मानव एवं जीवों में प्रजनन Notes in Hindi | Reproduction Complete Biology

0

अध्याय 17. मानव एवं जीवों में प्रजनन

Human and Organism Reproduction – Complete Biology Notes

Noble Exam City

Smart Preparation, Sure Selection

UP PET UPSSSC SSC Railway Police UPPSC
अध्याय में शामिल विषय: प्रजनन का महत्त्व, अलैंगिक एवं लैंगिक प्रजनन, पौधों में प्रजनन, मानव प्रजनन तंत्र, युग्मक निर्माण, मासिक धर्म चक्र, निषेचन, भ्रूण विकास, गर्भावस्था, अपरा, जुड़वाँ बच्चे, गर्भनिरोधक विधियाँ एवं प्रजनन स्वास्थ्य।

1. प्रजनन का अर्थ एवं महत्त्व

प्रजनन (Reproduction) वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा कोई जीव अपने समान नई संतति उत्पन्न करता है। यह जीवों का एक महत्त्वपूर्ण जैविक लक्षण है। प्रजनन किसी एक जीव के व्यक्तिगत जीवन को बनाए रखने के लिए अनिवार्य नहीं है, लेकिन किसी प्रजाति की निरंतरता और अस्तित्व बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

प्रजनन के माध्यम से माता-पिता के आनुवंशिक गुण अगली पीढ़ी तक पहुँचते हैं। लैंगिक प्रजनन में माता और पिता दोनों के आनुवंशिक पदार्थ के मिलने से संतति में विविधता उत्पन्न होती है। यही विविधता बदलते पर्यावरण में अनुकूलन और विकास की प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

प्रजनन के प्रमुख महत्त्व

  • प्रजाति की निरंतरता एवं अस्तित्व बनाए रखना।
  • जीवों की संख्या में वृद्धि करना।
  • आनुवंशिक गुणों का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरण।
  • लैंगिक प्रजनन द्वारा आनुवंशिक विविधता उत्पन्न करना।
  • जीवों के विकास एवं अनुकूलन की प्रक्रिया में योगदान देना।
परीक्षा तथ्य: प्रजनन जीवों की प्रजाति के अस्तित्व को बनाए रखता है, जबकि वृद्धि (Growth) किसी जीव के आकार, भार या कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि को दर्शाती है। दोनों अलग-अलग जैविक प्रक्रियाएँ हैं।

2. अलैंगिक प्रजनन (Asexual Reproduction)

अलैंगिक प्रजनन वह प्रक्रिया है जिसमें सामान्यतः एक ही जनक से बिना युग्मकों के संलयन के नई संतति उत्पन्न होती है। इसमें निषेचन नहीं होता। इस प्रकार उत्पन्न संतति आनुवंशिक रूप से जनक के समान हो सकती है। ऐसी संतति को क्लोन (Clone) कहा जाता है, यद्यपि उत्परिवर्तन के कारण अंतर उत्पन्न हो सकता है।

अलैंगिक प्रजनन सामान्यतः एककोशिकीय जीवों, कुछ सरल बहुकोशिकीय जीवों तथा पौधों में पाया जाता है। इसमें कम समय में अधिक संख्या में संतति उत्पन्न हो सकती है।

अलैंगिक प्रजनन की प्रमुख विशेषताएँ

  • सामान्यतः एक जनक की आवश्यकता होती है।
  • युग्मकों का निर्माण एवं संलयन आवश्यक नहीं होता।
  • निषेचन की प्रक्रिया नहीं होती।
  • संतति प्रायः आनुवंशिक रूप से जनक के समान होती है।
  • अनुकूल परिस्थितियों में यह तीव्र गति से हो सकता है।

3. लैंगिक प्रजनन (Sexual Reproduction)

लैंगिक प्रजनन वह प्रक्रिया है जिसमें नर एवं मादा युग्मकों के संलयन से युग्मनज (Zygote) का निर्माण होता है। सामान्यतः नर युग्मक शुक्राणु तथा मादा युग्मक अंडाणु होता है। इनके संलयन को निषेचन (Fertilization) कहते हैं।

लैंगिक प्रजनन में अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) द्वारा गुणसूत्रों की संख्या आधी करने वाले युग्मक बनते हैं। निषेचन के समय नर और मादा युग्मकों के गुणसूत्र मिलकर सामान्यतः द्विगुणित गुणसूत्र संख्या पुनः स्थापित करते हैं। इस प्रक्रिया में आनुवंशिक पुनर्संयोजन के कारण संतति में विविधता उत्पन्न होती है।

लैंगिक प्रजनन के प्रमुख चरण

  1. युग्मक निर्माण: नर एवं मादा जनन कोशिकाओं से युग्मकों का निर्माण।
  2. युग्मक स्थानांतरण: नर एवं मादा युग्मकों का एक-दूसरे के निकट पहुँचना।
  3. निषेचन: दोनों युग्मकों के संलयन से युग्मनज का निर्माण।
  4. भ्रूण विकास: युग्मनज में बार-बार कोशिका विभाजन और विभेदन से भ्रूण का विकास।
आधारअलैंगिक प्रजननलैंगिक प्रजनन
जनकसामान्यतः एकसामान्यतः दो जनकों के युग्मक
युग्मकआवश्यक नहींआवश्यक
निषेचननहीं होताहोता है
आनुवंशिक विविधतासामान्यतः कमसामान्यतः अधिक
उदाहरणअमीबा, हाइड्रा, यीस्टमनुष्य, अधिकांश जन्तु, पुष्पी पौधे

4. द्विखंडन एवं बहुखंडन

द्विखंडन (Binary Fission)

द्विखंडन अलैंगिक प्रजनन की वह विधि है जिसमें एक जनक कोशिका विभाजित होकर दो नई संतति कोशिकाएँ बनाती है। पहले आनुवंशिक पदार्थ का विभाजन होता है और फिर कोशिका द्रव्य विभाजित होकर दो कोशिकाएँ बनाता है।

  • अमीबा: सामान्यतः किसी भी दिशा में द्विखंडन कर सकता है।
  • पैरामीशियम: सामान्यतः अनुप्रस्थ द्विखंडन करता है।
  • लीशमैनिया: अनुदैर्ध्य द्विखंडन करता है।

बहुखंडन (Multiple Fission)

बहुखंडन में एक जनक कोशिका का केंद्रक बार-बार विभाजित होता है। बाद में कोशिका द्रव्य विभाजित होकर अनेक संतति कोशिकाएँ बनाता है।

उदाहरण: प्लाज्मोडियम में बहुखंडन पाया जाता है। प्रतिकूल परिस्थितियों में अमीबा भी पुटी (Cyst) बनाकर बहुखंडन कर सकता है।

याद रखें: द्विखंडन में एक कोशिका से दो संतति बनती हैं, जबकि बहुखंडन में एक कोशिका से अनेक संतति बनती हैं।

5. मुकुलन एवं बीजाणु निर्माण

मुकुलन (Budding)

मुकुलन में जनक जीव के शरीर पर कोशिका विभाजन के कारण एक छोटी कलिका या मुकुल बनता है। यह धीरे-धीरे विकसित होकर नया जीव बन जाता है। पूर्ण विकसित होने के बाद यह जनक से अलग हो सकता है या उससे जुड़ा रह सकता है।

  • यीस्ट: एककोशिकीय कवक में मुकुलन द्वारा प्रजनन होता है।
  • हाइड्रा: शरीर पर मुकुल बनता है, जो विकसित होकर नया हाइड्रा बनाता है।

बीजाणु निर्माण (Spore Formation)

इस विधि में जीव विशेष प्रजनन संरचनाओं में बीजाणु बनाते हैं। अनुकूल परिस्थितियाँ मिलने पर बीजाणु अंकुरित होकर नया जीव बना सकते हैं। बीजाणुओं की बाहरी भित्ति उन्हें प्रतिकूल परिस्थितियों से सुरक्षा प्रदान कर सकती है।

उदाहरण: राइजोपस (ब्रेड मोल्ड) में बीजाणुधानी (Sporangium) के भीतर बीजाणु बनते हैं।

महत्त्वपूर्ण अंतर: यीस्ट एवं हाइड्रा में मुकुलन, जबकि राइजोपस में बीजाणु निर्माण सामान्य परीक्षा उदाहरण हैं।

6. पुनर्जनन एवं कायिक प्रवर्धन

पुनर्जनन (Regeneration)

पुनर्जनन वह क्षमता है जिसके द्वारा कोई जीव अपने खोए हुए या क्षतिग्रस्त भागों का पुनर्निर्माण कर सकता है। कुछ सरल जीवों में शरीर के अलग हुए भाग से पूरा नया जीव भी बन सकता है।

  • प्लैनेरिया: शरीर के कुछ भागों से नया जीव विकसित हो सकता है।
  • हाइड्रा: पुनर्जनन की क्षमता प्रदर्शित करता है।
  • तारा मछली: कुछ प्रजातियों में शरीर के भागों से पुनर्जनन संभव है; केवल भुजा का अलग होना हमेशा पूर्ण नया जीव बनने के लिए पर्याप्त नहीं होता।

कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation)

पौधों में जड़, तना या पत्ती जैसे कायिक अंगों से नया पौधा विकसित होने की प्रक्रिया कायिक प्रवर्धन कहलाती है। यह अलैंगिक प्रजनन का एक रूप है।

विधिउदाहरण
तना द्वाराआलू, अदरक, गन्ना, प्याज
पत्ती द्वाराब्रायोफिलम
जड़ द्वाराशकरकंद, डहेलिया
कलम (Cutting)गुलाब, गन्ना
दाब लगाना (Layering)चमेली, बोगनवेलिया
ग्राफ्टिंग (Grafting)आम, नींबू की कुछ किस्में
ऊतक संवर्धन (Tissue Culture)केला, ऑर्किड तथा अन्य पौधे

कायिक प्रवर्धन से कम समय में पौधों की बड़ी संख्या तैयार की जा सकती है। इसमें मूल पौधे के उपयोगी गुण प्रायः सुरक्षित रहते हैं। बीजरहित या कम बीज वाले पौधों के संवर्धन में भी इसका महत्त्व है।

7. पुष्पी पौधों में लैंगिक प्रजनन

पुष्पी पौधों में फूल लैंगिक प्रजनन की प्रमुख संरचना है। एक सामान्य फूल में बाह्यदल, दल, पुंकेसर और स्त्रीकेसर पाए जाते हैं। इनमें पुंकेसर नर जनन अंग तथा स्त्रीकेसर मादा जनन अंग होता है।

पुष्प के प्रमुख भाग

  • बाह्यदल (Sepals): कली की अवस्था में फूल की सुरक्षा करते हैं।
  • दल (Petals): रंग एवं गंध के कारण परागणकर्ताओं को आकर्षित कर सकते हैं।
  • पुंकेसर (Stamen): नर जनन अंग। इसके दो प्रमुख भाग परागकोश और तंतु हैं।
  • स्त्रीकेसर (Pistil/Carpel): मादा जनन अंग। इसके प्रमुख भाग वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय हैं।

परागकोश में परागकण बनते हैं। अंडाशय के भीतर बीजांड स्थित होते हैं। परागण के बाद परागकण वर्तिकाग्र पर पहुँचता है। परागनलिका विकसित होकर बीजांड तक पहुँचती है और नर युग्मक वहाँ पहुँचते हैं।

विशेष तथ्य: निषेचन के बाद बीजांड बीज में और अंडाशय सामान्यतः फल में विकसित होता है। बीज के भीतर भ्रूण होता है।

8. परागण एवं निषेचन

परागण (Pollination)

परागकोश से परागकणों का उसी फूल या उसी प्रजाति के किसी अन्य फूल के वर्तिकाग्र तक पहुँचना परागण कहलाता है। परागण निषेचन से पहले की प्रक्रिया है।

परागण का प्रकारअर्थउदाहरण/विशेषता
स्वपरागण (Self-pollination)उसी फूल या उसी पौधे के दूसरे फूल के वर्तिकाग्र पर परागकण पहुँचनामटर में सामान्य
परपरागण (Cross-pollination)एक पौधे के फूल से उसी प्रजाति के दूसरे पौधे के फूल तक परागकण पहुँचनाआनुवंशिक विविधता बढ़ा सकता है

परागण के माध्यम

  • वायु: मक्का, गेहूँ जैसे अनेक घास कुल के पौधे।
  • जल: वैलिसनेरिया तथा जोस्टेरा जैसे कुछ जलीय पौधे।
  • कीट: मधुमक्खी, तितली आदि।
  • पक्षी: कुछ पौधों में पक्षियों द्वारा परागण।
  • अन्य जन्तु: चमगादड़ आदि कुछ पौधों के परागण में सहायता करते हैं।

द्विनिषेचन (Double Fertilization)

आवृतबीजी पौधों (Angiosperms) में दो नर युग्मक भ्रूणकोष में पहुँचते हैं। एक नर युग्मक अंड कोशिका से मिलकर द्विगुणित युग्मनज बनाता है। दूसरे नर युग्मक का संलयन दो ध्रुवीय केंद्रकों या द्वितीयक केंद्रक से होता है, जिससे सामान्यतः त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक बनता है। इस प्रक्रिया को द्विनिषेचन कहते हैं।

परीक्षा में अत्यंत महत्त्वपूर्ण: द्विनिषेचन आवृतबीजी पौधों की विशिष्ट विशेषता है। एक संलयन से युग्मनज और दूसरे से भ्रूणपोष (Endosperm) का विकास होता है।

9. मानव प्रजनन तंत्र

मनुष्य में लैंगिक प्रजनन होता है। मानव प्रजनन तंत्र में नर तथा मादा जनन अंग शामिल होते हैं। नर जनन तंत्र शुक्राणुओं के निर्माण एवं उनके स्थानांतरण में भूमिका निभाता है, जबकि मादा जनन तंत्र अंडाणु निर्माण, निषेचन, भ्रूण के विकास और प्रसव के लिए आवश्यक संरचनाएँ प्रदान करता है।

मनुष्य में निषेचन सामान्यतः आंतरिक होता है। निषेचन के बाद भ्रूण का विकास मादा के गर्भाशय में होता है। मानव में विकास की प्रक्रिया को जरायुज (Viviparous) प्रजनन कहा जाता है।

10. पुरुष प्रजनन तंत्र

पुरुष प्रजनन तंत्र में वृषण, वृषणकोश, अधिवृषण, शुक्रवाहिनी, स्खलन नलिका, मूत्रमार्ग, सहायक ग्रंथियाँ तथा शिश्न शामिल हैं।

प्रमुख अंग एवं उनके कार्य

  • वृषण (Testes): शुक्राणुओं का निर्माण तथा टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्राव।
  • वृषणकोश (Scrotum): वृषणों को शरीर के बाहर थैली में रखता है और शुक्राणु निर्माण के लिए उपयुक्त तापमान बनाए रखने में सहायता करता है।
  • अधिवृषण (Epididymis): शुक्राणुओं के परिपक्व होने और अस्थायी संग्रह का स्थान।
  • शुक्रवाहिनी (Vas deferens): शुक्राणुओं को आगे ले जाने वाली नलिका।
  • शुक्राशय (Seminal vesicles): वीर्य द्रव में पोषक पदार्थों, विशेषकर फ्रक्टोज, का योगदान।
  • प्रोस्टेट ग्रंथि: वीर्य द्रव में स्राव मिलाती है।
  • काउपर ग्रंथि: चिकनाईयुक्त स्राव प्रदान करती है।
  • शिश्न (Penis): मैथुन अंग तथा मूत्र एवं वीर्य के निष्कासन का मार्ग।
शुक्राणु का मार्ग: शुक्रजनक नलिकाएँ → अधिवृषण → शुक्रवाहिनी → स्खलन नलिका → मूत्रमार्ग।

11. महिला प्रजनन तंत्र

महिला प्रजनन तंत्र में अंडाशय, अंडवाहिनी, गर्भाशय, गर्भाशय ग्रीवा और योनि प्रमुख अंग हैं। ये अंडाणु निर्माण, हार्मोन स्राव, निषेचन, भ्रूण के विकास और प्रसव में भूमिका निभाते हैं।

  • अंडाशय (Ovary): अंडाणु/द्वितीयक अंडक का विकास तथा एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्राव।
  • अंडवाहिनी (Fallopian Tube/Oviduct): अंडाणु को गर्भाशय की ओर ले जाती है। सामान्यतः निषेचन इसी में होता है।
  • गर्भाशय (Uterus): भ्रूण के आरोपण एवं विकास का स्थान।
  • गर्भाशय ग्रीवा (Cervix): गर्भाशय का निचला संकरा भाग, जो योनि से जुड़ता है।
  • योनि (Vagina): मैथुन अंग, मासिक स्राव का मार्ग तथा प्रसव के समय जन्म मार्ग।
परीक्षा तथ्य: मानव में निषेचन सामान्यतः अंडवाहिनी के एम्पुलरी-इस्थमिक संधि क्षेत्र (Ampullary-Isthmic Junction) में होता है।

12. शुक्राणु एवं अंडाणु

शुक्राणु (Sperm)

शुक्राणु नर युग्मक है। यह आकार में छोटा और गतिशील होता है। एक सामान्य शुक्राणु के तीन प्रमुख भाग होते हैं:

  • शीर्ष (Head): इसमें अगुणित केंद्रक होता है। शीर्ष के अग्र भाग में एक्रोसोम होता है, जिसमें अंडाणु की बाहरी परतों को पार करने में सहायता करने वाले एंजाइम होते हैं।
  • मध्य भाग (Middle Piece): इसमें अनेक माइटोकॉन्ड्रिया होते हैं, जो गति के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं।
  • पूँछ (Tail): शुक्राणु की गति में सहायता करती है।

अंडाणु (Ovum)

अंडाणु मादा युग्मक है। यह सामान्यतः शुक्राणु की तुलना में आकार में बड़ा और गतिहीन होता है। इसमें अगुणित गुणसूत्र समूह तथा भ्रूण के प्रारंभिक विकास के लिए कोशिकाद्रव्य में आवश्यक पदार्थ उपस्थित होते हैं। मानव अंडाणु के चारों ओर सुरक्षा देने वाली परतों में जोना पेल्यूसिडा (Zona Pellucida) प्रमुख है।

आधारशुक्राणुअंडाणु
प्रकारनर युग्मकमादा युग्मक
निर्माण स्थानवृषणअंडाशय
आकारबहुत छोटातुलनात्मक रूप से बड़ा
गतिशीलतापूँछ के कारण गतिशीलस्वयं सक्रिय रूप से गतिशील नहीं
गुणसूत्र2323
गुणसूत्र तथ्य: मानव की सामान्य देह कोशिकाओं में 46 गुणसूत्र (23 जोड़े) होते हैं। सामान्य युग्मकों में 23 गुणसूत्र होते हैं।

13. मासिक धर्म चक्र (Menstrual Cycle)

मासिक धर्म चक्र प्रजनन आयु की महिलाओं में होने वाली नियमित जैविक प्रक्रिया है। इसमें अंडाशय तथा गर्भाशय में चक्रीय परिवर्तन होते हैं। इसका उद्देश्य संभावित गर्भधारण के लिए गर्भाशय की आंतरिक परत को तैयार करना है। यदि गर्भधारण नहीं होता, तो गर्भाशय की आंतरिक परत का एक भाग रक्त एवं ऊतक के साथ बाहर निकलता है, जिसे मासिक धर्म कहते हैं।

मासिक धर्म चक्र की औसत अवधि लगभग 28 दिन मानी जाती है, लेकिन स्वस्थ व्यक्तियों में इसकी अवधि अलग-अलग हो सकती है। इसे चार प्रमुख चरणों में समझा जाता है।

चरणलगभग समयमुख्य घटनाएँ
मासिक चरणदिन 1–5गर्भाशय की आंतरिक परत का कुछ भाग रक्त के साथ बाहर निकलता है।
कूपिक चरण (Follicular Phase)दिन 1 से अंडोत्सर्ग तकFSH के प्रभाव से अंडाशय में कूप विकसित होते हैं और एस्ट्रोजन बढ़ता है।
अंडोत्सर्ग (Ovulation)28 दिन के चक्र में लगभग 14वाँ दिनLH में तीव्र वृद्धि के बाद परिपक्व कूप से अंडाणु/द्वितीयक अंडक निकलता है।
ल्यूटियल चरण (Luteal Phase)अंडोत्सर्ग के बादकॉर्पस ल्यूटियम प्रोजेस्टेरोन स्रावित करता है और गर्भाशय की परत को बनाए रखने में मदद करता है।

प्रमुख हार्मोन

  • FSH: अंडाशय में कूप के विकास को प्रोत्साहित करता है।
  • LH: LH surge अंडोत्सर्ग को प्रेरित करता है तथा कॉर्पस ल्यूटियम के निर्माण में भूमिका निभाता है।
  • एस्ट्रोजन: गर्भाशय की आंतरिक परत के विकास में सहायता करता है।
  • प्रोजेस्टेरोन: गर्भाशय की परत को गर्भधारण के अनुकूल बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण है।
ध्यान दें: 14वाँ दिन केवल 28 दिन के औसत चक्र का अनुमान है। सभी महिलाओं में अंडोत्सर्ग ठीक 14वें दिन नहीं होता। चक्र की अवधि और अंडोत्सर्ग का समय अलग-अलग हो सकता है।

14. निषेचन एवं भ्रूण विकास

नर एवं मादा युग्मकों के संलयन से युग्मनज (Zygote) बनता है। मानव में शुक्राणु और अंडाणु के संलयन के बाद सामान्यतः द्विगुणित गुणसूत्र संख्या 46 पुनः स्थापित होती है। युग्मनज में बार-बार समसूत्री विभाजन होता है और भ्रूण विकास प्रारंभ होता है।

भ्रूण विकास के प्रमुख चरण

  1. युग्मनज: निषेचन से बनने वाली प्रथम कोशिका।
  2. विदलन (Cleavage): युग्मनज में तीव्र कोशिका विभाजन होता है।
  3. मोरुला (Morula): कोशिकाओं का ठोस समूह बनता है।
  4. ब्लास्टोसिस्ट (Blastocyst): कोशिकाओं की बाहरी परत तथा आंतरिक कोशिका समूह वाली संरचना बनती है।
  5. आरोपण (Implantation): ब्लास्टोसिस्ट गर्भाशय की आंतरिक परत में स्थापित होता है।
  6. भ्रूणीय विकास: विभिन्न ऊतकों एवं अंगों का निर्माण और विभेदन होता है।
  7. भ्रूण से गर्भस्थ शिशु: विकास के आगे के चरण में अंगों की पहचान अधिक स्पष्ट होती जाती है।
निषेचन से आरोपण तक: अंडवाहिनी में निषेचन → युग्मनज → विदलन → मोरुला → ब्लास्टोसिस्ट → गर्भाशय में आरोपण।

15. गर्भावस्था एवं प्रसव

निषेचन और गर्भाशय में आरोपण के बाद गर्भावस्था की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। मानव गर्भावस्था की अवधि अंतिम मासिक धर्म के प्रथम दिन से लगभग 40 सप्ताह मानी जाती है। निषेचन के समय से गिनने पर यह लगभग 38 सप्ताह होती है। सामान्य परिस्थितियों में गर्भावस्था की अवधि में कुछ अंतर हो सकता है।

गर्भावस्था के प्रमुख चरण

  • प्रथम त्रैमास (First Trimester): प्रारंभिक 12 सप्ताह में प्रमुख अंगों के निर्माण की प्रक्रिया होती है।
  • द्वितीय त्रैमास (Second Trimester): भ्रूण का आकार बढ़ता है और विभिन्न अंगों का विकास आगे बढ़ता है।
  • तृतीय त्रैमास (Third Trimester): भ्रूण का भार और अंगों की परिपक्वता बढ़ती है।

प्रसव (Parturition)

गर्भावस्था के अंत में गर्भाशय की पेशियों के लयबद्ध संकुचन से शिशु का जन्म होता है। इस प्रक्रिया को प्रसव कहते हैं। प्रसव की प्रक्रिया में ऑक्सीटोसिन हार्मोन महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रसव के बाद अपरा गर्भाशय से बाहर निकलती है।

16. अपरा (Placenta) एवं उसके कार्य

अपरा गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय की दीवार और भ्रूण के बीच बनने वाला अस्थायी, अत्यधिक रक्तवाहिकायुक्त अंग है। यह माता और भ्रूण के बीच पदार्थों के आदान-प्रदान में सहायता करता है। भ्रूण अपरा से नाभिनाल (Umbilical Cord) द्वारा जुड़ा रहता है।

अपरा के प्रमुख कार्य

  • माता के रक्त से भ्रूण तक ऑक्सीजन एवं पोषक पदार्थ पहुँचाने में सहायता।
  • भ्रूण से कार्बन डाइऑक्साइड एवं अपशिष्ट पदार्थ माता के रक्त की ओर स्थानांतरित करना।
  • hCG, hPL, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का स्राव।
  • माता एवं भ्रूण के बीच कुछ प्रतिरक्षी पदार्थों के स्थानांतरण में सहायता।
महत्त्वपूर्ण: सामान्यतः माता और भ्रूण का रक्त सीधे एक-दूसरे में नहीं मिलता। पदार्थों का आदान-प्रदान अपरा की चयनात्मक बाधा के माध्यम से होता है। कुछ संक्रमण एवं हानिकारक पदार्थ फिर भी अपरा को पार कर सकते हैं।

17. जुड़वाँ बच्चों का जन्म (Twins)

एक गर्भावस्था में दो बच्चों का जन्म जुड़वाँ जन्म कहलाता है। जुड़वाँ बच्चे मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं।

1. एकयुग्मजी जुड़वाँ (Monozygotic Twins)

जब एक ही निषेचित अंडाणु से बना युग्मनज प्रारंभिक विकास में दो भ्रूणों में विभाजित हो जाता है, तब एकयुग्मजी जुड़वाँ बनते हैं। इनमें सामान्यतः आनुवंशिक संरचना बहुत समान होती है और दोनों का जैविक लिंग समान होता है। अपरा और भ्रूणावरण की व्यवस्था विभाजन के समय पर निर्भर करती है।

2. द्वियुग्मजी जुड़वाँ (Dizygotic Twins)

जब एक ही मासिक चक्र में दो अलग-अलग अंडाणु निकलते हैं और दोनों का अलग-अलग शुक्राणुओं से निषेचन होता है, तब द्वियुग्मजी जुड़वाँ बनते हैं। ये सामान्य भाई-बहनों की तरह आनुवंशिक रूप से भिन्न हो सकते हैं और इनका जैविक लिंग समान या अलग हो सकता है।

आधारएकयुग्मजीद्वियुग्मजी
निषेचित अंडाणुएकदो
निर्माणएक युग्मनज का विभाजनदो अलग-अलग निषेचन
आनुवंशिक समानताअत्यधिक समानसामान्य भाई-बहनों जैसी
जैविक लिंगसामान्यतः समानसमान या अलग

18. परिवार नियोजन एवं गर्भनिरोधक विधियाँ

परिवार नियोजन का उद्देश्य व्यक्तियों और दंपतियों को संतान की संख्या तथा जन्म के बीच अंतर के संबंध में सूचित एवं स्वैच्छिक निर्णय लेने में सहायता करना है। गर्भनिरोधक विधियाँ अनचाहे गर्भधारण को रोकने में सहायक होती हैं। सभी विधियों की प्रभावशीलता, उपयोग की प्रक्रिया और उपयुक्तता अलग-अलग होती है।

गर्भनिरोधक विधियों के प्रमुख प्रकार

विधिउदाहरणमुख्य विशेषता
प्राकृतिक विधिआवधिक संयम, स्तनपान अमेनोरिया विधि (LAM)दवाओं या उपकरणों के बिना गर्भधारण की संभावना घटाने का प्रयास। LAM केवल निर्धारित शर्तों में प्रभावी है।
अवरोधक विधिपुरुष कंडोम, महिला कंडोम, डायफ्रामशुक्राणुओं को अंडाणु तक पहुँचने से रोकना।
हार्मोनल विधिगर्भनिरोधक गोलियाँ, इंजेक्शन, इम्प्लांटअंडोत्सर्ग या अन्य प्रजनन प्रक्रियाओं को प्रभावित करना।
अंतर्गर्भाशयी युक्ति (IUD)कॉपर-T, हार्मोनल IUDगर्भाशय में स्थापित की जाने वाली गर्भनिरोधक युक्ति।
आपातकालीन गर्भनिरोधआपातकालीन गर्भनिरोधक गोली, कॉपर IUDअसुरक्षित संभोग या गर्भनिरोधक विफलता के बाद निर्धारित समय-सीमा में उपयोग।
शल्य विधिपुरुष नसबंदी (Vasectomy), महिला नसबंदी (Tubectomy)स्थायी गर्भनिरोधक उपाय।

पुरुष नसबंदी (Vasectomy)

इस प्रक्रिया में शुक्रवाहिनियों को काटकर या बंद करके शुक्राणुओं के वीर्य में पहुँचने का मार्ग रोका जाता है। यह सामान्यतः स्थायी गर्भनिरोधक विधि है। इससे टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का निर्माण सामान्यतः बंद नहीं होता और न ही यौन क्षमता स्वतः समाप्त होती है। प्रक्रिया के बाद चिकित्सकीय जाँच द्वारा सफलता की पुष्टि होने तक अन्य गर्भनिरोधक उपाय आवश्यक होते हैं।

महिला नसबंदी (Tubectomy)

इस प्रक्रिया में अंडवाहिनियों को बंद या काट दिया जाता है, जिससे अंडाणु और शुक्राणु के मिलने की संभावना रोकी जाती है। यह भी सामान्यतः स्थायी गर्भनिरोधक विधि है।

परीक्षा एवं स्वास्थ्य तथ्य: कंडोम गर्भधारण की संभावना कम करने के साथ-साथ HIV सहित अनेक यौन संचारित संक्रमणों के जोखिम को कम करने में भी सहायता करता है। अधिकांश अन्य गर्भनिरोधक विधियाँ STI से सुरक्षा प्रदान नहीं करतीं।

19. प्रजनन स्वास्थ्य एवं यौन संचारित संक्रमण

प्रजनन स्वास्थ्य का अर्थ केवल रोगों की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि प्रजनन से संबंधित शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण की स्थिति भी है। इसमें सुरक्षित मातृत्व, परिवार नियोजन, यौन शिक्षा, संक्रमणों की रोकथाम, समय पर जाँच और उचित स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच शामिल हैं।

यौन संचारित संक्रमण (STIs)

यौन संपर्क के माध्यम से फैलने वाले संक्रमणों को यौन संचारित संक्रमण कहा जाता है। कुछ संक्रमण गर्भावस्था, प्रसव या रक्त के माध्यम से भी फैल सकते हैं। कई संक्रमणों में प्रारंभिक अवस्था में स्पष्ट लक्षण नहीं होते, इसलिए जाँच एवं समय पर उपचार महत्त्वपूर्ण है।

रोग/संक्रमणकारकमुख्य जानकारी
सिफिलिस (Syphilis)जीवाणु – Treponema pallidumउपचार न होने पर शरीर के अनेक अंग प्रभावित हो सकते हैं।
गोनोरिया (Gonorrhoea)जीवाणु – Neisseria gonorrhoeaeजनन एवं मूत्र मार्ग को प्रभावित कर सकता है।
क्लैमाइडियाजीवाणु – Chlamydia trachomatisअक्सर बिना लक्षण के भी हो सकता है; अनुपचारित रहने पर प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है।
जननांग हर्पीजवायरस – Herpes simplex virusजननांग क्षेत्र में छाले या घाव हो सकते हैं।
जननांग मस्सेह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV)कुछ HPV प्रकार गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का कारण बन सकते हैं।
HIV संक्रमणHuman Immunodeficiency Virusप्रतिरक्षा तंत्र की CD4 कोशिकाओं को प्रभावित करता है।
हेपेटाइटिस-BHepatitis B Virusयकृत को प्रभावित करता है; यौन संपर्क एवं संक्रमित रक्त से फैल सकता है।

रोकथाम एवं नियंत्रण

  • कंडोम का सही एवं नियमित उपयोग।
  • जोखिम की स्थिति में समय पर जाँच एवं चिकित्सकीय परामर्श।
  • संक्रमण होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय उचित उपचार।
  • Hepatitis-B और HPV के लिए उपलब्ध टीकाकरण की जानकारी एवं पात्रता के अनुसार टीका लगवाना।
  • HIV की रोकथाम, जाँच और उपचार संबंधी विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग।
  • गर्भवती महिलाओं की नियमित प्रसवपूर्व जाँच।
महत्त्वपूर्ण: HIV संक्रमण और AIDS एक ही चीज नहीं हैं। HIV एक वायरस है, जबकि AIDS HIV संक्रमण की उन्नत अवस्था में विकसित होने वाली गंभीर प्रतिरक्षा-अल्पता की स्थिति है। प्रभावी एंटीरेट्रोवायरल उपचार से HIV को नियंत्रित किया जा सकता है।

20. प्रजनन से संबंधित प्रमुख वैज्ञानिक तथ्य

तथ्यउत्तर
मानव में प्रजनन का प्रकारलैंगिक प्रजनन
मानव में निषेचनआंतरिक निषेचन
नर युग्मकशुक्राणु
मादा युग्मकअंडाणु
शुक्राणु निर्माण का स्थानवृषण की शुक्रजनक नलिकाएँ
टेस्टोस्टेरोन का स्राववृषण की लेडिग कोशिकाएँ
अंडाणु निर्माण/परिपक्वता का स्थानअंडाशय
निषेचन का सामान्य स्थानअंडवाहिनी का एम्पुलरी-इस्थमिक संधि क्षेत्र
भ्रूण का आरोपणगर्भाशय की अंतःस्तर (Endometrium) में
गर्भावस्था का हार्मोन परीक्षणhCG
प्रसव में महत्त्वपूर्ण हार्मोनऑक्सीटोसिन
दूध निर्माण से संबंधित हार्मोनप्रोलैक्टिन
दूध निष्कासन में सहायक हार्मोनऑक्सीटोसिन
मानव देह कोशिका में गुणसूत्र46
मानव युग्मक में गुणसूत्र23
आवृतबीजी पौधों की विशिष्ट प्रक्रियाद्विनिषेचन
बीजांड का विकासबीज में
अंडाशय का विकासफल में
पुष्प का नर जनन अंगपुंकेसर
पुष्प का मादा जनन अंगस्त्रीकेसर

त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision)

  • अमीबा – द्विखंडन।
  • प्लाज्मोडियम – बहुखंडन।
  • यीस्ट एवं हाइड्रा – मुकुलन।
  • राइजोपस – बीजाणु निर्माण।
  • प्लैनेरिया – पुनर्जनन।
  • आलू – तने का रूपांतरित भाग (कंद)।
  • ब्रायोफिलम – पत्ती द्वारा कायिक प्रवर्धन।
  • पुंकेसर – नर जनन अंग।
  • स्त्रीकेसर – मादा जनन अंग।
  • परागकोश – परागकण निर्माण।
  • अंडाशय – बीजांड धारण करता है।
  • आवृतबीजी पौधे – द्विनिषेचन।
  • मानव में निषेचन – सामान्यतः अंडवाहिनी में।
  • मानव में आरोपण – गर्भाशय की अंतःस्तर में।
  • शुक्राणु – 23 गुणसूत्र।
  • अंडाणु – 23 गुणसूत्र।
  • मानव देह कोशिका – 46 गुणसूत्र।
  • मासिक धर्म चक्र – औसतन 28 दिन, लेकिन परिवर्तनशील।
  • hCG – गर्भावस्था परीक्षण में उपयोगी हार्मोन।
  • ऑक्सीटोसिन – प्रसव संकुचन एवं दूध निष्कासन में भूमिका।
  • प्रोलैक्टिन – दूध निर्माण में भूमिका।
  • एकयुग्मजी जुड़वाँ – एक युग्मनज से।
  • द्वियुग्मजी जुड़वाँ – दो अलग-अलग निषेचित अंडाणुओं से।
  • कंडोम – गर्भधारण एवं STI के जोखिम को कम करने में सहायक।
  • Vasectomy – पुरुष नसबंदी।
  • Tubectomy – महिला नसबंदी।

महत्त्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

निर्देश: पहले स्वयं प्रश्न हल करें, फिर View Answer पर क्लिक करके सही उत्तर और व्याख्या देखें। नीचे दिए गए प्रश्न अभ्यास हेतु तैयार किए गए मौलिक प्रश्न हैं; इन्हें किसी विशिष्ट परीक्षा के वास्तविक PYQ के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।

प्रश्न 1. प्रजनन का प्रमुख जैविक महत्त्व क्या है?

(A) प्रत्येक जीव की व्यक्तिगत आयु बढ़ाना

(B) प्रजाति की निरंतरता बनाए रखना

(C) शरीर का तापमान नियंत्रित करना

(D) भोजन का पाचन करना

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) प्रजाति की निरंतरता बनाए रखना।
प्रजनन से नई संतति उत्पन्न होती है और प्रजाति का अस्तित्व पीढ़ी-दर-पीढ़ी बना रहता है।
प्रश्न 2. निम्न में से कौन-सा जीव सामान्यतः द्विखंडन द्वारा प्रजनन करता है?

(A) अमीबा

(B) हाइड्रा

(C) राइजोपस

(D) यीस्ट

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) अमीबा।
अमीबा में एक जनक कोशिका विभाजित होकर दो संतति कोशिकाएँ बनाती है।
प्रश्न 3. प्लाज्मोडियम में सामान्यतः कौन-सा अलैंगिक प्रजनन पाया जाता है?

(A) मुकुलन

(B) द्विखंडन

(C) बहुखंडन

(D) कायिक प्रवर्धन

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) बहुखंडन।
बहुखंडन में एक जनक कोशिका से अनेक संतति कोशिकाएँ बनती हैं।
प्रश्न 4. यीस्ट में सामान्यतः प्रजनन की कौन-सी विधि पाई जाती है?

(A) पुनर्जनन

(B) मुकुलन

(C) द्विनिषेचन

(D) परागण

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) मुकुलन।
यीस्ट की कोशिका पर छोटी कलिका बनती है, जो विकसित होकर नई कोशिका बनाती है।
प्रश्न 5. ब्रेड मोल्ड राइजोपस में अलैंगिक प्रजनन की प्रमुख विधि क्या है?

(A) बीजाणु निर्माण

(B) निषेचन

(C) परागण

(D) विखंडन द्वारा भ्रूण निर्माण

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) बीजाणु निर्माण।
राइजोपस में बीजाणुधानी के भीतर बीजाणु बनते हैं।
प्रश्न 6. प्लैनेरिया किस क्षमता के लिए प्रसिद्ध है?

(A) प्रकाश संश्लेषण

(B) पुनर्जनन

(C) परागण

(D) आंतरिक निषेचन

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) पुनर्जनन।
प्लैनेरिया शरीर के कुछ भागों से नए जीव का निर्माण कर सकता है।
प्रश्न 7. ब्रायोफिलम में कायिक प्रवर्धन किसके द्वारा होता है?

(A) जड़

(B) तना

(C) पत्ती

(D) फूल

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) पत्ती।
ब्रायोफिलम की पत्तियों के किनारों पर कलिकाएँ बनती हैं, जिनसे नए पौधे विकसित होते हैं।
प्रश्न 8. आलू का कौन-सा भाग कायिक प्रवर्धन में सहायक होता है?

(A) जड़

(B) तना

(C) पत्ती

(D) फूल

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) तना।
आलू एक भूमिगत रूपांतरित तना है, जिसे कंद कहते हैं। इसकी आँखों में कलिकाएँ होती हैं।
प्रश्न 9. पुष्प का नर जनन अंग कौन-सा है?

(A) स्त्रीकेसर

(B) पुंकेसर

(C) वर्तिकाग्र

(D) अंडाशय

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) पुंकेसर।
पुंकेसर में परागकोश और तंतु होते हैं। परागकोश में परागकण बनते हैं।
प्रश्न 10. पुष्प में बीजांड कहाँ पाए जाते हैं?

(A) परागकोश

(B) वर्तिकाग्र

(C) अंडाशय

(D) दल

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) अंडाशय।
स्त्रीकेसर के अंडाशय के भीतर बीजांड उपस्थित होते हैं।
प्रश्न 11. परागकोश से परागकणों का वर्तिकाग्र तक पहुँचना कहलाता है—

(A) निषेचन

(B) परागण

(C) अंकुरण

(D) आरोपण

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) परागण।
परागण में परागकण परागकोश से वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं।
प्रश्न 12. द्विनिषेचन किसमें पाया जाता है?

(A) शैवाल

(B) कवक

(C) आवृतबीजी पौधों

(D) सभी जीवाणुओं

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) आवृतबीजी पौधों।
आवृतबीजी पौधों में एक नर युग्मक अंड कोशिका से और दूसरा ध्रुवीय केंद्रकों से संलयित होता है।
प्रश्न 13. निषेचन के बाद बीजांड किसमें परिवर्तित होता है?

(A) फल

(B) बीज

(C) पत्ती

(D) जड़

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) बीज।
निषेचन के बाद बीजांड बीज तथा अंडाशय सामान्यतः फल में विकसित होता है।
प्रश्न 14. मानव में शुक्राणुओं का निर्माण कहाँ होता है?

(A) अधिवृषण

(B) शुक्रजनक नलिकाएँ

(C) प्रोस्टेट ग्रंथि

(D) शुक्राशय

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) शुक्रजनक नलिकाएँ।
वृषण की शुक्रजनक नलिकाओं में शुक्राणु निर्माण होता है।
प्रश्न 15. टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्राव मुख्यतः किस कोशिका द्वारा होता है?

(A) सर्टोली कोशिका

(B) लेडिग कोशिका

(C) लाल रक्त कोशिका

(D) अंड कोशिका

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) लेडिग कोशिका।
वृषण की अंतराली कोशिकाएँ अर्थात् लेडिग कोशिकाएँ टेस्टोस्टेरोन का स्राव करती हैं।
प्रश्न 16. शुक्राणुओं का परिपक्वन मुख्यतः कहाँ होता है?

(A) अधिवृषण

(B) मूत्राशय

(C) प्रोस्टेट

(D) मूत्रमार्ग

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) अधिवृषण।
अधिवृषण में शुक्राणुओं का परिपक्वन और अस्थायी संग्रह होता है।
प्रश्न 17. मानव में अंडाणु का निर्माण किस अंग में होता है?

(A) गर्भाशय

(B) अंडाशय

(C) योनि

(D) गर्भाशय ग्रीवा

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) अंडाशय।
अंडाशय में अंड कोशिकाओं का विकास होता है और यह स्त्री जनन हार्मोन भी स्रावित करता है।
प्रश्न 18. मानव में निषेचन सामान्यतः कहाँ होता है?

(A) गर्भाशय

(B) योनि

(C) अंडवाहिनी

(D) अंडाशय

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) अंडवाहिनी।
निषेचन सामान्यतः अंडवाहिनी के एम्पुलरी-इस्थमिक संधि क्षेत्र में होता है।
प्रश्न 19. मानव में भ्रूण का आरोपण कहाँ होता है?

(A) अंडाशय

(B) गर्भाशय की अंतःस्तर

(C) योनि

(D) गर्भाशय ग्रीवा

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) गर्भाशय की अंतःस्तर।
ब्लास्टोसिस्ट गर्भाशय की आंतरिक परत अर्थात् एंडोमेट्रियम में आरोपित होता है।
प्रश्न 20. मानव के सामान्य शुक्राणु में कितने गुणसूत्र होते हैं?

(A) 22

(B) 23

(C) 44

(D) 46

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) 23।
मानव शुक्राणु अगुणित होता है और इसमें 23 गुणसूत्र होते हैं।
प्रश्न 21. मानव के सामान्य अंडाणु में कितने गुणसूत्र होते हैं?

(A) 23

(B) 24

(C) 44

(D) 46

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) 23।
मानव अंडाणु में 22 स्वजात गुणसूत्र और एक X गुणसूत्र होता है।
प्रश्न 22. मानव में सामान्य देह कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या कितनी होती है?

(A) 23

(B) 44

(C) 46

(D) 48

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) 46।
मानव की सामान्य देह कोशिकाओं में 23 जोड़े अर्थात् 46 गुणसूत्र होते हैं।
प्रश्न 23. 28 दिन के औसत मासिक धर्म चक्र में अंडोत्सर्ग सामान्यतः किस दिन के आसपास होता है?

(A) 1वाँ दिन

(B) 7वाँ दिन

(C) 14वाँ दिन

(D) 28वाँ दिन

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) 14वाँ दिन।
28 दिन के औसत चक्र में अंडोत्सर्ग लगभग 14वें दिन होता है। वास्तविक समय चक्र की अवधि के अनुसार बदल सकता है।
प्रश्न 24. अंडोत्सर्ग को प्रेरित करने में किस हार्मोन की तीव्र वृद्धि महत्त्वपूर्ण है?

(A) LH

(B) इंसुलिन

(C) थायरॉक्सिन

(D) मेलाटोनिन

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) LH।
LH surge परिपक्व कूप से अंडाणु के निकलने अर्थात् अंडोत्सर्ग को प्रेरित करता है।
प्रश्न 25. गर्भावस्था परीक्षण में सामान्यतः किस हार्मोन की जाँच की जाती है?

(A) FSH

(B) hCG

(C) टेस्टोस्टेरोन

(D) थायरॉक्सिन

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) hCG।
आरोपण के बाद विकसित होने वाला भ्रूणीय बाहरी ऊतक hCG हार्मोन बनाता है, जिसकी जाँच गर्भावस्था परीक्षण में की जाती है।
प्रश्न 26. प्रसव के दौरान गर्भाशय संकुचन को बढ़ाने में कौन-सा हार्मोन महत्त्वपूर्ण है?

(A) ऑक्सीटोसिन

(B) इंसुलिन

(C) ग्लूकागॉन

(D) एड्रेनालिन

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) ऑक्सीटोसिन।
ऑक्सीटोसिन गर्भाशय की पेशियों के संकुचन को बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रश्न 27. दूध के निर्माण में मुख्य भूमिका किस हार्मोन की होती है?

(A) प्रोलैक्टिन

(B) ऑक्सीटोसिन

(C) LH

(D) FSH

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) प्रोलैक्टिन।
प्रोलैक्टिन स्तन ग्रंथियों में दूध निर्माण को प्रोत्साहित करता है।
प्रश्न 28. दूध के निष्कासन (Milk Ejection) में कौन-सा हार्मोन सहायक है?

(A) एस्ट्रोजन

(B) ऑक्सीटोसिन

(C) प्रोजेस्टेरोन

(D) टेस्टोस्टेरोन

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) ऑक्सीटोसिन।
ऑक्सीटोसिन स्तन ग्रंथियों की मायोएपिथीलियल कोशिकाओं के संकुचन द्वारा दूध निष्कासन में मदद करता है।
प्रश्न 29. अपरा (Placenta) का प्रमुख कार्य क्या है?

(A) केवल शुक्राणु निर्माण

(B) माता एवं भ्रूण के बीच पदार्थों का आदान-प्रदान

(C) अंडाणु निर्माण

(D) पाचन एंजाइम बनाना

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) माता एवं भ्रूण के बीच पदार्थों का आदान-प्रदान।
अपरा ऑक्सीजन, पोषक पदार्थों और अपशिष्ट पदार्थों के स्थानांतरण में सहायता करती है।
प्रश्न 30. एकयुग्मजी जुड़वाँ बच्चों का निर्माण किससे होता है?

(A) दो अंडाणुओं के निषेचन से

(B) एक युग्मनज के विभाजन से

(C) बिना निषेचन के

(D) दो अलग-अलग माताओं से

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) एक युग्मनज के विभाजन से।
एक निषेचित अंडाणु से बना युग्मनज विभाजित होकर दो भ्रूण बना सकता है।
प्रश्न 31. द्वियुग्मजी जुड़वाँ बच्चों का निर्माण किस स्थिति में होता है?

(A) एक युग्मनज के विभाजन से

(B) दो अलग-अलग अंडाणुओं के निषेचन से

(C) केवल एक शुक्राणु से

(D) बिना अंडाणु के

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) दो अलग-अलग अंडाणुओं के निषेचन से।
दो अंडाणु अलग-अलग शुक्राणुओं से निषेचित होकर दो युग्मनज बनाते हैं।
प्रश्न 32. कॉपर-T किस प्रकार का गर्भनिरोधक है?

(A) हार्मोनल इंजेक्शन

(B) अंतर्गर्भाशयी युक्ति

(C) शल्य विधि

(D) प्राकृतिक विधि

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) अंतर्गर्भाशयी युक्ति।
कॉपर-T एक गैर-हार्मोनल अंतर्गर्भाशयी गर्भनिरोधक युक्ति है।
प्रश्न 33. पुरुष नसबंदी को किस नाम से जाना जाता है?

(A) ट्यूबेक्टॉमी

(B) वैसेक्टॉमी

(C) हिस्टेरेक्टॉमी

(D) ओवरीक्टॉमी

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) वैसेक्टॉमी।
वैसेक्टॉमी में शुक्रवाहिनियों को काटकर या बंद करके शुक्राणुओं के परिवहन को रोका जाता है।
प्रश्न 34. महिला नसबंदी को किस नाम से जाना जाता है?

(A) वैसेक्टॉमी

(B) ट्यूबेक्टॉमी

(C) वासोडाइलेशन

(D) डायलिसिस

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) ट्यूबेक्टॉमी।
इस प्रक्रिया में अंडवाहिनियों को बंद या काट दिया जाता है।
प्रश्न 35. निम्न में से कौन-सी गर्भनिरोधक विधि STI के जोखिम को भी कम करने में सहायता करती है?

(A) कॉपर-T

(B) गर्भनिरोधक गोली

(C) कंडोम

(D) ट्यूबेक्टॉमी

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) कंडोम।
कंडोम गर्भधारण और अनेक यौन संचारित संक्रमणों के जोखिम को कम करने में सहायक है।
प्रश्न 36. सिफिलिस रोग का कारक कौन-सा है?

(A) Treponema pallidum

(B) Plasmodium vivax

(C) HIV

(D) Vibrio cholerae

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) Treponema pallidum।
सिफिलिस एक जीवाणुजनित यौन संचारित संक्रमण है।
प्रश्न 37. गोनोरिया रोग का कारक कौन-सा है?

(A) Neisseria gonorrhoeae

(B) Salmonella typhi

(C) Mycobacterium tuberculosis

(D) Entamoeba histolytica

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) Neisseria gonorrhoeae।
यह जीवाणु गोनोरिया संक्रमण का कारण है।
प्रश्न 38. AIDS किस वायरस के संक्रमण से संबंधित है?

(A) HPV

(B) HIV

(C) HBV

(D) Influenza virus

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) HIV।
HIV प्रतिरक्षा तंत्र को प्रभावित करता है और अनुपचारित संक्रमण AIDS की अवस्था तक पहुँच सकता है।
प्रश्न 39. गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के कई मामलों से कौन-सा वायरस संबंधित है?

(A) HPV

(B) HIV

(C) Rabies virus

(D) Dengue virus

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) HPV।
ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के कुछ उच्च जोखिम वाले प्रकार गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से संबंधित हैं।
प्रश्न 40. मानव में गर्भावस्था की अवधि अंतिम मासिक धर्म के प्रथम दिन से औसतन कितनी मानी जाती है?

(A) 20 सप्ताह

(B) 28 सप्ताह

(C) 40 सप्ताह

(D) 50 सप्ताह

View Answer / उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) 40 सप्ताह।
चिकित्सकीय रूप से गर्भावस्था की अवधि अंतिम मासिक धर्म के प्रथम दिन से लगभग 40 सप्ताह मानी जाती है। निषेचन से गणना करने पर लगभग 38 सप्ताह होती है।

परीक्षा के लिए अंतिम महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • अलैंगिक प्रजनन में निषेचन नहीं होता।
  • द्विखंडन, बहुखंडन, मुकुलन और बीजाणु निर्माण अलैंगिक प्रजनन की विधियाँ हैं।
  • आवृतबीजी पौधों में द्विनिषेचन पाया जाता है।
  • मानव में निषेचन सामान्यतः अंडवाहिनी में होता है।
  • शुक्राणु एवं अंडाणु में 23-23 गुणसूत्र होते हैं।
  • मानव की सामान्य देह कोशिका में 46 गुणसूत्र होते हैं।
  • hCG गर्भावस्था परीक्षण में महत्त्वपूर्ण है।
  • प्रोलैक्टिन दूध निर्माण तथा ऑक्सीटोसिन दूध निष्कासन में सहायक है।
  • अपरा माता और भ्रूण के बीच पदार्थों के आदान-प्रदान में सहायक है।
  • एकयुग्मजी जुड़वाँ एक युग्मनज से तथा द्वियुग्मजी जुड़वाँ दो युग्मनजों से बनते हैं।
  • कंडोम गर्भधारण के साथ-साथ STI का जोखिम कम करने में भी सहायक है।

संदर्भ एवं अध्ययन आधार

  1. NCERT कक्षा 10 विज्ञान – अध्याय: How Do Organisms Reproduce?
  2. NCERT कक्षा 12 जीव विज्ञान – Sexual Reproduction in Flowering Plants.
  3. NCERT कक्षा 12 जीव विज्ञान – Human Reproduction.
  4. NCERT कक्षा 12 जीव विज्ञान – Reproductive Health.
  5. भारत सरकार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय – परिवार नियोजन एवं प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी सामग्री।
  6. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) – यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य तथा यौन संचारित संक्रमण संबंधी तथ्य।

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें (0)