किसी भी उद्योग की स्थापना के लिए 'न्यूनतम लागत सिद्धांत' काम करता है। मुख्य कारक हैं:
1. कच्चा माल (Raw Material)
भारी उद्योगों के लिए (जैसे लोहा) कच्चे माल के पास होना अनिवार्य है।
2. ऊर्जा (Energy)
एल्युमीनियम उद्योग के लिए सस्ती बिजली सबसे बड़ा कारक है।
1. सूती वस्त्र उद्योग (Cotton Textile)
यह भारत का सबसे प्राचीन और सबसे बड़ा संगठित उद्योग है। इसमें सर्वाधिक रोजगार मिलता है।
| क्षेत्र / उपनाम | शहर |
|---|---|
| भारत का मैनचेस्टर | अहमदाबाद |
| उत्तर भारत का मैनचेस्टर | कानपुर |
| दक्षिण भारत का मैनचेस्टर | कोयंबटूर |
| सूती वस्त्रों की राजधानी | मुंबई |
2. चीनी उद्योग (Sugar Industry)
यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा कृषि आधारित उद्योग है।
1. लोहा एवं इस्पात (Iron & Steel)
इसे "रीढ़ की हड्डी" (Backbone of Economy) कहा जाता है।
द्वितीय पंचवर्षीय योजना (2nd FYP)
• भिलाई (रूस की मदद से)
• राउरकेला (जर्मनी की मदद से)
• दुर्गापुर (ब्रिटेन की मदद से)
तृतीय पंचवर्षीय योजना (3rd FYP)
• बोकारो (रूस की मदद से) - 1964
2. एल्युमीनियम उद्योग
यह तांबे के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण धातु उद्योग है। इसका कच्चा माल बॉक्साइट (Bauxite) है।
High-Yield Facts for Exam
• TISCO: भारत का पहला निजी क्षेत्र का सफल कारखाना (1907)।
• SAIL: भारतीय इस्पात प्राधिकरण की स्थापना 1973 में हुई।
• Footloose Industry: वे उद्योग जिन्हें कहीं भी लगाया जा सकता है (जैसे- हीरा काटना, IT उद्योग)।
अल्फ्रेड वेबर (Alfred Weber) का सिद्धांत: वेबर ने 1909 में "औद्योगिक अवस्थिति का सिद्धांत" दिया।
यदि MI < 1 है, तो उद्योग 'बाजार' के पास लगेगा (जैसे: बेकरी, इलेक्ट्रॉनिक्स)।
🔹 स्वामित्व के आधार पर (Ownership)
- सार्वजनिक: BHEL, SAIL (सरकार के अधीन)
- निजी: TISCO, Reliance (व्यक्तियों के अधीन)
- संयुक्त: Oil India Ltd (सरकार + निजी)
- सहकारी: अमूल, महाराष्ट्र की चीनी मिलें
🔹 कच्चे माल की प्रकृति पर
- भारी उद्योग: लोहा-इस्पात, सीमेंट
- हल्के उद्योग: घड़ी, बिजली के बल्ब, खिलौने
यह भारत का सबसे प्राचीन (1818 - फोर्ट ग्लोस्टर में प्रथम प्रयास) उद्योग है।
- विश्व में स्थान: चीन के बाद भारत दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है।
- जीडीपी योगदान: लगभग 4%।
भारत विश्व का सबसे बड़ा उपभोक्ता और दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
| संयंत्र (Plant) | सहायक देश | स्थान (राज्य) |
|---|---|---|
| भिलाई | रूस (पूर्व सोवियत संघ) | छत्तीसगढ़ |
| राउरकेला | जर्मनी | ओडिशा |
| दुर्गापुर | ब्रिटेन | पश्चिम बंगाल |
| बोकारो | रूस | झारखंड |
| विशाखापत्तनम | - | आंध्र प्रदेश (पहला तटवर्ती) |
भारत के औद्योगिक वितरण को समझने के लिए इन 3 सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान दें:
यह ठाणे से पुणे और नासिक तक फैला है। मुख्य कारण: कपास की खेती का क्षेत्र और स्वेज नहर के खुलने से मुंबई बंदरगाह का विकास।
Key Industries: Textiles, Chemicals, ITहुगली नदी के दोनों किनारों पर। मुख्य कारण: जूट की खेती और रानीगंज/झरिया से कोयले की निकटता।
Key Industries: Jute, Paper, Engineeringइसे 'भारत की सिलिकॉन वैली' बेल्ट भी कहा जाता है। मुख्य कारण: Pykara पनबिजली परियोजना और कुशल श्रमिक।
Key Industries: Aircraft, Electronics, ITभारत सरकार 11 गलियारों का विकास कर रही है ताकि व्यापार और लॉजिस्टिक्स को वैश्विक स्तर पर ले जाया जा सके।
🚀 DMIC (Delhi-Mumbai Industrial Corridor)
यह भारत का सबसे महत्वाकांक्षी गलियारा है जो 1500 किमी लंबा है। यह जापान के सहयोग से विकसित किया जा रहा है। यह 6 राज्यों से होकर गुजरता है।
- राज्यों की ट्रिक: "यूपी वाले राजा गुजरी दिल्ली से" (UP, Haryana, Rajasthan, Gujarat, Maharashtra, Delhi)
🚢 AKIC & CBIC
• Amritsar-Kolkata (AKIC): पूर्वी भारत को जोड़ने के लिए।
• Chennai-Bengaluru (CBIC): दक्षिण के मैन्युफैक्चरिंग हब को जोड़ने के लिए।
तेजी से बढ़ते उद्योगों ने 4 प्रमुख संकट पैदा किए हैं:
1. जल प्रदूषण (Water Pollution)
चमड़ा और कागज उद्योग सबसे ज्यादा हानिकारक रसायनों को नदियों में छोड़ते हैं (जैसे गंगा में कानपुर के पास)।
2. फ्लाई ऐश (Fly Ash)
ताप विद्युत संयंत्रों (Thermal Plants) से निकलने वाली राख जो हवा को दूषित करती है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा घोषित। इसमें भारत को 'मिश्रित अर्थव्यवस्था' (Mixed Economy) घोषित किया गया।
इसे भारत का 'आर्थिक संविधान' कहा जाता है। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector) को प्राथमिकता दी गई।
उदारीकरण (Liberalization), निजीकरण (Privatization) और वैश्वीकरण (Globalization) की शुरुआत। 'लाइसेंस राज' का अंत हुआ।
SEZ एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ व्यापारिक नियम देश के बाकी हिस्सों से अलग (सरल) होते हैं ताकि निर्यात बढ़ सके।
भारत में SEZ की नीति अप्रैल 2000 में आई, लेकिन SEB अधिनियम 2005 में पारित हुआ और 10 फरवरी 2006 से प्रभावी हुआ।
लक्ष्य: GDP में विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र का हिस्सा 16% से बढ़ाकर 25% करना।
भारत में सामान बनाने वाली कंपनियों को उनके बढ़े हुए उत्पादन पर सरकार द्वारा नकद प्रोत्साहन (Incentive) देना।
⚡ Quick Recap for Exam
- महारत्न कंपनियाँ: वर्तमान में भारत में 13 महारत्न कंपनियाँ हैं (जैसे- OIL, NTPC, ONGC)।
- नवरत्न कंपनियाँ: इनकी संख्या 16 है।
- लघु उद्योग (MSME): नई परिभाषा के अनुसार 1 करोड़ निवेश और 5 करोड़ टर्नओवर वाली कंपनी 'Micro' कहलाती है।
⛓️ लौह-इस्पात संयंत्र (PYQ Special)
🧵 वस्त्र उद्योग के उपनाम
📜 नीतियां और वर्ष
🏗️ एल्युमीनियम कंपनियाँ
| विषय | महत्वपूर्ण तथ्य (Must Remember) |
|---|---|
| महारत्न कंपनियाँ | वर्तमान में कुल 13 (Latest: Oil India Limited) |
| नवरत्न कंपनियाँ | वर्तमान में कुल 16 (Latest: RITES, IRCON) |
| प्रथम सफल मिल | 1854 - कावसजी डाबर (मुंबई) |
| एशिया का प्रथम EPZ | 1965 - कांडला (गुजरात) |
उत्तर प्रदेश गन्ने का सबसे बड़ा उत्पादक है। यहाँ अनुकूल मिट्टी और जलवायु के कारण गन्ने की खेती व्यापक स्तर पर होती है, जिससे यह चीनी उत्पादन में शीर्ष पर रहता है। हाल के वर्षों में महाराष्ट्र और यूपी के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा रहती है।
भिलाई इस्पात संयंत्र छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित है। इसकी स्थापना 1955 में भारत और सोवियत संघ (USSR) के मध्य हुए समझौते के तहत द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-61) के दौरान की गई थी।
1965 में कांडला में एशिया का पहला EPZ स्थापित हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य मुक्त व्यापार को बढ़ावा देना और निर्यात में वृद्धि करना था। बाद में सरकार ने 2000 में SEZ नीति की घोषणा की और इन क्षेत्रों को SEZ में परिवर्तित कर दिया।
यह परियोजना चार प्रमुख महानगरों (दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता) को औद्योगिक गलियारों से जोड़ती है। हालांकि यह परिवहन से जुड़ी है, लेकिन यह भारत के औद्योगिक विकास की रीढ़ मानी जाती है।
स्वतंत्र भारत का पहला सार्वजनिक क्षेत्र का उर्वरक कारखाना 1951 में सिंदरी में स्थापित हुआ था। हालांकि, भारत में सुपर फॉस्फेट का पहला कारखाना 1906 में रानीपेट (तमिलनाडु) में लगा था।
हिंदुस्तान एल्युमीनियम कॉर्पोरेशन (हिंडाल्को) का संयंत्र रेणुकूट में है। इसकी स्थापना रिहंद बांध से मिलने वाली सस्ती बिजली और बॉक्साइट की उपलब्धता के कारण यहाँ की गई थी।
यह भारत का पहला ऐसा कारखाना है जो समुद्र तट (आंध्र प्रदेश) पर स्थित है। इसे आयात-निर्यात की सुविधा के लिए यहाँ स्थापित किया गया था।
नेपानगर में भारत का प्रमुख अखबारी कागज का कारखाना स्थित है। इसके अलावा होशंगाबाद (MP) में नोट छापने वाले कागज (Currency Note Press) का कारखाना है।
इसरो (ISRO) का मुख्यालय बेंगलुरु में है जहाँ सैटेलाइट डिजाइन होते हैं, जबकि श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) मुख्य लॉन्चिंग स्टेशन है।
फिरोजाबाद को 'सुहाग नगरी' भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ कांच की चूड़ियों का सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र है।
जहाँ भिलाई, राउरकेला और दुर्गापुर दूसरी योजना में बने, वहीं बोकारो (झारखंड) की स्थापना 1964 में रूस की मदद से तीसरी योजना के दौरान हुई।
चेन्नई को ऑटोमोबाइल उद्योग (कार निर्माण) के भारी जमाव के कारण भारत का 'डेट्रायट' कहा जाता है। अमेरिका का डेट्रायट शहर भी कार निर्माण के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
वर्तमान में 13 महारत्न कंपनियाँ हैं। 13वीं कंपनी 'ऑयल इंडिया लिमिटेड' (OIL) बनी।
वेबर ने 1909 में बताया कि उद्योग वहाँ लगाना चाहिए जहाँ कच्चे माल और तैयार माल की परिवहन लागत सबसे कम हो।
भारत दुनिया में कपास का सबसे बड़ा उत्पादक है, लेकिन वस्त्र निर्यात और उत्पादन में चीन पहले स्थान पर है और भारत दूसरे पर।
जमशेदजी टाटा द्वारा झारखंड के साक्षी (अब जमशेदपुर) में स्वर्णरेखा और खरकई नदियों के संगम पर इसकी स्थापना की गई। यह भारत का पहला निजी सफल इस्पात कारखाना है।
फुटलूज उद्योग वे होते हैं जिन्हें कच्चे माल की उपलब्धता की जरूरत नहीं होती और वे कहीं भी लगाए जा सकते हैं (जैसे घड़ी बनाना, कंप्यूटर चिप)।
24 जुलाई 1991 को नई नीति आई, जिसे डॉ. मनमोहन सिंह (तत्कालीन वित्त मंत्री) के साथ मिलकर राव-मनमोहन मॉडल भी कहा जाता है।
पायकारा और पेरियार परियोजनाओं से मिलने वाली सस्ती बिजली ने दक्षिण भारत के वस्त्र और इंजीनियरिंग उद्योगों के विकास में मुख्य भूमिका निभाई है।
इस योजना का उद्देश्य भारतीय MSME उत्पादों की गुणवत्ता सुधारना (Zero Defect) और पर्यावरण पर शून्य प्रभाव (Zero Effect) सुनिश्चित करना है।
यह मिलान अक्सर परीक्षाओं में कूट के रूप में पूछा जाता है। याद रखें: दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल) में अंग्रेजों (ब्रिटेन) ने निवेश किया था, जबकि राउरकेला में जर्मन तकनीक का उपयोग हुआ।
सूचना प्रौद्योगिकी (IT) उद्योग के अत्यधिक संकेंद्रण के कारण बेंगलुरु को यह उपनाम दिया गया है। अमेरिका में मूल 'सिलिकॉन वैली' कैलिफोर्निया में है।
मुजफ्फरनगर जिले के खतौली में स्थित त्रिवेणी इंजीनियरिंग की चीनी मिल को पेराई क्षमता के मामले में एशिया की सबसे बड़ी मिलों में गिना जाता है।
जूट के रेशों के चमकीले पीले/सुनहरे रंग के कारण इसे स्वर्ण रेशा कहा जाता है। भारत का पश्चिम बंगाल राज्य जूट उत्पादन में प्रथम है।
जमशेदपुर स्थित इस संयंत्र को सिंहभूम (झारखंड) की नोआमंडी खानों और मयूरभंज (ओडिशा) के बादामपहाड़ से उच्च कोटि का हेमेटाइट अयस्क मिलता है।
भारत में कागज का पहला कारखाना 1832 में सीरामपुर (प. बंगाल) में लगा था जो असफल रहा। प्रथम सफल कारखाना 1879 में लखनऊ में 'अपर इंडिया कूपर पेपर मिल' के नाम से लगा।
वाराणसी में रेलवे के डीजल इंजन बनाए जाते हैं। अब इसका नाम बदलकर 'बनारस रेल इंजन कारखाना' (BLW) कर दिया गया है क्योंकि यहाँ अब इलेक्ट्रिक इंजन भी बनते हैं।
जादुगुड़ा की खानें यूरेनियम के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं, जो भारत के परमाणु ऊर्जा उद्योगों के लिए कच्चे माल की आपूर्ति करती हैं।
कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड भारत का सबसे बड़ा और आधुनिक शिपयार्ड है। यहाँ भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत 'आईएनएस विक्रांत' भी बनाया गया।
कानपुर न केवल सूती वस्त्र और चमड़े के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) क्षेत्र में 'मॉडर्न बेकरीज' का बड़ा केंद्र भी रहा है।
भारत एल्युमीनियम कंपनी (BALCO) छत्तीसगढ़ के कोरबा में स्थित है। एल्युमीनियम उद्योग के लिए भारी बिजली की आवश्यकता होती है, जो स्थानीय थर्मल पावर प्लांट से पूरी होती है।
भारत जूट का सबसे बड़ा उत्पादक है, लेकिन निर्यात (Export) के मामले में बांग्लादेश अग्रणी है क्योंकि वहाँ की घरेलू खपत कम है और गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है।
चीन विश्व का सबसे बड़ा सूती वस्त्र उत्पादक और निर्यातक है। वैश्विक बाजारों में भारत और चीन के बीच लागत और गुणवत्ता को लेकर सीधी प्रतिस्पर्धा होती है।
भेल (BHEL) की स्थापना 1964 में की गई थी। इसके भोपाल संयंत्र में ब्रिटेन और हरिद्वार/हैदराबाद संयंत्रों में रूस का सहयोग मिला।
ओडिशा का राउरकेला संयंत्र शंख और दक्षिण कोयल नदियों के संगम (जो बाद में ब्राह्मणी कहलाती है) पर स्थित है। यहाँ से इसे पानी की आपूर्ति होती है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज का जामनगर परिसर दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल हब है।
ब्राजील के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है, लेकिन यहाँ खपत (Consumption) दुनिया में सबसे अधिक है।
अगस्त 2023 में 'ऑयल इंडिया लिमिटेड' को 13वीं महारत्न कंपनी का दर्जा दिया गया।
चूंकि बेंगलुरु (सिलिकॉन वैली) कर्नाटक में है, इसलिए पूरे राज्य को 'सिलिकॉन स्टेट' के नाम से जाना जाता है।
जमशेदपुर स्थित टिस्को को झरिया की खानों से कोकिंग कोल की प्राप्ति होती है।
इस्को (IISCO) के तीन मुख्य केंद्र पश्चिम बंगाल में हैं, जिन्हें अब 'सेल' (SAIL) में विलय कर दिया गया है।
मद्रास (अब चेन्नई) में 1904 में पहला सीमेंट कारखाना लगा, जो सीपियों (Shells) से सीमेंट बनाने का प्रयास था, हालांकि यह सफल नहीं रहा।
चूंकि कानपुर उत्तर भारत का मैनचेस्टर है, इसलिए वस्त्रों से जुड़े शोध और शिक्षा का मुख्य केंद्र यहीं स्थित है।
सेलम स्टेनलेस स्टील के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ स्थानीय लौह-अयस्क का उपयोग किया जाता है।
चीनी उद्योग भारत का दूसरा सबसे बड़ा उद्योग है जो कृषि पर निर्भर है और लाखों किसानों को रोजगार देता है।
भारत ने चीन की सफलता को देखते हुए अपने निर्यात को बढ़ाने के लिए SEZ मॉडल को अपनाया।
रायबरेली के लालगंज में 'मॉडर्न रेल कोच फैक्ट्री' (MCF) स्थित है, जहाँ रेलवे के आधुनिक डिब्बे बनाए जाते हैं।
इसे पहले 'मैसूर आयरन एंड स्टील वर्क्स' के नाम से जाना जाता था। यह कोयले के स्थान पर चारकोल (लकड़ी का कोयला) का उपयोग करने वाला पहला संयंत्र था।
सड़कों और उद्योगों के किनारे 4-6 कतारों में घने पेड़ लगाने की तकनीक को ग्रीन मफलर कहते हैं, जो ध्वनि तरंगों को अवशोषित कर शोर कम करते हैं।
यह 1500 किमी लंबा है और भारत के 6 राज्यों से गुजरता है। इसे जापान के सहयोग से 'स्मार्ट सिटी' और 'लॉजिस्टिक्स हब' के रूप में विकसित किया जा रहा है।
