया जाता है। यह शुंग वंश के बाद मगध में स्थापित हुआ।
कण्व वंश की स्थापना सामान्यतः लगभग 75 या 72 ई.पू. के आसपास मानी जाती है। परीक्षा दृष्टि से 75 ई.पू. उत्तर के रूप में लिया जाता है। यह शुंग वंश के बाद मगध में स्थापित हुआ।
Q109. कण्व वंश का अंतिम शासक कौन था?
उत्तर: D. सुशर्मा
कण्व वंश का अंतिम शासक सुशर्मा माना जाता है। कण्व वंश के शासकों में वसुदेव, भूमिमित्र, नारायण और सुशर्मा के नाम मिलते हैं। इसके बाद कण्व सत्ता समाप्त हो गई।
कण्व वंश का अंतिम शासक सुशर्मा माना जाता है। कण्व वंश के शासकों में वसुदेव, भूमिमित्र, नारायण और सुशर्मा के नाम मिलते हैं। इसके बाद कण्व सत्ता समाप्त हो गई।
Q110. कण्व वंश का अंत किसने किया?
उत्तर: C. सिमुक
पुराणिक परंपरा के अनुसार कण्व वंश का अंत आंध्र या सातवाहन शक्ति के उदय से हुआ। सिमुक को सातवाहन वंश का प्रारंभिक संस्थापक शासक माना जाता है। इसलिए इस प्रश्न में सिमुक सही उत्तर है।
पुराणिक परंपरा के अनुसार कण्व वंश का अंत आंध्र या सातवाहन शक्ति के उदय से हुआ। सिमुक को सातवाहन वंश का प्रारंभिक संस्थापक शासक माना जाता है। इसलिए इस प्रश्न में सिमुक सही उत्तर है।
Q111. कुषाण किस जनजाति से संबंधित थे?
उत्तर: C. यू-ची
कुषाणों का संबंध यू-ची या युएझी जनजाति से माना जाता है। युएझी मध्य एशिया से आए और बाद में उनके एक भाग ने कुषाण शक्ति को संगठित किया। कुषाण साम्राज्य ने उत्तर भारत, अफगानिस्तान और मध्य एशिया के क्षेत्रों पर प्रभाव डाला।
कुषाणों का संबंध यू-ची या युएझी जनजाति से माना जाता है। युएझी मध्य एशिया से आए और बाद में उनके एक भाग ने कुषाण शक्ति को संगठित किया। कुषाण साम्राज्य ने उत्तर भारत, अफगानिस्तान और मध्य एशिया के क्षेत्रों पर प्रभाव डाला।
Q112. कुषाण साम्राज्य का सबसे प्रसिद्ध शासक कौन था?
उत्तर: C. कनिष्क
कनिष्क कुषाण वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक था। उसके समय में कुषाण साम्राज्य अपने उत्कर्ष पर पहुँचा। वह बौद्ध धर्म, विशेषकर महायान बौद्ध धर्म, का बड़ा संरक्षक माना जाता है।
कनिष्क कुषाण वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक था। उसके समय में कुषाण साम्राज्य अपने उत्कर्ष पर पहुँचा। वह बौद्ध धर्म, विशेषकर महायान बौद्ध धर्म, का बड़ा संरक्षक माना जाता है।
Q113. कनिष्क के समय कौन-सी कला शैली विकसित हुई?
उत्तर: C. गांधार और मथुरा
कनिष्क और कुषाण काल में गांधार और मथुरा कला शैली का विशेष विकास हुआ। गांधार शैली में यूनानी-रोमन प्रभाव दिखता है, जबकि मथुरा शैली अधिक भारतीय विशेषताओं वाली थी। बुद्ध प्रतिमाओं के विकास में दोनों शैलियों का बड़ा योगदान रहा।
कनिष्क और कुषाण काल में गांधार और मथुरा कला शैली का विशेष विकास हुआ। गांधार शैली में यूनानी-रोमन प्रभाव दिखता है, जबकि मथुरा शैली अधिक भारतीय विशेषताओं वाली थी। बुद्ध प्रतिमाओं के विकास में दोनों शैलियों का बड़ा योगदान रहा।
Q114. मथुरा किस वंश के समय प्रमुख केंद्र बना?
उत्तर: C. कुषाण
मथुरा कुषाण काल में कला, धर्म और व्यापार का प्रमुख केंद्र बना। यहाँ से कुषाण शासकों की प्रतिमाएँ और लाल बलुआ पत्थर की मूर्तियाँ मिली हैं। मथुरा कला ने बौद्ध, जैन और ब्राह्मण परंपराओं को अभिव्यक्ति दी।
मथुरा कुषाण काल में कला, धर्म और व्यापार का प्रमुख केंद्र बना। यहाँ से कुषाण शासकों की प्रतिमाएँ और लाल बलुआ पत्थर की मूर्तियाँ मिली हैं। मथुरा कला ने बौद्ध, जैन और ब्राह्मण परंपराओं को अभिव्यक्ति दी।
Q115. हुविष्क किस वंश से संबंधित था?
उत्तर: C. कुषाण
हुविष्क कुषाण वंश का शासक था। वह कनिष्क के बाद के प्रमुख कुषाण शासकों में गिना जाता है। कुषाण काल में सिक्कों, व्यापार और धार्मिक सहिष्णुता का अच्छा विकास हुआ।
हुविष्क कुषाण वंश का शासक था। वह कनिष्क के बाद के प्रमुख कुषाण शासकों में गिना जाता है। कुषाण काल में सिक्कों, व्यापार और धार्मिक सहिष्णुता का अच्छा विकास हुआ।
Q116. कुषाण वंश का अंतिम प्रमुख शासक कौन था?
उत्तर: C. वासुदेव
वासुदेव को कुषाण वंश का अंतिम प्रमुख शासक माना जाता है। उसके बाद कुषाण शक्ति धीरे-धीरे कमजोर होने लगी। स्थानीय शक्तियों और बाहरी दबावों के कारण कुषाण साम्राज्य का प्रभाव घट गया।
वासुदेव को कुषाण वंश का अंतिम प्रमुख शासक माना जाता है। उसके बाद कुषाण शक्ति धीरे-धीरे कमजोर होने लगी। स्थानीय शक्तियों और बाहरी दबावों के कारण कुषाण साम्राज्य का प्रभाव घट गया।
Q117. गुप्त वंश का संस्थापक कौन था?
उत्तर: B. श्रीगुप्त
श्रीगुप्त को गुप्त वंश का प्रारंभिक संस्थापक माना जाता है। उसके बाद घटोत्कच और फिर चंद्रगुप्त प्रथम ने गुप्त शक्ति को आगे बढ़ाया। गुप्त साम्राज्य का वास्तविक विस्तार चंद्रगुप्त प्रथम और समुद्रगुप्त के समय हुआ।
श्रीगुप्त को गुप्त वंश का प्रारंभिक संस्थापक माना जाता है। उसके बाद घटोत्कच और फिर चंद्रगुप्त प्रथम ने गुप्त शक्ति को आगे बढ़ाया। गुप्त साम्राज्य का वास्तविक विस्तार चंद्रगुप्त प्रथम और समुद्रगुप्त के समय हुआ।
Q118. चंद्रगुप्त प्रथम की उपाधि क्या थी?
उत्तर: C. महाराजाधिराज
चंद्रगुप्त प्रथम ने महाराजाधिराज की उपाधि धारण की थी। इस उपाधि से गुप्त शक्ति की बढ़ती राजनीतिक प्रतिष्ठा प्रकट होती है। लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह ने भी उसकी स्थिति मजबूत की।
चंद्रगुप्त प्रथम ने महाराजाधिराज की उपाधि धारण की थी। इस उपाधि से गुप्त शक्ति की बढ़ती राजनीतिक प्रतिष्ठा प्रकट होती है। लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह ने भी उसकी स्थिति मजबूत की।
Q119. समुद्रगुप्त को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर: B. भारतीय नेपोलियन
समुद्रगुप्त को उसकी व्यापक विजयों के कारण भारतीय नेपोलियन कहा गया। यह उपाधि इतिहासकार वी. ए. स्मिथ से जुड़ी है। प्रयाग प्रशस्ति में उसकी सैन्य सफलताओं और दक्षिणापथ अभियान का विस्तृत वर्णन मिलता है।
समुद्रगुप्त को उसकी व्यापक विजयों के कारण भारतीय नेपोलियन कहा गया। यह उपाधि इतिहासकार वी. ए. स्मिथ से जुड़ी है। प्रयाग प्रशस्ति में उसकी सैन्य सफलताओं और दक्षिणापथ अभियान का विस्तृत वर्णन मिलता है।
Q120. प्रयाग प्रशस्ति किससे संबंधित है?
उत्तर: B. समुद्रगुप्त
प्रयाग प्रशस्ति समुद्रगुप्त से संबंधित है। यह इलाहाबाद/प्रयागराज स्तंभ पर अंकित है। इसमें समुद्रगुप्त की विजयों, नीति और राजनीतिक प्रभाव का महत्वपूर्ण विवरण मिलता है।
प्रयाग प्रशस्ति समुद्रगुप्त से संबंधित है। यह इलाहाबाद/प्रयागराज स्तंभ पर अंकित है। इसमें समुद्रगुप्त की विजयों, नीति और राजनीतिक प्रभाव का महत्वपूर्ण विवरण मिलता है।
Q121. प्रयाग प्रशस्ति के रचयिता कौन थे?
उत्तर: B. हरिषेण
प्रयाग प्रशस्ति की रचना हरिषेण ने की थी। हरिषेण समुद्रगुप्त का दरबारी कवि और मंत्री था। यह प्रशस्ति संस्कृत भाषा में लिखी गई और गुप्त इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत है।
प्रयाग प्रशस्ति की रचना हरिषेण ने की थी। हरिषेण समुद्रगुप्त का दरबारी कवि और मंत्री था। यह प्रशस्ति संस्कृत भाषा में लिखी गई और गुप्त इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत है।
Q122. चंद्रगुप्त द्वितीय की उपाधि क्या थी?
उत्तर: B. विक्रमादित्य
चंद्रगुप्त द्वितीय को विक्रमादित्य की उपाधि से जाना जाता है। उसके शासन में गुप्त साम्राज्य की शक्ति और सांस्कृतिक प्रतिष्ठा बढ़ी। शकों पर विजय के कारण पश्चिमी भारत पर गुप्त प्रभाव मजबूत हुआ।
चंद्रगुप्त द्वितीय को विक्रमादित्य की उपाधि से जाना जाता है। उसके शासन में गुप्त साम्राज्य की शक्ति और सांस्कृतिक प्रतिष्ठा बढ़ी। शकों पर विजय के कारण पश्चिमी भारत पर गुप्त प्रभाव मजबूत हुआ।
Q123. गुप्त काल को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर: B. स्वर्ण युग
गुप्त काल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग कहा जाता है। इस काल में साहित्य, कला, विज्ञान, गणित, खगोल और मंदिर स्थापत्य का उल्लेखनीय विकास हुआ। हालांकि आधुनिक इतिहास लेखन में इस शब्द को सावधानी से इस्तेमाल किया जाता है, परीक्षा में यही मानक उत्तर है।
गुप्त काल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग कहा जाता है। इस काल में साहित्य, कला, विज्ञान, गणित, खगोल और मंदिर स्थापत्य का उल्लेखनीय विकास हुआ। हालांकि आधुनिक इतिहास लेखन में इस शब्द को सावधानी से इस्तेमाल किया जाता है, परीक्षा में यही मानक उत्तर है।
Q124. चंद्रगुप्त द्वितीय के दरबार में कितने नवरत्न थे?
उत्तर: C. 9
परंपरा के अनुसार चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य के दरबार में नौ विद्वान थे, जिन्हें नवरत्न कहा जाता है। इनमें कालिदास का नाम सबसे प्रसिद्ध है। ऐतिहासिक रूप से नवरत्न परंपरा पर मतभेद हैं, लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं में 9 उत्तर स्वीकार किया जाता है।
परंपरा के अनुसार चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य के दरबार में नौ विद्वान थे, जिन्हें नवरत्न कहा जाता है। इनमें कालिदास का नाम सबसे प्रसिद्ध है। ऐतिहासिक रूप से नवरत्न परंपरा पर मतभेद हैं, लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं में 9 उत्तर स्वीकार किया जाता है।
Q125. कालिदास किस शासक के दरबार में थे?
उत्तर: B. चंद्रगुप्त द्वितीय
कालिदास को सामान्यतः चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य के दरबार से जोड़ा जाता है। वे संस्कृत साहित्य के महान कवि और नाटककार माने जाते हैं। अभिज्ञानशाकुंतलम्, मेघदूत और कुमारसंभव उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं।
कालिदास को सामान्यतः चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य के दरबार से जोड़ा जाता है। वे संस्कृत साहित्य के महान कवि और नाटककार माने जाते हैं। अभिज्ञानशाकुंतलम्, मेघदूत और कुमारसंभव उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं।
Q126. कुमारगुप्त प्रथम का संबंध किससे है?
उत्तर: A. नालंदा विश्वविद्यालय
नालंदा महाविहार की स्थापना को सामान्यतः गुप्त काल से जोड़ा जाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इसका संबंध प्रायः कुमारगुप्त प्रथम से माना जाता है। नालंदा आगे चलकर बौद्ध अध्ययन और उच्च शिक्षा का विश्वप्रसिद्ध केंद्र बना।
नालंदा महाविहार की स्थापना को सामान्यतः गुप्त काल से जोड़ा जाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इसका संबंध प्रायः कुमारगुप्त प्रथम से माना जाता है। नालंदा आगे चलकर बौद्ध अध्ययन और उच्च शिक्षा का विश्वप्रसिद्ध केंद्र बना।
Q127. हूणों का आक्रमण किसके समय हुआ?
उत्तर: D. स्कन्दगुप्त
स्कन्दगुप्त के समय हूणों का दबाव गुप्त साम्राज्य पर बढ़ा। उसने हूण आक्रमणों को रोकने में सफलता पाई। लेकिन इन संघर्षों से गुप्त साम्राज्य की सैन्य और आर्थिक शक्ति पर भारी दबाव पड़ा।
स्कन्दगुप्त के समय हूणों का दबाव गुप्त साम्राज्य पर बढ़ा। उसने हूण आक्रमणों को रोकने में सफलता पाई। लेकिन इन संघर्षों से गुप्त साम्राज्य की सैन्य और आर्थिक शक्ति पर भारी दबाव पड़ा।
Q128. हूणों को किसने पराजित किया?
उत्तर: C. स्कन्दगुप्त
स्कन्दगुप्त ने हूणों के आक्रमण को पराजित किया था। उसके अभिलेखों से पता चलता है कि उसने साम्राज्य की शक्ति को पुनः स्थापित किया। फिर भी हूण आक्रमणों ने गुप्त साम्राज्य के पतन की प्रक्रिया को तेज किया।
स्कन्दगुप्त ने हूणों के आक्रमण को पराजित किया था। उसके अभिलेखों से पता चलता है कि उसने साम्राज्य की शक्ति को पुनः स्थापित किया। फिर भी हूण आक्रमणों ने गुप्त साम्राज्य के पतन की प्रक्रिया को तेज किया।
Q129. स्कन्दगुप्त किस धर्म का अनुयायी था?
उत्तर: C. वैष्णव
स्कन्दगुप्त को वैष्णव परंपरा से संबंधित माना जाता है। गुप्त शासकों में वैष्णव धर्म का प्रभाव अधिक था, हालांकि वे अन्य धर्मों के प्रति भी सहिष्णु रहे। गुप्त सिक्कों और अभिलेखों में वैष्णव प्रतीकों का उल्लेख मिलता है।
स्कन्दगुप्त को वैष्णव परंपरा से संबंधित माना जाता है। गुप्त शासकों में वैष्णव धर्म का प्रभाव अधिक था, हालांकि वे अन्य धर्मों के प्रति भी सहिष्णु रहे। गुप्त सिक्कों और अभिलेखों में वैष्णव प्रतीकों का उल्लेख मिलता है।
Q130. गुप्त काल की प्रसिद्ध कला शैली कहाँ विकसित हुई?
उत्तर: C. दोनों
गुप्त काल में सारनाथ और मथुरा दोनों कला के प्रमुख केंद्र रहे। सारनाथ की बुद्ध प्रतिमाएँ शांत, कोमल और आध्यात्मिक अभिव्यक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं। मथुरा की कला परंपरा कुषाण काल से विकसित होकर गुप्त काल में भी प्रभावशाली रही।
गुप्त काल में सारनाथ और मथुरा दोनों कला के प्रमुख केंद्र रहे। सारनाथ की बुद्ध प्रतिमाएँ शांत, कोमल और आध्यात्मिक अभिव्यक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं। मथुरा की कला परंपरा कुषाण काल से विकसित होकर गुप्त काल में भी प्रभावशाली रही।
Q131. देवगढ़ मंदिर किस काल से संबंधित है?
उत्तर: C. गुप्त
देवगढ़ का विष्णु मंदिर गुप्त कालीन मंदिर स्थापत्य का महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह उत्तर भारत में प्रारंभिक शिखर मंदिर परंपरा से संबंधित माना जाता है। इसकी मूर्तिकला और स्थापत्य गुप्त कला की उत्कृष्टता दिखाते हैं।
देवगढ़ का विष्णु मंदिर गुप्त कालीन मंदिर स्थापत्य का महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह उत्तर भारत में प्रारंभिक शिखर मंदिर परंपरा से संबंधित माना जाता है। इसकी मूर्तिकला और स्थापत्य गुप्त कला की उत्कृष्टता दिखाते हैं।
Q132. गुप्त काल की बुद्ध प्रतिमाएँ कहाँ मिली हैं?
उत्तर: C. दोनों
गुप्त काल की बुद्ध प्रतिमाएँ सारनाथ और मथुरा दोनों क्षेत्रों से मिली हैं। सारनाथ शैली में बुद्ध की प्रतिमाएँ अत्यंत शांत और आध्यात्मिक भाव वाली हैं। मथुरा शैली में लाल बलुआ पत्थर और मजबूत शारीरिक गठन की परंपरा दिखाई देती है।
गुप्त काल की बुद्ध प्रतिमाएँ सारनाथ और मथुरा दोनों क्षेत्रों से मिली हैं। सारनाथ शैली में बुद्ध की प्रतिमाएँ अत्यंत शांत और आध्यात्मिक भाव वाली हैं। मथुरा शैली में लाल बलुआ पत्थर और मजबूत शारीरिक गठन की परंपरा दिखाई देती है।
Q133. गुप्त काल में किस लिपि का प्रयोग हुआ?
उत्तर: A. ब्राह्मी
गुप्त काल में ब्राह्मी लिपि के विकसित रूप का प्रयोग हुआ। इसे गुप्त ब्राह्मी या गुप्त लिपि भी कहा जाता है। बाद में इसी परंपरा से नागरी जैसी उत्तर भारतीय लिपियों का विकास हुआ।
गुप्त काल में ब्राह्मी लिपि के विकसित रूप का प्रयोग हुआ। इसे गुप्त ब्राह्मी या गुप्त लिपि भी कहा जाता है। बाद में इसी परंपरा से नागरी जैसी उत्तर भारतीय लिपियों का विकास हुआ।
Q134. गुप्त काल में प्रमुख वैज्ञानिक कौन था?
उत्तर: B. आर्यभट्ट
आर्यभट्ट गुप्त काल के महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री थे। उनकी रचना आर्यभटीय गणित और खगोल विज्ञान की महत्वपूर्ण कृति है। उन्होंने ग्रहों की गति और गणना पद्धतियों पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए।
आर्यभट्ट गुप्त काल के महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री थे। उनकी रचना आर्यभटीय गणित और खगोल विज्ञान की महत्वपूर्ण कृति है। उन्होंने ग्रहों की गति और गणना पद्धतियों पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए।
Q135. निम्न में से कौन गुप्त शासक नहीं था?
उत्तर: C. कनिष्क
समुद्रगुप्त, चंद्रगुप्त और स्कन्दगुप्त गुप्त वंश से संबंधित शासक थे। कनिष्क गुप्त शासक नहीं था, वह कुषाण वंश का प्रसिद्ध राजा था। इसलिए सही उत्तर कनिष्क है।
समुद्रगुप्त, चंद्रगुप्त और स्कन्दगुप्त गुप्त वंश से संबंधित शासक थे। कनिष्क गुप्त शासक नहीं था, वह कुषाण वंश का प्रसिद्ध राजा था। इसलिए सही उत्तर कनिष्क है।
Q136. गुप्त वंश का पतन किस कारण हुआ?
उत्तर: B. हूण आक्रमण
गुप्त वंश के पतन में हूण आक्रमण एक प्रमुख कारण था। लगातार बाहरी आक्रमणों से साम्राज्य की सैन्य और आर्थिक शक्ति कमजोर हुई। इसके साथ उत्तराधिकार की समस्या और सामंती प्रवृत्तियों ने भी पतन को बढ़ाया।
गुप्त वंश के पतन में हूण आक्रमण एक प्रमुख कारण था। लगातार बाहरी आक्रमणों से साम्राज्य की सैन्य और आर्थिक शक्ति कमजोर हुई। इसके साथ उत्तराधिकार की समस्या और सामंती प्रवृत्तियों ने भी पतन को बढ़ाया।
Q137. गुप्त काल का प्रमुख साहित्यकार कौन था?
उत्तर: A. कालिदास
कालिदास गुप्त काल के सबसे प्रसिद्ध साहित्यकार माने जाते हैं। वे संस्कृत के महान कवि और नाटककार थे। उनकी रचनाएँ गुप्त काल की सांस्कृतिक और साहित्यिक उन्नति को दर्शाती हैं।
कालिदास गुप्त काल के सबसे प्रसिद्ध साहित्यकार माने जाते हैं। वे संस्कृत के महान कवि और नाटककार थे। उनकी रचनाएँ गुप्त काल की सांस्कृतिक और साहित्यिक उन्नति को दर्शाती हैं।
Q138. मथुरा किस काल में मूर्तिकला का प्रमुख केंद्र था?
उत्तर: D. दोनों (कुषाण व गुप्त)
मथुरा कुषाण और गुप्त दोनों कालों में मूर्तिकला का प्रमुख केंद्र रहा। कुषाण काल में यहाँ बुद्ध, जैन तीर्थंकर और ब्राह्मण देवताओं की प्रतिमाएँ विकसित हुईं। गुप्त काल में इसी परंपरा ने अधिक परिष्कृत और आध्यात्मिक रूप ग्रहण किया।
मथुरा कुषाण और गुप्त दोनों कालों में मूर्तिकला का प्रमुख केंद्र रहा। कुषाण काल में यहाँ बुद्ध, जैन तीर्थंकर और ब्राह्मण देवताओं की प्रतिमाएँ विकसित हुईं। गुप्त काल में इसी परंपरा ने अधिक परिष्कृत और आध्यात्मिक रूप ग्रहण किया।
Q139. कनिष्क का संबंध किस धर्म से था?
उत्तर: B. बौद्ध
कनिष्क बौद्ध धर्म का महान संरक्षक माना जाता है। उसके समय में महायान बौद्ध धर्म को विशेष संरक्षण मिला। बौद्ध धर्म के मध्य एशिया और चीन की ओर प्रसार में कुषाण काल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कनिष्क बौद्ध धर्म का महान संरक्षक माना जाता है। उसके समय में महायान बौद्ध धर्म को विशेष संरक्षण मिला। बौद्ध धर्म के मध्य एशिया और चीन की ओर प्रसार में कुषाण काल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
Q140. गुप्त काल में शिक्षा का प्रमुख केंद्र कौन था?
उत्तर: A. नालंदा
नालंदा गुप्त काल से विकसित प्रमुख शिक्षा केंद्र था। बाद के समय में यह बौद्ध अध्ययन, दर्शन, व्याकरण, चिकित्सा और तर्कशास्त्र का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बन गया। यहाँ भारत के साथ-साथ विदेशों से भी विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते थे।
नालंदा गुप्त काल से विकसित प्रमुख शिक्षा केंद्र था। बाद के समय में यह बौद्ध अध्ययन, दर्शन, व्याकरण, चिकित्सा और तर्कशास्त्र का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बन गया। यहाँ भारत के साथ-साथ विदेशों से भी विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते थे।
SET 5 (Q141-200) : उत्तर गुप्तकाल + मध्यकालीन इतिहास
Q141. हूणों का प्रमुख शासक कौन था?
उत्तर: B. तोरमण
तोरमण हूणों का प्रमुख शासक था, जिसने उत्तर भारत में अपना प्रभाव बढ़ाया। हूण आक्रमणों ने उत्तर गुप्तकालीन राजनीतिक व्यवस्था को कमजोर किया। उसके बाद मिहिरकुल भी हूणों का प्रसिद्ध शासक माना जाता है।
तोरमण हूणों का प्रमुख शासक था, जिसने उत्तर भारत में अपना प्रभाव बढ़ाया। हूण आक्रमणों ने उत्तर गुप्तकालीन राजनीतिक व्यवस्था को कमजोर किया। उसके बाद मिहिरकुल भी हूणों का प्रसिद्ध शासक माना जाता है।
Q142. हूणों के आक्रमण का मुख्य प्रभाव क्या था?
उत्तर: B. गुप्त साम्राज्य का पतन
हूण आक्रमण गुप्त साम्राज्य के पतन के प्रमुख कारणों में गिने जाते हैं। लगातार बाहरी आक्रमणों से सैन्य और आर्थिक शक्ति कमजोर हुई। इसके साथ उत्तराधिकार संघर्ष और प्रांतीय शक्तियों का उदय भी पतन में सहायक रहा।
हूण आक्रमण गुप्त साम्राज्य के पतन के प्रमुख कारणों में गिने जाते हैं। लगातार बाहरी आक्रमणों से सैन्य और आर्थिक शक्ति कमजोर हुई। इसके साथ उत्तराधिकार संघर्ष और प्रांतीय शक्तियों का उदय भी पतन में सहायक रहा।
Q143. मौखरी वंश का प्रमुख केंद्र कहाँ था?
उत्तर: B. कन्नौज
उत्तर गुप्तकाल में मौखरी वंश का प्रमुख केंद्र कन्नौज था। कन्नौज गंगा घाटी का महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामरिक नगर बन गया। बाद में हर्षवर्धन ने भी कन्नौज को अपनी राजधानी बनाया।
उत्तर गुप्तकाल में मौखरी वंश का प्रमुख केंद्र कन्नौज था। कन्नौज गंगा घाटी का महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामरिक नगर बन गया। बाद में हर्षवर्धन ने भी कन्नौज को अपनी राजधानी बनाया।
Q144. हर्षवर्धन का प्रारंभिक राज्य कहाँ था?
उत्तर: B. थानेश्वर
हर्षवर्धन का प्रारंभिक राज्य थानेश्वर था। वह पुष्यभूति या वर्धन वंश से संबंधित था। अपने भाई राज्यवर्धन की मृत्यु के बाद उसने सत्ता संभाली और बाद में कन्नौज को प्रमुख राजधानी बनाया।
हर्षवर्धन का प्रारंभिक राज्य थानेश्वर था। वह पुष्यभूति या वर्धन वंश से संबंधित था। अपने भाई राज्यवर्धन की मृत्यु के बाद उसने सत्ता संभाली और बाद में कन्नौज को प्रमुख राजधानी बनाया।
Q145. हर्षवर्धन की राजधानी क्या थी?
उत्तर: B. कन्नौज
हर्षवर्धन ने अपने साम्राज्य के विस्तार के बाद कन्नौज को राजधानी बनाया। कन्नौज उस समय उत्तर भारत की राजनीति का केंद्रीय नगर बन चुका था। हर्ष के कारण इसकी प्रतिष्ठा और बढ़ी।
हर्षवर्धन ने अपने साम्राज्य के विस्तार के बाद कन्नौज को राजधानी बनाया। कन्नौज उस समय उत्तर भारत की राजनीति का केंद्रीय नगर बन चुका था। हर्ष के कारण इसकी प्रतिष्ठा और बढ़ी।
Q146. हर्षवर्धन का शासनकाल लगभग कितना था?
उत्तर: C. 40 वर्ष
हर्षवर्धन का शासनकाल लगभग 606 ई. से 647 ई. तक माना जाता है। इस प्रकार उसने करीब 40 वर्ष तक शासन किया। उसके समय उत्तर भारत में राजनीतिक एकता और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला।
हर्षवर्धन का शासनकाल लगभग 606 ई. से 647 ई. तक माना जाता है। इस प्रकार उसने करीब 40 वर्ष तक शासन किया। उसके समय उत्तर भारत में राजनीतिक एकता और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला।
Q147. हर्ष के समय भारत आए चीनी यात्री कौन थे?
उत्तर: B. ह्वेनसांग
हर्षवर्धन के समय चीनी यात्री ह्वेनसांग भारत आया था। उसने भारत की राजनीति, समाज, शिक्षा और बौद्ध धर्म से संबंधित विस्तृत विवरण दिया। नालंदा और कन्नौज के वर्णन के कारण उसका यात्रा-वृत्तांत बहुत महत्वपूर्ण है।
हर्षवर्धन के समय चीनी यात्री ह्वेनसांग भारत आया था। उसने भारत की राजनीति, समाज, शिक्षा और बौद्ध धर्म से संबंधित विस्तृत विवरण दिया। नालंदा और कन्नौज के वर्णन के कारण उसका यात्रा-वृत्तांत बहुत महत्वपूर्ण है।
Q148. हर्ष के बाद क्या स्थिति हुई?
उत्तर: C. राजनीतिक विघटन
हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद उत्तर भारत में कोई शक्तिशाली केंद्रीय सत्ता नहीं रही। कई क्षेत्रीय शक्तियाँ उभरने लगीं। इसी राजनीतिक विघटन ने आगे चलकर कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष की पृष्ठभूमि तैयार की।
हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद उत्तर भारत में कोई शक्तिशाली केंद्रीय सत्ता नहीं रही। कई क्षेत्रीय शक्तियाँ उभरने लगीं। इसी राजनीतिक विघटन ने आगे चलकर कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष की पृष्ठभूमि तैयार की।
Q149. कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष किनके बीच हुआ?
उत्तर: B. पाल-प्रतिहार-राष्ट्रकूट
कन्नौज के नियंत्रण के लिए पाल, गुर्जर-प्रतिहार और राष्ट्रकूट शक्तियों में त्रिपक्षीय संघर्ष हुआ। यह संघर्ष 8वीं-9वीं शताब्दी में उत्तर भारत की राजनीति का प्रमुख विषय था। कन्नौज पर अधिकार प्रतिष्ठा और सामरिक नियंत्रण का प्रतीक था।
कन्नौज के नियंत्रण के लिए पाल, गुर्जर-प्रतिहार और राष्ट्रकूट शक्तियों में त्रिपक्षीय संघर्ष हुआ। यह संघर्ष 8वीं-9वीं शताब्दी में उत्तर भारत की राजनीति का प्रमुख विषय था। कन्नौज पर अधिकार प्रतिष्ठा और सामरिक नियंत्रण का प्रतीक था।
Q150. त्रिपक्षीय संघर्ष का मुख्य केंद्र क्या था?
उत्तर: B. कन्नौज
त्रिपक्षीय संघर्ष का मुख्य केंद्र कन्नौज था। गंगा घाटी में स्थित होने के कारण इसका सामरिक और आर्थिक महत्व बहुत अधिक था। हर्ष के बाद कन्नौज उत्तर भारत की सर्वोच्च सत्ता का प्रतीक बन गया।
त्रिपक्षीय संघर्ष का मुख्य केंद्र कन्नौज था। गंगा घाटी में स्थित होने के कारण इसका सामरिक और आर्थिक महत्व बहुत अधिक था। हर्ष के बाद कन्नौज उत्तर भारत की सर्वोच्च सत्ता का प्रतीक बन गया।
Q151. गुर्जर-प्रतिहार वंश का प्रमुख शासक कौन था?
उत्तर: A. नागभट्ट
नागभट्ट गुर्जर-प्रतिहार वंश का प्रमुख शासक था। प्रतिहारों ने पश्चिमी और उत्तर भारत में अपनी शक्ति स्थापित की। अरब आक्रमणों को रोकने और कन्नौज पर प्रभाव के कारण यह वंश महत्वपूर्ण माना जाता है।
नागभट्ट गुर्जर-प्रतिहार वंश का प्रमुख शासक था। प्रतिहारों ने पश्चिमी और उत्तर भारत में अपनी शक्ति स्थापित की। अरब आक्रमणों को रोकने और कन्नौज पर प्रभाव के कारण यह वंश महत्वपूर्ण माना जाता है।
Q152. प्रतिहारों की राजधानी कहाँ बनी?
उत्तर: B. कन्नौज
गुर्जर-प्रतिहारों ने कन्नौज को अपनी राजधानी बनाया। कन्नौज से उन्हें गंगा घाटी और उत्तर भारत पर प्रभाव जमाने में सुविधा मिली। प्रतिहारों के समय यह नगर फिर से राजनीतिक केंद्र बना।
गुर्जर-प्रतिहारों ने कन्नौज को अपनी राजधानी बनाया। कन्नौज से उन्हें गंगा घाटी और उत्तर भारत पर प्रभाव जमाने में सुविधा मिली। प्रतिहारों के समय यह नगर फिर से राजनीतिक केंद्र बना।
Q153. कन्नौज का महत्व किस कारण था?
उत्तर: B. व्यापार और सामरिक
कन्नौज गंगा नदी के पास स्थित महत्वपूर्ण नगर था। इसकी स्थिति व्यापारिक मार्गों और उत्तर भारत की राजनीति के लिए अनुकूल थी। इसलिए इस पर अधिकार सामरिक शक्ति और राजनीतिक प्रतिष्ठा दोनों का प्रतीक था।
कन्नौज गंगा नदी के पास स्थित महत्वपूर्ण नगर था। इसकी स्थिति व्यापारिक मार्गों और उत्तर भारत की राजनीति के लिए अनुकूल थी। इसलिए इस पर अधिकार सामरिक शक्ति और राजनीतिक प्रतिष्ठा दोनों का प्रतीक था।
Q154. 1018 ई. में कन्नौज पर किसने आक्रमण किया?
उत्तर: B. महमूद गजनवी
महमूद गजनवी ने 1018 ई. में उत्तर भारत के अभियान के दौरान कन्नौज पर आक्रमण किया। उस समय कन्नौज अपनी पुरानी प्रतिष्ठा के कारण महत्वपूर्ण था। गजनवी के आक्रमणों ने उत्तर भारत की राजनीतिक कमजोरी को उजागर किया।
महमूद गजनवी ने 1018 ई. में उत्तर भारत के अभियान के दौरान कन्नौज पर आक्रमण किया। उस समय कन्नौज अपनी पुरानी प्रतिष्ठा के कारण महत्वपूर्ण था। गजनवी के आक्रमणों ने उत्तर भारत की राजनीतिक कमजोरी को उजागर किया।
Q155. दिल्ली सल्तनत की स्थापना किसने की?
उत्तर: B. कुतुबुद्दीन ऐबक
दिल्ली सल्तनत की स्थापना 1206 ई. में कुतुबुद्दीन ऐबक ने की। वह मुहम्मद गौरी का गुलाम और सेनापति था। गौरी की मृत्यु के बाद उसने स्वतंत्र सत्ता स्थापित की और गुलाम वंश की शुरुआत हुई।
दिल्ली सल्तनत की स्थापना 1206 ई. में कुतुबुद्दीन ऐबक ने की। वह मुहम्मद गौरी का गुलाम और सेनापति था। गौरी की मृत्यु के बाद उसने स्वतंत्र सत्ता स्थापित की और गुलाम वंश की शुरुआत हुई।
Q156. कालपी पर अधिकार किसने किया?
उत्तर: B. ऐबक
कालपी उत्तर भारत का महत्वपूर्ण सामरिक नगर था। दिल्ली सल्तनत के आरंभिक विस्तार में कुतुबुद्दीन ऐबक ने गंगा-यमुना क्षेत्र के कई नगरों पर अधिकार स्थापित किया। परीक्षा परंपरा में कालपी पर अधिकार ऐबक से जोड़ा जाता है।
कालपी उत्तर भारत का महत्वपूर्ण सामरिक नगर था। दिल्ली सल्तनत के आरंभिक विस्तार में कुतुबुद्दीन ऐबक ने गंगा-यमुना क्षेत्र के कई नगरों पर अधिकार स्थापित किया। परीक्षा परंपरा में कालपी पर अधिकार ऐबक से जोड़ा जाता है।
Q157. जौनपुर की स्थापना किसने की?
उत्तर: B. फिरोज शाह तुगलक
जौनपुर नगर की स्थापना फिरोज शाह तुगलक ने 14वीं शताब्दी में की थी। माना जाता है कि इसका नाम मुहम्मद बिन तुगलक, जिनका नाम जूना खान था, की स्मृति में पड़ा। बाद में शर्की वंश के समय जौनपुर प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र बना।
जौनपुर नगर की स्थापना फिरोज शाह तुगलक ने 14वीं शताब्दी में की थी। माना जाता है कि इसका नाम मुहम्मद बिन तुगलक, जिनका नाम जूना खान था, की स्मृति में पड़ा। बाद में शर्की वंश के समय जौनपुर प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र बना।
Q158. जौनपुर को क्या कहा जाता था?
उत्तर: A. शिराज-ए-हिंद
जौनपुर को शिराज-ए-हिंद कहा जाता था। शर्की शासनकाल में यह शिक्षा, संगीत, स्थापत्य और इस्लामी संस्कृति का बड़ा केंद्र बना। अटाला मस्जिद और अन्य इमारतें इसकी सांस्कृतिक समृद्धि दिखाती हैं।
जौनपुर को शिराज-ए-हिंद कहा जाता था। शर्की शासनकाल में यह शिक्षा, संगीत, स्थापत्य और इस्लामी संस्कृति का बड़ा केंद्र बना। अटाला मस्जिद और अन्य इमारतें इसकी सांस्कृतिक समृद्धि दिखाती हैं।
Q159. मुग़ल साम्राज्य की स्थापना किसने की?
उत्तर: B. बाबर
भारत में मुग़ल साम्राज्य की स्थापना बाबर ने की थी। उसने 1526 ई. में पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराया। इस विजय के बाद दिल्ली और आगरा पर मुग़ल सत्ता स्थापित हुई।
भारत में मुग़ल साम्राज्य की स्थापना बाबर ने की थी। उसने 1526 ई. में पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराया। इस विजय के बाद दिल्ली और आगरा पर मुग़ल सत्ता स्थापित हुई।
Q160. पानीपत का प्रथम युद्ध कब हुआ?
उत्तर: A. 1526
पानीपत का प्रथम युद्ध 1526 ई. में बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच हुआ। बाबर ने तोपखाने और युद्धनीति का प्रभावी उपयोग किया। यह युद्ध भारत में मुग़ल सत्ता की शुरुआत का आधार बना।
पानीपत का प्रथम युद्ध 1526 ई. में बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच हुआ। बाबर ने तोपखाने और युद्धनीति का प्रभावी उपयोग किया। यह युद्ध भारत में मुग़ल सत्ता की शुरुआत का आधार बना।
Q161. आगरा की स्थापना किसने की?
उत्तर: C. सिकंदर लोदी
आगरा को एक प्रमुख शहरी केंद्र के रूप में विकसित करने का श्रेय सिकंदर लोदी को दिया जाता है। उसने 16वीं शताब्दी के प्रारंभ में इसे अपनी राजधानी बनाया। बाद में मुग़लों के समय आगरा और अधिक प्रसिद्ध हुआ।
आगरा को एक प्रमुख शहरी केंद्र के रूप में विकसित करने का श्रेय सिकंदर लोदी को दिया जाता है। उसने 16वीं शताब्दी के प्रारंभ में इसे अपनी राजधानी बनाया। बाद में मुग़लों के समय आगरा और अधिक प्रसिद्ध हुआ।
Q162. आगरा किला किसने बनवाया?
उत्तर: B. अकबर
आगरा किले का वर्तमान विशाल लाल बलुआ पत्थर वाला निर्माण अकबर ने 1565 ई. के आसपास शुरू कराया। यह मुग़ल साम्राज्य का महत्वपूर्ण सैन्य और प्रशासनिक केंद्र था। बाद में जहाँगीर और शाहजहाँ ने भी इसमें निर्माण कराए।
आगरा किले का वर्तमान विशाल लाल बलुआ पत्थर वाला निर्माण अकबर ने 1565 ई. के आसपास शुरू कराया। यह मुग़ल साम्राज्य का महत्वपूर्ण सैन्य और प्रशासनिक केंद्र था। बाद में जहाँगीर और शाहजहाँ ने भी इसमें निर्माण कराए।
Q163. ताजमहल किसने बनवाया?
उत्तर: C. शाहजहाँ
ताजमहल का निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज महल की स्मृति में कराया। यह आगरा में यमुना नदी के किनारे स्थित है। इसे मुग़ल स्थापत्य की उत्कृष्ट कृति माना जाता है।
ताजमहल का निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज महल की स्मृति में कराया। यह आगरा में यमुना नदी के किनारे स्थित है। इसे मुग़ल स्थापत्य की उत्कृष्ट कृति माना जाता है।
Q164. एतमाद-उद-दौला का मकबरा किसने बनवाया?
उत्तर: B. नूरजहाँ
एतमाद-उद-दौला का मकबरा नूरजहाँ ने अपने पिता मिर्जा गियास बेग की स्मृति में बनवाया। यह आगरा में स्थित है और संगमरमर के सुंदर उपयोग के लिए प्रसिद्ध है। इसे कभी-कभी ताजमहल की पूर्वपीठिका भी कहा जाता है।
एतमाद-उद-दौला का मकबरा नूरजहाँ ने अपने पिता मिर्जा गियास बेग की स्मृति में बनवाया। यह आगरा में स्थित है और संगमरमर के सुंदर उपयोग के लिए प्रसिद्ध है। इसे कभी-कभी ताजमहल की पूर्वपीठिका भी कहा जाता है।
Q165. फतेहपुर सीकरी किसने बसाया?
उत्तर: B. अकबर
फतेहपुर सीकरी को अकबर ने बसाया और कुछ समय के लिए इसे अपनी राजधानी बनाया। यह नगर सूफी संत शेख सलीम चिश्ती से जुड़ा हुआ है। यहाँ मुग़ल स्थापत्य के कई महत्वपूर्ण स्मारक स्थित हैं।
फतेहपुर सीकरी को अकबर ने बसाया और कुछ समय के लिए इसे अपनी राजधानी बनाया। यह नगर सूफी संत शेख सलीम चिश्ती से जुड़ा हुआ है। यहाँ मुग़ल स्थापत्य के कई महत्वपूर्ण स्मारक स्थित हैं।
Q166. बुलंद दरवाजा कहाँ स्थित है?
उत्तर: C. फतेहपुर सीकरी
बुलंद दरवाजा फतेहपुर सीकरी में स्थित है। इसे अकबर ने गुजरात विजय की स्मृति में बनवाया था। यह मुग़ल स्थापत्य की भव्यता और ऊँचाई के लिए प्रसिद्ध है।
बुलंद दरवाजा फतेहपुर सीकरी में स्थित है। इसे अकबर ने गुजरात विजय की स्मृति में बनवाया था। यह मुग़ल स्थापत्य की भव्यता और ऊँचाई के लिए प्रसिद्ध है।
Q167. शेरशाह सूरी किससे संबंधित है?
उत्तर: B. सूरी वंश
शेरशाह सूरी सूरी वंश का शासक था। उसने हुमायूँ को हराकर उत्तर भारत में अपनी सत्ता स्थापित की। उसके प्रशासन, सड़क व्यवस्था और मुद्रा सुधारों को मध्यकालीन भारत में महत्वपूर्ण माना जाता है।
शेरशाह सूरी सूरी वंश का शासक था। उसने हुमायूँ को हराकर उत्तर भारत में अपनी सत्ता स्थापित की। उसके प्रशासन, सड़क व्यवस्था और मुद्रा सुधारों को मध्यकालीन भारत में महत्वपूर्ण माना जाता है।
Q168. हेमू को किसने हराया?
उत्तर: B. अकबर
हेमू को 1556 ई. के पानीपत के द्वितीय युद्ध में अकबर की सेना ने हराया। उस समय अकबर की ओर से बैरम खाँ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस विजय से मुग़ल सत्ता उत्तर भारत में फिर से मजबूत हुई।
हेमू को 1556 ई. के पानीपत के द्वितीय युद्ध में अकबर की सेना ने हराया। उस समय अकबर की ओर से बैरम खाँ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस विजय से मुग़ल सत्ता उत्तर भारत में फिर से मजबूत हुई।
Q169. पानीपत का द्वितीय युद्ध कब हुआ?
उत्तर: B. 1556
पानीपत का द्वितीय युद्ध 1556 ई. में अकबर की सेना और हेमू के बीच हुआ। हेमू ने दिल्ली पर अधिकार कर लिया था, लेकिन युद्ध में पराजित हुआ। इस युद्ध ने अकबर के शासन को स्थिरता दी।
पानीपत का द्वितीय युद्ध 1556 ई. में अकबर की सेना और हेमू के बीच हुआ। हेमू ने दिल्ली पर अधिकार कर लिया था, लेकिन युद्ध में पराजित हुआ। इस युद्ध ने अकबर के शासन को स्थिरता दी।
Q170. अकबर की राजधानी क्या थी?
उत्तर: B. फतेहपुर सीकरी
अकबर ने फतेहपुर सीकरी को बसाकर कुछ समय के लिए अपनी राजधानी बनाया। हालांकि उसके शासन में आगरा और लाहौर भी प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहे। प्रतियोगी परीक्षाओं में इस प्रश्न का मानक उत्तर फतेहपुर सीकरी माना जाता है।
अकबर ने फतेहपुर सीकरी को बसाकर कुछ समय के लिए अपनी राजधानी बनाया। हालांकि उसके शासन में आगरा और लाहौर भी प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहे। प्रतियोगी परीक्षाओं में इस प्रश्न का मानक उत्तर फतेहपुर सीकरी माना जाता है।
Q171. अकबर के नवरत्नों में कौन था?
उत्तर: B. बीरबल
बीरबल अकबर के नवरत्नों में शामिल थे। वे अपनी बुद्धिमत्ता, वाक्पटुता और दरबारी भूमिका के लिए प्रसिद्ध हैं। अकबर के दरबार में टोडरमल, अबुल फजल और तानसेन जैसे अन्य प्रसिद्ध व्यक्तित्व भी थे।
बीरबल अकबर के नवरत्नों में शामिल थे। वे अपनी बुद्धिमत्ता, वाक्पटुता और दरबारी भूमिका के लिए प्रसिद्ध हैं। अकबर के दरबार में टोडरमल, अबुल फजल और तानसेन जैसे अन्य प्रसिद्ध व्यक्तित्व भी थे।
Q172. टोडरमल किससे संबंधित है?
उत्तर: B. प्रशासन
राजा टोडरमल अकबर के प्रशासन और राजस्व व्यवस्था से संबंधित थे। उन्होंने भूमि मापन और दहसाला प्रणाली को व्यवस्थित किया। मुग़ल प्रशासन में उनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
राजा टोडरमल अकबर के प्रशासन और राजस्व व्यवस्था से संबंधित थे। उन्होंने भूमि मापन और दहसाला प्रणाली को व्यवस्थित किया। मुग़ल प्रशासन में उनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
Q173. मुग़ल काल में ‘हिंदुस्तान’ शब्द किसके लिए प्रयोग हुआ?
उत्तर: B. उत्तर भारत
मध्यकालीन स्रोतों में हिंदुस्तान शब्द का प्रयोग कई अर्थों में हुआ, लेकिन मुग़ल संदर्भ में यह प्रायः उत्तर भारत या गंगा-यमुना क्षेत्र के लिए प्रयुक्त मिलता है। बाबर जैसे लेखकों ने इसे उत्तर भारतीय भूभाग के संदर्भ में इस्तेमाल किया। परीक्षा में उत्तर भारत मानक उत्तर है।
मध्यकालीन स्रोतों में हिंदुस्तान शब्द का प्रयोग कई अर्थों में हुआ, लेकिन मुग़ल संदर्भ में यह प्रायः उत्तर भारत या गंगा-यमुना क्षेत्र के लिए प्रयुक्त मिलता है। बाबर जैसे लेखकों ने इसे उत्तर भारतीय भूभाग के संदर्भ में इस्तेमाल किया। परीक्षा में उत्तर भारत मानक उत्तर है।
Q174. लखनऊ किससे संबंधित है?
उत्तर: C. अवध
लखनऊ अवध के नवाबों की राजधानी के रूप में प्रसिद्ध हुआ। आसफ-उद-दौला ने राजधानी फैजाबाद से लखनऊ स्थानांतरित की। इसके बाद लखनऊ कला, संगीत, स्थापत्य और नवाबी संस्कृति का प्रमुख केंद्र बना।
लखनऊ अवध के नवाबों की राजधानी के रूप में प्रसिद्ध हुआ। आसफ-उद-दौला ने राजधानी फैजाबाद से लखनऊ स्थानांतरित की। इसके बाद लखनऊ कला, संगीत, स्थापत्य और नवाबी संस्कृति का प्रमुख केंद्र बना।
Q175. अवध का अंतिम नवाब कौन था?
उत्तर: B. वाजिद अली शाह
वाजिद अली शाह अवध के अंतिम नवाब थे। अंग्रेजों ने 1856 ई. में अवध का विलय कर उन्हें सत्ता से हटा दिया। वे संगीत, नृत्य, कविता और लखनऊ की सांस्कृतिक परंपरा के संरक्षण के लिए भी प्रसिद्ध हैं।
वाजिद अली शाह अवध के अंतिम नवाब थे। अंग्रेजों ने 1856 ई. में अवध का विलय कर उन्हें सत्ता से हटा दिया। वे संगीत, नृत्य, कविता और लखनऊ की सांस्कृतिक परंपरा के संरक्षण के लिए भी प्रसिद्ध हैं।
Q176. वाजिद अली शाह को किसने हटाया?
उत्तर: C. अंग्रेज
वाजिद अली शाह को अंग्रेजों ने 1856 ई. में पदच्युत किया। लॉर्ड डलहौजी के समय अवध को कुशासन के आधार पर अंग्रेजी राज्य में मिला लिया गया। यह घटना 1857 के विद्रोह की पृष्ठभूमि में बहुत महत्वपूर्ण रही।
वाजिद अली शाह को अंग्रेजों ने 1856 ई. में पदच्युत किया। लॉर्ड डलहौजी के समय अवध को कुशासन के आधार पर अंग्रेजी राज्य में मिला लिया गया। यह घटना 1857 के विद्रोह की पृष्ठभूमि में बहुत महत्वपूर्ण रही।
Q177. बड़ा इमामबाड़ा किसने बनवाया?
उत्तर: B. आसफ-उद-दौला
बड़ा इमामबाड़ा लखनऊ में आसफ-उद-दौला ने 1784 ई. में बनवाया। यह अवध स्थापत्य का प्रसिद्ध उदाहरण है। इसके निर्माण को अकाल राहत कार्यों से भी जोड़ा जाता है।
बड़ा इमामबाड़ा लखनऊ में आसफ-उद-दौला ने 1784 ई. में बनवाया। यह अवध स्थापत्य का प्रसिद्ध उदाहरण है। इसके निर्माण को अकाल राहत कार्यों से भी जोड़ा जाता है।
Q178. इलाहाबाद की संधि कब हुई?
उत्तर: B. 1765
इलाहाबाद की संधि 1765 ई. में हुई थी। यह बक्सर के युद्ध के बाद की महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना थी। इसके बाद अंग्रेजों को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी प्राप्त हुई।
इलाहाबाद की संधि 1765 ई. में हुई थी। यह बक्सर के युद्ध के बाद की महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना थी। इसके बाद अंग्रेजों को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी प्राप्त हुई।
Q179. इलाहाबाद की संधि किसके बीच हुई?
उत्तर: B. अंग्रेज-शाह आलम द्वितीय
इलाहाबाद की संधि 1765 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी और मुग़ल सम्राट शाह आलम द्वितीय के बीच प्रमुख रूप से हुई। व्यापक समझौते में अवध के नवाब शुजा-उद-दौला से भी व्यवस्था जुड़ी थी। परीक्षा में दिए गए विकल्पों में अंग्रेज-शाह आलम द्वितीय सही माना जाएगा।
इलाहाबाद की संधि 1765 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी और मुग़ल सम्राट शाह आलम द्वितीय के बीच प्रमुख रूप से हुई। व्यापक समझौते में अवध के नवाब शुजा-उद-दौला से भी व्यवस्था जुड़ी थी। परीक्षा में दिए गए विकल्पों में अंग्रेज-शाह आलम द्वितीय सही माना जाएगा।
Q180. आसफ-उद-दौला ने राजधानी कहाँ स्थानांतरित की?
उत्तर: B. फैजाबाद से लखनऊ
आसफ-उद-दौला ने अवध की राजधानी फैजाबाद से लखनऊ स्थानांतरित की। इसके बाद लखनऊ नवाबी शासन, कला और स्थापत्य का प्रमुख केंद्र बना। बड़ा इमामबाड़ा इसी नवाबी काल की प्रसिद्ध इमारत है।
आसफ-उद-दौला ने अवध की राजधानी फैजाबाद से लखनऊ स्थानांतरित की। इसके बाद लखनऊ नवाबी शासन, कला और स्थापत्य का प्रमुख केंद्र बना। बड़ा इमामबाड़ा इसी नवाबी काल की प्रसिद्ध इमारत है।
Q181. 1707 ई. किस घटना से संबंधित है?
उत्तर: B. औरंगज़ेब की मृत्यु
1707 ई. में औरंगज़ेब की मृत्यु हुई। उसके बाद मुग़ल साम्राज्य में उत्तराधिकार संघर्ष और प्रांतीय शक्तियों का उदय तेज हुआ। इसे मुग़ल पतन की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है।
1707 ई. में औरंगज़ेब की मृत्यु हुई। उसके बाद मुग़ल साम्राज्य में उत्तराधिकार संघर्ष और प्रांतीय शक्तियों का उदय तेज हुआ। इसे मुग़ल पतन की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है।
Q182. 1757 ई. किस घटना से संबंधित है?
उत्तर: B. प्लासी का युद्ध
1757 ई. में प्लासी का युद्ध हुआ। इसमें ईस्ट इंडिया कंपनी ने सिराजुद्दौला को हराया। यह युद्ध भारत में अंग्रेजी राजनीतिक प्रभुत्व की शुरुआत के रूप में देखा जाता है।
1757 ई. में प्लासी का युद्ध हुआ। इसमें ईस्ट इंडिया कंपनी ने सिराजुद्दौला को हराया। यह युद्ध भारत में अंग्रेजी राजनीतिक प्रभुत्व की शुरुआत के रूप में देखा जाता है।
Q183. मुग़ल पतन का कारण क्या था?
उत्तर: B. आंतरिक संघर्ष
मुग़ल साम्राज्य के पतन में आंतरिक संघर्ष, कमजोर उत्तराधिकारी और प्रांतीय शक्तियों का उदय प्रमुख कारण थे। मराठों, जाटों, सिखों और नवाबों की शक्ति बढ़ी। बाहरी आक्रमणों और आर्थिक दबावों ने भी स्थिति कमजोर की।
मुग़ल साम्राज्य के पतन में आंतरिक संघर्ष, कमजोर उत्तराधिकारी और प्रांतीय शक्तियों का उदय प्रमुख कारण थे। मराठों, जाटों, सिखों और नवाबों की शक्ति बढ़ी। बाहरी आक्रमणों और आर्थिक दबावों ने भी स्थिति कमजोर की।
Q184. मराठों का प्रभाव कहाँ बढ़ा?
उत्तर: B. उत्तर भारत
18वीं शताब्दी में मराठों का प्रभाव उत्तर भारत में तेजी से बढ़ा। मुग़ल सत्ता की कमजोरी के बाद वे दिल्ली और गंगा-यमुना क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय हुए। 1761 के पानीपत के तृतीय युद्ध से पहले उनका प्रभाव बहुत व्यापक हो चुका था।
18वीं शताब्दी में मराठों का प्रभाव उत्तर भारत में तेजी से बढ़ा। मुग़ल सत्ता की कमजोरी के बाद वे दिल्ली और गंगा-यमुना क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय हुए। 1761 के पानीपत के तृतीय युद्ध से पहले उनका प्रभाव बहुत व्यापक हो चुका था।
Q185. रोहिल्ला किस क्षेत्र से संबंधित थे?
उत्तर: B. रोहिलखंड
रोहिल्ला अफगान मूल के समूह थे, जिनका प्रभाव उत्तर प्रदेश के रोहिलखंड क्षेत्र में बढ़ा। बरेली और आसपास का क्षेत्र रोहिल्ला शक्ति से जुड़ा था। 18वीं शताब्दी में वे अवध और अंग्रेजों की राजनीति में महत्वपूर्ण रहे।
रोहिल्ला अफगान मूल के समूह थे, जिनका प्रभाव उत्तर प्रदेश के रोहिलखंड क्षेत्र में बढ़ा। बरेली और आसपास का क्षेत्र रोहिल्ला शक्ति से जुड़ा था। 18वीं शताब्दी में वे अवध और अंग्रेजों की राजनीति में महत्वपूर्ण रहे।
Q186. जौनपुर की अटाला मस्जिद किसने बनवाई?
उत्तर: B. इब्राहिम शाह शर्की
जौनपुर की अटाला मस्जिद शर्की स्थापत्य का प्रसिद्ध उदाहरण है। इसका निर्माण इब्राहिम शाह शर्की के समय पूरा हुआ माना जाता है। यह जौनपुर को शिराज-ए-हिंद कहलाने वाली सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ती है।
जौनपुर की अटाला मस्जिद शर्की स्थापत्य का प्रसिद्ध उदाहरण है। इसका निर्माण इब्राहिम शाह शर्की के समय पूरा हुआ माना जाता है। यह जौनपुर को शिराज-ए-हिंद कहलाने वाली सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ती है।
Q187. बदायूं की जामा मस्जिद किसने बनवाई?
उत्तर: B. इल्तुतमिश
बदायूं की जामा मस्जिद का निर्माण इल्तुतमिश से संबंधित माना जाता है। बदायूं दिल्ली सल्तनत के प्रारंभिक दौर में महत्वपूर्ण नगर था। यह मस्जिद उत्तर भारत की प्रारंभिक सल्तनती स्थापत्य परंपरा का उदाहरण है।
बदायूं की जामा मस्जिद का निर्माण इल्तुतमिश से संबंधित माना जाता है। बदायूं दिल्ली सल्तनत के प्रारंभिक दौर में महत्वपूर्ण नगर था। यह मस्जिद उत्तर भारत की प्रारंभिक सल्तनती स्थापत्य परंपरा का उदाहरण है।
Q188. झांसी किससे संबंधित है?
उत्तर: B. बुंदेलखंड
झांसी बुंदेलखंड क्षेत्र से संबंधित है। यह क्षेत्र मध्यकालीन और आधुनिक इतिहास दोनों में महत्वपूर्ण रहा। झांसी का किला और बुंदेला शासकों की गतिविधियाँ इसे ऐतिहासिक दृष्टि से विशेष बनाती हैं।
झांसी बुंदेलखंड क्षेत्र से संबंधित है। यह क्षेत्र मध्यकालीन और आधुनिक इतिहास दोनों में महत्वपूर्ण रहा। झांसी का किला और बुंदेला शासकों की गतिविधियाँ इसे ऐतिहासिक दृष्टि से विशेष बनाती हैं।
Q189. बीर सिंह बुंदेला किस क्षेत्र से संबंधित थे?
उत्तर: B. झांसी
बीर सिंह बुंदेला बुंदेलखंड क्षेत्र के प्रमुख शासक थे। झांसी और ओरछा क्षेत्र बुंदेला इतिहास से जुड़े हैं। मुग़ल काल में बुंदेला शक्ति क्षेत्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण रही।
बीर सिंह बुंदेला बुंदेलखंड क्षेत्र के प्रमुख शासक थे। झांसी और ओरछा क्षेत्र बुंदेला इतिहास से जुड़े हैं। मुग़ल काल में बुंदेला शक्ति क्षेत्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण रही।
Q190. भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत कौन थे?
उत्तर: A. कबीर
कबीर भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों में गिने जाते हैं। उन्होंने निर्गुण भक्ति, सामाजिक समानता और धार्मिक आडंबरों के विरोध का संदेश दिया। उनके दोहे आज भी जनभाषा और समाज-सुधार की परंपरा में महत्वपूर्ण हैं।
कबीर भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों में गिने जाते हैं। उन्होंने निर्गुण भक्ति, सामाजिक समानता और धार्मिक आडंबरों के विरोध का संदेश दिया। उनके दोहे आज भी जनभाषा और समाज-सुधार की परंपरा में महत्वपूर्ण हैं।
Q191. रामानंद किससे संबंधित थे?
उत्तर: B. भक्ति आंदोलन
रामानंद भक्ति आंदोलन से संबंधित प्रमुख संत थे। उन्होंने उत्तर भारत में राम भक्ति को लोकप्रिय बनाने में योगदान दिया। कबीर और रैदास जैसे संतों को परंपरा में रामानंद से जोड़ा जाता है।
रामानंद भक्ति आंदोलन से संबंधित प्रमुख संत थे। उन्होंने उत्तर भारत में राम भक्ति को लोकप्रिय बनाने में योगदान दिया। कबीर और रैदास जैसे संतों को परंपरा में रामानंद से जोड़ा जाता है।
Q192. कबीर का संदेश क्या था?
उत्तर: B. धर्म एकता
कबीर ने हिंदू-मुस्लिम एकता, ईश्वर की निराकार भक्ति और सामाजिक समानता का संदेश दिया। उन्होंने कर्मकांड और बाहरी आडंबरों की आलोचना की। उनके विचार भक्ति आंदोलन की समन्वयवादी धारा को प्रकट करते हैं।
कबीर ने हिंदू-मुस्लिम एकता, ईश्वर की निराकार भक्ति और सामाजिक समानता का संदेश दिया। उन्होंने कर्मकांड और बाहरी आडंबरों की आलोचना की। उनके विचार भक्ति आंदोलन की समन्वयवादी धारा को प्रकट करते हैं।
Q193. ताजमहल किस नदी के किनारे है?
उत्तर: B. यमुना
ताजमहल आगरा में यमुना नदी के किनारे स्थित है। नदी के किनारे इसकी स्थिति मुग़ल उद्यान योजना और स्थापत्य सौंदर्य का हिस्सा है। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भी है।
ताजमहल आगरा में यमुना नदी के किनारे स्थित है। नदी के किनारे इसकी स्थिति मुग़ल उद्यान योजना और स्थापत्य सौंदर्य का हिस्सा है। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भी है।
Q194. फतेहपुर सीकरी किस राज्य में है?
उत्तर: B. उत्तर प्रदेश
फतेहपुर सीकरी उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में स्थित है। इसे अकबर ने बसाया था और यह कुछ समय के लिए मुग़ल राजधानी रही। यहाँ बुलंद दरवाजा, जामा मस्जिद और पंचमहल जैसे स्मारक स्थित हैं।
फतेहपुर सीकरी उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में स्थित है। इसे अकबर ने बसाया था और यह कुछ समय के लिए मुग़ल राजधानी रही। यहाँ बुलंद दरवाजा, जामा मस्जिद और पंचमहल जैसे स्मारक स्थित हैं।
Q195. आगरा किस नदी के किनारे स्थित है?
उत्तर: B. यमुना
आगरा यमुना नदी के किनारे स्थित है। मुग़ल काल में यह महत्वपूर्ण राजधानी और स्थापत्य केंद्र रहा। ताजमहल, आगरा किला और एतमाद-उद-दौला जैसे स्मारक इसी नगर में हैं।
आगरा यमुना नदी के किनारे स्थित है। मुग़ल काल में यह महत्वपूर्ण राजधानी और स्थापत्य केंद्र रहा। ताजमहल, आगरा किला और एतमाद-उद-दौला जैसे स्मारक इसी नगर में हैं।
Q196. लखनऊ किस नदी के किनारे स्थित है?
उत्तर: C. गोमती
लखनऊ गोमती नदी के किनारे स्थित है। अवध के नवाबों के समय यह राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र बना। गोमती के किनारे बसे होने से इसका शहरी विकास और व्यापारिक महत्व बढ़ा।
लखनऊ गोमती नदी के किनारे स्थित है। अवध के नवाबों के समय यह राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र बना। गोमती के किनारे बसे होने से इसका शहरी विकास और व्यापारिक महत्व बढ़ा।
Q197. कन्नौज किस नदी के किनारे स्थित है?
उत्तर: A. गंगा
कन्नौज गंगा नदी के किनारे स्थित है। इसी भौगोलिक स्थिति ने इसे व्यापार, सामरिक नियंत्रण और राजनीतिक प्रतिष्ठा का केंद्र बनाया। हर्ष और प्रतिहारों के समय इसका महत्व विशेष रूप से बढ़ा।
कन्नौज गंगा नदी के किनारे स्थित है। इसी भौगोलिक स्थिति ने इसे व्यापार, सामरिक नियंत्रण और राजनीतिक प्रतिष्ठा का केंद्र बनाया। हर्ष और प्रतिहारों के समय इसका महत्व विशेष रूप से बढ़ा।
Q198. जौनपुर किस नदी के किनारे स्थित है?
उत्तर: B. गोमती
जौनपुर गोमती नदी के किनारे स्थित है। तुगलक और शर्की काल में यह महत्वपूर्ण नगर बना। शर्की स्थापत्य और शिक्षा-संस्कृति के कारण इसे शिराज-ए-हिंद कहा गया।
जौनपुर गोमती नदी के किनारे स्थित है। तुगलक और शर्की काल में यह महत्वपूर्ण नगर बना। शर्की स्थापत्य और शिक्षा-संस्कृति के कारण इसे शिराज-ए-हिंद कहा गया।
Q199. अवध क्षेत्र किस नदी के आसपास विकसित हुआ?
उत्तर: B. गोमती
अवध क्षेत्र का विकास गोमती और घाघरा-सरयू क्षेत्र की उपजाऊ भूमि से जुड़ा रहा। दिए गए विकल्पों में गोमती सबसे उपयुक्त उत्तर है। लखनऊ के नवाबी केंद्र बनने से गोमती क्षेत्र का राजनीतिक और सांस्कृतिक महत्व और बढ़ा।
अवध क्षेत्र का विकास गोमती और घाघरा-सरयू क्षेत्र की उपजाऊ भूमि से जुड़ा रहा। दिए गए विकल्पों में गोमती सबसे उपयुक्त उत्तर है। लखनऊ के नवाबी केंद्र बनने से गोमती क्षेत्र का राजनीतिक और सांस्कृतिक महत्व और बढ़ा।
Q200. उत्तर प्रदेश का मध्यकालीन इतिहास किससे समाप्त होता है?
उत्तर: C. अंग्रेजी शासन की स्थापना
उत्तर प्रदेश का मध्यकालीन इतिहास मुग़ल, नवाबी, मराठा और क्षेत्रीय शक्तियों से होकर अंग्रेजी प्रभुत्व तक पहुँचता है। अंग्रेजी शासन की स्थापना के साथ आधुनिक काल की शुरुआत मानी जाती है। इसलिए मध्यकालीन चरण का अंत अंग्रेजी सत्ता के उदय से जोड़ा जाता है।
उत्तर प्रदेश का मध्यकालीन इतिहास मुग़ल, नवाबी, मराठा और क्षेत्रीय शक्तियों से होकर अंग्रेजी प्रभुत्व तक पहुँचता है। अंग्रेजी शासन की स्थापना के साथ आधुनिक काल की शुरुआत मानी जाती है। इसलिए मध्यकालीन चरण का अंत अंग्रेजी सत्ता के उदय से जोड़ा जाता है।
