Transport & Communication | National Waterways & Ports
📘 परिभाषा (Definition)
जल परिवहन वह परिवहन प्रणाली है जिसमें नदियों, नहरों, झीलों, समुद्रों एवं महासागरों के माध्यम से यात्रियों एवं वस्तुओं का आवागमन किया जाता है। यह परिवहन का सबसे प्राचीन, सस्ता एवं ऊर्जा-कुशल माध्यम माना जाता है।
🧠 Concept (अवधारणा)
भारत जैसे विशाल, प्रायद्वीपीय एवं नदी-प्रधान देश में जल परिवहन का आर्थिक भूगोल में विशेष स्थान है। भारी, थोक एवं कम समय-संवेदनशील वस्तुओं के लिए जल परिवहन रेल और सड़क परिवहन की तुलना में अधिक किफायती होता है।
यही कारण है कि भारत सरकार अंतर्देशीय जल परिवहन (IWT) और समुद्री परिवहन को राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स प्रणाली का महत्वपूर्ण स्तंभ मानती है।
📊 Fact Card (Exam Data)
- भारत के विदेशी व्यापार का 90% (मात्रा के आधार पर) जल मार्ग से होता है।
- जल परिवहन सबसे कम ईंधन खर्च वाला परिवहन माध्यम है।
- भारत में जल परिवहन की क्षमता अभी भी कम उपयोग की गई है।
- राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के बाद इसका महत्व बढ़ा।
🎯 Exam Tips / Tricks
- जहाँ भी सस्ता परिवहन पूछा जाए → जल परिवहन
- भारी एवं थोक वस्तुएँ → जल मार्ग
- Foreign Trade / Port आधारित प्रश्न → Sea Transport से जोड़ें
- IWT + Ports = UPSC / UPPSC का पसंदीदा क्षेत्र
जल परिवहन को उसके भौगोलिक क्षेत्र, उपयोग एवं संचालन प्रकृति के आधार पर मुख्यतः दो भागों में वर्गीकृत किया जाता है। यह वर्गीकरण प्रतियोगी परीक्षाओं में सीधे प्रश्न, मिलान एवं कथन आधारित रूप में पूछा जाता है।
🚤 A. अंतर्देशीय जल परिवहन (Inland Water Transport – IWT)
वह जल परिवहन जो देश के भीतर नदियों, नहरों, झीलों एवं बैकवाटर के माध्यम से संचालित होता है, उसे अंतर्देशीय जल परिवहन कहा जाता है।
- नदियाँ – गंगा, ब्रह्मपुत्र आदि
- नहरें – सिंचाई व नौपरिवहन हेतु
- झीलें एवं बैकवाटर – केरल क्षेत्र
भारत में IWT को विकसित करने के लिए राष्ट्रीय जलमार्ग (National Waterways) घोषित किए गए हैं।
⚓ B. समुद्री जल परिवहन (Sea / Maritime Transport)
वह परिवहन प्रणाली जिसमें समुद्रों एवं महासागरों के माध्यम से देशों के बीच वस्तुओं एवं यात्रियों का आवागमन होता है, उसे समुद्री जल परिवहन कहते हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का मुख्य आधार
- बंदरगाहों (Ports) के माध्यम से संचालन
- भारी एवं विशाल मात्रा का परिवहन
भारत का लगभग 90% विदेशी व्यापार समुद्री मार्ग से संचालित होता है।
🔍 जल परिवहन का विस्तृत उप-वर्गीकरण
- प्राकृतिक जलमार्ग: नदियाँ, समुद्र, झीलें (जैसे – गंगा, अरब सागर)
- कृत्रिम जलमार्ग: मानव द्वारा निर्मित नहरें (जैसे – केनाल सिस्टम)
- घरेलू जल परिवहन: देश के भीतर वस्तुओं का आवागमन
- अंतर्राष्ट्रीय जल परिवहन: देशों के बीच व्यापारिक परिवहन
📊 IWT बनाम Sea Transport (Exam Favourite)
| आधार | IWT | Sea Transport |
|---|---|---|
| क्षेत्र | देश के भीतर | अंतर्राष्ट्रीय |
| मार्ग | नदी, नहर | समुद्र, महासागर |
| मुख्य उपयोग | घरेलू परिवहन | विदेशी व्यापार |
🎯 Exam Tips (Very Important)
- Classification पर कथन आधारित प्रश्न UPSC/UPPSC में आम हैं
- IWT = National Waterways → सीधे जोड़कर पढ़ें
- Foreign Trade % पूछा जाए → Sea Transport
- Table आधारित तुलना = SSC / Railway Favourite
📘 परिभाषा (Definition)
अंतर्देशीय जल परिवहन (Inland Water Transport – IWT) वह परिवहन प्रणाली है जिसमें देश की आंतरिक जल सतहों जैसे नदियाँ, नहरें, झीलें, लैगून एवं बैकवाटर के माध्यम से वस्तुओं एवं यात्रियों का परिवहन किया जाता है।
🧠 अवधारणा (Core Concept)
अंतर्देशीय जल परिवहन का विकास मुख्यतः उन देशों में होता है जहाँ लंबी, नौगम्य नदियाँ एवं समतल भू-आकृति उपलब्ध होती है। भारत में गंगा–ब्रह्मपुत्र, महानदी, गोदावरी, कृष्णा जैसे नदी तंत्र IWT की आधारशिला हैं।
यह परिवहन माध्यम विशेष रूप से भारी, थोक एवं कम समय-संवेदनशील वस्तुओं (कोयला, सीमेंट, अनाज, उर्वरक) के लिए उपयुक्त है।
📊 महत्वपूर्ण आँकड़े (Exam Data)
- भारत में लगभग 14,500 किमी लंबा नौगम्य जलमार्ग नेटवर्क उपलब्ध है।
- देश में वर्तमान में 111 राष्ट्रीय जलमार्ग अधिसूचित हैं।
- IWT का कुल परिवहन में योगदान अभी 2% से भी कम है।
- ईंधन दक्षता में IWT, सड़क परिवहन से 4–5 गुना बेहतर है।
🗺️ Map Based Understanding (Exam Logic)
मानचित्र आधारित प्रश्नों में IWT के लिए निम्न नदी तंत्र अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
- गंगा तंत्र – उत्तर भारत का सबसे महत्वपूर्ण IWT क्षेत्र
- ब्रह्मपुत्र तंत्र – उत्तर–पूर्व भारत की जीवन रेखा
- केरल बैकवाटर – दक्षिण भारत का प्रमुख IWT नेटवर्क
- पूर्वी तटीय नदियाँ – महानदी, गोदावरी, कृष्णा
UPSC/State PCS में अक्सर नदी + राज्य + जलमार्ग संख्या को जोड़कर प्रश्न पूछे जाते हैं।
✅ अंतर्देशीय जल परिवहन के लाभ
- सबसे सस्ता परिवहन माध्यम
- कम ईंधन खपत एवं पर्यावरण अनुकूल
- भारी एवं विशाल माल ढुलाई में सक्षम
- सड़क व रेल पर दबाव कम करता है
❌ सीमाएँ (Limitations)
- नदियों की मौसमी प्रवाहशीलता
- ड्रेजिंग एवं रख-रखाव की आवश्यकता
- सीमित गहराई (Draft) की समस्या
- पोर्ट–हिंटरलैंड कनेक्टिविटी कमजोर
📌 Exam Facts (Very Important)
- IWT का विकास = National Waterways + IWAI
- सबसे व्यस्त IWT क्षेत्र → गंगा–ब्रह्मपुत्र घाटी
- केरल = बैकवाटर आधारित IWT मॉडल
- National Waterways Act – 2016
🎯 Exam Tips & Traps
- IWT ≠ Sea Transport (Statement questions में trap)
- NW की संख्या बार-बार पूछी जाती है
- Map में गंगा–ब्रह्मपुत्र को कभी न भूलें
- Environment + Transport linkage पर UPSC फोकस
📘 परिभाषा (Definition)
राष्ट्रीय जलमार्ग (National Waterways) वे अंतर्देशीय जलमार्ग होते हैं जिन्हें भारत सरकार द्वारा संसद के अधिनियम के माध्यम से राष्ट्रीय महत्व प्रदान किया जाता है, ताकि उन पर नियमित, सुरक्षित एवं आर्थिक जल परिवहन विकसित किया जा सके।
किसी जलमार्ग को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित करने का मुख्य उद्देश्य अंतर्देशीय जल परिवहन (IWT) को बढ़ावा देना तथा सड़क व रेल परिवहन पर दबाव को कम करना होता है।
🧠 अवधारणा (Conceptual Understanding)
राष्ट्रीय जलमार्गों के विकास से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, ईंधन की बचत तथा पर्यावरणीय लाभ प्राप्त होते हैं। इसलिए भारत सरकार ने नदी तंत्र, बैकवाटर एवं नहरों को एकीकृत कर राष्ट्रीय जलमार्गों का नेटवर्क विकसित किया है।
📊 मुख्य तथ्य (Key Data)
- भारत में वर्तमान में कुल 111 राष्ट्रीय जलमार्ग अधिसूचित हैं।
- राष्ट्रीय जलमार्गों का विकास Inland Waterways Authority of India (IWAI) द्वारा किया जाता है।
- सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग – NW-1 (गंगा)।
🏛️ IWAI – Inland Waterways Authority of India
IWAI एक वैधानिक संस्था है, जिसकी स्थापना भारत में अंतर्देशीय जल परिवहन के विकास, विनियमन एवं रख-रखाव के लिए की गई।
- स्थापना: 1986
- अधिनियम: Inland Waterways Authority of India Act, 1985
- मुख्यालय: नोएडा (उत्तर प्रदेश)
IWAI का प्रमुख कार्य:
- राष्ट्रीय जलमार्गों का विकास एवं अनुरक्षण
- ड्रेजिंग, टर्मिनल एवं नेविगेशन सुविधाएँ
- Private Participation (PPP) को बढ़ावा
📜 National Waterways Act, 2016
राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 भारत में IWT के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस अधिनियम के माध्यम से 106 नए जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया।
- पहले केवल 5 राष्ट्रीय जलमार्ग थे
- 2016 के बाद कुल संख्या → 111
- उद्देश्य: IWT नेटवर्क का तीव्र विस्तार
🗺️ Map Based Logic (Very Important)
मानचित्र आधारित प्रश्नों में अक्सर पूछा जाता है:
- NW-1 → गंगा → उत्तर भारत
- NW-2 → ब्रह्मपुत्र → उत्तर-पूर्व भारत
- NW-3 → केरल बैकवाटर → दक्षिण भारत
UPSC/State PCS में जलमार्ग संख्या + नदी + राज्य को जोड़कर प्रश्न पूछे जाते हैं।
⚠️ Exam Traps (Beware)
- IWAI ≠ Ministry (यह एक Authority है)
- National Waterways Act = 2016 (बार-बार confusion)
- NW की संख्या पुराने प्रश्नों में अलग हो सकती है
🎯 Exam Tips
- NW + IWAI + Act = Combined question बनता है
- UPPSC/UPSSSC में तथ्यात्मक प्रश्न
- UPSC में statement + map linkage
भारत में कुल 111 राष्ट्रीय जलमार्ग अधिसूचित हैं, किंतु प्रतियोगी परीक्षाओं में कुछ प्रमुख राष्ट्रीय जलमार्ग बार-बार पूछे जाते हैं। इनमें विशेष रूप से NW-1, NW-2 और NW-3 अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
🚢 राष्ट्रीय जलमार्ग–1 (NW-1 : गंगा जलमार्ग)
- नदी: गंगा
- मार्ग: हल्दिया (प. बंगाल) → प्रयागराज (उ.प्र.)
- लंबाई: लगभग 1,620 किमी
- राज्य: पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश
NW-1 भारत का सबसे महत्वपूर्ण एवं सबसे व्यस्त राष्ट्रीय जलमार्ग है। यह उत्तर भारत को समुद्री बंदरगाहों से जोड़ता है।
🚤 राष्ट्रीय जलमार्ग–2 (NW-2 : ब्रह्मपुत्र जलमार्ग)
- नदी: ब्रह्मपुत्र
- मार्ग: सादिया → धुबरी
- लंबाई: लगभग 891 किमी
- राज्य: असम
NW-2 उत्तर-पूर्व भारत का सबसे महत्वपूर्ण अंतर्देशीय जलमार्ग है और असम की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माना जाता है।
🚣 राष्ट्रीय जलमार्ग–3 (NW-3 : केरल बैकवाटर)
- क्षेत्र: केरल बैकवाटर
- मार्ग: कोल्लम → कोट्टापुरम
- लंबाई: लगभग 205 किमी
- राज्य: केरल
NW-3 भारत का एकमात्र बैकवाटर आधारित राष्ट्रीय जलमार्ग है और यह पर्यटन व स्थानीय परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
🌐 अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय जलमार्ग
- NW-4: गोदावरी–कृष्णा नदियाँ (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु)
- NW-5: ब्राह्मणी–महानदी–पूर्वी तटीय नहर (ओडिशा)
🧠 Smart Revision Card
- NW-1 → गंगा → सबसे लंबा व महत्वपूर्ण
- NW-2 → ब्रह्मपुत्र → उत्तर-पूर्व भारत
- NW-3 → केरल → बैकवाटर आधारित
- NW-4/5 → पूर्वी तट फोकस
🎯 Exam Tips & Traps
- NW संख्या + नदी + राज्य = UPSC/PCS favourite
- NW-3 को अक्सर नदी आधारित मान लिया जाता है (गलत)
- NW-1 से जुड़ी परियोजना = Jal Marg Vikas
- Map-based questions में NW-2 अत्यंत महत्वपूर्ण
📘 परिभाषा (Definition)
समुद्री जल परिवहन वह परिवहन प्रणाली है, जिसमें समुद्रों एवं महासागरों के माध्यम से विभिन्न देशों के बीच वस्तुओं एवं यात्रियों का आवागमन किया जाता है। यह परिवहन मुख्यतः अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से संबंधित होता है।
🧠 अवधारणा (Core Concept)
समुद्री परिवहन किसी भी देश की विदेशी व्यापार प्रणाली की रीढ़ होता है। भारी, विशाल तथा कम समय-संवेदनशील वस्तुएँ जैसे—कच्चा तेल, कोयला, लौह अयस्क, मशीनरी आदि समुद्री मार्ग से ही परिवहन की जाती हैं।
भारत जैसे लंबी तटरेखा (लगभग 7,516 किमी) वाले देश के लिए समुद्री परिवहन का आर्थिक भूगोल में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।
📊 महत्वपूर्ण आँकड़े (Key Data)
- भारत के विदेशी व्यापार का लगभग 90% (मात्रा के आधार पर) समुद्री मार्ग से होता है।
- मूल्य के आधार पर लगभग 70% व्यापार समुद्री परिवहन से होता है।
- भारत की तटरेखा की लंबाई लगभग 7,516 किमी है।
- भारत के पास 12 प्रमुख (Major) बंदरगाह हैं।
🗺️ Map Based Understanding (Exam Logic)
मानचित्र आधारित प्रश्नों में समुद्री परिवहन के लिए निम्नलिखित बिंदु अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं:
- पूर्वी तट → बंगाल की खाड़ी → अधिक बंदरगाह
- पश्चिमी तट → अरब सागर → प्राकृतिक बंदरगाह अधिक
- तेल आयात → पश्चिमी तट के बंदरगाह
✅ समुद्री जल परिवहन के लाभ
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए सबसे किफायती माध्यम
- अत्यधिक भारी एवं विशाल माल का परिवहन
- लंबी दूरी पर कम लागत
- रेल व सड़क पर दबाव कम करता है
❌ सीमाएँ (Limitations)
- धीमी गति (Time consuming)
- मौसम पर अत्यधिक निर्भरता
- केवल तटीय क्षेत्रों तक सीधी पहुँच
- बंदरगाह एवं Hinterland Connectivity की आवश्यकता
📌 Smart Exam Facts
- समुद्री परिवहन = Foreign Trade Backbone
- Crude Oil आयात → समुद्री मार्ग
- Natural Harbours → पश्चिमी तट
- पूर्वी तट → कृत्रिम बंदरगाह अधिक
⚠️ Exam Traps (Beware)
- Sea Transport ≠ Coastal Shipping (अक्सर confuse किया जाता है)
- 90% = मात्रा के आधार पर (Value नहीं)
- सभी बंदरगाह Major नहीं होते
🎯 Exam Tips
- Sea Transport + Ports = Combined Questions
- UPSC में Map + Trade linkage
- SSC/UPSSSC में तथ्यात्मक % आधारित प्रश्न
📘 परिभाषा (परिभाषा)
बंदरगाह (Port) वह तटीय स्थान होता है जहाँ जहाजों का ठहराव, माल की लोडिंग–अनलोडिंग तथा यात्रियों का आवागमन किया जाता है। समुद्री जल परिवहन में बंदरगाह भूमि एवं समुद्र के बीच सेतु का कार्य करते हैं।
🧠 अवधारणा (Concept)
किसी भी देश का विदेशी व्यापार उसके बंदरगाहों की संख्या, क्षमता एवं दक्षता पर निर्भर करता है। भारत जैसे विशाल तटरेखा वाले देश में बंदरगाह आर्थिक विकास, औद्योगीकरण एवं वैश्विक व्यापार के मुख्य द्वार होते हैं।
🗂️ बंदरगाहों का वर्गीकरण (Classification)
- प्रमुख बंदरगाह (Major Ports): केंद्र सरकार के अधीन, बड़े जहाजों एवं विदेशी व्यापार हेतु
- गैर-प्रमुख / लघु बंदरगाह (Non-Major / Minor Ports): राज्य सरकारों के अधीन
- प्राकृतिक बंदरगाह: प्राकृतिक रूप से सुरक्षित (जैसे – मुंबई)
- कृत्रिम बंदरगाह: मानव निर्मित (जैसे – चेन्नई)
📊 Major Ports – मुख्य तथ्य
- भारत में कुल 12 प्रमुख (Major) बंदरगाह हैं।
- ये सभी Major Port Authorities Act, 2021 के अंतर्गत आते हैं।
- विदेशी व्यापार का अधिकांश भाग इन्हीं से संचालित होता है।
⚓ भारत के सभी प्रमुख बंदरगाहों की सूची
| क्रम | बंदरगाह | राज्य / तट |
|---|---|---|
| 1 | दीनदयाल (कांडला) | गुजरात – पश्चिमी तट |
| 2 | मुंबई | महाराष्ट्र – पश्चिमी तट |
| 3 | जवाहरलाल नेहरू (JNPT) | महाराष्ट्र – पश्चिमी तट |
| 4 | मर्मुगाओ | गोवा – पश्चिमी तट |
| 5 | न्यू मंगलुरु | कर्नाटक – पश्चिमी तट |
| 6 | कोच्चि | केरल – पश्चिमी तट |
| 7 | चेन्नई | तमिलनाडु – पूर्वी तट |
| 8 | कामराजार (एन्नोर) | तमिलनाडु – पूर्वी तट |
| 9 | तूतुकुड़ी (VO Chidambaranar) | तमिलनाडु – पूर्वी तट |
| 10 | विशाखापत्तनम | आंध्र प्रदेश – पूर्वी तट |
| 11 | पारादीप | ओडिशा – पूर्वी तट |
| 12 | कोलकाता–हल्दिया | पश्चिम बंगाल – पूर्वी तट |
🧠 याद रखने की ट्रिक (Tricks)
- पश्चिमी तट = अधिक प्राकृतिक बंदरगाह
- पूर्वी तट = अधिक कृत्रिम बंदरगाह
- तमिलनाडु = सबसे अधिक Major Ports (3)
- JNPT = भारत का सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट
⚠️ Exam Traps (गलतियों से बचें)
- सभी बंदरगाह Major नहीं होते
- एन्नोर = कामराजार पोर्ट (नाम परिवर्तन)
- कांडला = दीनदयाल पोर्ट
- कोलकाता एकमात्र नदीय Major Port है
🎯 परीक्षा टिप्स
- Ports + State = SSC/UPSSSC favourite
- UPSC में Map + Trade linkage
- नाम परिवर्तन वाले पोर्ट पर विशेष ध्यान
भारत की लंबी तटरेखा के कारण बंदरगाहों का वितरण पूर्वी तट (बंगाल की खाड़ी) एवं पश्चिमी तट (अरब सागर) पर किया गया है। परीक्षाओं में अक्सर Map + Cargo + Specialization को जोड़कर प्रश्न पूछे जाते हैं।
🗺️ Map Logic (Exam Favourite)
- पश्चिमी तट → प्राकृतिक बंदरगाह अधिक → गहरी खाड़ी
- पूर्वी तट → कृत्रिम बंदरगाह अधिक → डेल्टाई तट
- तेल आयात → पश्चिमी तट
- लौह अयस्क/कोयला निर्यात → पूर्वी तट
⚓ पश्चिमी तट के प्रमुख बंदरगाह (Arab Sea Coast)
🚢 दीनदयाल (कांडला) – गुजरात
- अवस्थिति: यह गुजरात के कच्छ की खाड़ी (Gulf of Kutch) में स्थित है।
- प्रकार: यह एक ज्वारीय बंदरगाह (Tidal Port) है।
- स्थापना का कारण: 1947 में विभाजन के बाद कराची बंदरगाह के विकल्प के रूप में इसे विकसित किया गया था।
- नाम परिवर्तन: वर्ष 2017 में कांडला बंदरगाह का नाम बदलकर दीनदयाल पोर्ट ट्रस्ट कर दिया गया।
- प्राकृतिक सुरक्षा: यह एक प्राकृतिक बंदरगाह (Natural Harbour) है, जो भौगोलिक रूप से जहाजों के लिए सुरक्षित माना जाता है।
- मुक्त व्यापार क्षेत्र (SEZ): यह भारत का पहला मुक्त व्यापार क्षेत्र (Free Trade Zone) बना, जिसे निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विकसित किया गया।
- व्यापार की प्रकृति: यह मुख्य रूप से कच्चे तेल (Petroleum), उर्वरक, गंधक, अनाज और खाद्य तेल के आयात-निर्यात के लिए प्रसिद्ध है।
- आर्थिक महत्व: इसे 'कार्गो हैंडलिंग' के मामले में भारत के सबसे व्यस्त और सबसे बड़े (मात्रा के आधार पर) बंदरगाहों में गिना जाता है।
- हिंटरलैंड (पश्चात प्रदेश): यह उत्तर भारत के राज्यों (राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली) के व्यापार के लिए सबसे नजदीकी समुद्री द्वार है।
- नमक उत्पादन: कांडला के आस-पास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर समुद्री नमक का उत्पादन और निर्यात किया जा सके
🚢⚓️ मुंबई पोर्ट (Mumbai Port) – भारत का प्रवेश द्वार
- प्रकार: यह भारत का सबसे बड़ा और सबसे पुराना प्राकृतिक बंदरगाह (Natural Harbour) है।
- अवस्थिति: यह महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में स्थित है और इसे 'भारत का प्रवेश द्वार' (Gateway of India) भी कहा जाता है।
- व्यापार: यह भारत का सबसे व्यस्त बंदरगाह है, जहाँ से सर्वाधिक खनिज तेल और शुष्क कार्गो (Dry Cargo) का व्यापार होता है।
- महत्व: स्वेज नहर मार्ग के निकट होने के कारण यूरोपीय देशों के साथ व्यापार के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है।
- क्षमता: यहाँ जहाजों को खड़ा करने के लिए विशाल 'बर्थ' और भंडारण की बेहतरीन सुविधा उपलब्ध है।
- प्रमुख टर्मिनल: यहाँ तीन प्रमुख गोदी (Docks) हैं:
- प्रिंस डॉक (Prince's Dock)
- विक्टोरिया डॉक (Victoria Dock)
- इंदिरा डॉक (Indira Dock) - यह यहाँ का सबसे बड़ा डॉक है।
- तेल रिफाइनरी: मुंबई पोर्ट के पास ही ट्रॉम्बे (Trombay) में भारत की बड़ी तेल रिफाइनरियां स्थित हैं, इसलिए यहाँ से कच्चे तेल (Crude Oil) का सर्वाधिक आयात होता है।
- पर्यटन: प्रसिद्ध 'एलिफेंटा की गुफाएं' जाने के लिए नावें इसी बंदरगाह के पास स्थित 'गेटवे ऑफ इंडिया' से चलती हैं।
📦 JNPT (नावा शेवा)
- स्थान: नवी मुंबई, महाराष्ट्र।
- उपनाम: भारत का सबसे बड़ा कंटेनर बंदरगाह।
- प्रकार: यह एक कृत्रिम (Artificial) और सबसे आधुनिक बंदरगाह है।
- उद्देश्य: मुंबई बंदरगाह का बोझ कम करने के लिए बनाया गया।
- तकनीक: पूरी तरह यंत्रीकृत (Mechanized) और 'हाई-टेक' सुविधाओं से लैस।
- व्यापार: भारत का लगभग 50% कंटेनर व्यापार यहीं से होता है।
- कनेक्टिविटी: यह 'वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर' (DFC) का मुख्य केंद्र है।
- SEZ: बंदरगाह के पास ही 'विशेष आर्थिक क्षेत्र' बना है।
- रैंकिंग: दुनिया के टॉप कंटेनर बंदरगाहों में शामिल।
- नाम: पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम पर समर्पित।
⛴️ मर्मुगाओ – गोवा
- खनिज आधारित पोर्ट
- स्थान: यह गोवा राज्य में जुआरी नदी (Zuari River) के मुहाने पर स्थित है।
- प्रकार: यह एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक (Natural) बंदरगाह है।
- मुख्य निर्यात: यहाँ से मुख्य रूप से लौह-अयस्क (Iron Ore) का निर्यात किया जाता है।
- जापान से संबंध: भारत से जापान को होने वाले लौह-अयस्क निर्यात में इसकी प्रमुख भूमिका है।
- पर्यटन: यह बंदरगाह 'क्रूज पर्यटन' (Cruise Tourism) के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है।
- कनेक्टिविटी: यह कोंकण रेलवे से जुड़ा है, जिससे माल ढुलाई आसान होती है।
- ऐतिहासिक महत्व: 1961 में गोवा की मुक्ति के बाद इसका विकास तेजी से हुआ।
🛢️ न्यू मंगलुरु – कर्नाटक
- स्थान: यह कर्नाटक के मंगलुरु शहर में 'पनम्बूर' नामक स्थान पर स्थित है।
- प्रकार: यह पश्चिमी तट का एक प्रमुख गहरा और कृत्रिम बंदरगाह है।
- उपनाम: इसे 'कर्नाटक का प्रवेश द्वार' (Gateway of Karnataka) कहा जाता है।
- कुद्रेमुख कनेक्शन: यहाँ से मुख्य रूप से कुद्रेमुख की खानों का लौह-अयस्क निर्यात किया जाता है।
- निर्यात वस्तुएं: लौह-अयस्क के अलावा ग्रेनाइट, काजू, कॉफी और मसालों का भारी निर्यात होता है।
- आयात वस्तुएं: पेट्रोलियम उत्पाद (LPG), उर्वरक और लकड़ी के लट्ठों का प्रमुखता से आयात होता है।
- 9वां बड़ा बंदरगाह: इसे 1974 में भारत का 9वां प्रमुख (Major) बंदरगाह घोषित किया गया था।
- तेल रिफाइनरी: यहाँ पास ही MRPL (Mangalore Refinery and Petrochemicals Limited) स्थित है।
- रेल कनेक्टिविटी: यह बंदरगाह कोंकण रेलवे और दक्षिण-पश्चिम रेलवे से अच्छी तरह जुड़ा है।
- पर्यावरण: यह अपनी स्वच्छता और हरित पहल (Green Port) के लिए भी जाना जाता है।
🌊 कोच्चि – केरल
- स्थान: यह केरल के लक्षद्वीप सागर (अरब सागर) तट पर स्थित है।
- प्रकार: यह एक सुंदर प्राकृतिक (Natural) बंदरगाह है।
- उपनाम: इसे 'अरब सागर की रानी' (Queen of the Arabian Sea) कहा जाता है।
- अवस्थिति: यह वेलिंगडन द्वीप और वल्लारपदम द्वीप पर स्थित है।
- वल्लारपदम टर्मिनल: यहाँ भारत का पहला इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल बना है।
- मसाला व्यापार: प्राचीन काल से ही यह मसालों के निर्यात के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।
- सामरिक महत्व: यहाँ भारतीय नौसेना का दक्षिणी नौसेना कमान का मुख्यालय स्थित है।
- कोच्चि शिपयार्ड: यहाँ भारत का सबसे बड़ा जहाज निर्माण और मरम्मत केंद्र (Cochin Shipyard) स्थित है।
- प्रवेश द्वार: यह भारत के दक्षिण-पश्चिमी तट का प्रमुख व्यापारिक द्वार है।
- कनेक्टिविटी: यह बंदरगाह राष्ट्रीय राजमार्गों और रेलवे के माध्यम से दक्षिण भारत से अच्छी तरह जुड़ा है।
⚓ पूर्वी तट के प्रमुख बंदरगाह (Bay of Bengal Coast)
🚢 कोलकाता–हल्दिया – प. बंगाल
- प्रकार: भारत का एकमात्र प्रमुख नदी तटीय (Riverine) बंदरगाह।
- नदी: यह हुगली नदी के किनारे स्थित है।
- नया नाम: श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट (2020 में बदला गया)।
- हल्दिया: कोलकाता का बोझ कम करने के लिए बनाया गया सहायक बंदरगाह।
- निर्यात: चाय, जूट, कोयला और लौह-अयस्क।
- लैंडलॉक देशों की मदद: यह नेपाल और भूटान के समुद्री व्यापार का मुख्य केंद्र है।
- NW-1: यह राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (हल्दिया से प्रयागराज) का अंतिम छोर है।
- उपनाम: 'पूर्वी भारत का प्रवेश द्वार'।
- चुनौती: हुगली नदी में गाद (Silt) की सफाई (Dredging) की बार-बार जरूरत।
- विशेष: समुद्र से लगभग 120 किमी अंदर नदी के रास्ते स्थित है।
- ऐतिहासिक महत्व: यह ब्रिटिश काल से ही भारत का सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र रहा है।
⚙️ पारादीप – ओडिशा
- स्थान: ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में महानदी और बंगाल की खाड़ी के संगम पर।
- प्रकार: यह एक गहरा और प्राकृतिक (Natural) बंदरगाह है।
- स्वतंत्रता के बाद: यह आजादी के बाद पूर्वी तट पर विकसित पहला बड़ा बंदरगाह है (1966)।
- लौह-अयस्क निर्यात: यहाँ से मुख्य रूप से ओडिशा और झारखंड का लौह-अयस्क जापान को भेजा जाता है।
- पृष्ठप्रदेश (Hinterland): यह ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड के खनिज समृद्ध क्षेत्रों की सेवा करता है।
- कोयला व्यापार: यहाँ से दक्षिणी भारत के बिजली संयंत्रों के लिए कोयले की भारी खेप भेजी जाती है।
- तेल शोधन: बंदरगाह के पास ही इंडियन ऑयल (IOCL) की बड़ी रिफाइनरी स्थित है।
- गहराई: यह भारत के सबसे गहरे बंदरगाहों में से एक है, जिससे यहाँ बड़े मालवाहक जहाज आसानी से आ सकते हैं।
- कनेक्टिविटी: यह पूर्वी तट रेलवे और राष्ट्रीय राजमार्गों से अच्छी तरह जुड़ा है।
- विशेषता: चक्रवात (Cyclone) प्रवण क्षेत्र होने के बावजूद यह तकनीक की दृष्टि से बहुत मजबूत बंदरगाह है।
🚢 विशाखापत्तनम – आंध्र प्रदेश
- विशेषता: यह भारत का सबसे गहरा (Deepest) बंदरगाह है।
- प्रकार: एक सुरक्षित और प्राकृतिक (Natural) बंदरगाह।
- सुरक्षा: यह 'डॉल्फिन नोज' (Dolphin's Nose) नामक पहाड़ी के पीछे स्थित है, जो इसे समुद्री तूफानों से बचाती है।
- निर्यात: मुख्य रूप से लौह-अयस्क (जापान को) और पेट्रोलियम उत्पाद।
- शिपयार्ड: यहाँ 'हिंदुस्तान शिपयार्ड' स्थित है, जहाँ जहाजों का निर्माण और मरम्मत होती है।
- नौसेना: भारतीय नौसेना की पूर्वी नौसेना कमान का मुख्यालय यहीं है।
- व्यापार: यह खनिज और कच्चे तेल के व्यापार का प्रमुख केंद्र है।
- पृष्ठप्रदेश: यह आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के औद्योगिक क्षेत्रों की सेवा करता है।
🏗️ चेन्नई – तमिलनाडु
- 📜 प्रकार: यह भारत का सबसे पुराना कृत्रिम (Artificial) बंदरगाह है।
- 🌊 तट: यह पूर्वी तट (बंगाल की खाड़ी) का सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह है।
- 🚢 व्यापार: मुंबई के बाद यह भारत का दूसरा सबसे व्यस्त बंदरगाह माना जाता है।
- 🚗 ऑटोमोबाइल: इसे 'दक्षिण भारत का प्रवेश द्वार' कहते हैं और यहाँ से कारों का भारी निर्यात होता है।
- 📦 कार्गो: यहाँ मुख्य रूप से उर्वरक, कच्चा तेल, लोहा और कंटेनर्स का व्यापार होता है।
- 🏗️ चुनौती: यह खुला समुद्री बंदरगाह है, इसलिए चक्रवात के समय जहाजों को अंदर आने में दिक्कत होती है।
- 🏙️ एन्नोर पोर्ट: चेन्नई बंदरगाह का बोझ कम करने के लिए इसके पास ही एन्नोर (कामराजार) बंदरगाह बनाया गया है।
⚡ कामराजार (एन्नोर)
- 🏢 प्रकार: यह भारत का पहला कॉर्पोरेट (Corporate) बंदरगाह है (पब्लिक कंपनी के रूप में पंजीकृत)।
- 📍 स्थान: चेन्नई बंदरगाह से लगभग 24 किमी उत्तर में स्थित है।
- 🏗️ उद्देश्य: चेन्नई बंदरगाह के भारी बोझ और भीड़ को कम करने के लिए बनाया गया।
- 🏷️ नया नाम: इसका नाम स्वतंत्रता सेनानी के. कामराजार के नाम पर रखा गया है।
- 🌑 मुख्य व्यापार: यह मुख्य रूप से कोयले (Coal) के आयात के लिए प्रसिद्ध है (तापीय ऊर्जा संयंत्रों हेतु)।
- 🤖 तकनीक: यह एक अत्याधुनिक और पूरी तरह कंप्यूटरीकृत (Computerized) बंदरगाह है।
- 🚗 निर्यात: यहाँ से कारों (Automobiles) और लोहे के अयस्क का भी बड़े पैमाने पर व्यापार होता है।
- 🌊 तट: यह पूर्वी तट (बंगाल की खाड़ी) पर स्थित एक कृत्रिम बंदरगाह है।
🛢️ तूतीकोरिन (VO Chidambaranar)
- 📍 स्थान: यह तमिलनाडु के दक्षिणी भाग में मन्नार की खाड़ी के तट पर स्थित है।
- 💎 उपनाम: इसे 'मोतियों का शहर' (Pearl City) कहा जाता है क्योंकि यहाँ से मोतियों का व्यापार होता था।
- 📜 नया नाम: इसका नाम बदलकर वी. ओ. चिदंबरनार पोर्ट कर दिया गया है।
- 🌊 गहराई: यह एक छिछला (Shallow) बंदरगाह है, इसलिए बड़े जहाज मुख्य तट से थोड़ा दूर रुकते हैं।
- 🏗️ प्रकार: यह एक कृत्रिम (Artificial) बंदरगाह है।
- 🤝 पड़ोसी देश: यहाँ से श्रीलंका के साथ सबसे अधिक व्यापार (खाद्य सामग्री, कपड़ा, निर्माण सामग्री) होता है।
- 🚢 मुख्य व्यापार: कोयला, नमक, पेट्रोलियम उत्पाद और उर्वरक का प्रमुख केंद्र।
- 🇮🇳 दक्षिण छोर: यह भारत के सबसे दक्षिणी मुख्य बंदरगाहों में से एक है।
🧠 Smart Facts (One-Liners)
- पश्चिमी तट = प्राकृतिक बंदरगाह अधिक
- पूर्वी तट = कृत्रिम बंदरगाह अधिक
- JNPT = सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट
- विशाखापत्तनम = पूर्वी तट का प्राकृतिक बंदरगाह
⚠️ Exam Traps
- सभी पूर्वी तट के पोर्ट कृत्रिम नहीं होते
- कोलकाता = नदीय पोर्ट (समुद्री नहीं)
- एन्नोर = कामराजार (नाम भ्रम)
भारत में जल परिवहन, बंदरगाह एवं लॉजिस्टिक्स को आधुनिक, एकीकृत एवं प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने कई महत्वाकांक्षी योजनाएँ प्रारंभ की हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में इन योजनाओं से Statement आधारित, Match-the-following एवं Current + Static प्रश्न पूछे जाते हैं।
⚓ सागरमाला परियोजना (Sagarmala Project)
सागरमाला परियोजना भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य बंदरगाह-आधारित विकास (Port-led Development) को बढ़ावा देना तथा लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना है।
- प्रारंभ: 2015
- नोडल मंत्रालय: पोत परिवहन मंत्रालय
- मुख्य लक्ष्य: Port-led Development
🔹 सागरमाला के 4 प्रमुख स्तंभ
- बंदरगाहों का आधुनिकीकरण एवं विस्तार
- पोर्ट–हिंटरलैंड कनेक्टिविटी
- तटीय आर्थिक क्षेत्र (Coastal Economic Zones)
- तटीय समुदायों का विकास
🌊 Maritime India Vision 2030
Maritime India Vision 2030 भारत के समुद्री क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास रोडमैप के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय बंदरगाहों को वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनाना है।
- लॉन्च: 2021
- दृष्टि अवधि: 2030 तक
🔹 प्रमुख लक्ष्य
- कार्गो हैंडलिंग क्षमता में वृद्धि
- लॉजिस्टिक्स लागत में कमी
- ग्रीन एवं स्मार्ट पोर्ट का विकास
- निजी निवेश (PPP) को बढ़ावा
🛣️ प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना (PM Gati Shakti)
PM Gati Shakti एक राष्ट्रीय मास्टर प्लान है, जिसका उद्देश्य विभिन्न परिवहन माध्यमों— सड़क, रेल, जलमार्ग, बंदरगाह एवं हवाई— को एकीकृत करना है।
- लॉन्च: 2021
- फोकस: Multi-modal Connectivity
🔹 जल परिवहन से संबंध
- पोर्ट–हिंटरलैंड कनेक्टिविटी
- National Waterways + Ports Integration
- लॉजिस्टिक्स समय एवं लागत में कमी
🧠 Smart Comparison (Quick Recall)
- Sagarmala → Port-led Development
- Maritime India Vision 2030 → Long-term Maritime Roadmap
- PM Gati Shakti → Multi-modal Integration
⚠️ Exam Traps
- Sagarmala ≠ Inland Waterways Project (दोनों अलग)
- Vision 2030 कोई कानून नहीं है
- PM Gati Shakti केवल सड़क परियोजना नहीं है
🎯 परीक्षा टिप्स
- UPSC में योजनाओं पर Statement प्रश्न
- UPPSC/SSC में Year + Objective
- Static Ports के साथ Current Schemes को लिंक करें
🚢 Core Concepts
- जल परिवहन सबसे सस्ता, ऊर्जा-कुशल परिवहन माध्यम है।
- जल परिवहन दो प्रकार का होता है: IWT और Sea Transport।
- भारी एवं थोक वस्तुओं के लिए जल परिवहन सर्वोत्तम है।
- भारत की तटरेखा लगभग 7,516 किमी है।
- विदेशी व्यापार का ~90% (मात्रा) समुद्री मार्ग से होता है।
🚤 Inland Water Transport (IWT)
- IWT = नदियाँ, नहरें, झीलें, बैकवाटर।
- भारत में नौगम्य जलमार्ग ~14,500 किमी।
- IWT का कुल परिवहन में योगदान 2% से कम।
- सबसे महत्वपूर्ण IWT क्षेत्र: गंगा–ब्रह्मपुत्र घाटी।
- केरल = बैकवाटर आधारित IWT मॉडल।
🛶 National Waterways
- भारत में कुल 111 राष्ट्रीय जलमार्ग।
- राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम – 2016।
- पहले केवल 5 राष्ट्रीय जलमार्ग थे।
- IWAI की स्थापना 1986, मुख्यालय नोएडा।
- NW-1 = गंगा (सबसे लंबा व महत्वपूर्ण)।
🗺️ Major National Waterways
- NW-1: गंगा → हल्दिया–प्रयागराज।
- NW-2: ब्रह्मपुत्र → सादिया–धुबरी।
- NW-3: केरल बैकवाटर → कोल्लम–कोट्टापुरम।
- NW-4/5: पूर्वी तट नदी तंत्र।
- NW-3 = एकमात्र बैकवाटर आधारित जलमार्ग।
⚓ Ports of India
- भारत में 12 Major Ports हैं।
- Major Port Authorities Act – 2021।
- कोलकाता = एकमात्र नदीय Major Port।
- JNPT = सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट।
- तमिलनाडु = सबसे अधिक Major Ports (3)।
🌊 East vs West Coast
- पश्चिमी तट = अधिक प्राकृतिक बंदरगाह।
- पूर्वी तट = अधिक कृत्रिम बंदरगाह।
- तेल आयात → पश्चिमी तट।
- लौह अयस्क/कोयला → पूर्वी तट।
- विशाखापत्तनम = पूर्वी तट का प्राकृतिक बंदरगाह।
🚀 Current Projects & Traps
- Sagarmala = Port-led Development।
- Maritime India Vision 2030 = दीर्घकालिक रोडमैप।
- PM Gati Shakti = Multi-modal Integration।
- Sea Transport ≠ Coastal Shipping।
- 90% व्यापार = मात्रा के आधार पर (Value नहीं)।

