उत्तर प्रदेश के प्रमुख क्षेत्र एवं क्षेत्रीय पहचान | UP GK Notes

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NOBLE EXAM CITY UP GK MASTER SERIES UNIT 01

अध्याय 7 – उत्तर प्रदेश के प्रमुख क्षेत्र एवं क्षेत्रीय पहचान

Regional Divisions and Regional Identity

पश्चिमांचल | मध्यांचल | पूर्वांचल | बुंदेलखंड | अवध | ब्रज | रुहेलखंड

Advanced Level Notes 50 Practice MCQs UPPSC • UPSSSC • RO/ARO • ASO/ARO

1. उत्तर प्रदेश का क्षेत्रीय विभाजन : परिचय

उत्तर प्रदेश भारत के उत्तरी भाग में स्थित एक विशाल एवं भौगोलिक-सांस्कृतिक विविधता वाला राज्य है। राज्य का अधिकांश भाग गंगा के विशाल जलोढ़ मैदान में आता है, जबकि दक्षिणी भाग में बुंदेलखंड का पठारी क्षेत्र तथा विंध्य पर्वतीय भू-भाग मिलता है। उत्तर में हिमालय की तराई से लगा उप-हिमालयी क्षेत्र है। नदियों, मिट्टी, जलवायु, कृषि, इतिहास, भाषा, लोक-संस्कृति और आर्थिक गतिविधियों में अंतर के कारण उत्तर प्रदेश में अनेक क्षेत्रीय पहचान विकसित हुई हैं।

क्षेत्रीय विभाजन का अर्थ किसी राज्य को उसकी प्राकृतिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, आर्थिक अथवा प्रशासनिक विशेषताओं के आधार पर अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में समझना है। उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय पहचान के लिए एक ही सर्वमान्य और कानूनी रूप से निश्चित सूची नहीं है। अलग-अलग सरकारी विभाग अलग-अलग उद्देश्य से अलग क्षेत्रीय वर्गीकरण का उपयोग करते हैं।

अध्याय का मूल सिद्धांत: पश्चिमांचल, मध्यांचल, पूर्वांचल और बुंदेलखंड व्यापक विकासात्मक क्षेत्र हैं। अवध, ब्रज, रुहेलखंड, तराई, दोआब और विंध्य ऐतिहासिक, सांस्कृतिक या भौगोलिक पहचान वाले क्षेत्र हैं। कृषि-जलवायु क्षेत्र इन सबसे अलग वैज्ञानिक वर्गीकरण है।

क्षेत्रीय विभाजन के प्रमुख आधार

  • भौतिक आधार: स्थलाकृति, नदियाँ, मिट्टी, जलवायु, वर्षा, वनस्पति और प्राकृतिक संसाधन।
  • ऐतिहासिक आधार: प्राचीन जनपद, राज्य, रियासतें, नवाबी शासन और औपनिवेशिक प्रशासन।
  • सांस्कृतिक आधार: भाषा, बोलियाँ, लोकगीत, लोकनृत्य, त्योहार, भोजन, स्थापत्य और धार्मिक परंपराएँ।
  • आर्थिक आधार: कृषि, उद्योग, व्यापार, परिवहन, खनिज और रोजगार की प्रकृति।
  • प्रशासनिक आधार: विकास योजनाओं, सरकारी नीतियों और प्रशासनिक सुविधा के लिए अपनाया गया क्षेत्रीय वर्गीकरण।

क्षेत्रीय पहचान और प्रशासनिक इकाई में अंतर

आधारक्षेत्रीय पहचानप्रशासनिक इकाई
स्वरूपभौगोलिक, ऐतिहासिक या सांस्कृतिक पहचानसरकारी प्रशासन के लिए निर्धारित इकाई
उदाहरणब्रज, अवध, रुहेलखंड, तराईमंडल, जिला, तहसील
सीमासंदर्भ के अनुसार बदल सकती हैसरकारी अधिसूचना से निर्धारित
उद्देश्यक्षेत्र की पहचान और अध्ययनप्रशासन एवं सेवा वितरण

2. उत्तर प्रदेश का व्यापक क्षेत्रीय वर्गीकरण

उत्तर प्रदेश की विकास एवं निवेश संबंधी नीतियों में राज्य को व्यापक रूप से चार क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है। इस वर्गीकरण में पश्चिमांचल, मध्यांचल, पूर्वांचल और बुंदेलखंड शामिल हैं। उत्तर प्रदेश की IT एवं ITES नीति 2022 के परिशिष्ट में जिलों का क्षेत्रवार वर्गीकरण दिया गया है। यह एक नीतिगत वर्गीकरण है, न कि संविधान द्वारा निर्धारित स्थायी भौगोलिक सीमा।

व्यापक क्षेत्रक्षेत्रीय पहचानमुख्य विशेषता
पश्चिमांचलपश्चिमी उत्तर प्रदेशकृषि, गन्ना, डेयरी, उद्योग, NCR प्रभाव
मध्यांचलमध्य उत्तर प्रदेशप्रशासनिक, औद्योगिक, कृषि एवं सेवा क्षेत्र
पूर्वांचलपूर्वी उत्तर प्रदेशघनी आबादी, कृषि, सांस्कृतिक विविधता और नदी मैदान
बुंदेलखंडदक्षिणी पठारी क्षेत्रपठारी भू-भाग, जल-संकट, दलहन एवं तिलहन
परीक्षा में सावधानी: चार क्षेत्रीय विकासात्मक भागों को 18 मंडलों का विकल्प न समझें। मंडल प्रशासनिक इकाइयाँ हैं, जबकि पश्चिमांचल आदि नीतिगत एवं क्षेत्रीय वर्गीकरण हैं।

3. पश्चिमी उत्तर प्रदेश (Western Uttar Pradesh / Paschimanchal)

उत्तर प्रदेश का पश्चिमी भाग राज्य का महत्वपूर्ण कृषि, औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्र है। दिल्ली तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से निकटता के कारण इस क्षेत्र में नगरीकरण, परिवहन, उद्योग, आवास और सेवा क्षेत्र का तेजी से विस्तार हुआ है। गंगा-यमुना दोआब का बड़ा भाग पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आता है।

3.1 पश्चिमांचल के जिले

उत्तर प्रदेश की IT एवं ITES नीति 2022 के क्षेत्रीय वर्गीकरण में पश्चिमांचल के अंतर्गत निम्नलिखित जिलों को रखा गया है:

गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, मथुरा, अलीगढ़, हाथरस, कासगंज, एटा, मुरादाबाद, बिजनौर, संभल, रामपुर, अमरोहा, मेरठ, बुलंदशहर, हापुड़, बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, बरेली, बदायूँ, पीलीभीत और शाहजहाँपुर।

यह सूची नीतिगत वर्गीकरण पर आधारित है। पारंपरिक सांस्कृतिक या ऐतिहासिक परिभाषाओं में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीमा इससे अलग हो सकती है।

3.2 भौतिक विशेषताएँ

  • गंगा और यमुना नदियों के बीच विस्तृत जलोढ़ मैदान।
  • दोआब क्षेत्र में उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी का व्यापक विस्तार।
  • नहरों, नलकूपों और अन्य सिंचाई साधनों का महत्वपूर्ण योगदान।
  • कुछ दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में अपेक्षाकृत कम वर्षा और अर्द्ध-शुष्क दशाएँ।
  • उत्तर-पश्चिमी भाग में तराई से संबंधित नम एवं उपजाऊ क्षेत्र भी मिलते हैं।

3.3 कृषि एवं आर्थिक पहचान

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गेहूँ, गन्ना, धान, आलू, सरसों और अन्य फसलें महत्वपूर्ण हैं। गन्ना आधारित चीनी मिल उद्योग, गुड़ उद्योग, डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं। सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, बिजनौर और आसपास के क्षेत्रों में गन्ना उत्पादन एवं चीनी उद्योग का विशेष महत्व है।

मेरठ खेल सामग्री एवं खेल उपकरण निर्माण के लिए प्रसिद्ध है। गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स तथा सेवा क्षेत्र का विस्तार हुआ है। आगरा पर्यटन, चमड़ा और जूता उद्योग के लिए जाना जाता है। मुरादाबाद पीतल एवं धातु हस्तशिल्प से जुड़ा प्रमुख केंद्र है।

3.4 सांस्कृतिक पहचान

  • खड़ी बोली पश्चिमी उत्तर प्रदेश की प्रमुख भाषाई पहचान है।
  • ब्रज भाषा का प्रभाव मथुरा, वृंदावन और आसपास के क्षेत्रों में मिलता है।
  • रागिनी, रसिया, लोकगीत और ग्रामीण मेलों की परंपरा क्षेत्रीय संस्कृति का हिस्सा है।
  • कृषि और पशुपालन आधारित ग्रामीण जीवन यहाँ की सामाजिक संरचना में महत्वपूर्ण है।

3.5 प्रमुख चुनौतियाँ

  • भूजल का अत्यधिक दोहन और जलस्तर में गिरावट।
  • औद्योगिक प्रदूषण तथा नगरीय अपशिष्ट प्रबंधन।
  • दिल्ली-NCR के विस्तार से भूमि उपयोग में तेजी से बदलाव।
  • गंगा और यमुना के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मौसमी जोखिम।
  • कृषि में फसल विविधीकरण और टिकाऊ जल प्रबंधन की आवश्यकता।

4. मध्य उत्तर प्रदेश (Madhyanchal / Central Uttar Pradesh)

मध्य उत्तर प्रदेश राज्य का प्रशासनिक, कृषि और औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण भाग है। लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, रायबरेली, हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, इटावा, औरैया और कन्नौज जैसे जिले इस क्षेत्र की प्रमुख पहचान बनाते हैं। यह क्षेत्र गंगा के मध्य मैदानी भाग का हिस्सा है।

4.1 मध्यांचल के जिले

उत्तर प्रदेश की IT एवं ITES नीति 2022 के वर्गीकरण के अनुसार मध्यांचल में मुख्यतः निम्नलिखित जिले रखे गए हैं:

कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज, लखनऊ, हरदोई, लखीमपुर खीरी, रायबरेली, सीतापुर और उन्नाव।

4.2 भौतिक एवं कृषि विशेषताएँ

  • मुख्यतः समतल जलोढ़ मैदान।
  • गोमती, गंगा, सई, रामगंगा तथा अन्य नदियों का प्रभाव।
  • गेहूँ, धान, दलहन, तिलहन, आलू और अन्य फसलें।
  • नहरों और भूजल आधारित सिंचाई का महत्वपूर्ण स्थान।
  • कुछ क्षेत्रों में जलभराव तथा कुछ क्षेत्रों में भूजल दबाव की समस्या।

4.3 आर्थिक एवं सांस्कृतिक पहचान

लखनऊ राज्य की राजधानी और प्रमुख प्रशासनिक केंद्र है। कानपुर ऐतिहासिक रूप से प्रमुख औद्योगिक नगर रहा है। कन्नौज इत्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। लखीमपुर खीरी में कृषि एवं चीनी उद्योग का महत्व है। रायबरेली और उन्नाव में कृषि के साथ औद्योगिक गतिविधियाँ भी विकसित हुई हैं।

अवधी भाषा और संस्कृति का प्रभाव लखनऊ, बाराबंकी, सीतापुर, रायबरेली, उन्नाव, सुल्तानपुर तथा आसपास के क्षेत्रों में मिलता है। हालांकि अवधी सांस्कृतिक क्षेत्र की सीमा मध्यांचल की नीतिगत सीमा के समान नहीं है।

महत्वपूर्ण अंतर: मध्यांचल और अवध एक-दूसरे के समानार्थी नहीं हैं। मध्यांचल एक व्यापक विकासात्मक क्षेत्र है, जबकि अवध ऐतिहासिक-सांस्कृतिक पहचान वाला क्षेत्र है।

5. पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं पूर्वांचल (Eastern Uttar Pradesh / Purvanchal)

उत्तर प्रदेश का पूर्वी भाग सामान्यतः पूर्वांचल कहलाता है। यह क्षेत्र गंगा के मध्य एवं निचले मैदानों से संबंधित है और बिहार की सीमा तक विस्तृत है। गंगा, घाघरा, राप्ती, गंडक, गोमती, सरयू तथा अन्य नदियों की उपस्थिति के कारण यहाँ का भूगोल और कृषि व्यवस्था अत्यंत नदी-आधारित है।

5.1 पूर्वांचल के जिले

राज्य की IT एवं ITES नीति 2022 के क्षेत्रीय वर्गीकरण में पूर्वांचल के अंतर्गत निम्न जिले सम्मिलित हैं:

अयोध्या, अम्बेडकर नगर, बाराबंकी, सुल्तानपुर, अमेठी, गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज, कुशीनगर, प्रयागराज, कौशाम्बी, फतेहपुर, प्रतापगढ़, वाराणसी, चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर, संत रविदास नगर (भदोही), सोनभद्र, आजमगढ़, बलिया, मऊ, गोंडा, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, बस्ती, संत कबीर नगर और सिद्धार्थनगर।

इस सूची में प्रयागराज, अयोध्या और मिर्जापुर जैसे सीमांत या संक्रमण क्षेत्र के जिले भी नीतिगत वर्गीकरण के अनुसार शामिल हैं। सांस्कृतिक पूर्वांचल की परिभाषा अलग हो सकती है।

5.2 भौतिक विशेषताएँ

  • गंगा और उसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित विस्तृत जलोढ़ मैदान।
  • घाघरा, राप्ती, गंडक और अन्य नदियों के कारण अनेक क्षेत्रों में बाढ़ का प्रभाव।
  • सामान्यतः पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी भागों की तुलना में अधिक आर्द्रता।
  • नदी तटीय क्षेत्रों में नई जलोढ़ मिट्टी और खादर भूमि का विकास।
  • निम्न एवं समतल भूभाग में जलभराव की समस्या कुछ जिलों में प्रमुख।

5.3 कृषि एवं आर्थिक पहचान

पूर्वांचल में धान, गेहूँ, दलहन, तिलहन, मक्का और सब्जियों की खेती महत्वपूर्ण है। कुछ क्षेत्रों में गन्ना, केला, आम और अन्य बागवानी फसलें भी उगाई जाती हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि, पशुपालन, छोटे उद्योग, हस्तशिल्प और प्रवासी श्रम का योगदान है।

5.4 सांस्कृतिक पहचान

  • भोजपुरी पूर्वांचल के बड़े भाग में बोली जाने वाली प्रमुख लोकभाषा है।
  • अवधी, बघेली प्रभाव वाले सीमांत क्षेत्र और अन्य स्थानीय बोलियाँ भी मिलती हैं।
  • कजरी, बिरहा, चैता, सोहर और लोकनाट्य परंपराएँ महत्वपूर्ण हैं।
  • वाराणसी संगीत, बनारसी वस्त्र, धार्मिक परंपराओं और शास्त्रीय कला का प्रमुख केंद्र है।
  • गोरखपुर, कुशीनगर, श्रावस्ती और सिद्धार्थनगर क्षेत्र बौद्ध एवं ऐतिहासिक विरासत से जुड़े हैं।

5.5 पूर्वांचल की प्रमुख चुनौतियाँ

  • घाघरा, राप्ती और अन्य नदियों से बाढ़ तथा कटाव।
  • कृषि जोतों का छोटा आकार और ग्रामीण रोजगार की चुनौती।
  • स्वास्थ्य, शिक्षा और औद्योगिक अवसरों का क्षेत्रीय असंतुलन।
  • कई क्षेत्रों में जलभराव और जल निकासी की समस्या।
  • स्थानीय स्तर पर गैर-कृषि रोजगार और मूल्य संवर्धन की आवश्यकता।

6. बुंदेलखंड क्षेत्र (Bundelkhand)

बुंदेलखंड उत्तर प्रदेश के दक्षिणी भाग में स्थित एक ऐतिहासिक एवं भौगोलिक क्षेत्र है। इसका विस्तार उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों में है। उत्तर प्रदेश वाला बुंदेलखंड मुख्यतः पठारी, चट्टानी और अपेक्षाकृत कम वर्षा वाला क्षेत्र है। इसकी पहचान वीरता, किलों, ऐतिहासिक राजवंशों, लोककला, जल-संकट और दलहन-तिलहन आधारित कृषि से जुड़ी है।

6.1 उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के सात जिले

झाँसी, जालौन, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा, बाँदा और चित्रकूट।

उत्तर प्रदेश सरकार की निवेश एवं जलापूर्ति संबंधी सामग्री में बुंदेलखंड के इन सात जिलों का उल्लेख किया गया है।

6.2 भौतिक संरचना

  • प्राचीन कठोर चट्टानों और पठारी भू-भाग का व्यापक प्रभाव।
  • ग्रेनाइट, गनीस और अन्य प्राचीन शैलों की उपस्थिति।
  • बेतवा, केन, धसान, पहूज और अन्य नदियाँ क्षेत्रीय जल व्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं।
  • कुछ भागों में उथली, पथरीली और कम जलधारण क्षमता वाली मिट्टी।
  • दक्षिण-पश्चिम मानसून पर निर्भरता तथा वर्षा की अनिश्चितता।

6.3 कृषि एवं आर्थिक पहचान

बुंदेलखंड में गेहूँ, चना, अरहर, उड़द, मूँग, तिल, सरसों और अन्य दलहन-तिलहन फसलें महत्वपूर्ण हैं। कृषि की उत्पादकता पर वर्षा, मिट्टी की गहराई, सिंचाई सुविधाओं और जल उपलब्धता का प्रभाव पड़ता है। पशुपालन, पत्थर एवं खनिज आधारित गतिविधियाँ, हस्तशिल्प और पर्यटन भी क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं।

6.4 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान

  • चंदेल शासकों की स्थापत्य परंपरा और खजुराहो से ऐतिहासिक सांस्कृतिक संबंध।
  • कालिंजर दुर्ग, झाँसी दुर्ग, देवगढ़ और चंदेलकालीन स्मारक।
  • रानी लक्ष्मीबाई और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियाँ।
  • आल्हा गायन और बुंदेली लोकगीतों की परंपरा।
  • राई, दीवारी और अन्य लोकनृत्य क्षेत्रीय संस्कृति के महत्वपूर्ण रूप हैं।

6.5 जल-संकट एवं विकास संबंधी चुनौतियाँ

बुंदेलखंड की प्रमुख समस्याओं में अनियमित वर्षा, सूखा, भूजल की सीमित उपलब्धता, वर्षा जल का तेज बहाव, मिट्टी का कटाव और कृषि की अनिश्चितता शामिल हैं। इस क्षेत्र में जल संरक्षण, तालाबों का पुनर्जीवन, चेकडैम, सिंचाई परियोजनाएँ, जलग्रहण प्रबंधन और सूखा-सहिष्णु कृषि पद्धतियों का विशेष महत्व है।

परीक्षा तथ्य: उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में सात जिले हैं। इसे मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड से अलग समझना चाहिए। संपूर्ण बुंदेलखंड क्षेत्र केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है।

7. रुहेलखंड क्षेत्र (Rohilkhand)

रुहेलखंड उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक-सांस्कृतिक क्षेत्र है। इसका नाम रुहेला/रोहिला अफगान समूहों और उनके ऐतिहासिक राजनीतिक प्रभाव से संबंधित माना जाता है। अठारहवीं शताब्दी में इस क्षेत्र में रुहेला सरदारों का प्रभाव रहा। बाद में यह क्षेत्र अवध, मराठा और अंग्रेजी सत्ता संघर्षों से भी प्रभावित हुआ।

7.1 प्रमुख क्षेत्रीय विस्तार

रुहेलखंड की परंपरागत पहचान मुख्यतः बरेली, बदायूँ, पीलीभीत, शाहजहाँपुर, रामपुर, मुरादाबाद, बिजनौर और अमरोहा के आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी है। संभल सहित कुछ क्षेत्रों को भी व्यापक रुहेलखंड संदर्भ में शामिल किया जाता है। इसकी कोई एक अधिसूचित जिला-सीमा नहीं है।

7.2 भौतिक एवं आर्थिक पहचान

  • रामगंगा और उसकी सहायक नदियों का प्रभाव।
  • तराई से लगे उत्तरी भागों में अधिक नमी और कृषि की अनुकूल परिस्थितियाँ।
  • गेहूँ, धान, गन्ना, दलहन और तिलहन की खेती।
  • बरेली में कृषि व्यापार, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य उद्योग।
  • मुरादाबाद में पीतल एवं धातु हस्तशिल्प की पहचान।
  • रामपुर की ऐतिहासिक नवाबी विरासत और सांस्कृतिक पहचान।

7.3 ऐतिहासिक महत्त्व

रुहेलखंड का इतिहास रुहेला सरदारों, रामपुर रियासत और अठारहवीं शताब्दी के सत्ता संघर्षों से जुड़ा है। रामपुर रियासत ने क्षेत्रीय राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ध्यान दें: रुहेलखंड कोई वर्तमान मंडल या जिला नहीं है। बरेली और मुरादाबाद मंडल इसके प्रमुख प्रशासनिक संदर्भ हैं, लेकिन ऐतिहासिक रुहेलखंड की सीमाएँ इन मंडलों की सीमाओं से पूरी तरह समान नहीं हैं।

8. अवध क्षेत्र (Awadh)

अवध उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र है। इसका नाम प्राचीन अयोध्या से संबंधित माना जाता है। मध्यकाल में अवध एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और राजनीतिक क्षेत्र रहा। मुगल काल में सूबा अवध तथा बाद में अवध के नवाबी शासन ने इस क्षेत्र की राजनीतिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य पहचान को विकसित किया।

8.1 अवध के प्रमुख क्षेत्र

अवध की सांस्कृतिक पहचान मुख्यतः लखनऊ, अयोध्या, बाराबंकी, सुल्तानपुर, अमेठी, रायबरेली, प्रतापगढ़, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी है। लखीमपुर खीरी तथा कुछ अन्य सीमांत क्षेत्रों का संबंध संदर्भ के अनुसार अवध और तराई दोनों से जोड़ा जा सकता है।

8.2 अवध की ऐतिहासिक पहचान

  • अयोध्या प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र।
  • लखनऊ अवध के नवाबी शासन का प्रमुख केंद्र।
  • अवध की नवाबी स्थापत्य कला, इमामबाड़े, दरवाजे और महल।
  • 1856 में अंग्रेजों द्वारा अवध का विलय।
  • 1857 के विद्रोह में लखनऊ, अवध और आसपास के क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका।

8.3 भाषा एवं लोक-संस्कृति

अवधी भाषा इस क्षेत्र की प्रमुख सांस्कृतिक पहचान है। रामचरितमानस की भाषा अवधी है। तुलसीदास की साहित्यिक परंपरा, लोकगीत, बिरहा, कजरी, सोहर और विवाह गीत अवध की सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण अंग हैं। लखनऊ की तहजीब, अदब, पाककला और चिकनकारी ने अवध को विशिष्ट पहचान दी है।

8.4 आर्थिक पहचान

अवध क्षेत्र में धान, गेहूँ, गन्ना, दलहन, तिलहन और बागवानी फसलें उगाई जाती हैं। लखनऊ प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा क्षेत्र और उद्योग का बड़ा केंद्र है। बाराबंकी, सुल्तानपुर और रायबरेली में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का विशेष महत्व है।

9. तराई क्षेत्र (Terai Region)

तराई उत्तर प्रदेश के उत्तरी भाग में नेपाल सीमा के समानांतर फैला नम, उपजाऊ और पारिस्थितिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। हिमालय की तलहटी के निकट स्थित होने के कारण यहाँ वर्षा, नमी, नदियों, भूजल और वनस्पति का विशेष प्रभाव मिलता है। तराई का भौगोलिक क्षेत्र उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड, बिहार और नेपाल तक विभिन्न रूपों में विस्तृत है।

9.1 उत्तर प्रदेश में तराई के प्रमुख जिले

तराई की व्यापक पहचान में पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, महाराजगंज तथा आसपास के उत्तरी जिलों के हिस्से शामिल होते हैं। कृषि-जलवायु वर्गीकरण में तराई/भाभर क्षेत्र की जिला सूची अलग हो सकती है।

9.2 प्राकृतिक विशेषताएँ

  • हिमालय की तलहटी से निकलने वाली नदियों और जलधाराओं का प्रभाव।
  • अधिक नमी, दलदली भूमि और कुछ क्षेत्रों में जलभराव।
  • घासभूमि, साल वन और विविध वन्यजीव।
  • उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और धान-गन्ना आधारित कृषि।
  • नेपाल सीमा से निकटता के कारण अंतरराष्ट्रीय सीमा संबंधी रणनीतिक महत्त्व।

9.3 प्रमुख पर्यावरणीय पहचान

दुधवा राष्ट्रीय उद्यान और दुधवा टाइगर रिजर्व तराई पारिस्थितिकी के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार बहराइच जिले में स्थित है। सोहगीबरवा वन्यजीव क्षेत्र महाराजगंज के निकट तराई जैव विविधता से संबंधित है। इन क्षेत्रों में बाघ, गैंडा, दलदली हिरण, घड़ियाल तथा अनेक पक्षी प्रजातियों के आवास मिलते हैं।

परीक्षा में पहचान: तराई = हिमालय की तलहटी, अधिक नमी, दलदली/घासभूमि, वन एवं वन्यजीव। इसे बुंदेलखंड के शुष्क पठारी भू-भाग से अलग समझें।

10. ब्रज क्षेत्र (Braj Region)

ब्रज उत्तर प्रदेश का विशिष्ट धार्मिक-सांस्कृतिक क्षेत्र है, जिसका संबंध भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और ब्रजभाषा से है। मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और नंदगाँव ब्रज संस्कृति के प्रमुख केंद्र हैं। ब्रज क्षेत्र की सांस्कृतिक सीमा आधुनिक जिला सीमाओं से पूरी तरह मेल नहीं खाती और इसका कुछ विस्तार राजस्थान तथा हरियाणा के क्षेत्रों तक भी माना जाता है।

10.1 उत्तर प्रदेश में ब्रज के प्रमुख क्षेत्र

  • मथुरा और वृंदावन।
  • गोवर्धन, बरसाना और नंदगाँव।
  • आगरा के कुछ क्षेत्र।
  • हाथरस और अलीगढ़ के कुछ सांस्कृतिक क्षेत्र।
  • फिरोजाबाद एवं आसपास के कुछ भागों में ब्रज भाषाई प्रभाव।

10.2 सांस्कृतिक विशेषताएँ

  • ब्रजभाषा और कृष्ण भक्ति साहित्य।
  • रासलीला और संकीर्तन परंपरा।
  • लट्ठमार होली, फूलों की होली और ब्रज की पारंपरिक होली।
  • मयूर नृत्य, चर्कुला और रसिया गायन।
  • गोवर्धन परिक्रमा और ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा।
  • माखन-मिश्री, पेड़ा और अन्य पारंपरिक खाद्य पहचान।

10.3 आर्थिक पहचान

ब्रज क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में धार्मिक पर्यटन, होटल, परिवहन, दुग्ध उत्पादन, मिठाई उद्योग, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यापार का महत्वपूर्ण स्थान है। मथुरा-वृंदावन का धार्मिक पर्यटन पूरे देश से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

11. दोआब क्षेत्र (Doab)

दोआब शब्द फारसी मूल का है। 'दो' का अर्थ दो और 'आब' का अर्थ पानी अथवा नदी है। दो नदियों के बीच स्थित भूभाग को दोआब कहा जाता है। उत्तर प्रदेश में गंगा और यमुना के बीच का भूभाग गंगा-यमुना दोआब कहलाता है।

11.1 गंगा-यमुना दोआब की भौगोलिक स्थिति

गंगा और यमुना के बीच का क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर प्रयागराज के निकट दोनों नदियों के संगम क्षेत्र तक विस्तृत है। दोआब का पश्चिमी भाग ऊपरी दोआब और पूर्वी भाग निचले दोआब के रूप में समझा जा सकता है। यह विभाजन भूगोल की व्याख्या के लिए उपयोगी है; इसके लिए जिलों की कोई एक स्थायी प्रशासनिक सूची नहीं है।

11.2 प्रमुख विशेषताएँ

  • दो नदियों के बीच स्थित जलोढ़ मैदान।
  • उपजाऊ मिट्टी और कृषि की अनुकूल परिस्थितियाँ।
  • गेहूँ, गन्ना, धान, आलू और अन्य फसलों का उत्पादन।
  • नहरों एवं नलकूपों से सिंचाई का व्यापक विकास।
  • नदी तटीय क्षेत्रों में खादर और ऊँचे भागों में बांगर भूमि का अंतर।
याद रखें: गंगा-यमुना दोआब दो नदियों के बीच का भूभाग है। प्रयागराज के निकट गंगा और यमुना का संगम होता है। संगम के आगे नदियों का संयुक्त प्रवाह गंगा के रूप में आगे बढ़ता है।

12. विंध्य क्षेत्र (Vindhyan Region)

उत्तर प्रदेश का विंध्य क्षेत्र दक्षिणी भाग में स्थित पठारी एवं पहाड़ी भू-भाग से जुड़ा है। मिर्जापुर और सोनभद्र इसके प्रमुख भौगोलिक संदर्भ हैं। प्रयागराज के दक्षिणी हिस्से तथा आसपास के क्षेत्रों में भी विंध्य एवं बघेलखंड की ओर संक्रमण मिलता है। यह क्षेत्र गंगा के विस्तृत मैदानी भूभाग से भौतिक संरचना में भिन्न है।

12.1 प्रमुख जिले एवं क्षेत्र

  • मिर्जापुर।
  • सोनभद्र।
  • प्रयागराज के दक्षिणी क्षेत्र से संबंधित कुछ भूभाग।
  • भदोही के कुछ वर्गीकरणों में विंध्य क्षेत्र से संबंध दिखता है।

12.2 भौतिक एवं आर्थिक विशेषताएँ

  • पठारी भू-भाग, पहाड़ियाँ और चट्टानी संरचनाएँ।
  • सोन, रिहंद, बेलन, कर्मनाशा और अन्य नदी प्रणालियों का प्रभाव।
  • खनिज संसाधनों, पत्थर, चूना पत्थर और ऊर्जा परियोजनाओं का महत्व।
  • वन, जैव विविधता और वन-आधारित आजीविका।
  • कुछ भागों में सिंचाई और पेयजल उपलब्धता की चुनौती।

12.3 सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक पहचान

मिर्जापुर का विंध्याचल धाम धार्मिक दृष्टि से प्रसिद्ध है। चुनार दुर्ग, कैमूर पर्वतीय क्षेत्र, प्रागैतिहासिक शैलचित्र और सोनभद्र के जीवाश्म स्थल इस क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक महत्व को बढ़ाते हैं।

13. उत्तर प्रदेश के नौ कृषि-जलवायु क्षेत्र

कृषि-जलवायु क्षेत्र (Agro-Climatic Zones) का निर्धारण मिट्टी, वर्षा, तापमान, जल उपलब्धता, फसल प्रणाली और कृषि की संभावनाओं के आधार पर किया जाता है। यह वर्गीकरण सामान्य क्षेत्रीय नामों से अलग है। उत्तर प्रदेश के कृषि और मौसम संबंधी सरकारी स्रोतों में नौ कृषि-जलवायु क्षेत्रों का उल्लेख मिलता है।

क्रमकृषि-जलवायु क्षेत्रमुख्य भौगोलिक पहचानप्रमुख फसलें/विशेषता
1भाभर-तराई क्षेत्रनेपाल सीमा से लगा उत्तरी भागधान, गेहूँ, गन्ना, दलहन
2पश्चिमी मैदानी क्षेत्रपश्चिमी गंगा मैदानगेहूँ, धान, गन्ना, सरसों
3मध्य-पश्चिमी मैदानी क्षेत्रबरेली-मुरादाबाद से संबंधित भागधान, गेहूँ, दलहन, गन्ना
4दक्षिण-पश्चिमी अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रआगरा-मथुरा-अलीगढ़ का भागबाजरा, गेहूँ, सरसों, दलहन
5मध्य मैदानी क्षेत्रकानपुर-लखनऊ और आसपासगेहूँ, धान, मक्का, दलहन
6बुंदेलखंड क्षेत्रदक्षिणी पठारी भागचना, उड़द, तिल, अरहर
7उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्रगोरखपुर-बस्ती-देवीपाटन का भागधान, गेहूँ, दलहन
8पूर्वी मैदानी क्षेत्रवाराणसी-आजमगढ़-अयोध्या का भागधान, गेहूँ, मक्का, दलहन
9विंध्य क्षेत्रमिर्जापुर-सोनभद्र एवं आसपासअरहर, ज्वार, बाजरा, तिल
अत्यंत महत्वपूर्ण: नौ कृषि-जलवायु क्षेत्रों की जिला-वार सीमाएँ अलग-अलग सरकारी दस्तावेजों और समय के अनुसार संशोधित हो सकती हैं। किसी जिले का कुछ भाग एक कृषि क्षेत्र और दूसरा भाग दूसरे क्षेत्र में हो सकता है। इसलिए कृषि-जलवायु क्षेत्र को जिला या मंडल की पूर्ण सीमा के समान न मानें।

क्षेत्रीय कृषि की तुलनात्मक पहचान

क्षेत्रप्रमुख कृषि पहचानमुख्य चुनौती
पश्चिमी मैदानगन्ना, गेहूँ, धान, डेयरीभूजल दोहन और प्रदूषण
मध्य मैदानगेहूँ, धान, दलहन, आलूजलभराव और कृषि विविधीकरण
पूर्वी मैदानधान, गेहूँ, दलहन, सब्जियाँबाढ़, कटाव और छोटी जोतें
बुंदेलखंडचना, अरहर, उड़द, तिलसूखा और जल-संकट
तराईधान, गन्ना, गेहूँजलभराव और पारिस्थितिक दबाव
विंध्यदलहन, तिलहन, मोटे अनाजपठारी भूमि और सिंचाई की सीमाएँ

14. क्षेत्रीय नामकरण का ऐतिहासिक आधार

उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रीय नाम प्राचीन जनपदों, मध्यकालीन राजनीतिक व्यवस्थाओं, स्थानीय शासक समूहों, भाषाई परंपराओं और प्राकृतिक भू-आकृतियों से विकसित हुए हैं। इन नामों को समझने से क्षेत्रीय इतिहास और संस्कृति का संबंध स्पष्ट होता है।

क्षेत्रीय नामनामकरण/ऐतिहासिक आधारप्रमुख पहचान
अवधअयोध्या और ऐतिहासिक अवध राज्य/नवाबी शासननवाबी संस्कृति, अवधी भाषा
ब्रजकृष्ण लीला एवं ब्रज सांस्कृतिक परंपराब्रजभाषा, रासलीला
रुहेलखंडरुहेला/रोहिला अफगान सरदारों का ऐतिहासिक प्रभावरामपुर, बरेली की ऐतिहासिक पहचान
बुंदेलखंडबुंदेला राजवंश एवं क्षेत्रीय राजनीतिक इतिहासकिले, पठार, बुंदेली संस्कृति
तराईहिमालय की तलहटी का नम एवं दलदली भूभागवन, घासभूमि, आर्द्र पारिस्थितिकी
दोआबदो नदियों के बीच का भूभागगंगा-यमुना के बीच का मैदान
विंध्यविंध्य पर्वत एवं पठारी भू-आकृतिपठार, खनिज और वन
पूर्वांचलउत्तर प्रदेश का पूर्वी भौगोलिक-सांस्कृतिक भागभोजपुरी एवं पूर्वी लोकसंस्कृति

प्राचीन ऐतिहासिक क्षेत्र और आधुनिक क्षेत्रीय पहचान

प्राचीन उत्तर भारत में कोसल, काशी, वत्स, पांचाल, शूरसेन और कुरु जैसे महाजनपदों का उल्लेख मिलता है। इनकी सीमाएँ आधुनिक जिलों या वर्तमान क्षेत्रीय वर्गीकरण से समान नहीं थीं। उदाहरण के लिए कोसल का केंद्र अयोध्या और श्रावस्ती क्षेत्र, वत्स का केंद्र कौशाम्बी तथा शूरसेन का केंद्र मथुरा था। इन प्राचीन राजनीतिक इकाइयों को आधुनिक अवध, ब्रज या पूर्वांचल के साथ पूरी तरह समान नहीं मानना चाहिए।

15. क्षेत्रीय सांस्कृतिक विशेषताएँ

क्षेत्रभाषा/बोलीलोक-सांस्कृतिक पहचानप्रमुख केंद्र
पश्चिमी उत्तर प्रदेशखड़ी बोली, ब्रज का प्रभावरागिनी, रसिया, ग्रामीण लोकगीतमेरठ, सहारनपुर, मथुरा
मध्यांचलअवधी, खड़ी बोलीअवधी लोकगीत, चिकनकारी, नवाबी संस्कृतिलखनऊ, कन्नौज, रायबरेली
पूर्वांचलभोजपुरी, अवधी और अन्य बोलियाँबिरहा, कजरी, चैता, सोहरवाराणसी, गोरखपुर, आजमगढ़
बुंदेलखंडबुंदेलीआल्हा, राई, दीवारीझाँसी, महोबा, बाँदा
ब्रजब्रजभाषारासलीला, रसिया, लट्ठमार होलीमथुरा, वृंदावन, बरसाना
अवधअवधीरामलीला, लोकगीत, नवाबी तहजीबअयोध्या, लखनऊ
रुहेलखंडखड़ी बोली और स्थानीय बोलियाँक्षेत्रीय लोकगीत, नवाबी/रुहेला विरासतबरेली, रामपुर
तराईहिंदी, अवधी, भोजपुरी तथा स्थानीय भाषाई रूपथारू समुदाय की लोक परंपराएँलखीमपुर खीरी, बहराइच
विंध्यहिंदी एवं स्थानीय बोलियाँआदिवासी एवं वनवासी लोकपरंपराएँमिर्जापुर, सोनभद्र
भाषाई सावधानी: किसी बोली की सीमा हमेशा जिले की सीमा से मेल नहीं खाती। एक जिले में एक से अधिक भाषाई रूप मिल सकते हैं। इसलिए भाषा और क्षेत्र का मिलान सामान्य सांस्कृतिक पहचान के आधार पर करें, न कि कठोर प्रशासनिक सीमा के रूप में।

16. क्षेत्रीय आर्थिक पहचान एवं विकास की चुनौतियाँ

उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों, बाजार तक पहुँच, परिवहन, औद्योगिक निवेश, सिंचाई और मानव संसाधन की उपलब्धता में अंतर है। इन अंतरों का प्रभाव क्षेत्रीय आय, रोजगार, कृषि उत्पादकता और जीवन स्तर पर पड़ता है।

क्षेत्रवार आर्थिक विशेषताएँ

क्षेत्रआर्थिक गतिविधियाँविकास की प्रमुख आवश्यकता
पश्चिमांचलगन्ना, चीनी, डेयरी, खेल सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक्स, NCR आधारित सेवाएँजल प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण, संतुलित नगरीकरण
मध्यांचलप्रशासन, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र, कृषि, इत्र एवं हस्तशिल्पऔद्योगिक विस्तार और कृषि मूल्य संवर्धन
पूर्वांचलधान-गेहूँ, वस्त्र, हस्तशिल्प, धार्मिक पर्यटन, छोटे उद्योगबाढ़ प्रबंधन, रोजगार, स्वास्थ्य एवं शिक्षा
बुंदेलखंडदलहन, तिलहन, खनिज, पत्थर, पर्यटन, ऊर्जाजल संरक्षण, सिंचाई, सूखा प्रबंधन
तराईधान, गन्ना, वन-आधारित गतिविधियाँ, पर्यटनपारिस्थितिक संरक्षण और सतत कृषि
विंध्यखनिज, ऊर्जा, वन, कृषि और पर्यटनस्थानीय रोजगार, जल उपलब्धता और पर्यावरण संरक्षण

क्षेत्रीय विकास असंतुलन के कारण

  • प्राकृतिक संसाधनों और जल उपलब्धता में अंतर।
  • सिंचाई एवं परिवहन सुविधाओं का असमान वितरण।
  • औद्योगिक निवेश और बाजारों तक पहुँच में अंतर।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कौशल विकास के अवसरों में असमानता।
  • बाढ़, सूखा, जलभराव और पर्यावरणीय जोखिमों का क्षेत्रवार अलग प्रभाव।
  • ग्रामीण रोजगार की सीमित उपलब्धता और मौसमी पलायन।

क्षेत्रीय विकास के प्रमुख उपाय

  • क्षेत्र विशेष की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार विकास योजना।
  • बुंदेलखंड में जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई और सूखा-सहिष्णु कृषि।
  • पूर्वांचल में बाढ़ नियंत्रण, जल निकासी, खाद्य प्रसंस्करण और रोजगार सृजन।
  • पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भूजल संरक्षण और औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण।
  • तराई और विंध्य क्षेत्रों में जैव विविधता एवं वन संसाधनों का संरक्षण।
  • क्षेत्रीय उत्पादों के लिए भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन सुविधाओं का विस्तार।

17. मानचित्र आधारित अध्ययन

मानचित्र आधारित प्रश्नों के लिए उत्तर प्रदेश को उत्तर से दक्षिण और पश्चिम से पूर्व की दिशा में समझें। नीचे दिया गया रेखाचित्र केवल अवधारणा समझाने के लिए है, यह सटीक भौगोलिक मानचित्र नहीं है।

उत्तर ↑ नेपाल सीमा एवं तराई क्षेत्र ┌──────────────────────────────┐ │ पीलीभीत लखीमपुर बहराइच │ │ │ │ पश्चिमी मैदान पूर्वांचल │ │ मेरठ-मुजफ्फरनगर गोरखपुर │ │ सहारनपुर देवरिया │ │ │ │ दोआब मध्य मैदान │ │ गंगा-यमुना लखनऊ-कानपुर │ │ │ │ ब्रज क्षेत्र अवध क्षेत्र │ │ मथुरा-आगरा अयोध्या │ │ │ │ बुंदेलखंड विंध्य क्षेत्र│ │ झाँसी-बाँदा मिर्जापुर │ │ सोनभद्र │ └──────────────────────────────┘ ↓ दक्षिण

मानचित्र पर याद रखने योग्य नदी-क्षेत्र संबंध

  • गंगा-यमुना के बीच – दोआब।
  • नेपाल सीमा के समानांतर – तराई।
  • दक्षिणी पठारी भाग – बुंदेलखंड एवं विंध्य क्षेत्र।
  • मथुरा-वृंदावन – ब्रज क्षेत्र।
  • लखनऊ-अयोध्या – अवध की प्रमुख सांस्कृतिक पहचान।
  • बरेली-रामपुर-मुरादाबाद – रुहेलखंड की प्रमुख ऐतिहासिक पहचान।
  • वाराणसी-गोरखपुर-आजमगढ़ – पूर्वांचल के प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र।

क्षेत्र और विशेषता का त्वरित मिलान

क्षेत्रविशेषता
बुंदेलखंडपठार, सूखा, दलहन-तिलहन
तराईनमी, घासभूमि, वन, बाढ़
दोआबगंगा और यमुना के बीच का मैदान
ब्रजकृष्ण भक्ति, रासलीला, ब्रजभाषा
अवधनवाबी संस्कृति, अवधी भाषा
रुहेलखंडरुहेला इतिहास, रामपुर-बरेली
विंध्यपठारी भूभाग, खनिज, वन
पूर्वांचलभोजपुरी संस्कृति, नदी मैदान

18. Quick Revision – एक नजर में

व्यापक विकासात्मक क्षेत्र: पश्चिमांचल, मध्यांचल, पूर्वांचल, बुंदेलखंड।
ऐतिहासिक-सांस्कृतिक क्षेत्र: अवध, ब्रज, रुहेलखंड।
भौगोलिक क्षेत्र: तराई, दोआब, विंध्य।
कृषि-जलवायु वर्गीकरण: नौ कृषि-जलवायु क्षेत्र।
  • पश्चिमांचल – गन्ना, चीनी उद्योग, NCR, खेल सामग्री।
  • मध्यांचल – लखनऊ, कानपुर, कन्नौज और प्रशासनिक-औद्योगिक गतिविधियाँ।
  • पूर्वांचल – भोजपुरी, धान-गेहूँ, बाढ़ की समस्या, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत।
  • बुंदेलखंड – सात जिले, पठारी भूभाग, जल-संकट, दलहन एवं तिलहन।
  • रुहेलखंड – रुहेला इतिहास, बरेली और रामपुर।
  • अवध – अयोध्या, लखनऊ, अवधी भाषा, नवाबी संस्कृति।
  • तराई – नेपाल सीमा, नमी, वन और घासभूमि।
  • ब्रज – मथुरा, वृंदावन, ब्रजभाषा और रासलीला।
  • दोआब – गंगा और यमुना के बीच का क्षेत्र।
  • विंध्य – मिर्जापुर, सोनभद्र, पठार और खनिज।
  • कृषि-जलवायु क्षेत्र – कुल नौ।

19. महत्वपूर्ण अभ्यास प्रश्न – 50 MCQ

सभी प्रश्न मौलिक अभ्यास प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न के साथ सही उत्तर और व्याख्या दी गई है।

PYQ संबंधी सूचना: इस अध्याय के लिए परीक्षा-वर्ष और मूल प्रश्नपत्र सहित सत्यापित वास्तविक PYQ उपलब्ध न होने के कारण किसी प्रश्न को PYQ घोषित नहीं किया गया है। नीचे दिए गए प्रश्न अभ्यास हेतु तैयार किए गए हैं।
प्रश्न 1. उत्तर प्रदेश की IT एवं ITES नीति 2022 के क्षेत्रीय वर्गीकरण में कितने व्यापक क्षेत्र शामिल हैं?
  1. तीन
  2. चार
  3. पाँच
  4. नौ
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सही उत्तर: (B) चार
इस नीतिगत वर्गीकरण में पश्चिमांचल, मध्यांचल, पूर्वांचल और बुंदेलखंड चार व्यापक क्षेत्र हैं। यह प्रशासनिक मंडल व्यवस्था नहीं है।
प्रश्न 2. उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में कितने जिले शामिल हैं?
  1. 5
  2. 6
  3. 7
  4. 8
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सही उत्तर: (C) 7
उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में झाँसी, जालौन, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा, बाँदा और चित्रकूट शामिल हैं।
प्रश्न 3. निम्नलिखित में से कौन-सा जिला बुंदेलखंड क्षेत्र का हिस्सा है?
  1. बरेली
  2. महोबा
  3. मऊ
  4. बिजनौर
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सही उत्तर: (B) महोबा
महोबा उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के सात जिलों में से एक है।
प्रश्न 4. गंगा और यमुना नदियों के बीच स्थित भूभाग क्या कहलाता है?
  1. तराई
  2. दोआब
  3. डेल्टा
  4. भाभर
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सही उत्तर: (B) दोआब
दो नदियों के बीच स्थित भूभाग को दोआब कहा जाता है। गंगा-यमुना दोआब उत्तर प्रदेश का महत्वपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र है।
प्रश्न 5. ब्रज क्षेत्र का प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र कौन-सा है?
  1. मथुरा-वृंदावन
  2. झाँसी-ललितपुर
  3. बरेली-रामपुर
  4. गोरखपुर-देवरिया
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सही उत्तर: (A) मथुरा-वृंदावन
मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और नंदगाँव ब्रज संस्कृति के प्रमुख केंद्र हैं।
प्रश्न 6. रुहेलखंड क्षेत्र का ऐतिहासिक नामकरण मुख्यतः किससे संबंधित है?
  1. चंदेल शासक
  2. रुहेला/रोहिला सरदार
  3. बुंदेला शासक
  4. मुगल सूबेदार मात्र
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सही उत्तर: (B) रुहेला/रोहिला सरदार
रुहेलखंड का नामकरण रुहेला अफगान समूहों और उनके ऐतिहासिक राजनीतिक प्रभाव से जुड़ा है।
प्रश्न 7. अवध क्षेत्र की प्रमुख सांस्कृतिक भाषा कौन-सी है?
  1. ब्रजभाषा
  2. बुंदेली
  3. अवधी
  4. भोजपुरी
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सही उत्तर: (C) अवधी
अवधी अवध क्षेत्र की प्रमुख सांस्कृतिक भाषा है। तुलसीदास की रामचरितमानस अवधी भाषा की महत्वपूर्ण साहित्यिक कृति है।
प्रश्न 8. तराई क्षेत्र की प्रमुख प्राकृतिक विशेषता क्या है?
  1. शुष्क पठार
  2. अधिक नमी और दलदली भूभाग
  3. रेतीला मरुस्थल
  4. लावा पठार
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सही उत्तर: (B)
तराई हिमालय की तलहटी का नम क्षेत्र है, जहाँ घासभूमि, वन, दलदली भूमि और जलभराव की स्थितियाँ मिलती हैं।
प्रश्न 9. उत्तर प्रदेश का कौन-सा क्षेत्र मुख्यतः पठारी भू-भाग और जल-संकट से जुड़ा है?
  1. तराई
  2. बुंदेलखंड
  3. ऊपरी दोआब
  4. ब्रज का नदी तटीय क्षेत्र
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सही उत्तर: (B) बुंदेलखंड
बुंदेलखंड में पठारी एवं चट्टानी भूभाग, अनिश्चित वर्षा और जल उपलब्धता की चुनौती प्रमुख है।
प्रश्न 10. विंध्य क्षेत्र के प्रमुख जिलों में कौन-सा समूह सही है?
  1. मिर्जापुर और सोनभद्र
  2. मेरठ और बागपत
  3. बरेली और पीलीभीत
  4. मथुरा और हाथरस
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सही उत्तर: (A)
मिर्जापुर और सोनभद्र विंध्य क्षेत्र के प्रमुख भौगोलिक संदर्भ हैं। प्रयागराज का दक्षिणी भाग भी विंध्य-बघेलखंड संक्रमण से संबंधित है।
प्रश्न 11. बुंदेलखंड की प्रमुख कृषि पहचान किससे संबंधित है?
  1. चाय और कॉफी
  2. दलहन और तिलहन
  3. जूट और रबर
  4. सेब और केसर
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सही उत्तर: (B)
चना, अरहर, उड़द, मूँग, तिल और सरसों जैसी फसलें बुंदेलखंड की कृषि में महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्न 12. ब्रज क्षेत्र की प्रमुख लोकभाषा कौन-सी है?
  1. भोजपुरी
  2. बुंदेली
  3. ब्रजभाषा
  4. अवधी
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सही उत्तर: (C) ब्रजभाषा
ब्रजभाषा का प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र मथुरा-वृंदावन और आसपास का ब्रज क्षेत्र है।
प्रश्न 13. निम्नलिखित में से कौन-सा लोकनृत्य बुंदेलखंड से विशेष रूप से संबंधित है?
  1. राई
  2. गरबा
  3. घूमर
  4. भांगड़ा
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सही उत्तर: (A) राई
राई बुंदेलखंड की प्रमुख लोकनृत्य परंपराओं में से एक है।
प्रश्न 14. आल्हा गायन किस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान है?
  1. अवध
  2. बुंदेलखंड
  3. तराई
  4. रुहेलखंड
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सही उत्तर: (B) बुंदेलखंड
आल्हा गायन बुंदेलखंड की वीरगाथात्मक लोकगायन परंपरा है।
प्रश्न 15. निम्नलिखित में से कौन-सा नगर ब्रज क्षेत्र से जुड़ा है?
  1. बरसाना
  2. कालपी
  3. भिनगा
  4. बहजोई
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सही उत्तर: (A) बरसाना
बरसाना ब्रज क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक स्थल है और लट्ठमार होली के लिए प्रसिद्ध है।
प्रश्न 16. उत्तर प्रदेश का कौन-सा क्षेत्र नेपाल की सीमा से लगा हुआ नम भूभाग है?
  1. दोआब
  2. तराई
  3. विंध्य
  4. बुंदेलखंड
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सही उत्तर: (B) तराई
तराई क्षेत्र हिमालय की तलहटी और नेपाल सीमा के निकट स्थित है।
प्रश्न 17. दुधवा राष्ट्रीय उद्यान किस भौगोलिक क्षेत्र की पारिस्थितिकी से जुड़ा है?
  1. बुंदेलखंड
  2. तराई
  3. विंध्य
  4. दोआब
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सही उत्तर: (B) तराई
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान लखीमपुर खीरी जिले में स्थित है और तराई के वन, घासभूमि तथा आर्द्र पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
प्रश्न 18. कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार किस जिले में स्थित है?
  1. बहराइच
  2. महोबा
  3. मथुरा
  4. मेरठ
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सही उत्तर: (A) बहराइच
कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार बहराइच जिले में नेपाल सीमा के निकट स्थित है।
प्रश्न 19. गंगा-यमुना दोआब की पहचान किस आधार पर है?
  1. दो पर्वतों के बीच का क्षेत्र
  2. दो नदियों के बीच का क्षेत्र
  3. दो राज्यों के बीच का क्षेत्र
  4. दो पठारों के बीच का क्षेत्र
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सही उत्तर: (B)
दोआब दो नदियों के बीच स्थित भूभाग है। गंगा और यमुना के बीच का क्षेत्र गंगा-यमुना दोआब कहलाता है।
प्रश्न 20. रुहेलखंड की ऐतिहासिक पहचान से कौन-सा नगर विशेष रूप से जुड़ा है?
  1. बरेली
  2. झाँसी
  3. वाराणसी
  4. चित्रकूट
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सही उत्तर: (A) बरेली
बरेली रुहेलखंड का प्रमुख ऐतिहासिक एवं क्षेत्रीय केंद्र रहा है। रामपुर भी रुहेला इतिहास से जुड़ा है।
प्रश्न 21. अवध के नवाबी शासन का प्रमुख केंद्र कौन था?
  1. आगरा
  2. लखनऊ
  3. मेरठ
  4. झाँसी
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सही उत्तर: (B) लखनऊ
लखनऊ अवध के नवाबी शासन का प्रमुख राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र बना।
प्रश्न 22. अवध क्षेत्र की स्थापत्य पहचान का प्रमुख उदाहरण कौन-सा है?
  1. बड़ा इमामबाड़ा
  2. खजुराहो मंदिर
  3. कालिंजर दुर्ग
  4. दुधवा राष्ट्रीय उद्यान
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सही उत्तर: (A) बड़ा इमामबाड़ा
लखनऊ का बड़ा इमामबाड़ा अवध की नवाबी स्थापत्य परंपरा का प्रसिद्ध उदाहरण है।
प्रश्न 23. पूर्वांचल की प्रमुख लोकभाषाओं में कौन-सी भाषा शामिल है?
  1. भोजपुरी
  2. कोंकणी
  3. मलयालम
  4. गुजराती
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सही उत्तर: (A) भोजपुरी
भोजपुरी पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रमुख लोकभाषाओं में से एक है। इसका सांस्कृतिक विस्तार बिहार और अन्य क्षेत्रों तक भी है।
प्रश्न 24. पूर्वांचल में बाढ़ की समस्या का एक प्रमुख भौगोलिक कारण क्या है?
  1. रेगिस्तानी हवाएँ
  2. घाघरा और राप्ती जैसी नदियाँ
  3. ज्वालामुखी गतिविधि
  4. हिमनदों का स्थानीय विस्तार
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सही उत्तर: (B)
घाघरा, राप्ती और अन्य नदियों के जलस्तर में मानसून के दौरान वृद्धि से पूर्वांचल के कई जिलों में बाढ़ और कटाव की समस्या उत्पन्न होती है।
प्रश्न 25. वाराणसी किस क्षेत्र की प्रमुख सांस्कृतिक पहचान है?
  1. बुंदेलखंड
  2. पूर्वांचल
  3. रुहेलखंड
  4. तराई
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सही उत्तर: (B) पूर्वांचल
वाराणसी पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और हस्तशिल्प केंद्र है।
प्रश्न 26. कन्नौज किस आर्थिक गतिविधि के लिए प्रसिद्ध है?
  1. इत्र उद्योग
  2. चाय उद्योग
  3. जूट उद्योग
  4. जहाज निर्माण
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सही उत्तर: (A) इत्र उद्योग
कन्नौज पारंपरिक इत्र निर्माण और सुगंध उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। यह मध्य उत्तर प्रदेश की विशिष्ट आर्थिक पहचान है।
प्रश्न 27. मेरठ की प्रमुख औद्योगिक पहचान क्या है?
  1. खेल सामग्री
  2. चाय प्रसंस्करण
  3. रेशम उत्पादन
  4. समुद्री मत्स्य उद्योग
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सही उत्तर: (A) खेल सामग्री
मेरठ खेल सामग्री एवं खेल उपकरण निर्माण के लिए प्रसिद्ध है।
प्रश्न 28. मुरादाबाद की प्रमुख हस्तशिल्प पहचान क्या है?
  1. पीतल एवं धातु शिल्प
  2. लकड़ी की नाव
  3. ऊन कालीन
  4. चंदन की नक्काशी
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सही उत्तर: (A) पीतल एवं धातु शिल्प
मुरादाबाद पीतल और धातु के हस्तशिल्प उत्पादों के लिए प्रसिद्ध है।
प्रश्न 29. बुंदेलखंड में जल-संकट का एक प्रमुख कारण क्या है?
  1. अत्यधिक हिमपात
  2. अनियमित वर्षा और पठारी भूभाग
  3. समुद्री ज्वार
  4. सालभर भारी वर्षा
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सही उत्तर: (B)
अनियमित मानसूनी वर्षा, चट्टानी भूभाग, तेज सतही बहाव और सीमित जलधारण क्षमता जल-संकट को बढ़ाते हैं।
प्रश्न 30. विंध्य क्षेत्र की प्रमुख आर्थिक विशेषता क्या है?
  1. खनिज एवं ऊर्जा संसाधन
  2. समुद्री व्यापार
  3. चाय बागान
  4. नारियल उद्योग
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सही उत्तर: (A)
मिर्जापुर और सोनभद्र क्षेत्र में खनिज, पत्थर, ऊर्जा और वन संसाधनों का विशेष महत्व है।
प्रश्न 31. ब्रज क्षेत्र की प्रसिद्ध धार्मिक-सांस्कृतिक परिक्रमा कौन-सी है?
  1. चौरासी कोस परिक्रमा
  2. पंचकोसी परिक्रमा
  3. नर्मदा परिक्रमा
  4. गोदावरी परिक्रमा
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सही उत्तर: (A) चौरासी कोस परिक्रमा
ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मथुरा-वृंदावन और आसपास के कृष्ण लीला स्थलों से संबंधित है।
प्रश्न 32. तराई क्षेत्र में किस प्रकार की वनस्पति एवं भू-दृश्य सामान्यतः मिलते हैं?
  1. काँटेदार मरुस्थलीय वनस्पति
  2. घासभूमि, नम वन और दलदली क्षेत्र
  3. अल्पाइन टुंड्रा
  4. मैंग्रोव वन
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सही उत्तर: (B)
तराई क्षेत्र में नमी, जलभराव, घासभूमि और नम वन पारिस्थितिकी की प्रमुख विशेषताएँ हैं।
प्रश्न 33. निम्न में से कौन-सा जिला नीति आधारित पश्चिमांचल वर्गीकरण में शामिल है?
  1. सोनभद्र
  2. गौतम बुद्ध नगर
  3. बलिया
  4. गोरखपुर
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सही उत्तर: (B) गौतम बुद्ध नगर
IT एवं ITES नीति के वर्गीकरण में गौतम बुद्ध नगर पश्चिमांचल में शामिल है।
प्रश्न 34. निम्न में से कौन-सा जिला नीति आधारित मध्यांचल वर्गीकरण में शामिल है?
  1. कन्नौज
  2. मिर्जापुर
  3. मऊ
  4. बहराइच
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सही उत्तर: (A) कन्नौज
कन्नौज मध्यांचल के नीतिगत वर्गीकरण में शामिल है और इत्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।
प्रश्न 35. निम्न में से कौन-सा जिला नीति आधारित पूर्वांचल वर्गीकरण में शामिल है?
  1. मुजफ्फरनगर
  2. गोरखपुर
  3. बिजनौर
  4. मथुरा
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सही उत्तर: (B) गोरखपुर
गोरखपुर पूर्वांचल के नीतिगत वर्गीकरण में शामिल है और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख केंद्र है।
प्रश्न 36. उत्तर प्रदेश के किस क्षेत्र का ऐतिहासिक संबंध रुहेला सरदारों से है?
  1. रुहेलखंड
  2. ब्रज
  3. अवध
  4. बुंदेलखंड
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सही उत्तर: (A) रुहेलखंड
रुहेलखंड की ऐतिहासिक पहचान रुहेला/रोहिला सरदारों से जुड़ी है।
प्रश्न 37. अवध का प्रमुख ऐतिहासिक राजनीतिक केंद्र कौन-सा था?
  1. लखनऊ
  2. आगरा
  3. मेरठ
  4. मुरादाबाद
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सही उत्तर: (A) लखनऊ
लखनऊ अवध के नवाबों का प्रमुख राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र बना।
प्रश्न 38. गंगा-यमुना दोआब का पूर्वी छोर किस क्षेत्र के निकट माना जाता है?
  1. प्रयागराज का संगम क्षेत्र
  2. नेपाल सीमा
  3. सोनभद्र का पठार
  4. पीलीभीत का तराई क्षेत्र
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सही उत्तर: (A)
गंगा और यमुना का संगम प्रयागराज के निकट होता है। दोआब का पूर्वी विस्तार इसी संगम क्षेत्र तक समझा जाता है।
प्रश्न 39. उत्तर प्रदेश में नौ कृषि-जलवायु क्षेत्रों का वर्गीकरण किस आधार पर उपयोगी है?
  1. केवल भाषा
  2. मिट्टी, जलवायु, वर्षा और फसल प्रणाली
  3. केवल जिला मुख्यालय
  4. केवल धार्मिक स्थल
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सही उत्तर: (B)
कृषि-जलवायु वर्गीकरण में मिट्टी, तापमान, वर्षा, जल उपलब्धता और फसल प्रणाली जैसे कारक देखे जाते हैं।
प्रश्न 40. दक्षिण-पश्चिमी अर्द्ध-शुष्क कृषि क्षेत्र की पहचान किससे जुड़ी है?
  1. आगरा-मथुरा-अलीगढ़ क्षेत्र
  2. गोरखपुर-देवरिया क्षेत्र
  3. बहराइच-श्रावस्ती क्षेत्र
  4. गाजीपुर-बलिया क्षेत्र
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सही उत्तर: (A)
दक्षिण-पश्चिमी अर्द्ध-शुष्क कृषि-जलवायु क्षेत्र में आगरा, मथुरा, अलीगढ़ और आसपास के जिले शामिल किए जाते हैं।
प्रश्न 41. निम्न में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?
  1. कन्नौज – इत्र
  2. मेरठ – चाय
  3. मुरादाबाद – जूट
  4. मथुरा – रेशम बुनाई का प्रमुख केंद्र मात्र
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सही उत्तर: (A)
कन्नौज पारंपरिक इत्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। मेरठ खेल सामग्री और मुरादाबाद पीतल शिल्प के लिए जाना जाता है।
प्रश्न 42. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
  1. ब्रज एक राजस्व मंडल है।
  2. अवध एक जिला है।
  3. दोआब दो नदियों के बीच का क्षेत्र है।
  4. तराई एक नगर निगम है।
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सही उत्तर: (C)
दोआब दो नदियों के बीच स्थित भूभाग है। ब्रज, अवध और तराई क्षेत्रीय पहचान हैं, प्रशासनिक निकाय नहीं।
प्रश्न 43. निम्न में से कौन-सा जिला बुंदेलखंड में शामिल नहीं है?
  1. ललितपुर
  2. जालौन
  3. चित्रकूट
  4. फतेहपुर
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सही उत्तर: (D) फतेहपुर
फतेहपुर बुंदेलखंड के सात जिलों में शामिल नहीं है। यह प्रयागराज मंडल के अंतर्गत आता है।
प्रश्न 44. निम्न में से कौन-सा जिला रुहेलखंड की परंपरागत क्षेत्रीय पहचान से जुड़ा है?
  1. रामपुर
  2. बलिया
  3. झाँसी
  4. महोबा
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सही उत्तर: (A) रामपुर
रामपुर ऐतिहासिक रुहेला शासन और नवाबी विरासत से जुड़ा है।
प्रश्न 45. ब्रज क्षेत्र की प्रमुख सांस्कृतिक परंपरा कौन-सी है?
  1. रासलीला
  2. छऊ
  3. गरबा
  4. भांगड़ा
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सही उत्तर: (A) रासलीला
रासलीला कृष्ण भक्ति और ब्रज की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा से गहराई से जुड़ी है।
प्रश्न 46. पूर्वांचल की प्रमुख लोकगायन शैलियों में कौन-सा समूह सही है?
  1. बिरहा, कजरी, चैता
  2. लावणी, तमाशा, पोवाड़ा
  3. भांगड़ा, गिद्धा, टप्पा
  4. गरबा, डांडिया, भवई
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सही उत्तर: (A)
बिरहा, कजरी और चैता पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रमुख लोकगायन परंपराओं में शामिल हैं।
प्रश्न 47. बुंदेलखंड में जल संरक्षण का कौन-सा उपाय विशेष रूप से उपयोगी है?
  1. तालाबों का पुनर्जीवन और चेकडैम
  2. केवल गहरे नलकूपों का विस्तार
  3. वनों की कटाई
  4. वर्षा जल को बहने देना
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सही उत्तर: (A)
तालाबों, चेकडैम, जलग्रहण प्रबंधन और वर्षा जल संचयन से सतही जल संरक्षण तथा भूजल पुनर्भरण में मदद मिलती है।
प्रश्न 48. तराई क्षेत्र में कृषि की एक प्रमुख विशेषता क्या है?
  1. धान की खेती का महत्व
  2. केवल बाजरा उत्पादन
  3. केवल शुष्क कृषि
  4. केवल बागवानी
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सही उत्तर: (A)
अधिक नमी, जल उपलब्धता और उपजाऊ मिट्टी के कारण तराई क्षेत्र में धान की खेती महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 49. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म गलत सुमेलित है?
  1. अवध – अवधी
  2. ब्रज – ब्रजभाषा
  3. बुंदेलखंड – बुंदेली
  4. रुहेलखंड – तमिल
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सही उत्तर: (D) रुहेलखंड – तमिल
तमिल दक्षिण भारत की द्रविड़ भाषा है। रुहेलखंड में हिंदी और स्थानीय पश्चिमी हिंदी भाषाई रूपों का प्रभाव मिलता है।
प्रश्न 50. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय पहचान और प्रशासनिक सीमा हमेशा समान होती है।
2. तराई एक भौगोलिक-पारिस्थितिक क्षेत्र है।
3. कृषि-जलवायु क्षेत्र और विकासात्मक क्षेत्र अलग-अलग वर्गीकरण हो सकते हैं।
सही विकल्प चुनिए।
  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 2 और 3
  4. 1, 2 और 3
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सही उत्तर: (C) 2 और 3
क्षेत्रीय पहचान हमेशा प्रशासनिक सीमाओं से मेल नहीं खाती। तराई भौगोलिक-पारिस्थितिक क्षेत्र है और कृषि-जलवायु वर्गीकरण का उद्देश्य विकासात्मक क्षेत्रीय वर्गीकरण से अलग है।

20. References एवं Data Authentication

इस अध्याय के क्षेत्रीय वर्गीकरण, कृषि-जलवायु क्षेत्रों, बुंदेलखंड, तराई, ब्रज, दोआब और विंध्य से संबंधित तथ्यों के सत्यापन के लिए निम्न सरकारी स्रोत उपयोगी हैं।

डेटा सत्यापन संबंधी नोट: क्षेत्रीय नामों की सीमाएँ सभी सरकारी विभागों में एक जैसी नहीं हैं। इस अध्याय में चार व्यापक विकासात्मक क्षेत्रों के लिए IT एवं ITES नीति 2022 का वर्गीकरण और कृषि-जलवायु क्षेत्रों के लिए सरकारी कृषि/मौसम स्रोतों का उपयोग किया गया है। अवध, ब्रज, रुहेलखंड, तराई, दोआब और विंध्य को उनके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक अथवा भौगोलिक संदर्भ में समझाया गया है। इन्हें अधिसूचित प्रशासनिक इकाई न माना जाए।

21. Noble Exam City – अन्य अध्ययन सामग्री

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