अध्याय 7 – उत्तर प्रदेश के प्रमुख क्षेत्र एवं क्षेत्रीय पहचान
Regional Divisions and Regional Identity
पश्चिमांचल | मध्यांचल | पूर्वांचल | बुंदेलखंड | अवध | ब्रज | रुहेलखंड
Advanced Level Notes 50 Practice MCQs UPPSC • UPSSSC • RO/ARO • ASO/ARO1. उत्तर प्रदेश का क्षेत्रीय विभाजन : परिचय
उत्तर प्रदेश भारत के उत्तरी भाग में स्थित एक विशाल एवं भौगोलिक-सांस्कृतिक विविधता वाला राज्य है। राज्य का अधिकांश भाग गंगा के विशाल जलोढ़ मैदान में आता है, जबकि दक्षिणी भाग में बुंदेलखंड का पठारी क्षेत्र तथा विंध्य पर्वतीय भू-भाग मिलता है। उत्तर में हिमालय की तराई से लगा उप-हिमालयी क्षेत्र है। नदियों, मिट्टी, जलवायु, कृषि, इतिहास, भाषा, लोक-संस्कृति और आर्थिक गतिविधियों में अंतर के कारण उत्तर प्रदेश में अनेक क्षेत्रीय पहचान विकसित हुई हैं।
क्षेत्रीय विभाजन का अर्थ किसी राज्य को उसकी प्राकृतिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, आर्थिक अथवा प्रशासनिक विशेषताओं के आधार पर अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में समझना है। उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय पहचान के लिए एक ही सर्वमान्य और कानूनी रूप से निश्चित सूची नहीं है। अलग-अलग सरकारी विभाग अलग-अलग उद्देश्य से अलग क्षेत्रीय वर्गीकरण का उपयोग करते हैं।
क्षेत्रीय विभाजन के प्रमुख आधार
- भौतिक आधार: स्थलाकृति, नदियाँ, मिट्टी, जलवायु, वर्षा, वनस्पति और प्राकृतिक संसाधन।
- ऐतिहासिक आधार: प्राचीन जनपद, राज्य, रियासतें, नवाबी शासन और औपनिवेशिक प्रशासन।
- सांस्कृतिक आधार: भाषा, बोलियाँ, लोकगीत, लोकनृत्य, त्योहार, भोजन, स्थापत्य और धार्मिक परंपराएँ।
- आर्थिक आधार: कृषि, उद्योग, व्यापार, परिवहन, खनिज और रोजगार की प्रकृति।
- प्रशासनिक आधार: विकास योजनाओं, सरकारी नीतियों और प्रशासनिक सुविधा के लिए अपनाया गया क्षेत्रीय वर्गीकरण।
क्षेत्रीय पहचान और प्रशासनिक इकाई में अंतर
| आधार | क्षेत्रीय पहचान | प्रशासनिक इकाई |
|---|---|---|
| स्वरूप | भौगोलिक, ऐतिहासिक या सांस्कृतिक पहचान | सरकारी प्रशासन के लिए निर्धारित इकाई |
| उदाहरण | ब्रज, अवध, रुहेलखंड, तराई | मंडल, जिला, तहसील |
| सीमा | संदर्भ के अनुसार बदल सकती है | सरकारी अधिसूचना से निर्धारित |
| उद्देश्य | क्षेत्र की पहचान और अध्ययन | प्रशासन एवं सेवा वितरण |
2. उत्तर प्रदेश का व्यापक क्षेत्रीय वर्गीकरण
उत्तर प्रदेश की विकास एवं निवेश संबंधी नीतियों में राज्य को व्यापक रूप से चार क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है। इस वर्गीकरण में पश्चिमांचल, मध्यांचल, पूर्वांचल और बुंदेलखंड शामिल हैं। उत्तर प्रदेश की IT एवं ITES नीति 2022 के परिशिष्ट में जिलों का क्षेत्रवार वर्गीकरण दिया गया है। यह एक नीतिगत वर्गीकरण है, न कि संविधान द्वारा निर्धारित स्थायी भौगोलिक सीमा।
| व्यापक क्षेत्र | क्षेत्रीय पहचान | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| पश्चिमांचल | पश्चिमी उत्तर प्रदेश | कृषि, गन्ना, डेयरी, उद्योग, NCR प्रभाव |
| मध्यांचल | मध्य उत्तर प्रदेश | प्रशासनिक, औद्योगिक, कृषि एवं सेवा क्षेत्र |
| पूर्वांचल | पूर्वी उत्तर प्रदेश | घनी आबादी, कृषि, सांस्कृतिक विविधता और नदी मैदान |
| बुंदेलखंड | दक्षिणी पठारी क्षेत्र | पठारी भू-भाग, जल-संकट, दलहन एवं तिलहन |
3. पश्चिमी उत्तर प्रदेश (Western Uttar Pradesh / Paschimanchal)
उत्तर प्रदेश का पश्चिमी भाग राज्य का महत्वपूर्ण कृषि, औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्र है। दिल्ली तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से निकटता के कारण इस क्षेत्र में नगरीकरण, परिवहन, उद्योग, आवास और सेवा क्षेत्र का तेजी से विस्तार हुआ है। गंगा-यमुना दोआब का बड़ा भाग पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आता है।
3.1 पश्चिमांचल के जिले
उत्तर प्रदेश की IT एवं ITES नीति 2022 के क्षेत्रीय वर्गीकरण में पश्चिमांचल के अंतर्गत निम्नलिखित जिलों को रखा गया है:
यह सूची नीतिगत वर्गीकरण पर आधारित है। पारंपरिक सांस्कृतिक या ऐतिहासिक परिभाषाओं में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीमा इससे अलग हो सकती है।
3.2 भौतिक विशेषताएँ
- गंगा और यमुना नदियों के बीच विस्तृत जलोढ़ मैदान।
- दोआब क्षेत्र में उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी का व्यापक विस्तार।
- नहरों, नलकूपों और अन्य सिंचाई साधनों का महत्वपूर्ण योगदान।
- कुछ दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में अपेक्षाकृत कम वर्षा और अर्द्ध-शुष्क दशाएँ।
- उत्तर-पश्चिमी भाग में तराई से संबंधित नम एवं उपजाऊ क्षेत्र भी मिलते हैं।
3.3 कृषि एवं आर्थिक पहचान
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गेहूँ, गन्ना, धान, आलू, सरसों और अन्य फसलें महत्वपूर्ण हैं। गन्ना आधारित चीनी मिल उद्योग, गुड़ उद्योग, डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं। सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, बिजनौर और आसपास के क्षेत्रों में गन्ना उत्पादन एवं चीनी उद्योग का विशेष महत्व है।
मेरठ खेल सामग्री एवं खेल उपकरण निर्माण के लिए प्रसिद्ध है। गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स तथा सेवा क्षेत्र का विस्तार हुआ है। आगरा पर्यटन, चमड़ा और जूता उद्योग के लिए जाना जाता है। मुरादाबाद पीतल एवं धातु हस्तशिल्प से जुड़ा प्रमुख केंद्र है।
3.4 सांस्कृतिक पहचान
- खड़ी बोली पश्चिमी उत्तर प्रदेश की प्रमुख भाषाई पहचान है।
- ब्रज भाषा का प्रभाव मथुरा, वृंदावन और आसपास के क्षेत्रों में मिलता है।
- रागिनी, रसिया, लोकगीत और ग्रामीण मेलों की परंपरा क्षेत्रीय संस्कृति का हिस्सा है।
- कृषि और पशुपालन आधारित ग्रामीण जीवन यहाँ की सामाजिक संरचना में महत्वपूर्ण है।
3.5 प्रमुख चुनौतियाँ
- भूजल का अत्यधिक दोहन और जलस्तर में गिरावट।
- औद्योगिक प्रदूषण तथा नगरीय अपशिष्ट प्रबंधन।
- दिल्ली-NCR के विस्तार से भूमि उपयोग में तेजी से बदलाव।
- गंगा और यमुना के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मौसमी जोखिम।
- कृषि में फसल विविधीकरण और टिकाऊ जल प्रबंधन की आवश्यकता।
4. मध्य उत्तर प्रदेश (Madhyanchal / Central Uttar Pradesh)
मध्य उत्तर प्रदेश राज्य का प्रशासनिक, कृषि और औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण भाग है। लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, रायबरेली, हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, इटावा, औरैया और कन्नौज जैसे जिले इस क्षेत्र की प्रमुख पहचान बनाते हैं। यह क्षेत्र गंगा के मध्य मैदानी भाग का हिस्सा है।
4.1 मध्यांचल के जिले
उत्तर प्रदेश की IT एवं ITES नीति 2022 के वर्गीकरण के अनुसार मध्यांचल में मुख्यतः निम्नलिखित जिले रखे गए हैं:
4.2 भौतिक एवं कृषि विशेषताएँ
- मुख्यतः समतल जलोढ़ मैदान।
- गोमती, गंगा, सई, रामगंगा तथा अन्य नदियों का प्रभाव।
- गेहूँ, धान, दलहन, तिलहन, आलू और अन्य फसलें।
- नहरों और भूजल आधारित सिंचाई का महत्वपूर्ण स्थान।
- कुछ क्षेत्रों में जलभराव तथा कुछ क्षेत्रों में भूजल दबाव की समस्या।
4.3 आर्थिक एवं सांस्कृतिक पहचान
लखनऊ राज्य की राजधानी और प्रमुख प्रशासनिक केंद्र है। कानपुर ऐतिहासिक रूप से प्रमुख औद्योगिक नगर रहा है। कन्नौज इत्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। लखीमपुर खीरी में कृषि एवं चीनी उद्योग का महत्व है। रायबरेली और उन्नाव में कृषि के साथ औद्योगिक गतिविधियाँ भी विकसित हुई हैं।
अवधी भाषा और संस्कृति का प्रभाव लखनऊ, बाराबंकी, सीतापुर, रायबरेली, उन्नाव, सुल्तानपुर तथा आसपास के क्षेत्रों में मिलता है। हालांकि अवधी सांस्कृतिक क्षेत्र की सीमा मध्यांचल की नीतिगत सीमा के समान नहीं है।
5. पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं पूर्वांचल (Eastern Uttar Pradesh / Purvanchal)
उत्तर प्रदेश का पूर्वी भाग सामान्यतः पूर्वांचल कहलाता है। यह क्षेत्र गंगा के मध्य एवं निचले मैदानों से संबंधित है और बिहार की सीमा तक विस्तृत है। गंगा, घाघरा, राप्ती, गंडक, गोमती, सरयू तथा अन्य नदियों की उपस्थिति के कारण यहाँ का भूगोल और कृषि व्यवस्था अत्यंत नदी-आधारित है।
5.1 पूर्वांचल के जिले
राज्य की IT एवं ITES नीति 2022 के क्षेत्रीय वर्गीकरण में पूर्वांचल के अंतर्गत निम्न जिले सम्मिलित हैं:
इस सूची में प्रयागराज, अयोध्या और मिर्जापुर जैसे सीमांत या संक्रमण क्षेत्र के जिले भी नीतिगत वर्गीकरण के अनुसार शामिल हैं। सांस्कृतिक पूर्वांचल की परिभाषा अलग हो सकती है।
5.2 भौतिक विशेषताएँ
- गंगा और उसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित विस्तृत जलोढ़ मैदान।
- घाघरा, राप्ती, गंडक और अन्य नदियों के कारण अनेक क्षेत्रों में बाढ़ का प्रभाव।
- सामान्यतः पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी भागों की तुलना में अधिक आर्द्रता।
- नदी तटीय क्षेत्रों में नई जलोढ़ मिट्टी और खादर भूमि का विकास।
- निम्न एवं समतल भूभाग में जलभराव की समस्या कुछ जिलों में प्रमुख।
5.3 कृषि एवं आर्थिक पहचान
पूर्वांचल में धान, गेहूँ, दलहन, तिलहन, मक्का और सब्जियों की खेती महत्वपूर्ण है। कुछ क्षेत्रों में गन्ना, केला, आम और अन्य बागवानी फसलें भी उगाई जाती हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि, पशुपालन, छोटे उद्योग, हस्तशिल्प और प्रवासी श्रम का योगदान है।
5.4 सांस्कृतिक पहचान
- भोजपुरी पूर्वांचल के बड़े भाग में बोली जाने वाली प्रमुख लोकभाषा है।
- अवधी, बघेली प्रभाव वाले सीमांत क्षेत्र और अन्य स्थानीय बोलियाँ भी मिलती हैं।
- कजरी, बिरहा, चैता, सोहर और लोकनाट्य परंपराएँ महत्वपूर्ण हैं।
- वाराणसी संगीत, बनारसी वस्त्र, धार्मिक परंपराओं और शास्त्रीय कला का प्रमुख केंद्र है।
- गोरखपुर, कुशीनगर, श्रावस्ती और सिद्धार्थनगर क्षेत्र बौद्ध एवं ऐतिहासिक विरासत से जुड़े हैं।
5.5 पूर्वांचल की प्रमुख चुनौतियाँ
- घाघरा, राप्ती और अन्य नदियों से बाढ़ तथा कटाव।
- कृषि जोतों का छोटा आकार और ग्रामीण रोजगार की चुनौती।
- स्वास्थ्य, शिक्षा और औद्योगिक अवसरों का क्षेत्रीय असंतुलन।
- कई क्षेत्रों में जलभराव और जल निकासी की समस्या।
- स्थानीय स्तर पर गैर-कृषि रोजगार और मूल्य संवर्धन की आवश्यकता।
6. बुंदेलखंड क्षेत्र (Bundelkhand)
बुंदेलखंड उत्तर प्रदेश के दक्षिणी भाग में स्थित एक ऐतिहासिक एवं भौगोलिक क्षेत्र है। इसका विस्तार उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों में है। उत्तर प्रदेश वाला बुंदेलखंड मुख्यतः पठारी, चट्टानी और अपेक्षाकृत कम वर्षा वाला क्षेत्र है। इसकी पहचान वीरता, किलों, ऐतिहासिक राजवंशों, लोककला, जल-संकट और दलहन-तिलहन आधारित कृषि से जुड़ी है।
6.1 उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के सात जिले
उत्तर प्रदेश सरकार की निवेश एवं जलापूर्ति संबंधी सामग्री में बुंदेलखंड के इन सात जिलों का उल्लेख किया गया है।
6.2 भौतिक संरचना
- प्राचीन कठोर चट्टानों और पठारी भू-भाग का व्यापक प्रभाव।
- ग्रेनाइट, गनीस और अन्य प्राचीन शैलों की उपस्थिति।
- बेतवा, केन, धसान, पहूज और अन्य नदियाँ क्षेत्रीय जल व्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं।
- कुछ भागों में उथली, पथरीली और कम जलधारण क्षमता वाली मिट्टी।
- दक्षिण-पश्चिम मानसून पर निर्भरता तथा वर्षा की अनिश्चितता।
6.3 कृषि एवं आर्थिक पहचान
बुंदेलखंड में गेहूँ, चना, अरहर, उड़द, मूँग, तिल, सरसों और अन्य दलहन-तिलहन फसलें महत्वपूर्ण हैं। कृषि की उत्पादकता पर वर्षा, मिट्टी की गहराई, सिंचाई सुविधाओं और जल उपलब्धता का प्रभाव पड़ता है। पशुपालन, पत्थर एवं खनिज आधारित गतिविधियाँ, हस्तशिल्प और पर्यटन भी क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं।
6.4 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान
- चंदेल शासकों की स्थापत्य परंपरा और खजुराहो से ऐतिहासिक सांस्कृतिक संबंध।
- कालिंजर दुर्ग, झाँसी दुर्ग, देवगढ़ और चंदेलकालीन स्मारक।
- रानी लक्ष्मीबाई और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियाँ।
- आल्हा गायन और बुंदेली लोकगीतों की परंपरा।
- राई, दीवारी और अन्य लोकनृत्य क्षेत्रीय संस्कृति के महत्वपूर्ण रूप हैं।
6.5 जल-संकट एवं विकास संबंधी चुनौतियाँ
बुंदेलखंड की प्रमुख समस्याओं में अनियमित वर्षा, सूखा, भूजल की सीमित उपलब्धता, वर्षा जल का तेज बहाव, मिट्टी का कटाव और कृषि की अनिश्चितता शामिल हैं। इस क्षेत्र में जल संरक्षण, तालाबों का पुनर्जीवन, चेकडैम, सिंचाई परियोजनाएँ, जलग्रहण प्रबंधन और सूखा-सहिष्णु कृषि पद्धतियों का विशेष महत्व है।
7. रुहेलखंड क्षेत्र (Rohilkhand)
रुहेलखंड उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक-सांस्कृतिक क्षेत्र है। इसका नाम रुहेला/रोहिला अफगान समूहों और उनके ऐतिहासिक राजनीतिक प्रभाव से संबंधित माना जाता है। अठारहवीं शताब्दी में इस क्षेत्र में रुहेला सरदारों का प्रभाव रहा। बाद में यह क्षेत्र अवध, मराठा और अंग्रेजी सत्ता संघर्षों से भी प्रभावित हुआ।
7.1 प्रमुख क्षेत्रीय विस्तार
रुहेलखंड की परंपरागत पहचान मुख्यतः बरेली, बदायूँ, पीलीभीत, शाहजहाँपुर, रामपुर, मुरादाबाद, बिजनौर और अमरोहा के आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी है। संभल सहित कुछ क्षेत्रों को भी व्यापक रुहेलखंड संदर्भ में शामिल किया जाता है। इसकी कोई एक अधिसूचित जिला-सीमा नहीं है।
7.2 भौतिक एवं आर्थिक पहचान
- रामगंगा और उसकी सहायक नदियों का प्रभाव।
- तराई से लगे उत्तरी भागों में अधिक नमी और कृषि की अनुकूल परिस्थितियाँ।
- गेहूँ, धान, गन्ना, दलहन और तिलहन की खेती।
- बरेली में कृषि व्यापार, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य उद्योग।
- मुरादाबाद में पीतल एवं धातु हस्तशिल्प की पहचान।
- रामपुर की ऐतिहासिक नवाबी विरासत और सांस्कृतिक पहचान।
7.3 ऐतिहासिक महत्त्व
रुहेलखंड का इतिहास रुहेला सरदारों, रामपुर रियासत और अठारहवीं शताब्दी के सत्ता संघर्षों से जुड़ा है। रामपुर रियासत ने क्षेत्रीय राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
8. अवध क्षेत्र (Awadh)
अवध उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र है। इसका नाम प्राचीन अयोध्या से संबंधित माना जाता है। मध्यकाल में अवध एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और राजनीतिक क्षेत्र रहा। मुगल काल में सूबा अवध तथा बाद में अवध के नवाबी शासन ने इस क्षेत्र की राजनीतिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य पहचान को विकसित किया।
8.1 अवध के प्रमुख क्षेत्र
अवध की सांस्कृतिक पहचान मुख्यतः लखनऊ, अयोध्या, बाराबंकी, सुल्तानपुर, अमेठी, रायबरेली, प्रतापगढ़, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी है। लखीमपुर खीरी तथा कुछ अन्य सीमांत क्षेत्रों का संबंध संदर्भ के अनुसार अवध और तराई दोनों से जोड़ा जा सकता है।
8.2 अवध की ऐतिहासिक पहचान
- अयोध्या प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र।
- लखनऊ अवध के नवाबी शासन का प्रमुख केंद्र।
- अवध की नवाबी स्थापत्य कला, इमामबाड़े, दरवाजे और महल।
- 1856 में अंग्रेजों द्वारा अवध का विलय।
- 1857 के विद्रोह में लखनऊ, अवध और आसपास के क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका।
8.3 भाषा एवं लोक-संस्कृति
अवधी भाषा इस क्षेत्र की प्रमुख सांस्कृतिक पहचान है। रामचरितमानस की भाषा अवधी है। तुलसीदास की साहित्यिक परंपरा, लोकगीत, बिरहा, कजरी, सोहर और विवाह गीत अवध की सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण अंग हैं। लखनऊ की तहजीब, अदब, पाककला और चिकनकारी ने अवध को विशिष्ट पहचान दी है।
8.4 आर्थिक पहचान
अवध क्षेत्र में धान, गेहूँ, गन्ना, दलहन, तिलहन और बागवानी फसलें उगाई जाती हैं। लखनऊ प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा क्षेत्र और उद्योग का बड़ा केंद्र है। बाराबंकी, सुल्तानपुर और रायबरेली में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का विशेष महत्व है।
9. तराई क्षेत्र (Terai Region)
तराई उत्तर प्रदेश के उत्तरी भाग में नेपाल सीमा के समानांतर फैला नम, उपजाऊ और पारिस्थितिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। हिमालय की तलहटी के निकट स्थित होने के कारण यहाँ वर्षा, नमी, नदियों, भूजल और वनस्पति का विशेष प्रभाव मिलता है। तराई का भौगोलिक क्षेत्र उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड, बिहार और नेपाल तक विभिन्न रूपों में विस्तृत है।
9.1 उत्तर प्रदेश में तराई के प्रमुख जिले
तराई की व्यापक पहचान में पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, महाराजगंज तथा आसपास के उत्तरी जिलों के हिस्से शामिल होते हैं। कृषि-जलवायु वर्गीकरण में तराई/भाभर क्षेत्र की जिला सूची अलग हो सकती है।
9.2 प्राकृतिक विशेषताएँ
- हिमालय की तलहटी से निकलने वाली नदियों और जलधाराओं का प्रभाव।
- अधिक नमी, दलदली भूमि और कुछ क्षेत्रों में जलभराव।
- घासभूमि, साल वन और विविध वन्यजीव।
- उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और धान-गन्ना आधारित कृषि।
- नेपाल सीमा से निकटता के कारण अंतरराष्ट्रीय सीमा संबंधी रणनीतिक महत्त्व।
9.3 प्रमुख पर्यावरणीय पहचान
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान और दुधवा टाइगर रिजर्व तराई पारिस्थितिकी के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार बहराइच जिले में स्थित है। सोहगीबरवा वन्यजीव क्षेत्र महाराजगंज के निकट तराई जैव विविधता से संबंधित है। इन क्षेत्रों में बाघ, गैंडा, दलदली हिरण, घड़ियाल तथा अनेक पक्षी प्रजातियों के आवास मिलते हैं।
10. ब्रज क्षेत्र (Braj Region)
ब्रज उत्तर प्रदेश का विशिष्ट धार्मिक-सांस्कृतिक क्षेत्र है, जिसका संबंध भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और ब्रजभाषा से है। मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और नंदगाँव ब्रज संस्कृति के प्रमुख केंद्र हैं। ब्रज क्षेत्र की सांस्कृतिक सीमा आधुनिक जिला सीमाओं से पूरी तरह मेल नहीं खाती और इसका कुछ विस्तार राजस्थान तथा हरियाणा के क्षेत्रों तक भी माना जाता है।
10.1 उत्तर प्रदेश में ब्रज के प्रमुख क्षेत्र
- मथुरा और वृंदावन।
- गोवर्धन, बरसाना और नंदगाँव।
- आगरा के कुछ क्षेत्र।
- हाथरस और अलीगढ़ के कुछ सांस्कृतिक क्षेत्र।
- फिरोजाबाद एवं आसपास के कुछ भागों में ब्रज भाषाई प्रभाव।
10.2 सांस्कृतिक विशेषताएँ
- ब्रजभाषा और कृष्ण भक्ति साहित्य।
- रासलीला और संकीर्तन परंपरा।
- लट्ठमार होली, फूलों की होली और ब्रज की पारंपरिक होली।
- मयूर नृत्य, चर्कुला और रसिया गायन।
- गोवर्धन परिक्रमा और ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा।
- माखन-मिश्री, पेड़ा और अन्य पारंपरिक खाद्य पहचान।
10.3 आर्थिक पहचान
ब्रज क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में धार्मिक पर्यटन, होटल, परिवहन, दुग्ध उत्पादन, मिठाई उद्योग, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यापार का महत्वपूर्ण स्थान है। मथुरा-वृंदावन का धार्मिक पर्यटन पूरे देश से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
11. दोआब क्षेत्र (Doab)
दोआब शब्द फारसी मूल का है। 'दो' का अर्थ दो और 'आब' का अर्थ पानी अथवा नदी है। दो नदियों के बीच स्थित भूभाग को दोआब कहा जाता है। उत्तर प्रदेश में गंगा और यमुना के बीच का भूभाग गंगा-यमुना दोआब कहलाता है।
11.1 गंगा-यमुना दोआब की भौगोलिक स्थिति
गंगा और यमुना के बीच का क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर प्रयागराज के निकट दोनों नदियों के संगम क्षेत्र तक विस्तृत है। दोआब का पश्चिमी भाग ऊपरी दोआब और पूर्वी भाग निचले दोआब के रूप में समझा जा सकता है। यह विभाजन भूगोल की व्याख्या के लिए उपयोगी है; इसके लिए जिलों की कोई एक स्थायी प्रशासनिक सूची नहीं है।
11.2 प्रमुख विशेषताएँ
- दो नदियों के बीच स्थित जलोढ़ मैदान।
- उपजाऊ मिट्टी और कृषि की अनुकूल परिस्थितियाँ।
- गेहूँ, गन्ना, धान, आलू और अन्य फसलों का उत्पादन।
- नहरों एवं नलकूपों से सिंचाई का व्यापक विकास।
- नदी तटीय क्षेत्रों में खादर और ऊँचे भागों में बांगर भूमि का अंतर।
12. विंध्य क्षेत्र (Vindhyan Region)
उत्तर प्रदेश का विंध्य क्षेत्र दक्षिणी भाग में स्थित पठारी एवं पहाड़ी भू-भाग से जुड़ा है। मिर्जापुर और सोनभद्र इसके प्रमुख भौगोलिक संदर्भ हैं। प्रयागराज के दक्षिणी हिस्से तथा आसपास के क्षेत्रों में भी विंध्य एवं बघेलखंड की ओर संक्रमण मिलता है। यह क्षेत्र गंगा के विस्तृत मैदानी भूभाग से भौतिक संरचना में भिन्न है।
12.1 प्रमुख जिले एवं क्षेत्र
- मिर्जापुर।
- सोनभद्र।
- प्रयागराज के दक्षिणी क्षेत्र से संबंधित कुछ भूभाग।
- भदोही के कुछ वर्गीकरणों में विंध्य क्षेत्र से संबंध दिखता है।
12.2 भौतिक एवं आर्थिक विशेषताएँ
- पठारी भू-भाग, पहाड़ियाँ और चट्टानी संरचनाएँ।
- सोन, रिहंद, बेलन, कर्मनाशा और अन्य नदी प्रणालियों का प्रभाव।
- खनिज संसाधनों, पत्थर, चूना पत्थर और ऊर्जा परियोजनाओं का महत्व।
- वन, जैव विविधता और वन-आधारित आजीविका।
- कुछ भागों में सिंचाई और पेयजल उपलब्धता की चुनौती।
12.3 सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक पहचान
मिर्जापुर का विंध्याचल धाम धार्मिक दृष्टि से प्रसिद्ध है। चुनार दुर्ग, कैमूर पर्वतीय क्षेत्र, प्रागैतिहासिक शैलचित्र और सोनभद्र के जीवाश्म स्थल इस क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक महत्व को बढ़ाते हैं।
13. उत्तर प्रदेश के नौ कृषि-जलवायु क्षेत्र
कृषि-जलवायु क्षेत्र (Agro-Climatic Zones) का निर्धारण मिट्टी, वर्षा, तापमान, जल उपलब्धता, फसल प्रणाली और कृषि की संभावनाओं के आधार पर किया जाता है। यह वर्गीकरण सामान्य क्षेत्रीय नामों से अलग है। उत्तर प्रदेश के कृषि और मौसम संबंधी सरकारी स्रोतों में नौ कृषि-जलवायु क्षेत्रों का उल्लेख मिलता है।
| क्रम | कृषि-जलवायु क्षेत्र | मुख्य भौगोलिक पहचान | प्रमुख फसलें/विशेषता |
|---|---|---|---|
| 1 | भाभर-तराई क्षेत्र | नेपाल सीमा से लगा उत्तरी भाग | धान, गेहूँ, गन्ना, दलहन |
| 2 | पश्चिमी मैदानी क्षेत्र | पश्चिमी गंगा मैदान | गेहूँ, धान, गन्ना, सरसों |
| 3 | मध्य-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र | बरेली-मुरादाबाद से संबंधित भाग | धान, गेहूँ, दलहन, गन्ना |
| 4 | दक्षिण-पश्चिमी अर्द्ध-शुष्क क्षेत्र | आगरा-मथुरा-अलीगढ़ का भाग | बाजरा, गेहूँ, सरसों, दलहन |
| 5 | मध्य मैदानी क्षेत्र | कानपुर-लखनऊ और आसपास | गेहूँ, धान, मक्का, दलहन |
| 6 | बुंदेलखंड क्षेत्र | दक्षिणी पठारी भाग | चना, उड़द, तिल, अरहर |
| 7 | उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र | गोरखपुर-बस्ती-देवीपाटन का भाग | धान, गेहूँ, दलहन |
| 8 | पूर्वी मैदानी क्षेत्र | वाराणसी-आजमगढ़-अयोध्या का भाग | धान, गेहूँ, मक्का, दलहन |
| 9 | विंध्य क्षेत्र | मिर्जापुर-सोनभद्र एवं आसपास | अरहर, ज्वार, बाजरा, तिल |
क्षेत्रीय कृषि की तुलनात्मक पहचान
| क्षेत्र | प्रमुख कृषि पहचान | मुख्य चुनौती |
|---|---|---|
| पश्चिमी मैदान | गन्ना, गेहूँ, धान, डेयरी | भूजल दोहन और प्रदूषण |
| मध्य मैदान | गेहूँ, धान, दलहन, आलू | जलभराव और कृषि विविधीकरण |
| पूर्वी मैदान | धान, गेहूँ, दलहन, सब्जियाँ | बाढ़, कटाव और छोटी जोतें |
| बुंदेलखंड | चना, अरहर, उड़द, तिल | सूखा और जल-संकट |
| तराई | धान, गन्ना, गेहूँ | जलभराव और पारिस्थितिक दबाव |
| विंध्य | दलहन, तिलहन, मोटे अनाज | पठारी भूमि और सिंचाई की सीमाएँ |
14. क्षेत्रीय नामकरण का ऐतिहासिक आधार
उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रीय नाम प्राचीन जनपदों, मध्यकालीन राजनीतिक व्यवस्थाओं, स्थानीय शासक समूहों, भाषाई परंपराओं और प्राकृतिक भू-आकृतियों से विकसित हुए हैं। इन नामों को समझने से क्षेत्रीय इतिहास और संस्कृति का संबंध स्पष्ट होता है।
| क्षेत्रीय नाम | नामकरण/ऐतिहासिक आधार | प्रमुख पहचान |
|---|---|---|
| अवध | अयोध्या और ऐतिहासिक अवध राज्य/नवाबी शासन | नवाबी संस्कृति, अवधी भाषा |
| ब्रज | कृष्ण लीला एवं ब्रज सांस्कृतिक परंपरा | ब्रजभाषा, रासलीला |
| रुहेलखंड | रुहेला/रोहिला अफगान सरदारों का ऐतिहासिक प्रभाव | रामपुर, बरेली की ऐतिहासिक पहचान |
| बुंदेलखंड | बुंदेला राजवंश एवं क्षेत्रीय राजनीतिक इतिहास | किले, पठार, बुंदेली संस्कृति |
| तराई | हिमालय की तलहटी का नम एवं दलदली भूभाग | वन, घासभूमि, आर्द्र पारिस्थितिकी |
| दोआब | दो नदियों के बीच का भूभाग | गंगा-यमुना के बीच का मैदान |
| विंध्य | विंध्य पर्वत एवं पठारी भू-आकृति | पठार, खनिज और वन |
| पूर्वांचल | उत्तर प्रदेश का पूर्वी भौगोलिक-सांस्कृतिक भाग | भोजपुरी एवं पूर्वी लोकसंस्कृति |
प्राचीन ऐतिहासिक क्षेत्र और आधुनिक क्षेत्रीय पहचान
प्राचीन उत्तर भारत में कोसल, काशी, वत्स, पांचाल, शूरसेन और कुरु जैसे महाजनपदों का उल्लेख मिलता है। इनकी सीमाएँ आधुनिक जिलों या वर्तमान क्षेत्रीय वर्गीकरण से समान नहीं थीं। उदाहरण के लिए कोसल का केंद्र अयोध्या और श्रावस्ती क्षेत्र, वत्स का केंद्र कौशाम्बी तथा शूरसेन का केंद्र मथुरा था। इन प्राचीन राजनीतिक इकाइयों को आधुनिक अवध, ब्रज या पूर्वांचल के साथ पूरी तरह समान नहीं मानना चाहिए।
15. क्षेत्रीय सांस्कृतिक विशेषताएँ
| क्षेत्र | भाषा/बोली | लोक-सांस्कृतिक पहचान | प्रमुख केंद्र |
|---|---|---|---|
| पश्चिमी उत्तर प्रदेश | खड़ी बोली, ब्रज का प्रभाव | रागिनी, रसिया, ग्रामीण लोकगीत | मेरठ, सहारनपुर, मथुरा |
| मध्यांचल | अवधी, खड़ी बोली | अवधी लोकगीत, चिकनकारी, नवाबी संस्कृति | लखनऊ, कन्नौज, रायबरेली |
| पूर्वांचल | भोजपुरी, अवधी और अन्य बोलियाँ | बिरहा, कजरी, चैता, सोहर | वाराणसी, गोरखपुर, आजमगढ़ |
| बुंदेलखंड | बुंदेली | आल्हा, राई, दीवारी | झाँसी, महोबा, बाँदा |
| ब्रज | ब्रजभाषा | रासलीला, रसिया, लट्ठमार होली | मथुरा, वृंदावन, बरसाना |
| अवध | अवधी | रामलीला, लोकगीत, नवाबी तहजीब | अयोध्या, लखनऊ |
| रुहेलखंड | खड़ी बोली और स्थानीय बोलियाँ | क्षेत्रीय लोकगीत, नवाबी/रुहेला विरासत | बरेली, रामपुर |
| तराई | हिंदी, अवधी, भोजपुरी तथा स्थानीय भाषाई रूप | थारू समुदाय की लोक परंपराएँ | लखीमपुर खीरी, बहराइच |
| विंध्य | हिंदी एवं स्थानीय बोलियाँ | आदिवासी एवं वनवासी लोकपरंपराएँ | मिर्जापुर, सोनभद्र |
16. क्षेत्रीय आर्थिक पहचान एवं विकास की चुनौतियाँ
उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों, बाजार तक पहुँच, परिवहन, औद्योगिक निवेश, सिंचाई और मानव संसाधन की उपलब्धता में अंतर है। इन अंतरों का प्रभाव क्षेत्रीय आय, रोजगार, कृषि उत्पादकता और जीवन स्तर पर पड़ता है।
क्षेत्रवार आर्थिक विशेषताएँ
| क्षेत्र | आर्थिक गतिविधियाँ | विकास की प्रमुख आवश्यकता |
|---|---|---|
| पश्चिमांचल | गन्ना, चीनी, डेयरी, खेल सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक्स, NCR आधारित सेवाएँ | जल प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण, संतुलित नगरीकरण |
| मध्यांचल | प्रशासन, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र, कृषि, इत्र एवं हस्तशिल्प | औद्योगिक विस्तार और कृषि मूल्य संवर्धन |
| पूर्वांचल | धान-गेहूँ, वस्त्र, हस्तशिल्प, धार्मिक पर्यटन, छोटे उद्योग | बाढ़ प्रबंधन, रोजगार, स्वास्थ्य एवं शिक्षा |
| बुंदेलखंड | दलहन, तिलहन, खनिज, पत्थर, पर्यटन, ऊर्जा | जल संरक्षण, सिंचाई, सूखा प्रबंधन |
| तराई | धान, गन्ना, वन-आधारित गतिविधियाँ, पर्यटन | पारिस्थितिक संरक्षण और सतत कृषि |
| विंध्य | खनिज, ऊर्जा, वन, कृषि और पर्यटन | स्थानीय रोजगार, जल उपलब्धता और पर्यावरण संरक्षण |
क्षेत्रीय विकास असंतुलन के कारण
- प्राकृतिक संसाधनों और जल उपलब्धता में अंतर।
- सिंचाई एवं परिवहन सुविधाओं का असमान वितरण।
- औद्योगिक निवेश और बाजारों तक पहुँच में अंतर।
- शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कौशल विकास के अवसरों में असमानता।
- बाढ़, सूखा, जलभराव और पर्यावरणीय जोखिमों का क्षेत्रवार अलग प्रभाव।
- ग्रामीण रोजगार की सीमित उपलब्धता और मौसमी पलायन।
क्षेत्रीय विकास के प्रमुख उपाय
- क्षेत्र विशेष की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार विकास योजना।
- बुंदेलखंड में जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई और सूखा-सहिष्णु कृषि।
- पूर्वांचल में बाढ़ नियंत्रण, जल निकासी, खाद्य प्रसंस्करण और रोजगार सृजन।
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भूजल संरक्षण और औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण।
- तराई और विंध्य क्षेत्रों में जैव विविधता एवं वन संसाधनों का संरक्षण।
- क्षेत्रीय उत्पादों के लिए भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन सुविधाओं का विस्तार।
17. मानचित्र आधारित अध्ययन
मानचित्र आधारित प्रश्नों के लिए उत्तर प्रदेश को उत्तर से दक्षिण और पश्चिम से पूर्व की दिशा में समझें। नीचे दिया गया रेखाचित्र केवल अवधारणा समझाने के लिए है, यह सटीक भौगोलिक मानचित्र नहीं है।
मानचित्र पर याद रखने योग्य नदी-क्षेत्र संबंध
- गंगा-यमुना के बीच – दोआब।
- नेपाल सीमा के समानांतर – तराई।
- दक्षिणी पठारी भाग – बुंदेलखंड एवं विंध्य क्षेत्र।
- मथुरा-वृंदावन – ब्रज क्षेत्र।
- लखनऊ-अयोध्या – अवध की प्रमुख सांस्कृतिक पहचान।
- बरेली-रामपुर-मुरादाबाद – रुहेलखंड की प्रमुख ऐतिहासिक पहचान।
- वाराणसी-गोरखपुर-आजमगढ़ – पूर्वांचल के प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र।
क्षेत्र और विशेषता का त्वरित मिलान
| क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|
| बुंदेलखंड | पठार, सूखा, दलहन-तिलहन |
| तराई | नमी, घासभूमि, वन, बाढ़ |
| दोआब | गंगा और यमुना के बीच का मैदान |
| ब्रज | कृष्ण भक्ति, रासलीला, ब्रजभाषा |
| अवध | नवाबी संस्कृति, अवधी भाषा |
| रुहेलखंड | रुहेला इतिहास, रामपुर-बरेली |
| विंध्य | पठारी भूभाग, खनिज, वन |
| पूर्वांचल | भोजपुरी संस्कृति, नदी मैदान |
18. Quick Revision – एक नजर में
ऐतिहासिक-सांस्कृतिक क्षेत्र: अवध, ब्रज, रुहेलखंड।
भौगोलिक क्षेत्र: तराई, दोआब, विंध्य।
कृषि-जलवायु वर्गीकरण: नौ कृषि-जलवायु क्षेत्र।
- पश्चिमांचल – गन्ना, चीनी उद्योग, NCR, खेल सामग्री।
- मध्यांचल – लखनऊ, कानपुर, कन्नौज और प्रशासनिक-औद्योगिक गतिविधियाँ।
- पूर्वांचल – भोजपुरी, धान-गेहूँ, बाढ़ की समस्या, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत।
- बुंदेलखंड – सात जिले, पठारी भूभाग, जल-संकट, दलहन एवं तिलहन।
- रुहेलखंड – रुहेला इतिहास, बरेली और रामपुर।
- अवध – अयोध्या, लखनऊ, अवधी भाषा, नवाबी संस्कृति।
- तराई – नेपाल सीमा, नमी, वन और घासभूमि।
- ब्रज – मथुरा, वृंदावन, ब्रजभाषा और रासलीला।
- दोआब – गंगा और यमुना के बीच का क्षेत्र।
- विंध्य – मिर्जापुर, सोनभद्र, पठार और खनिज।
- कृषि-जलवायु क्षेत्र – कुल नौ।
19. महत्वपूर्ण अभ्यास प्रश्न – 50 MCQ
सभी प्रश्न मौलिक अभ्यास प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न के साथ सही उत्तर और व्याख्या दी गई है।
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इस नीतिगत वर्गीकरण में पश्चिमांचल, मध्यांचल, पूर्वांचल और बुंदेलखंड चार व्यापक क्षेत्र हैं। यह प्रशासनिक मंडल व्यवस्था नहीं है।
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उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में झाँसी, जालौन, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा, बाँदा और चित्रकूट शामिल हैं।
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महोबा उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के सात जिलों में से एक है।
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दो नदियों के बीच स्थित भूभाग को दोआब कहा जाता है। गंगा-यमुना दोआब उत्तर प्रदेश का महत्वपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र है।
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मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और नंदगाँव ब्रज संस्कृति के प्रमुख केंद्र हैं।
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रुहेलखंड का नामकरण रुहेला अफगान समूहों और उनके ऐतिहासिक राजनीतिक प्रभाव से जुड़ा है।
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अवधी अवध क्षेत्र की प्रमुख सांस्कृतिक भाषा है। तुलसीदास की रामचरितमानस अवधी भाषा की महत्वपूर्ण साहित्यिक कृति है।
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तराई हिमालय की तलहटी का नम क्षेत्र है, जहाँ घासभूमि, वन, दलदली भूमि और जलभराव की स्थितियाँ मिलती हैं।
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बुंदेलखंड में पठारी एवं चट्टानी भूभाग, अनिश्चित वर्षा और जल उपलब्धता की चुनौती प्रमुख है।
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मिर्जापुर और सोनभद्र विंध्य क्षेत्र के प्रमुख भौगोलिक संदर्भ हैं। प्रयागराज का दक्षिणी भाग भी विंध्य-बघेलखंड संक्रमण से संबंधित है।
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चना, अरहर, उड़द, मूँग, तिल और सरसों जैसी फसलें बुंदेलखंड की कृषि में महत्वपूर्ण हैं।
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ब्रजभाषा का प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र मथुरा-वृंदावन और आसपास का ब्रज क्षेत्र है।
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राई बुंदेलखंड की प्रमुख लोकनृत्य परंपराओं में से एक है।
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आल्हा गायन बुंदेलखंड की वीरगाथात्मक लोकगायन परंपरा है।
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बरसाना ब्रज क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक स्थल है और लट्ठमार होली के लिए प्रसिद्ध है।
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तराई क्षेत्र हिमालय की तलहटी और नेपाल सीमा के निकट स्थित है।
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दुधवा राष्ट्रीय उद्यान लखीमपुर खीरी जिले में स्थित है और तराई के वन, घासभूमि तथा आर्द्र पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
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कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार बहराइच जिले में नेपाल सीमा के निकट स्थित है।
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दोआब दो नदियों के बीच स्थित भूभाग है। गंगा और यमुना के बीच का क्षेत्र गंगा-यमुना दोआब कहलाता है।
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बरेली रुहेलखंड का प्रमुख ऐतिहासिक एवं क्षेत्रीय केंद्र रहा है। रामपुर भी रुहेला इतिहास से जुड़ा है।
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लखनऊ अवध के नवाबी शासन का प्रमुख राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र बना।
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लखनऊ का बड़ा इमामबाड़ा अवध की नवाबी स्थापत्य परंपरा का प्रसिद्ध उदाहरण है।
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भोजपुरी पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रमुख लोकभाषाओं में से एक है। इसका सांस्कृतिक विस्तार बिहार और अन्य क्षेत्रों तक भी है।
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घाघरा, राप्ती और अन्य नदियों के जलस्तर में मानसून के दौरान वृद्धि से पूर्वांचल के कई जिलों में बाढ़ और कटाव की समस्या उत्पन्न होती है।
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वाराणसी पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और हस्तशिल्प केंद्र है।
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कन्नौज पारंपरिक इत्र निर्माण और सुगंध उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। यह मध्य उत्तर प्रदेश की विशिष्ट आर्थिक पहचान है।
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मेरठ खेल सामग्री एवं खेल उपकरण निर्माण के लिए प्रसिद्ध है।
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मुरादाबाद पीतल और धातु के हस्तशिल्प उत्पादों के लिए प्रसिद्ध है।
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अनियमित मानसूनी वर्षा, चट्टानी भूभाग, तेज सतही बहाव और सीमित जलधारण क्षमता जल-संकट को बढ़ाते हैं।
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मिर्जापुर और सोनभद्र क्षेत्र में खनिज, पत्थर, ऊर्जा और वन संसाधनों का विशेष महत्व है।
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ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मथुरा-वृंदावन और आसपास के कृष्ण लीला स्थलों से संबंधित है।
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तराई क्षेत्र में नमी, जलभराव, घासभूमि और नम वन पारिस्थितिकी की प्रमुख विशेषताएँ हैं।
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IT एवं ITES नीति के वर्गीकरण में गौतम बुद्ध नगर पश्चिमांचल में शामिल है।
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कन्नौज मध्यांचल के नीतिगत वर्गीकरण में शामिल है और इत्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।
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गोरखपुर पूर्वांचल के नीतिगत वर्गीकरण में शामिल है और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख केंद्र है।
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रुहेलखंड की ऐतिहासिक पहचान रुहेला/रोहिला सरदारों से जुड़ी है।
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लखनऊ अवध के नवाबों का प्रमुख राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र बना।
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गंगा और यमुना का संगम प्रयागराज के निकट होता है। दोआब का पूर्वी विस्तार इसी संगम क्षेत्र तक समझा जाता है।
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कृषि-जलवायु वर्गीकरण में मिट्टी, तापमान, वर्षा, जल उपलब्धता और फसल प्रणाली जैसे कारक देखे जाते हैं।
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दक्षिण-पश्चिमी अर्द्ध-शुष्क कृषि-जलवायु क्षेत्र में आगरा, मथुरा, अलीगढ़ और आसपास के जिले शामिल किए जाते हैं।
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कन्नौज पारंपरिक इत्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। मेरठ खेल सामग्री और मुरादाबाद पीतल शिल्प के लिए जाना जाता है।
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दोआब दो नदियों के बीच स्थित भूभाग है। ब्रज, अवध और तराई क्षेत्रीय पहचान हैं, प्रशासनिक निकाय नहीं।
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फतेहपुर बुंदेलखंड के सात जिलों में शामिल नहीं है। यह प्रयागराज मंडल के अंतर्गत आता है।
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रामपुर ऐतिहासिक रुहेला शासन और नवाबी विरासत से जुड़ा है।
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रासलीला कृष्ण भक्ति और ब्रज की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा से गहराई से जुड़ी है।
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बिरहा, कजरी और चैता पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रमुख लोकगायन परंपराओं में शामिल हैं।
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तालाबों, चेकडैम, जलग्रहण प्रबंधन और वर्षा जल संचयन से सतही जल संरक्षण तथा भूजल पुनर्भरण में मदद मिलती है।
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अधिक नमी, जल उपलब्धता और उपजाऊ मिट्टी के कारण तराई क्षेत्र में धान की खेती महत्वपूर्ण है।
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तमिल दक्षिण भारत की द्रविड़ भाषा है। रुहेलखंड में हिंदी और स्थानीय पश्चिमी हिंदी भाषाई रूपों का प्रभाव मिलता है।
1. उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय पहचान और प्रशासनिक सीमा हमेशा समान होती है।
2. तराई एक भौगोलिक-पारिस्थितिक क्षेत्र है।
3. कृषि-जलवायु क्षेत्र और विकासात्मक क्षेत्र अलग-अलग वर्गीकरण हो सकते हैं।
सही विकल्प चुनिए।
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क्षेत्रीय पहचान हमेशा प्रशासनिक सीमाओं से मेल नहीं खाती। तराई भौगोलिक-पारिस्थितिक क्षेत्र है और कृषि-जलवायु वर्गीकरण का उद्देश्य विकासात्मक क्षेत्रीय वर्गीकरण से अलग है।
20. References एवं Data Authentication
इस अध्याय के क्षेत्रीय वर्गीकरण, कृषि-जलवायु क्षेत्रों, बुंदेलखंड, तराई, ब्रज, दोआब और विंध्य से संबंधित तथ्यों के सत्यापन के लिए निम्न सरकारी स्रोत उपयोगी हैं।
- उत्तर प्रदेश IT एवं ITES नीति 2022 – पश्चिमांचल, मध्यांचल, पूर्वांचल और बुंदेलखंड का जिला-वार नीतिगत वर्गीकरण।
- उत्तर प्रदेश निवेश मित्र – कृषि एवं कृषि-जलवायु क्षेत्र – नौ कृषि-जलवायु क्षेत्रों का वर्गीकरण।
- भारत मौसम विज्ञान विभाग, लखनऊ – उत्तर प्रदेश के कृषि-मौसम संबंधी क्षेत्रीय विवरण।
- Invest UP – बुंदेलखंड क्षेत्र – बुंदेलखंड के सात जिले, कृषि एवं विकास संबंधी विवरण।
- उत्तर प्रदेश जल निगम/ग्रामीण पेयजल – बुंदेलखंड-विंध्य परियोजना – जल-संकट एवं क्षेत्रीय जलापूर्ति संबंधी विवरण।
- प्रयागराज जिला प्रशासन – भूगोल – दोआब, अवध, बुंदेलखंड, पूर्वांचल और बघेलखंड के क्षेत्रीय संबंध।
- उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद – ब्रज क्षेत्र की सांस्कृतिक और विरासत पहचान।
- उत्तर प्रदेश इको-टूरिज्म बोर्ड – कतर्नियाघाट – तराई पारिस्थितिकी एवं वन्यजीव।
- उत्तर प्रदेश इको-टूरिज्म बोर्ड – सोहगीबरवा – तराई क्षेत्र की जैव विविधता।
- उत्तर प्रदेश इको-टूरिज्म बोर्ड – दुधवा राष्ट्रीय उद्यान – तराई वन एवं घासभूमि।
- उत्तर प्रदेश सरकार – City/Place Guide – राज्य की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक पहचान।
- उत्तर प्रदेश सरकार – इतिहास – ऐतिहासिक क्षेत्रीय एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि।
- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय – उत्तर प्रदेश रिपोर्ट – आर्थिक एवं कृषि-जलवायु क्षेत्रों का ऐतिहासिक संदर्भ।
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) – उत्तर प्रदेश की कृषि-जलवायु विविधता और क्षेत्रीय कृषि चुनौतियाँ।
21. Noble Exam City – अन्य अध्ययन सामग्री
उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान की तैयारी के लिए अन्य विषयों के नोट्स, क्विक रिवीजन, One Liner और Mock Test भी पढ़ें।
Notes, Quick Revision, One Liner, PYQ एवं Mock Test के लिए Noble Exam City का अध्ययन सामग्री पेज देखें।
