Complete Smart Notes: ISFR 2021 Report, वन संरक्षण अधिनियम एवं 50+ PYQs
🌿 1. वन (Forest) किसे कहते हैं? – विस्तृत परिभाषा
साधारण शब्दों में, 'वन' वह विशाल भू-क्षेत्र है जो मुख्य रूप से वृक्षों और झाड़ियों से ढका होता है। लेकिन भौगोलिक दृष्टि से इसकी परिभाषा अधिक गहरी है:
- 🌳 पारिस्थितिक तंत्र: वन केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि एक जटिल 'इकोसिस्टम' है जहाँ पादप, जीव-जंतु और सूक्ष्मजीव आपस में निर्भर होते हैं।
- 📏 वैज्ञानिक मापदंड (FAO): 0.5 हेक्टेयर से अधिक की भूमि, जहाँ पेड़ों की ऊँचाई कम से कम 5 मीटर हो और 'कैनोपी डेंसिटी' (पेड़ों की छतरी का घनत्व) 10% से अधिक हो।
- 🇮🇳 भारतीय संदर्भ: भारत में 'वन' का निर्धारण वर्षा, मिट्टी और तापमान के आधार पर होता है।
🌧️ 2. उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन (Evergreen Forests)
ये भारत के सबसे सुंदर और घने वन हैं। इन्हें 'वर्षा वन' (Rain Forests) भी कहा जाता है। आइए इनका सूक्ष्म विश्लेषण करें:
🌡️ अनुकूल परिस्थितियाँ (Conditions)
• वार्षिक वर्षा: 200 सेमी से अधिक (अत्यधिक भारी वर्षा)।
• औसत तापमान: 22°C से अधिक।
• आर्द्रता (Humidity): यहाँ हवा में नमी बहुत अधिक (70%+) होती है।
✨ प्रमुख विशेषताएँ (Characteristics)
🛤️ प्रमुख क्षेत्र एवं प्रजातियाँ
| क्षेत्र (Location) | प्रमुख वृक्ष (Flora) |
|---|---|
| पश्चिमी घाट, अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, उत्तर-पूर्वी भारत (असम, मेघालय) | रोजवुड (Rosewood), महोगनी, आबनूस (Ebony), रबड़, सिनकोना और बांस। |
याद रखें: इन वनों की लकड़ी अत्यंत कठोर (Hardwood) होती है, इसलिए इनका व्यापारिक दोहन (Commercial Logging) कठिन होता है। सिनकोना वृक्ष से कुनैन (Quinine) बनाई जाती है जो मलेरिया के इलाज में काम आती है।
🍂 1. पर्णपाती वन: परिचय एवं महत्व
भारत में सबसे अधिक क्षेत्रफल पर फैले होने के कारण इन्हें 'मानसूनी वन' कहा जाता है। इनका सबसे मुख्य गुण यह है कि ये शुष्क ग्रीष्म ऋतु में 6 से 8 सप्ताह के लिए अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं ताकि पानी का संरक्षण (Water Conservation) किया जा सके।
वर्षा की उपलब्धता के आधार पर इन्हें दो उप-भागों में बाँटा गया है: आर्द्र (Moist) और शुष्क (Dry)।
💧 2. आर्द्र पर्णपाती वन (Tropical Moist Deciduous)
- 🌧️ वर्षा का स्तर: 100 सेमी से 200 सेमी के बीच।
- 📍 प्रमुख क्षेत्र: हिमालय के गिरिपाद (Foot-hills), उत्तर-पूर्वी राज्य, झारखंड, पश्चिम ओडिशा और छत्तीसगढ़।
- 🌲 प्रमुख वृक्ष: सागौन (Teak) - यह सबसे महत्वपूर्ण प्रजाति है। इसके अलावा साल, शीशम, महुआ, चंदन और आंवला प्रमुख हैं।
☀️ 3. शुष्क पर्णपाती वन (Tropical Dry Deciduous)
- 🔥 वर्षा का स्तर: 70 सेमी से 100 सेमी के बीच।
- 📍 प्रमुख क्षेत्र: प्रायद्वीपीय पठार के वर्षा वाले भाग, उत्तर प्रदेश और बिहार के मैदानी इलाके।
- 🌲 प्रमुख वृक्ष: तेंदू, पलाश, अमलतास, बेल और खैर।
- 🐄 विशेषता: ये वन अधिक खुले होते हैं। इनमें घास के मैदान भी पाए जाते हैं, जो पशुओं के चरने के लिए उपयोग होते हैं।
पलाश (Palash): इसे 'जंगल की आग' (Flame of the Forest) कहा जाता है क्योंकि इसके फूल लाल-नारंगी रंग के होते हैं।
सागौन (Teak): यह आर्थिक रूप से सबसे मूल्यवान लकड़ी प्रदान करता है।
⚖️ 4. सदाबहार बनाम पर्णपाती (तुलना)
| विशेषता | सदाबहार वन | पर्णपाती वन |
|---|---|---|
| वर्षा | 200 सेमी + | 70 से 200 सेमी |
| पत्तियां | कभी साथ नहीं गिरतीं | गर्मी में एक साथ गिरती हैं |
| आर्थिक दोहन | कठिन (घने वन) | आसान (खुले वन) |
🌵 1. कंटीले वन एवं झाड़ियाँ (Thorn Forests)
ये उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ जल की भारी कमी होती है। यहाँ के पौधे वाष्पीकरण को रोकने के लिए कांटों का सहारा लेते हैं।
- 🌧️ वर्षा: 70 सेमी से भी कम।
- 📍 क्षेत्र: उत्तर-पश्चिमी भारत (राजस्थान, गुजरात, हरियाणा) और छत्तीसगढ़/MP के अर्ध-शुष्क भाग।
- 🌲 प्रमुख वृक्ष: बबूल (Acacia), कीकर, खजूर (Palm) और नागफनी (Cactus)।
- 🧬 विशेषता: इनकी जड़ें लंबी होती हैं ताकि गहराई से पानी ला सकें। पत्तियाँ छोटी होती हैं और छाल मोटी होती है।
"कम पानी, लंबी जड़, छोटा पत्ता, कांटा हर जगह।" - राजस्थान और गुजरात की गर्मी याद करें, कीवर्ड्स खुद याद आ जाएंगे।
🏔️ 2. पर्वतीय वन (Montane Forests)
पहाड़ों पर जैसे-जैसे ऊँचाई बढ़ती है, तापमान गिरता है और वनस्पति का प्रकार भी बदल जाता है।
🌲 शंकुधारी वन (Coniferous)
ऊँचाई: 1500 - 3000 मीटर।
वृक्ष: देवदार (Deodar), चीड़ (Pine), सिल्वर फर और स्प्रूस। इनकी पत्तियाँ सुई की तरह नुकीली होती हैं ताकि बर्फ जमा न हो।
❄️ अल्पाइन वनस्पति
ऊँचाई: 3600 मीटर से ऊपर।
यहाँ केवल घास के मैदान (जैसे उत्तराखंड में बुग्याल) और काई (Lichen) पाई जाती है। इसके ऊपर सिर्फ बर्फ होती है।
🌊 3. मैंग्रोव या ज्वारीय वन (Mangrove Forests)
इन्हें 'सुंदरवन' के नाम से भी जाना जाता है। ये दुनिया के सबसे अनूठे पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक हैं।
• न्यूमेटोफोर (Pneumatophores): इन पेड़ों की जड़ें श्वसन के लिए पानी से बाहर (उल्टी) निकली होती हैं।
• खारा पानी: ये खारे पानी (Salinity) में जीवित रहने की अद्भुत क्षमता रखते हैं।
• प्रमुख प्रजाति: सुंदरी (Sundari Tree) - इसी कारण इसका नाम 'सुंदरवन' पड़ा।
मैंग्रोव वन सुनामी और चक्रवात के समय 'प्राकृतिक दीवार' (Natural Buffer) का काम करते हैं और तटों की रक्षा करते हैं।
🏛️ 1. स्वतंत्र भारत की प्रथम वन नीति (1952)
1952 की नीति का मुख्य उद्देश्य औपनिवेशिक काल की 'राजस्व मानसिकता' को बदलकर वनों के संरक्षण की नींव रखना था।
핵심 बिंदु (Key Pillars):
- 📍 33.3% लक्ष्य: देश के कुल क्षेत्रफल का एक-तिहाई हिस्सा वनाच्छादित होना चाहिए।
- ⛰️ पर्वतीय सुरक्षा: मृदा अपरदन रोकने के लिए पहाड़ों पर 60% वन क्षेत्र का मानक।
- 🛡️ वर्गीकरण: वनों को 'संरक्षित वन', 'राष्ट्रीय वन', 'ग्राम वन' और 'वृक्ष भूमियों' में बांटा गया।
📜 2. राष्ट्रीय वन नीति, 1988 (वर्तमान आधार)
यह नीति भारत के वन इतिहास में 'पैराडाइम शिफ्ट' (Paradigm Shift) लेकर आई। इसमें वनों के आर्थिक लाभ के बजाय पारिस्थितिक स्थिरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।
💡 मुख्य उद्देश्य
• पर्यावरण संतुलन और पारिस्थितिक स्थिरता बनाए रखना।
• प्राकृतिक विरासत (Flora & Fauna) का संरक्षण।
• नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में मृदा अपरदन रोकना।
👥 जन भागीदारी
• वनों पर निर्भर आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों की सुरक्षा।
• सामाजिक वानिकी (Social Forestry) के माध्यम से खाली पड़ी भूमि पर वृक्षारोपण को बढ़ावा देना।
⚖️ 3. महत्वपूर्ण कानूनी अधिनियम (Must-Know Acts)
CAMPA (कैम्पा) फंड: प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) के लिए यह फंड बनाया गया। यदि कोई कंपनी वन काटती है, तो उसे उतनी ही जमीन पर कहीं और वन लगाने के लिए पैसा देना होता है। (सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 2016 में कानून बना)।
🗺️ 4. संवैधानिक स्थिति (Constitutional Status)
वनों को संविधान में कहाँ स्थान मिला है? यहाँ से सीधे सवाल आते हैं:
• अनुच्छेद 48A (DPSP): राज्य का कर्तव्य है कि वह वनों और वन्यजीवों की रक्षा करे।
• अनुच्छेद 51A(g) (मूल कर्तव्य): नागरिकों का कर्तव्य है कि वे प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करें।
📂 4. वनों का प्रशासनिक वर्गीकरण (Legal Classification)
भारतीय वन अधिनियम, 1927 के अनुसार वनों को उनकी सुरक्षा के स्तर के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है। यहाँ से UPSC 'कथन' वाले सवाल पूछता है:
ये सर्वाधिक सुरक्षित वन हैं। यहाँ सभी गतिविधियाँ (लकड़ी काटना, चराई) पूर्णतः प्रतिबंधित होती हैं, जब तक कि विशेष अनुमति न हो। भारत के कुल वन क्षेत्र का आधे से अधिक भाग इसी श्रेणी में है।
यहाँ सरकार के पास अधिकार होते हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को चराई और ईंधन की लकड़ी इकट्ठा करने की सीमित अनुमति दी जाती है, बशर्ते वनों को गंभीर नुकसान न हो।
ये वे वन और बंजर भूमि हैं जो सरकार या निजी व्यक्तियों/समुदायों के स्वामित्व में होते हैं। यहाँ सुरक्षा के कड़े नियम नहीं होते।
🏢 5. वन प्रशासन एवं संस्थागत ढांचा
भारत में वनों का प्रबंधन कैसे होता है? इसके लिए केंद्र और राज्य स्तर पर अलग-अलग संस्थाएं हैं:
- 🏛️ MoEFCC: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (नोडल एजेंसी)।
- 🌲 FSI (Forest Survey of India): देहरादून में स्थित, जो हर 2 साल में ISFR रिपोर्ट जारी करता है।
- 🎓 IGNFA: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, जहाँ IFS अधिकारियों की ट्रेनिंग होती है।
- 🦌 WII: भारतीय वन्यजीव संस्थान, जो वन्यजीव अनुसंधान का प्रमुख केंद्र है।
📢 6. प्रमुख वन संरक्षण आंदोलन (Historical Context)
नीतियां बनाने में इन जन-आंदोलनों की बहुत बड़ी भूमिका रही है:
| आंदोलन | नेतृत्व/स्थान | विशेष |
|---|---|---|
| चिपको आंदोलन (1973) | सुंदरलाल बहुगुणा, चंडी प्रसाद भट्ट (उत्तराखंड) | पेड़ों से चिपककर उनकी कटाई का विरोध। |
| अप्पिको आंदोलन (1983) | पांडुरंग हेगड़े (कर्नाटक) | चिपको का ही दक्षिण भारतीय रूप। |
| खेजड़ली आंदोलन (1730) | अमृता देवी बिश्नोई (राजस्थान) | खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए 363 लोगों का बलिदान। |
Chronology: 1730 (खेजड़ली) ➔ 1973 (चिपको) ➔ 1980 (वन संरक्षण एक्ट) ➔ 1983 (अप्पिको) ➔ 1988 (नई वन नीति)। यह क्रम अक्सर परीक्षाओं में सजाने के लिए आता है।
📊 1. ISFR 2021: मुख्य सांख्यिकी (Key Stats)
भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) प्रत्येक दो वर्ष में यह रिपोर्ट जारी करता है। 2021 की रिपोर्ट इस श्रृंखला की 17वीं रिपोर्ट है।
🏆 2. राज्यों की रैंकिंग (State Rankings)
परीक्षा में दो तरह से सवाल आते हैं: क्षेत्रफल (Area) के आधार पर और प्रतिशत (%) के आधार पर।
| श्रेणी (Category) | प्रथम (1st) | द्वितीय (2nd) | तृतीय (3rd) |
|---|---|---|---|
| सर्वाधिक क्षेत्रफल (Area) | मध्य प्रदेश (MP) | अरुणाचल प्रदेश | छत्तीसगढ़ |
| सर्वाधिक प्रतिशत (%) | मिजोरम (84.5%) | अरुणाचल प्रदेश | मेघालय |
| वृद्धि वाले राज्य (Increase) | आंध्र प्रदेश | तेलंगाना | ओडिशा |
• क्षेत्रफल: "मध्य में अरुण और छत्तीसगढ़" (MP > AP > CHG)
• प्रतिशत: "Mizo-Arun-Megh" (मिजोरम > अरुणाचल > मेघालय)
🦀 3. मैंग्रोव एवं कार्बन स्टॉक (Special Data)
पर्यावरण खंड के लिए ये दो बिंदु सबसे महत्वपूर्ण हैं:
- 🌿 मैंग्रोव कवर: भारत में कुल 4,992 वर्ग किमी मैंग्रोव हैं। (सबसे ज्यादा वृद्धि: ओडिशा में)।
- 🌳 कार्बन स्टॉक: देश के वनों में कुल कार्बन स्टॉक 7,204 मिलियन टन होने का अनुमान है। (सर्वाधिक कार्बन स्टॉक: अरुणाचल प्रदेश में)।
- 🔥 वनाग्नि (Forest Fire): लगभग 35% वन क्षेत्र आग के प्रति संवेदनशील हैं।
बाँस (Bamboo): रिपोर्ट के अनुसार देश में बाँस के क्षेत्र में भारी वृद्धि हुई है। मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश बाँस संसाधन में अग्रणी हैं।
📊 रिपोर्ट कार्ड: ISFR 2021
21.71%
2.91%
33.33%
🥇 सर्वाधिक क्षेत्रफल: मध्य प्रदेश (MP)
🥇 सर्वाधिक प्रतिशत: मिजोरम
🥇 सर्वाधिक वृद्धि: आंध्र प्रदेश
🥇 सर्वाधिक मैंग्रोव: पश्चिम बंगाल (सुंदरवन)
🌲 वनों के प्रकार (एक नज़र में)
• 🍂 पर्णपाती (Deciduous): 70-200cm वर्षा | सागौन, साल | भारत का सबसे बड़ा वन क्षेत्र।
• 🌵 कंटीले (Thorn): <70cm br=""> • 🌊 मैंग्रोव (Mangrove): दलदली क्षेत्र | सुंदरी वृक्ष | न्यूमेटोफोर जड़ें (श्वसन जड़ें)। 70cm>
1952: पहली राष्ट्रीय वन नीति
1973: चिपको आंदोलन
1980: वन संरक्षण अधिनियम
1988: नई (वर्तमान) वन नीति
2006: वन अधिकार अधिनियम (FRA)
2010: NGT की स्थापना
✅ समवर्ती सूची: वन अब समवर्ती सूची का हिस्सा हैं (42वां संशोधन)।
✅ FSI: मुख्यालय देहरादून में है।
✅ सिनकोना: इसकी छाल से मलेरिया की दवा 'कुनैन' बनती है।
व्याख्या: पलाश के फूल चटकीले लाल-नारंगी रंग के होते हैं, जो दूर से देखने पर जंगल में आग की तरह प्रतीत होते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम Butea monosperma है और यह उत्तर प्रदेश का राजकीय पुष्प भी है।
व्याख्या: भारत की राष्ट्रीय वन नीति, 1988 यह निर्धारित करती है कि देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का कम से कम एक-तिहाई भाग वनों से ढका होना चाहिए। इसमें पर्वतीय क्षेत्रों के लिए 60% और मैदानों के लिए 20% का लक्ष्य रखा गया है।
व्याख्या: सुंदरी वृक्ष गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा (सुंदरवन) में प्रचुर मात्रा में मिलता है। इसी वृक्ष के नाम पर इस क्षेत्र का नाम 'सुंदरवन' पड़ा है। इसकी लकड़ी बहुत मजबूत और जल-प्रतिरोधी होती है।
व्याख्या: ISFR 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्रफल के मामले में मध्य प्रदेश पहले स्थान पर है, उसके बाद अरुणाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ का स्थान आता है। प्रतिशत के मामले में मिजोरम शीर्ष पर है।
व्याख्या: यह अधिनियम 25 अक्टूबर 1980 को प्रभावी हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य वनों की अंधाधुंध कटाई पर रोक लगाना और वन भूमि को गैर-वन उद्देश्यों के लिए उपयोग करने से पहले केंद्र सरकार की अनुमति अनिवार्य बनाना है।
व्याख्या: उत्तराखंड में 3000 से 4000 मीटर की ऊँचाई पर पाए जाने वाले अल्पाइन घास के मैदानों को 'बुग्याल' कहा जाता है। इन्हें 'प्रकृति का कालीन' (Nature's Carpet) भी कहा जाता है।
व्याख्या: चंदन (Sandalwood) उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वनों का मुख्य वृक्ष है। भारत में कर्नाटक और तमिलनाडु का नीलगिरी क्षेत्र इसकी पैदावार के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
व्याख्या: 1973 में उत्तराखंड (तत्कालीन यूपी) के चमोली जिले से शुरू हुए इस आंदोलन का नेतृत्व सुंदरलाल बहुगुणा और चंडी प्रसाद भट्ट ने किया था। ग्रामीण महिलाएं पेड़ों से चिपक गई थीं ताकि ठेकेदार उन्हें काट न सकें।
व्याख्या: भोजपत्र का पेड़ हिमालय में 4,500 मीटर तक की ऊँचाई पर मिलता है। इसकी सफेद छाल का उपयोग प्राचीन काल में लिखने के लिए कागज के रूप में किया जाता था।
व्याख्या: इस संशोधन के माध्यम से पांच विषयों (शिक्षा, वन, नाप-तोल, वन्यजीव संरक्षण और न्याय प्रशासन) को राज्य सूची से हटाकर समवर्ती सूची (Concurrent List) में शामिल किया गया था।
व्याख्या: साइलेंट वैली अपनी अत्यधिक जैव-विविधता (Biodiversity) और दुर्लभ पौधों व पशुओं के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ 'शेर जैसी पूँछ वाला बंदर' (Lion-tailed Macaque) पाया जाता है। 1970 के दशक में यहाँ जलविद्युत परियोजना के विरोध में 'सेव साइलेंट वैली' आंदोलन चलाया गया था।
व्याख्या: ये वृक्ष उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वार्षिक वर्षा 200 सेमी से अधिक होती है। इनकी लकड़ी अत्यंत भारी, कठोर और टिकाऊ होती है। भारत में ये मुख्य रूप से अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और पश्चिमी घाट में मिलते हैं।
व्याख्या: राष्ट्रीय कृषि आयोग (1976) ने पहली बार इस शब्द का प्रयोग किया था। इसका मुख्य उद्देश्य खाली पड़ी सार्वजनिक व सामुदायिक भूमि पर वृक्षारोपण करना है ताकि स्थानीय लोगों को ईंधन, चारा और छोटी लकड़ी मिल सके और वनों पर दबाव कम हो।
व्याख्या: मैंग्रोव वनस्पति दलदली और खारे पानी में उगती है जहाँ मिट्टी में ऑक्सीजन की कमी होती है। इसलिए, इन पेड़ों की जड़ें जमीन से बाहर की ओर खूंटियों की तरह निकल आती हैं ताकि वायुमंडल से सीधे श्वसन कर सकें।
व्याख्या: 2019 के आकलन की तुलना में देश के कार्बन स्टॉक में 79.4 मिलियन टन की वृद्धि हुई है। कार्बन स्टॉक वनों द्वारा वायुमंडल से सोखी गई कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को दर्शाता है। सर्वाधिक कार्बन स्टॉक वाला राज्य अरुणाचल प्रदेश है।
व्याख्या: 1983 में उत्तर कन्नड़ जिले में पांडुरंग हेगड़े के नेतृत्व में यह आंदोलन शुरू हुआ था। यह उत्तर भारत के 'चिपको आंदोलन' से प्रेरित था। कन्नड़ भाषा में 'अप्पिको' का अर्थ 'गले लगाना' होता है।
व्याख्या: FSI की स्थापना 1981 में हुई थी। यह संस्थान हर दो साल में 'भारत वन स्थिति रिपोर्ट' (ISFR) जारी करता है। इसका मुख्य कार्य देश के वन संसाधनों का सर्वेक्षण और मूल्यांकन करना है।
व्याख्या: तेंदू, बेल, खैर और पलाश शुष्क पर्णपाती वनों के मुख्य वृक्ष हैं। तेंदू के पत्तों का उपयोग बीड़ी बनाने में किया जाता है, जो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की आय का मुख्य स्रोत है।
व्याख्या: यदि किसी विकास परियोजना के लिए वन भूमि का उपयोग किया जाता है, तो उसके बदले में गैर-वन भूमि पर वन लगाने के लिए यह फंड वसूला जाता है। इसके लिए 2016 में कानून बनाया गया था।
व्याख्या: उत्तर-पूर्वी भारत में बाँस की सर्वाधिक विविधता और मात्रा पाई जाती है। बाँस को 'हरा सोना' (Green Gold) भी कहा जाता है और यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है।
व्याख्या: यह कानून वनों में रहने वाली अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वन निवासियों को उन जमीनों पर अधिकार देता है जहाँ वे पीढ़ियों से रह रहे हैं।
व्याख्या: दक्षिण भारत के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों (नीलगिरी, अन्नामलाई) में पाए जाने वाले उष्णकटिबंधीय मोंटेन वनों को 'शोला' कहा जाता है। ये वन जैव-विविधता का केंद्र हैं।
व्याख्या: 2019 की तुलना में 2021 की रिपोर्ट में आंध्र प्रदेश ने वनावरण में सबसे अधिक (647 वर्ग किमी) वृद्धि की है। इसके बाद तेलंगाना और ओडिशा का स्थान है।
व्याख्या: खेजड़ी राजस्थान का राजकीय वृक्ष है। यह कम पानी में भी जीवित रह सकता है। 1730 में अमृता देवी बिश्नोई ने इसी वृक्ष को बचाने के लिए अपना बलिदान दिया था।
व्याख्या: संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वनों के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 21 मार्च को यह दिवस मनाया जाता है।
व्याख्या: चंदन एक बहुमूल्य वृक्ष है जो मुख्य रूप से कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल के क्षेत्रों में पाया जाता है। नीलगिरी की पहाड़ियाँ इसके लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। यह वनस्पति 'अर्ध-परजीवी' (Semi-parasitic) श्रेणी में आती है।
व्याख्या: 42वें संविधान संशोधन (1976) के माध्यम से इसे जोड़ा गया था। यह राज्य को निर्देश देता है कि वह देश के पर्यावरण की सुरक्षा और सुधार करे तथा वनों एवं वन्यजीवों की रक्षा करे।
व्याख्या: सिनकोना वृक्ष उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों में पाया जाता है। इसकी छाल से 'कुनैन' (Quinine) नामक औषधि प्राप्त की जाती है, जो मलेरिया के इलाज में अत्यंत प्रभावी है।
व्याख्या: इन वनों में चीड़ (Pine), देवदार (Deodar), सिल्वर फर और स्प्रूस प्रमुख हैं। इनकी लकड़ी मुलायम होती है और पत्तियाँ सुई की तरह नुकीली होती हैं ताकि उन पर बर्फ न टिक सके।
व्याख्या: वैज्ञानिक रूप से बाँस एक 'विशाल घास' है। भारतीय वन (संशोधन) अधिनियम, 2017 के द्वारा बाँस को 'पेड़' की श्रेणी से हटा दिया गया है ताकि लोग इसे वन भूमि के बाहर आसानी से काट और बेच सकें।
व्याख्या: बढ़ती जनसंख्या की खाद्यान्न जरूरतों को पूरा करने के लिए वन भूमि को कृषि भूमि में बदलना वनों के विनाश का सबसे बड़ा कारण रहा है। इसके बाद औद्योगिक विकास और सड़कें आती हैं।
व्याख्या: राजस्थान के जोधपुर जिले में अमृता देवी बिश्नोई और अन्य 363 बिश्नोई समाज के लोगों ने पेड़ों को बचाने के लिए जान दे दी थी। 'सिर साठे रूँख रहे तो भी सस्तो जाण' उनका नारा था।
व्याख्या: हरियाणा में भौगोलिक क्षेत्रफल के मुकाबले वनों का प्रतिशत सबसे कम (लगभग 3.63%) है। इसके बाद पंजाब का स्थान आता है। मैदानी और कृषि प्रधान होने के कारण यहाँ वन क्षेत्र कम है।
व्याख्या: पूर्वोत्तर के राज्यों (जैसे असम, नागालैंड) में वनों का बड़ा हिस्सा सामुदायिक स्वामित्व में है, इसलिए इन्हें सरकारी रिकॉर्ड में अवर्गीकृत वनों की श्रेणी में रखा जाता है।
व्याख्या: NGT का गठन पर्यावरण से संबंधित कानूनी विवादों के त्वरित निपटान के लिए किया गया था। भारत दुनिया का तीसरा देश है जिसने ऐसी संस्था बनाई है। इसका मुख्य मुख्यालय नई दिल्ली में है।
व्याख्या: झूम कृषि में जंगल के एक हिस्से को जलाकर साफ किया जाता है और खेती की जाती है। मिट्टी की उर्वरता कम होने पर दूसरी जगह फिर से जंगल काटा जाता है। यह मुख्य रूप से असम, मेघालय और नागालैंड में प्रचलित है, जिससे मृदा अपरदन बढ़ता है।
व्याख्या: सफेदा या यूकेलिप्टस को तेजी से बढ़ने के कारण लगाया गया था, लेकिन यह जमीन से बहुत अधिक जल सोख लेता है, जिससे भू-जल स्तर गिर जाता है। इसे 'पारिस्थितिक आतंकवादी' (Ecological Terrorist) भी कहा जाता है।
व्याख्या: 1971 में अराबाड़ी (मिदनापुर) में स्थानीय लोगों के सहयोग से साल के वनों को पुनर्जीवित किया गया था। यहीं से JFM की नींव पड़ी, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर 1990 में अपनाया गया।
व्याख्या: चिपको आंदोलन के प्रणेता सुंदरलाल बहुगुणा ने अपना पूरा जीवन वनों के संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने 'पारिस्थितिकी ही स्थायी अर्थव्यवस्था है' का नारा दिया था।
व्याख्या: ISFR 2021 के अनुसार, वनावरण 21.71% है और वृक्षावरण 2.91% है। इन दोनों का योग 24.62% है, जो राष्ट्रीय वन नीति के 33.33% के लक्ष्य से अभी भी काफी दूर है।
व्याख्या: डॉ. वंदना शिवा एक प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और लेखिका हैं। उन्होंने जैविक विविधता और बीजों के संरक्षण के लिए 'नवदान्य' (Navdanya) आंदोलन भी शुरू किया था।
व्याख्या: मैंग्रोव पौधों की पत्तियों में विशेष ग्रंथियां होती हैं जो अतिरिक्त नमक को बाहर निकाल देती हैं। कुछ पौधे नमक को अपनी पुरानी पत्तियों में जमा कर देते हैं जो बाद में गिर जाती हैं।
व्याख्या: इसकी स्थापना 1906 में हुई थी। यह अपनी ग्रीको-रोमन वास्तुकला वाली मुख्य इमारत के लिए प्रसिद्ध है और भारत में वन प्रबंधन अनुसंधान का सबसे बड़ा केंद्र है।
व्याख्या: 1950 में तत्कालीन कृषि और खाद्य मंत्री के.एम. मुंशी ने वनीकरण को बढ़ावा देने के लिए 'वन महोत्सव' की शुरुआत की। यह हर साल जुलाई के पहले सप्ताह में मनाया जाता है।
व्याख्या: IUCN द्वारा जारी इस किताब में उन पौधों और जीवों की सूची होती है जिन पर विलुप्ति का खतरा मंडरा रहा हो। वनों के कई पेड़ जैसे 'रेड सैंडर्स' (लाल चंदन) इसमें शामिल हैं।
व्याख्या: अपनी भौगोलिक स्थिति (विषुवत रेखा के निकट) और भारी वर्षा के कारण अंडमान निकोबार के लगभग 80% हिस्से पर सदाबहार वन हैं। यहाँ की जैव-विविधता अद्भुत है।
व्याख्या: लाल चंदन केवल आंध्र प्रदेश के पूर्वी घाट के दक्षिणी हिस्सों में मिलता है। इसकी लकड़ी की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार (खासकर चीन और जापान) में बहुत अधिक है।
व्याख्या: यह बताता है कि ऊपर से देखने पर पेड़ों के पत्तों और शाखाओं ने जमीन का कितना प्रतिशत हिस्सा ढका है। यदि यह 70% से अधिक है, तो उसे 'अत्यधिक सघन वन' (Very Dense Forest) कहा जाता है।
व्याख्या: भारत सरकार (MoEFCC) द्वारा दिया जाने वाला यह पुरस्कार उन व्यक्तियों या समुदायों को मिलता है जिन्होंने पर्यावरण और वन्यजीवों को बचाने के लिए असाधारण कार्य किया हो।
व्याख्या: भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) 1987 से यह रिपोर्ट जारी कर रहा है। यह रिपोर्ट सैटेलाइट डेटा (LISS-III) के आधार पर तैयार की जाती है। 2021 की रिपोर्ट 17वीं रिपोर्ट थी।
मित्रों, वन केवल पेड़ों का समूह नहीं हैं, बल्कि यह हमारी धरती के 'फेफड़े' हैं। इस लेख के माध्यम से हमने वनों के भौगोलिक वर्गीकरण से लेकर नवीनतम ISFR 2021 के आंकड़ों और कानूनी पहलुओं को गहराई से समझा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह विषय न केवल अंक दिलाने वाला है, बल्कि पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी दर्शाता है।
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